bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
/
Leviticus 22
Leviticus 22
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
← Chapter 21
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 23 →
1
प्रभु मूसा से बोला,
2
‘तू हारून और उसके पुत्रों से बोलना कि वे इस्राएली समाज को पवित्र वस्तुओं से, जिन्हें इस्राएली लोग मुझे चढ़ाते हैं, अलग रहें जिससे वे मेरे पवित्र नाम को अपवित्र न करें। मैं प्रभु हूँ।
3
उनसे कहना: यदि तुम्हारी पीढ़ी से पीढ़ी में तुम्हारा कोई वंशज अशुद्ध दशा में उन पवित्र वस्तुओं के निकट आएगा जिनको इस्राएली लोग मुझ प्रभु को चढ़ाते हैं, तो वह व्यक्ति मेरे सम्मुख से नष्ट किया जाएगा। मैं प्रभु हूँ।
4
हारून के वंश का कोई व्यक्ति, जो कुष्ठ-जैसे रोग से पीड़ित अथवा स्राव-ग्रस्त है, जब तक वह शुद्ध न हो जाए तब तक पवित्र वस्तुएं नहीं खाएगा। जो शव के कारण अथवा मनुष्य के वीर्यपात के कारण अशुद्ध होता है, उसका स्पर्श करने वाला
5
अथवा वह व्यक्ति जो उस रेंगनेवाले जीव-जन्तु का स्पर्श करेगा, जिसके कारण मनुष्य अशुद्ध होता है, अथवा जो व्यक्ति उस मनुष्य का स्पर्श करेगा जिससे वह अशुद्ध हो सकता है, चाहे उसकी अशुद्धता किसी भी प्रकार की क्यों न हो−
6
तो जो व्यक्ति इनमें से किसी का भी स्पर्श करेगा, वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। जब तक वह जल में स्नान नहीं करेगा तब तक पवित्र वस्तुओं को नहीं खाएगा।
7
सूर्यास्त होने पर वह शुद्ध हो जाएगा। तत्पश्चात् वह इन पवित्र वस्तुओं को खा सकेगा; क्योंकि ये उसका आहार हैं।
8
वह हिंस्र पशु के द्वारा फाड़े गए पशु अथवा मृत पशु की लोथ का मांस खाकर स्वयं को अशुद्ध नहीं करेगा। मैं प्रभु हूँ।
9
इसलिए वे मेरे आदेश का पालन करेंगे। ऐसा न हो कि वे उसको अपवित्र करके पाप का भार स्वयं वहन करें और मर जाएं। उनको पवित्र करने वाला मैं, प्रभु हूँ।
10
‘जो व्यक्ति पुरोहित नहीं है, वह पवित्र वस्तुएं नहीं खाएगा। पुरोहित का अतिथि अथवा उसका मजदूर भी पवित्र वस्तु नहीं खाएगा।
11
किन्तु यदि पुरोहित किसी व्यक्ति को रुपयों से खरीदकर अपनी सम्पत्ति बना ले, तो वह गुलाम उसको खा सकेगा। पुरोहित के परिवार में उत्पन्न गुलाम उसके भोजन को खा सकते हैं।
12
यदि पुरोहित की पुत्री का विवाह उस व्यक्ति से हुआ है, जो पुरोहित नहीं है, तो वह अर्पण की पवित्र वस्तुएं नहीं खाएगी।
13
किन्तु यदि पुरोहित की पुत्री परित्यक्ता अथवा विधवा है, उसकी सन्तान नहीं है, और वह कन्या के सदृश अपने पिता के घर लौट आई है, तो वह अपने पिता का भोजन खा सकती है। कोई अपुरोहित उसको नहीं खाएगा।
14
यदि कोई व्यक्ति अनजाने पवित्र वस्तु खा ले, तो वह उसके मूल्य का पांचवां भाग उसमें जोड़ेगा और पुरोहित को पवित्र वस्तु देगा।
15
जो पवित्र वस्तुएं इस्राएली लोग प्रभु को अर्पित करते हैं, उन्हें पुरोहित अपवित्र न करें,
16
और वे उन पवित्र वस्तुओं को खाकर उन लोगों को भी अधर्म का भार वहन करने वाले और दोषी न बनाएं; क्योंकि उनको पवित्र करनेवाला मैं, प्रभु हूँ।’
17
प्रभु मूसा से बोला,
18
‘हारून, उसके पुत्रों एवं समस्त इस्राएली समाज से बोलना। तू उनसे यह कहना: जब इस्राएल के वंशज अथवा उनके मध्य में निवास करने वाले प्रवासी अपनी मन्नत हेतु अथवा प्रभु को अग्नि-बलि के रूप में स्वेच्छा-बलि के हेतु चढ़ावा चढ़ाएंगे
19
तो इसको ग्राह्य बनाने के लिए तुम निष्कलंक बछड़ा, मेढ़ा, अथवा बकरा चढ़ाना।
20
जिन पशुओं में शारीरिक दोष होगा, उनको मत चढ़ाना क्योंकि उन्हें ग्रहण नहीं किया जाएगा।
21
जब कोई व्यक्ति मन्नत में अथवा स्वेच्छा-बलि के हेतु गाय-बैल या भेड़-बकरियों में से सहभागिता-बलि का पशु प्रभु को चढ़ाएगा, तब ग्राह्य बनने के लिए पशु निष्कलंक होना चाहिए। उसके शरीर पर कोई दोष नहीं होना चाहिए।
22
अन्धा, विकलांग, विकृत अंगवाला, फोड़ा-फुन्सी, खाज-खुजली वाला पशु प्रभु को मत चढ़ाना। इनको प्रभु के लिए वेदी पर अग्नि में अर्पित नहीं करना।
23
जिस बैल अथवा मेमने का कोई अंग बड़ा या छोटा है, उसको स्वेच्छा-बलि के रूप में चढ़ा सकते हो। परन्तु मन्नत में उसको ग्रहण नहीं किया जाएगा।
24
कुचले, दबे, टूटे अथवा कटे अण्डकोष वाला पशु प्रभु को मत चढ़ाना, और न अपने देश में ही उसको बलि करना।
25
विदेशी व्यक्ति से प्राप्त ऐसे पशु अपने परमेश्वर के आहार के रूप में मत चढ़ाना। उनके शरीर पर दोष है, वे विकृत हैं, इसलिए ग्रहण नहीं किए जाएंगे।’
26
प्रभु मूसा से बोला,
27
‘जब बछड़ा, मेमना अथवा बकरी का बच्चा उत्पन्न होगा, तब वह सात दिन तक अपनी मां के साथ रहेगा। उसके पश्चात् आठवें दिन से वह प्रभु को अग्नि में अर्पित चढ़ावे के रूप में ग्राह्य होगा।
28
तुम गाय अथवा भेड़ को उसके बच्चे के साथ एक ही दिन वध मत करना।
29
जब तुम स्तुतिबलि में प्रभु के लिए पशु वध करोगे तब उसको इस प्रकार वध करना कि तुम ग्राह्य हो सको।
30
बलि-पशु का मांस उसी दिन खाया जाएगा। तुम उसमें से कुछ भी सबेरे तक नहीं छोड़ना। मैं प्रभु हूँ।
31
‘तुम मेरी आज्ञाओं का पालन करना और उनको व्यवहार में लाना। मैं प्रभु हूँ।
32
तुम मेरे पवित्र नाम को अपवित्र मत करना; क्योंकि मैं इस्राएली समाज के मध्य में पवित्र माना जाऊंगा। तुम्हें पवित्र करनेवाला मैं, प्रभु हूँ।
33
तुम्हारा परमेश्वर होने के लिए मैंने तुम्हें मिस्र देश से बाहर निकाला है। मैं प्रभु हूँ।’
← Chapter 21
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 23 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27