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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Romans 7
Romans 7
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
हे विश्वासी भयों, तुम जंणदा छा (मि मूसा की व्यवस्था तैं जनण वलो बट्टी बुल्द) कि लुखुं तैं व्यवस्था कु पालन तभि तक कन जब तक उ ज्यूंदा छिनी।
2
बिवई जनन व्यवस्था का अनुसार अपड़ा आदिम का बचयां रौंण तक बधि रौंदी, पर जु वींको आदिम मोरि जांदु, त उ अपड़ा आदिम की व्यवस्था बट्टी छुटी जांद।
3
इलै जु कुई अपड़ा आदिम का ज्यूंदा हूंण पर भि कै दुसरा आदिम की हवे जौं, त व्यभिचारिणी कहलांदी, पर जु आदिम मोरि जौं, त व वीं व्यवस्था बट्टी छुटी गै, इख तक कि जु कै हैंका आदिम की हवे जौं त उ व्यभिचारिणी नि ठैरली।
4
त हे मेरा विश्वासी भयों, जब तुम मसीह का दगड़ी मोरि ग्यां, त तुम व्यवस्था का अधिकार कु भि मोरि ग्यां। अब तुम मसीह का छा, जु मुर्दों मा बट्टी ज्यूँदो हवे गै कि तुम परमेश्वर का फलदार जीवन जी सका।
5
किलैकि जब हम अपड़ा पापी स्वभाव का कब्जा मा छा, व्यवस्था का द्वारा जाग्रत पापमय इच्छा हमारा देह मा काम कनि छै, मौत का फल पैदा कनु कु हमारा देह का अंगों मा काम करदी छै।
6
पर हम वीं व्यवस्था कु मोरि ग्यां जैल एक बार हम तैं बंधि बंणै येलि छों, अब वीं व्यवस्था बट्टी छुटी ग्यां, अब हम पिता परमेश्वर कि सेवा पुरणी रीति बट्टी लिख्यां व्यवस्था का मनणु का द्वारा नि करदां, बल्कि पवित्र आत्मा का द्वारा एक नई रीति मा सेवा करदां।
7
त हम यूं बातों का बार मा क्य बोला? क्य व्यवस्था पाप च? न! बिल्कुल न! पर व्यवस्था का द्वारा मि पाप तैं जांण साको। मिल जांणि की लालच कन पाप च, किलैकि व्यवस्था मा इन लिख्युं च, कि “लालच नि कैर।”
8
पर पाप ल इन आज्ञा कु इस्तेमाल कैरी के सभि किस्मै का लालच पैदा कैरी, किलैकि व्यवस्था का बगैर पाप मुरयूं च।
9
पैली मि व्यवस्था तैं बगैर समझयां रौंदु छो, पर जब मिल व्यवस्था तैं जांणि, त पाप कि शक्ति बढण लगि गै, अर मि पिता परमेश्वर बट्टी दूर हवे ग्यों।
10
अर व आज्ञा ज्वा मेरू जींण कु कारण बनण वली छै, मि तैं पिता परमेश्वर बट्टी अलग कैरी दींनि।
11
पर पाप ल ईं आज्ञा कु इस्तेमाल कैरी कै मि तैं धोखा द्या, अर वेका द्वारा ही मि तैं मारि भि दींनि।
12
त हम यु बोलि सकदा कि व्यवस्था पवित्र च, अर आज्ञा पवित्र, धर्मी, अर अच्छी च।
13
क्य व्यवस्था ल, जु अच्छी च, मि तैं पिता परमेश्वर बट्टी दूर कैरी? न! बिल्कुल न! यु पाप च जैल इन कैरी। पाप ल वीं व्यवस्था जु अच्छी छै इस्तेमाल कैरी अर मि तैं पिता परमेश्वर बट्टी दूर कैरी। ईं रीति बट्टी पाप ल दिखै कि उ सच मा क्य च, अर आज्ञा ल दिखै कि पाप पूरी रीति ल बुरी च।
14
किलैकि हम जंणदा छा कि व्यवस्था त आत्मिक च, पर मि सांसारिक मनिख छौं अर पाप कु गुलाम छो।
15
अर जु मि करदु छौं वे तैं नि जंणदु, किलैकि जु मि चांदु छौं उन ही करदु, पर ज्यां बट्टी मि तैं नफरत च ऊई करदु छों।
16
अर जु मि नि चांदु ऊई बुरा काम करदु छों, त मि मांणी लींदु की व्यवस्था भलि च।
17
त इन दशा मा बुरो कन वलो मनिख मि न, पर पाप च जु मि मा बस्युं च।
18
किलैकि मि जंणदु छौं, कि मि मा यानि मेरा पापमय मनिख स्वभाव मा कुछ भि नि च, भला काम कने की इच्छा त मि मा च पर ऊं तैं कन मि बट्टी नि हूंदो।
19
किलैकि जै अच्छा काम कनै कि मि इच्छा करदु, उ त मि नि करदु, पर जीं बुरै कि इच्छा नि करदु, ऊई करदु।
20
पर जु मि ऊई करदु जै कि इच्छा नि करदु, त वेको कन वलो मि नि छो, पर पाप जु मि मा बस्युं च।
21
त मि या व्यवस्था पौंदु कि जब मि भलै कने कि इच्छा करदु, त मि उ करदु जु बुरो च।
22
किलैकि मि अपड़ा पूरा मन बट्टी पिता परमेश्वर कि व्यवस्था बट्टी भौत खुश रौंदु।
23
पर मि तैं अपड़ा देह का अंगों मा हैंका ढंग का काम दिखै दींदिनि, जु मेरा मन कि व्यवस्था तैं सै मंणदु अर लड़ै करदी अर यु मि तैं पाप कु कैदी बंणौंदींनि, जु अभि भि मेरा देह का अंगों मा काम करदी।
24
मि भौत अभागि मनिख छौं; मि तैं यु देह बट्टी कु छुडालो, जु मि तैं पिता परमेश्वर बट्टी अलग करदो।
25
इलै मि अफी बुद्धि बट्टी त परमेश्वर की व्यवस्था कु, पर देह बट्टी पाप की व्यवस्था की सेवा करदु, मि पिता परमेश्वर कु धन्यवाद करदु, जैल प्रभु यीशु मसीह का द्वारा मि तैं बचै।
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