bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi HSB 2023 (नवीन हिंदी बाइबल)
/
Matthew 24
Matthew 24
Hindi HSB 2023 (नवीन हिंदी बाइबल)
← Chapter 23
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 25 →
1
मंदिर-परिसर से निकलकर जब यीशु जा रहा था, तो उसके शिष्य उसे मंदिर के भवन दिखाने के लिए उसके पास आए।
2
इस पर उसने उनसे कहा, “तुम ये सब देख रहे हो न? मैं तुमसे सच कहता हूँ, यहाँ एक पत्थर भी पत्थर पर टिका न रहेगा जो ढाया न जाएगा।”
3
जब वह जैतून पहाड़ पर बैठा हुआ था तो शिष्यों ने एकांत में उसके पास आकर पूछा, “हमें बता कि ये बातें कब होंगी, और तेरे आगमन और इस जगत के अंत का क्या चिह्न होगा?”
4
यीशु ने उन्हें उत्तर दिया: “सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाए।
5
क्योंकि बहुत से लोग मेरे नाम से आकर कहेंगे, ‘मैं मसीह हूँ,’ और बहुतों को भरमाएँगे।
6
तुम युद्धों की आवाज़ और युद्धों की चर्चाएँ सुनोगे; देखो, घबरा मत जाना; क्योंकि इन बातों का होना अवश्य है, परंतु यह अंत नहीं है।
7
जाति, जाति के विरुद्ध और राज्य, राज्य के विरुद्ध उठ खड़े होंगे; स्थान-स्थान पर अकाल पड़ेंगे और भूकंप आएँगे।
8
ये सब बातें पीड़ाओं का आरंभ होंगी।
9
“तब वे तुम्हें कष्ट देने के लिए पकड़वाएँगे और तुम्हें मार डालेंगे, और मेरे नाम के कारण सब जातियाँ तुमसे घृणा करेंगी।
10
तब बहुत से लोग ठोकर खाएँगे और एक दूसरे को पकड़वाएँगे और एक दूसरे से घृणा करेंगे;
11
बहुत से झूठे भविष्यवक्ता उठ खड़े होंगे और बहुतों को भरमाएँगे;
12
और अधर्म बढ़ जाने के कारण बहुतों का प्रेम ठंडा हो जाएगा।
13
परंतु जो अंत तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा।
14
फिर राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा कि सब जातियों के लिए साक्षी हो और तब अंत आ जाएगा।
15
“इसलिए जब तुम दानिय्येल भविष्यवक्ता के द्वारा बताए गए उस उजाड़नेवाले घृणित पात्र को पवित्र स्थान में खड़े हुए देखो (पाठक समझ ले),
16
तो जो यहूदिया में हों, वे पहाड़ों पर भाग जाएँ,
17
जो छत पर हो, वह अपने घर से सामान लेने के लिए नीचे न उतरे,
18
और जो खेत में हो, वह अपना वस्त्र लेने के लिए पीछे न लौटे।
19
परंतु हाय उन पर जो उन दिनों में गर्भवती होंगी और जो दूध पिलाती होंगी।
20
प्रार्थना करो कि तुम्हें शीतकाल में या सब्त के दिन भागना न पड़े;
21
क्योंकि उस समय ऐसा भारी क्लेश होगा जैसा जगत के आरंभ से लेकर अब तक न तो हुआ है और न कभी होगा।
22
यदि उन दिनों को कम न किया गया होता तो कोई भी प्राणी न बचता; परंतु चुने हुओं के कारण उन दिनों को कम किया जाएगा।
23
उस समय यदि कोई तुमसे कहे, ‘देखो, मसीह यहाँ है’ या ‘वहाँ है’ तो विश्वास न करना;
24
क्योंकि झूठे मसीह और झूठे भविष्यवक्ता उठ खड़े होंगे और बड़े-बड़े चिह्न और अद्भुत कार्य दिखाएँगे कि यदि संभव हो तो चुने हुओं को भी भरमा दें;
25
देखो, मैंने पहले ही तुम्हें बता दिया है।
26
इसलिए यदि वे तुमसे कहें, ‘देखो, वह जंगल में है,’ तो बाहर न निकलना; ‘देखो, वह भीतरी कमरों में है,’ तो उनका विश्वास न करना;
27
क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आगमन होगा।
28
जहाँ शव हो, वहाँ गिद्ध इकट्ठे होंगे।
29
“परंतु उन दिनों के क्लेश के तुरंत बाद सूर्य अंधकारमय हो जाएगा और चंद्रमा अपना प्रकाश नहीं देगा, आकाश से तारे गिर जाएँगे, और आकाश की शक्तियाँ हिलाई जाएँगी।
30
तब आकाश में मनुष्य के पुत्र का चिह्न दिखाई देगा, और उस समय पृथ्वी के समस्त कुल छाती पीटेंगे और मनुष्य के पुत्र को सामर्थ्य और बड़ी महिमा के साथ आकाश के बादलों पर आते हुए देखेंगे;
31
और वह तुरही के ऊँचे स्वर के साथ अपने स्वर्गदूतों को भेजेगा, और वे आकाश के एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक, चारों दिशाओं से उसके चुने हुओं को इकट्ठा करेंगे।
32
“अंजीर के पेड़ के इस दृष्टांत से सीखो: जब उसकी डाली कोमल हो जाती है और पत्तियाँ निकलने लगती हैं, तो तुम जान लेते हो कि ग्रीष्मकाल निकट है।
33
उसी प्रकार जब तुम भी इन सब बातों को देखो, तो जान लेना कि वह निकट है बल्कि द्वार पर ही है।
34
मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जब तक ये सब बातें पूरी न हो जाएँ, तब तक इस पीढ़ी का अंत कदापि नहीं होगा।
35
आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परंतु मेरे वचन कदापि न टलेंगे।
36
“परंतु उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत और न ही पुत्र, परंतु केवल पिता।
37
जैसे नूह के दिनों में हुआ, वैसे ही मनुष्य के पुत्र के आगमन पर होगा।
38
क्योंकि जैसे जलप्रलय से पहले के उन दिनों में जब तक नूह ने जहाज़ में प्रवेश नहीं किया था, लोग खाते-पीते, विवाह करते और विवाह कराते रहे;
39
और उन्हें तब तक कुछ समझ नहीं आया जब तक जलप्रलय आकर सब कुछ बहा न ले गया; वैसे ही मनुष्य के पुत्र के आगमन पर भी होगा।
40
उस समय खेत में दो लोग होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा।
41
दो स्त्रियाँ चक्की पीसती होंगी, एक ले ली जाएगी और दूसरी छोड़ दी जाएगी।
42
इसलिए जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा।
43
परंतु यह जान लो कि यदि घर का स्वामी जानता कि चोर किस पहर आएगा, तो वह जागता रहता और अपने घर में सेंध लगने नहीं देता।
44
इसलिए तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं होगे, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।
45
“फिर ऐसा विश्वासयोग्य और बुद्धिमान दास कौन है जिसे उसके स्वामी ने अपने नौकरों के ऊपर नियुक्त किया कि उन्हें उचित समय पर भोजन दे?
46
धन्य है वह दास जिसे उसका स्वामी आकर ऐसा ही करते पाए।
47
मैं तुमसे सच कहता हूँ कि वह उसे अपनी सारी संपत्ति पर अधिकारी नियुक्त करेगा।
48
परंतु यदि वह दास दुष्ट हो और अपने मन में कहे, ‘मेरे स्वामी के आने में देर है।’
49
और वह अपने संगी दासों को पीटने लगे, और पियक्कड़ों के साथ खाए-पीए,
50
तो उस दास का स्वामी ऐसे दिन आएगा जब वह उसकी प्रतीक्षा नहीं करता होगा और ऐसी घड़ी जिसे वह नहीं जानता होगा;
51
और उसे वह कठोर दंड देगा और उसका भाग पाखंडियों के साथ ठहराएगा, जहाँ रोना और दाँतों का पीसना होगा।”
← Chapter 23
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 25 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28