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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Mark 1
Mark 1
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
परमेश्वरक पुत्र यीशु मसीहक शुभ समाचार एहि तरहेँ शुरू होइत अछि—
2
परमेश्वरक प्रवक्ता यशायाह द्वारा लिखल पुस्तक मे भविष्यवाणी कयल गेल अछि जे, “देखू, अहाँ सँ पहिने हम अपन दूत पठायब, जे अहाँक आगाँ-आगाँ अहाँक बाट तैयार करत।”
3
“निर्जन क्षेत्र मे केओ जोर सँ आवाज दऽ रहल अछि जे, ‘प्रभुक लेल मार्ग तैयार करू, हुनका लेल सोझ बाट बनाउ।’ ”
4
तहिना यूहन्ना नामक दूत निर्जन क्षेत्र मे अयलाह और लोक केँ बपतिस्मा दैत प्रचार करऽ लगलाह जे, “पापक क्षमा पयबाक लेल पश्चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन करू और बपतिस्मा लिअ।”
5
यहूदिया प्रदेशक और यरूशलेम शहरक सभ लोक बाहर निकलि कऽ हुनका लग गेल और अपन पाप स्वीकार करैत यरदन नदी मे हुनका सँ बपतिस्मा लेलक।
6
यूहन्ना ऊँटक रोंइयाँ सँ बनल वस्त्र पहिरने रहैत छलाह और अपना डाँड़ मे चमड़ाक पट्टी बन्हने रहैत छलाह। भोजन मे फनिगा आ वन वला मधु खाइत छलाह।
7
ओ एहि तरहेँ प्रचार करैत छलाह, “हमरा बाद मे एक गोटे आबि रहल छथि जे हमरा सँ शक्तिशाली छथि। हम झुकि कऽ हुनकर जुत्तो खोलऽ जोगरक नहि छी।
8
हम तँ अहाँ सभ केँ पानि सँ बपतिस्मा दैत छी लेकिन ओ अहाँ सभ केँ पवित्र आत्मा सँ बपतिस्मा देताह।”
9
ओहि समय मे यीशु गलील प्रदेशक नासरत नगर सँ अयलाह और यूहन्ना सँ यरदन नदी मे बपतिस्मा लेलनि।
10
पानि सँ बाहर होइत काल यीशु आकाश केँ फटैत और परबाक रूप मे पवित्र आत्मा केँ अपना पर उतरैत देखलनि।
11
स्वर्ग सँ आवाज आयल जे, “अहाँ हमर प्रिय पुत्र छी। अहाँ सँ हम बहुत प्रसन्न छी।”
12
तखन पवित्र आत्मा तुरत यीशु केँ निर्जन क्षेत्र मे पठौलथिन
13
जतऽ चालिस दिन धरि शैतान हुनका सँ पाप करयबाक कोशिश कयलकनि। ओ जंगली जानबर सभक बीच मे रहैत छलाह और स्वर्गदूत सभ हुनकर सेवा करैत छलनि।
14
बाद मे, यूहन्ना केँ जहल मे राखि देल गेलाक बाद, यीशु गलील प्रदेश गेलाह और परमेश्वरक शुभ समाचारक प्रचार कयलनि जे,
15
“समय आबि गेल अछि, परमेश्वरक राज्य लग मे अछि! अपना पापक लेल पश्चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू आ शुभ समाचार पर विश्वास करू।”
16
एक दिन यीशु गलील झीलक कात चलैत काल मे सिमोन और हुनकर भाय अन्द्रेयास केँ झील मे जाल फेकैत देखलनि। ओ सभ मछबार छलाह।
17
यीशु हुनका सभ केँ बजौलथिन और कहलथिन, “यौ! हमरा पाछाँ आउ। हम अहाँ सभ केँ मनुष्य केँ पकड़ऽ वला मछबार बना देब।”
18
ओ सभ अपन जाल छोड़ि कऽ हुनका पाछाँ लागि गेलनि।
19
किछु आगू बढ़लाक बाद यीशु याकूब और यूहन्ना दूनू भाय केँ अपन बाबू जबदीक संग नाव मे जाल तैयार करैत देखलथिन।
20
ओ तुरत हुनका सभ केँ बजौलथिन, और ओ सभ अपन बाबू जबदी केँ जऽन-बोनिहारक संग नाव मे छोड़ि हुनका संग भऽ गेलनि।
21
ओ सभ कफरनहूम नगर गेलाह। विश्रामक दिन मे यीशु सभाघर मे जा कऽ उपदेश देबऽ लगलाह।
22
हुनकर शिक्षा सुनि लोक सभ चकित भेल किएक तँ ओ धर्मशिक्षक सभ जकाँ नहि, बल्कि अधिकारपूर्बक शिक्षा दैत छलाह।
23
एकाएक सभाघर मे एकटा दुष्टात्मा लागल आदमी हल्ला करऽ लागल जे,
24
“यौ नासरतक निवासी यीशु! अहाँ केँ हमरा सभ सँ कोन काज? हमरा सभ केँ नष्ट करऽ अयलहुँ की? हम अहाँ केँ चिन्हैत छी। अहाँ परमेश्वरक पवित्र दूत छी।”
25
यीशु दुष्टात्मा केँ डाँटि कऽ कहलथिन, “चुप रह! तोँ एकरा मे सँ निकल!”
26
दुष्टात्मा ओहि आदमी केँ झकझोड़ैत आ जोर सँ चिचियाइत ओकरा मे सँ निकलि गेल।
27
ई देखि सभ आदमी ततेक आश्चर्य-चकित भेल जे एक-दोसर केँ कहऽ लागल जे, “ई की बात? ई कोन प्रकारक नव उपदेश अछि? ई आदमी तँ अधिकारपूर्बक दुष्टात्मा सभ केँ सेहो आज्ञा दैत छथि और ओ सभ हिनकर बात मानैत छनि!”
28
एहि सभ सँ यीशुक चर्चा बहुत जल्दी सम्पूर्ण गलील प्रदेश मे चारू कात पसरि गेलनि।
29
यीशु सभाघर सँ बाहर भऽ कऽ तुरत सिमोन और अन्द्रेयासक घर गेलाह। हुनका संग यूहन्ना और याकूब सेहो छलाह।
30
सिमोनक सासु बोखार सँ पीड़ित ओछायन पर पड़ल छलीह। लोक सभ हुनका विषय मे यीशु केँ कहलकनि।
31
यीशु हुनका लग जा आ हुनकर हाथ पकड़ि कऽ उठौलथिन। हुनकर बोखार तुरत उतरि गेलनि और ओ हिनका सभक सेवा-सत्कार मे लागि गेलीह।
32
ओही दिनक साँझ मे सूर्यास्तक बाद लोक सभ रोगी और दुष्टात्मा लागल आदमी सभ केँ हुनका लग अनलकनि।
33
ओहि नगरक सभ लोक घरक सामने जमा भऽ गेल।
34
यीशु अनेक प्रकारक बिमारी सँ पीड़ित बहुत लोक सभ केँ नीक कयलनि, और बहुत लोक मे सँ दुष्टात्मा सभ केँ सेहो निकाललनि। मुदा ओ दुष्टात्मा सभ केँ बाजऽ नहि देलथिन किएक तँ यीशु के छथि से ओकरा सभ केँ बुझल छलैक।
35
दोसर दिन यीशु अन्हरोखे उठि बाहर गेलाह और एकान्त स्थान मे जा कऽ प्रार्थना करऽ लगलाह।
36
सिमोन और हुनकर संगी सभ हुनका ताकऽ लेल गेलनि।
37
भेँट भेला पर हुनका कहलथिन, “सभ केओ अहाँ केँ खोजि रहल अछि।”
38
तखन ओ उत्तर देलथिन जे, “अपना सभ कोनो दोसर ठाम चलू। लग-पासक आरो गाम-बजार सभ मे सेहो हम परमेश्वरक शुभ समाचार सुनायब, किएक तँ हम एही लेल आयल छी।”
39
तेँ ओ पूरा गलील प्रदेश मे घुमलाह और ओकरा सभक सभाघर सभ मे जा कऽ उपदेश देलनि, और लोक सभ मे सँ दुष्टात्मा सभ केँ निकाललथिन।
40
एक बेर एकटा कुष्ठ-रोगी हुनका लग आबि ठेहुनिया रोपि कऽ हुनका सँ निवेदन कयलकनि जे, “अपने जँ चाही तँ हमरा शुद्ध कऽ सकैत छी।”
41
यीशु केँ ओकरा पर दया आबि गेलनि और ओ अपन हाथ बढ़ा कऽ ओकरा छुबि कऽ कहलथिन, “हम अवश्य चाहैत छिअह! तोँ शुद्ध भऽ जाह।”
42
तुरत्ते ओकर कुष्ठ-रोग ठीक भऽ गेलैक और ओ शुद्ध भऽ गेल।
43
यीशु ओकरा ई कड़ा आदेश दऽ कऽ विदा कयलथिन जे,
44
“ई बात ककरो नहि कहिअहक। पुरोहित लग जा कऽ अपना केँ देखाबह। शुद्ध होयबाक विषय मे मूसाक लिखल नियमक अनुसार, जे बलिदान चढ़यबाक अछि से चढ़ाबह। एहि तरहेँ सभक लेल गवाही रहत जे तोँ शुद्ध भऽ गेल छह।”
45
मुदा ओ एहि घटनाक विषय मे सभ केँ जा कऽ कहि देलकैक, जकर फल ई भेल जे यीशु आब खुलि कऽ कोनो नगर मे नहि जा सकैत छलाह। ओ शहर सँ बाहर एकान्त मे रहऽ लगलाह मुदा तैयो लोक सभ चारू दिस सँ हुनका लग अबैत-जाइत छलनि।
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