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Matthew 16
Hindi HSB 2023 (नवीन हिंदी बाइबल)
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1
तब फरीसियों और सदूकियों ने पास आकर उसे परखने के लिए उससे माँग की कि वह उन्हें स्वर्ग का कोई चिह्न दिखाए।
2
इस पर उसने उनसे कहा, “संध्या होने पर तुम कहते हो, ‘मौसम अच्छा रहेगा, क्योंकि आकाश लाल है;’
3
और भोर को कहते हो, ‘आज आँधी आएगी, क्योंकि आकाश धुँधला और लाल है।’ तुम आकाश के लक्षण पहचानना जानते हो, परंतु समयों के चिह्नों को पहचान नहीं सकते।
4
बुरी और व्यभिचारी पीढ़ी चिह्न ढूँढ़ती है, परंतु योना के चिह्न को छोड़ उसे कोई चिह्न नहीं दिया जाएगा।” फिर वह उन्हें छोड़कर चला गया।
5
शिष्य उस पार पहुँचे परंतु रोटी ले जाना भूल गए थे।
6
यीशु ने उनसे कहा, “देखो, फरीसियों और सदूकियों के ख़मीर से सावधान रहो।”
7
वे आपस में सोच विचार करने लगे, “हम तो रोटी नहीं लाए।”
8
परंतु यह जानकर यीशु ने कहा, “हे अल्पविश्वासियो, तुम आपस में सोच विचार क्यों कर रहे हो कि तुम्हारे पास रोटी नहीं है?
9
क्या तुम अब भी नहीं समझते? और क्या तुम्हें उन पाँच हज़ार लोगों के लिए पाँच रोटियाँ स्मरण नहीं, और यह कि तुमने कितनी टोकरियाँ उठाईं?
10
और न ही उन चार हज़ार लोगों के लिए सात रोटियाँ, और यह कि तुमने कितने टोकरे उठाए?
11
तुम क्यों नहीं समझते कि मैंने तुमसे रोटियों के विषय में नहीं कहा? परंतु यह कि फरीसियों और सदूकियों के ख़मीर से सावधान रहना।”
12
तब वे समझ गए कि उसने रोटियों के ख़मीर से नहीं बल्कि फरीसियों और सदूकियों की शिक्षाओं से सावधान रहने को कहा था।
13
जब यीशु कैसरिया फिलिप्पी के प्रदेश में आया तो अपने शिष्यों से पूछने लगा, “लोगों का क्या कहना है? मनुष्य का पुत्र कौन है?”
14
तब उन्होंने उत्तर दिया, “कुछ तो यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला, और कुछ लोग एलिय्याह, और कुछ लोग यिर्मयाह या भविष्यवक्ताओं में से एक कहते हैं।”
15
उसने उनसे पूछा, “परंतु तुम मुझे क्या कहते हो?”
16
शमौन पतरस ने उत्तर दिया, “तू जीवित परमेश्वर का पुत्र मसीह है।”
17
इस पर यीशु ने उससे कहा, “हे योना के पुत्र शमौन! तू धन्य है, क्योंकि यह बात मांस और लहू ने नहीं, बल्कि मेरे पिता ने जो स्वर्ग में है, तुझ पर प्रकट की है।
18
मैं भी तुझसे कहता हूँ कि तू पतरस है, और इस चट्टान पर मैं अपनी कलीसिया बनाऊँगा, और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल नहीं होंगे।
19
मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियाँ दूँगा, और जो कुछ तू पृथ्वी पर बाँधेगा वह स्वर्ग में बँध जाएगा, और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा वह स्वर्ग में खुल जाएगा।”
20
तब उसने शिष्यों को मना किया कि वे किसी से न कहें कि वह मसीह है।
21
उस समय से यीशु अपने शिष्यों पर प्रकट करने लगा कि अवश्य है कि मैं यरूशलेम को जाऊँ और धर्मवृद्धों, मुख्य याजकों और शास्त्रियों के हाथों बहुत दुःख उठाऊँ और मार डाला जाऊँ, और तीसरे दिन जी उठूँ।
22
तब पतरस उसे अलग ले जाकर झिड़कने लगा, “नहीं प्रभु! परमेश्वर की दया तुझ पर बनी रहे! तेरे साथ ऐसा कभी नहीं होगा।”
23
परंतु उसने मुड़कर पतरस से कहा, “हे शैतान, मुझसे दूर हो जा। तू मेरे लिए ठोकर का कारण है, क्योंकि तू परमेश्वर की नहीं बल्कि मनुष्यों की बातों पर मन लगाता है।”
24
तब यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, “यदि कोई मेरे पीछे आना चाहता है, तो वह अपने आप का इनकार करे, अपना क्रूस उठाए और मेरे पीछे हो ले;
25
क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा, वह उसे गँवाएगा; परंतु जो कोई मेरे कारण अपना प्राण गँवाएगा, वह उसे पाएगा।
26
यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त कर ले परंतु अपने प्राण की हानि उठाए तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले क्या देगा?
27
क्योंकि मनुष्य का पुत्र अपने स्वर्गदूतों के साथ अपने पिता की महिमा में आने वाला है, और उस समय वह प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार प्रतिफल देगा।
28
मैं तुमसे सच कहता हूँ कि यहाँ खड़े लोगों में से कुछ ऐसे हैं कि जब तक मनुष्य के पुत्र को अपने राज्य में आता हुआ न देख लें, तब तक मृत्यु का स्वाद कदापि न चखेंगे।”
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