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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Mark 10
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
यीशु तखन ओहि ठाम सँ विदा भऽ कऽ यहूदिया प्रदेश मे और यरदन नदीक ओहि पार गेलाह। बहुत बड़का भीड़ फेर हुनका लग अयलनि, तँ ओ अपन आदतक अनुसार ओकरा सभ केँ शिक्षा देबऽ लगलाह।
2
किछु फरिसी सभ आबि कऽ हुनका जँचबाक लेल पुछलथिन जे, “की धर्म-नियमक अनुसार पुरुष केँ अपना स्त्री केँ तलाक देनाइ ठीक अछि?”
3
यीशु हुनका सभ केँ पुछलथिन जे, “एहि सम्बन्ध मे मूसा की आज्ञा देने छथि?”
4
ओ सभ उत्तर देलथिन, “मूसा तलाकनामा लिखि कऽ तलाकक अनुमति देने छथि।”
5
एहि पर यीशु हुनका सभ केँ जबाब देलथिन जे, “अहाँ सभक मोनक कठोरताक कारणेँ मूसा अहाँ सभक लेल ई आज्ञा देने छथि।
6
लेकिन सृष्टिक शुरुए सँ परमेश्वर मनुष्य केँ ‘पुरुष आ स्त्री बनौलनि।’
7
‘एहि कारणेँ पुरुष अपन माय-बाबू केँ छोड़ि अपन स्त्रीक संग रहत और दूनू एक शरीर भऽ जायत।’
8
आब ओ सभ दू नहि अछि—एके भऽ गेल।
9
तेँ जकरा परमेश्वर जोड़ि देलथिन तकरा मनुष्य अलग नहि करओ।”
10
बाद मे जखन घर मे छलाह तखन शिष्य सभ एहि विषय मे यीशु सँ फेर पुछलथिन।
11
ओ उत्तर देलथिन जे, “जे केओ अपना स्त्री केँ तलाक दऽ कऽ दोसर सँ विवाह करैत अछि, से ओहि स्त्रीक संग परस्त्रीगमन करैत अछि।
12
और जे स्त्री अपना पति केँ तलाक दऽ कऽ दोसर पुरुष सँ विवाह करैत अछि, सेहो परपुरुषगमन करैत अछि।”
13
तखन लोक सभ यीशु लग अपन बच्चा सभ केँ आनऽ लगलनि जे ओ ओकरा सभ पर हाथ राखि आशीर्वाद देथिन। मुदा शिष्य सभ ओकरा सभ केँ डँटलनि।
14
ई देखि यीशु बहुत अप्रसन्न भऽ गेलाह और शिष्य सभ केँ कहलथिन, “बच्चा सभ केँ हमरा लग आबऽ दिऔक, ओकरा सभ केँ नहि रोकिऔक, किएक तँ परमेश्वरक राज्य एहने सभक अछि।
15
हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, जे बच्चा जकाँ परमेश्वरक राज्य ग्रहण नहि करत से ओहि मे कहियो नहि प्रवेश करत।”
16
तखन बच्चा सभ केँ कोरा मे उठा लेलथिन और ओकरा सभ पर हाथ राखि कऽ आशीर्वाद देलथिन।
17
यीशु जखन ओहिठाम सँ विदा भऽ रस्ता मे जा रहल छलाह तँ एक आदमी दौड़ि कऽ अयलाह, और हुनका आगाँ मे ठेहुनिया रोपि कऽ यीशु सँ पुछलथिन जे, “यौ उत्तम गुरुजी! अनन्त जीवन प्राप्त करबाक लेल हम की करू?”
18
यीशु हुनका कहलथिन, “अहाँ हमरा ‘उत्तम’ किएक कहैत छी? परमेश्वर केँ छोड़ि आरो केओ उत्तम नहि अछि।
19
मुदा अहाँ धर्म-नियमक आज्ञा सभ तँ जनिते छी—‘हत्या नहि करह, परस्त्रीगमन नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह, ककरो नहि ठकह, अपन माय-बाबूक आदर करह।’ ”
20
ओ उत्तर देलथिन जे, “गुरुजी, एहि सभ आज्ञाक पालन हम बचपने सँ करैत छी।”
21
यीशु हुनका देखि कऽ प्रेम कयलथिन और कहलथिन, “अहाँ मे एकटा बातक कमी अछि—अहाँ जाउ, अपन पूरा सम्पत्ति बेचि कऽ ओकरा गरीब सभ मे बाँटि दिअ, अहाँ केँ स्वर्ग मे धन भेटत। तकरबाद आउ आ हमरा पाछाँ चलू।”
22
ई बात सुनि कऽ ओहि आदमीक मुँह उतरि गेलनि, आ ओ उदास भऽ कऽ चल गेलाह किएक तँ हुनका बहुत धन-सम्पत्ति छलनि।
23
तखन यीशु चारू कात देखि कऽ अपना शिष्य सभ केँ कहलथिन, “धनिक सभक लेल परमेश्वरक राज्य मे प्रवेश कयनाइ कतेक कठिन अछि!”
24
शिष्य सभ एहि बात सँ अचम्भित भऽ गेलाह। यीशु हुनका सभ केँ फेर कहलथिन, “हे हमर बेटा सभ! परमेश्वरक राज्य मे प्रवेश कयनाइ कतेक कठिन अछि!
25
धनिक केँ परमेश्वरक राज्य मे प्रवेश कयनाइ सँ ऊँट केँ सुइक भूर दऽ कऽ निकलनाइ आसान अछि।”
26
ओ सभ आरो चकित भऽ कऽ एक-दोसर केँ कहऽ लगलाह जे, “तखन उद्धार ककर भऽ सकैत छैक?!”
27
यीशु हुनका सभ केँ एकटक देखैत कहलथिन, “मनुष्यक लेल तँ ई असम्भव अछि, लेकिन परमेश्वरक लेल नहि। परमेश्वरक लेल सभ किछु सम्भव अछि।”
28
पत्रुस हुनका कहलथिन, “देखू! हम सभ तँ सभ किछु त्यागि कऽ अहाँक पाछाँ आयल छी।”
29
यीशु उत्तर देलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्ये कहैत छी, प्रत्येक व्यक्ति जे हमरा लेल और शुभ समाचारक लेल घर, भाय, बहिन, माय-बाबू, सन्तान वा जमीन-जालक त्याग करत
30
तकरा एहि युग मे सय गुना भेटतैक—घर, भाय, बहिन, माय, सन्तान, जमीन, मुदा संगे-संगे सहऽ पड़तैक अत्याचार, और आबऽ वला युग मे भेटतैक अनन्त जीवन।
31
मुदा बहुतो लोक जे एखन आगाँ अछि से पाछाँ भऽ जायत, आ जे एखन पाछाँ अछि से आगाँ भऽ जायत।”
32
यीशु और हुनकर शिष्य सभ यरूशलेम जाय वला रस्ता पर बढ़ैत छलाह। यीशु आगू-आगू चलि रहल छलाह। शिष्य सभ आश्चर्य-चकित छलाह और जे सभ संग मे पाछू-पाछू अबैत छल से सभ भयभीत छल। बारहो शिष्य केँ यीशु फेर अलग लऽ जा कऽ हुनका सभ केँ बुझा देलथिन जे हुनका संग केहन घटना सभ होयतनि। ओ हुनका सभ केँ कहलथिन जे,
33
“सुनू, अपना सभ यरूशलेम जा रहल छी। ओहिठाम मनुष्य-पुत्र मुख्यपुरोहित और धर्मशिक्षक सभक हाथ मे पकड़ाओल जायत। ओ सभ ओकरा मृत्युदण्डक जोगरक ठहरा देतैक और गैर-यहूदी सभक हाथ मे सौंपि देतैक।
34
ओ सभ ओकर हँसी उड़ौतैक और ओकरा पर थुकतैक, ओकरा कोड़ा सँ मारतैक और मारि देतैक। मुदा तीन दिनक बाद ओ फेर जीबि उठत।”
35
जबदीक दूनू पुत्र याकूब और यूहन्ना यीशु लग आबि कऽ कहलथिन, “गुरुजी, हम सभ चाहैत छी जे, हम सभ जे किछु माँगी से अहाँ हमरा सभक लेल कऽ दिअ।”
36
यीशु पुछलथिन जे, “अहाँ सभ की चाहैत छी जे हम कऽ दिअ?”
37
ओ सभ जबाब देलथिन जे, “अहाँ अपन महिमामय राज्य मे हमरा सभ मे सँ एक केँ अपना दहिना कात मे और दोसर केँ अपना बामा कात मे बैसबाक अधिकार दिअ।”
38
यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ की माँगि रहल छी से अहाँ सभ नहि बुझैत छी। की दुःखक बाटी सँ जे हमरा पिबाक अछि से अहाँ सभ पिबि सकैत छी? वा कष्टक बपतिस्मा लऽ सकैत छी जे हमरा लेबाक अछि?”
39
ओ सभ उत्तर देलथिन जे, “हँ, कऽ सकैत छी।” तखन यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “जे बाटी हमरा पिबाक अछि से तँ अहाँ सभ पीब, और जे बपतिस्मा हमरा लेबाक अछि से अहाँ सभ लेब,
40
मुदा किनको अपना दहिना कात वा बामा कात बैसायब, तकर अधिकार हमरा नहि अछि—ई स्थान सभ तिनका सभक लेल छनि, जिनका सभक लेल तैयार कयल गेल अछि।”
41
जखन बाँकी दस शिष्य एहि बातक बारे मे सुनलनि तखन ओ सभ याकूब और यूहन्ना पर खिसिआय लगलाह।
42
एहि पर यीशु शिष्य सभ केँ अपना लग बजा कऽ कहलथिन, “अहाँ सभ जनैत छी जे एहि संसार मे जे सभ शासन करऽ वला बुझल जाइत छथि से सभ जनता पर हुकुम चलबैत रहैत छथि, और जनता मे जे पैघ लोक सभ छथि से जनता पर अधिकार जमबैत छथि।
43
मुदा अहाँ सभ मे एना नहि होअय। बल्कि, जे अहाँ सभ मे पैघ होमऽ चाहय से अहाँ सभक सेवक बनय।
44
और जे केओ अहाँ सभ मे प्रमुख व्यक्ति होमऽ चाहय से सभक टहलू बनय!
45
किएक तँ मनुष्य-पुत्र सेहो एहि लेल नहि आयल अछि जे अपन सेवा कराबय बल्कि एहि लेल जे ओ सेवा करय और बहुतो लोकक छुटकाराक मूल्य मे अपन प्राण देअय।”
46
तखन ओ सभ यरीहो नगर पहुँचलाह। जखन यीशु और शिष्य सभ बड़का भीड़क संग यरीहो सँ निकलैत छलाह तखन रस्ताक कात मे तिमाईक पुत्र, बरतिमाई, जे आन्हर छल, से भीख मँगैत बैसल छल।
47
जखन ओ सुनलक जे नासरत-निवासी यीशु जा रहल छथि तँ ओ सोर पारि कऽ कहऽ लागल जे, “यौ दाऊदक पुत्र यीशु! हमरा पर दया करू!”
48
ओकरा बहुत लोक डाँटि कऽ चुप रहऽ लेल कहलकैक, मुदा ओ आरो जोर सँ हल्ला कऽ कऽ कहऽ लागल जे, “यौ दाऊदक पुत्र! हमरा पर दया करू!”
49
यीशु ठाढ़ भऽ गेलाह आ कहलनि जे, “ओकरा बजाउ!” तखन ओहि आन्हर केँ बजा कऽ लोक सभ कहलकैक जे, “निराश नहि हो! उठ! तोरा बजबैत छथुन!”
50
अपन ओढ़ना फेकि कऽ ओ छरपि उठल और यीशु लग आयल।
51
यीशु ओकरा पुछलथिन जे, “तोँ की चाहैत छह, हम तोरा लेल की करिअह?” आन्हर बाजल, “गुरुजी, हम देखऽ चाहैत छी!”
52
यीशु ओकरा कहलथिन, “जाह—तोहर विश्वास तोरा नीक कऽ देलकह।” ओ तुरत देखऽ लागल और रस्ता मे यीशुक पाछाँ चलऽ लागल।
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