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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Mark 5
Mark 5
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
यीशु और हुनकर शिष्य सभ झीलक ओहि पार गिरासेनी सभक क्षेत्र मे पहुँचलाह।
2
नाव पर सँ उतरैत काल एक दुष्टात्मा लागल आदमी कबरिस्तान दिस सँ हुनका भेँट करऽ लेल अयलनि।
3
ओ आदमी कबरिस्तान मे रहैत छल। केओ आब ओकरा जंजीरो लऽ कऽ बान्हि नहि सकैत छल।
4
कतेको बेर लोक ओकरा जंजीर सँ हाथ-पयर बान्हि देने रहैक मुदा ओ सभ जंजीर केँ तोड़ि देने रहय। ककरो एतेक शक्ति नहि छल जे ओकरा सम्हारि कऽ राखि सकय।
5
दिन-राति कबरिस्तान और पहाड़ मे ओ सदिखन चिचियाइत रहैत छल और पाथर सँ अपना देह केँ कटैत रहैत छल।
6
यीशु केँ दूर सँ देखि ओ दौड़ैत आयल और हुनका पयर पर खसि कऽ
7
जोर सँ चिचिया लागल जे, “यौ परम परमेश्वरक पुत्र यीशु! अपने केँ हमरा सँ कोन काज? अपने केँ परमेश्वरक सपत अछि—हमरा दुःख नहि दिअ।”
8
ई बात ओ एहि द्वारे कहलक कि यीशु ओहि दुष्टात्मा केँ कहैत छलाह जे, “हे दुष्टात्मा! एहि आदमी मे सँ निकल!”
9
तखन यीशु ओकरा सँ पुछलथिन जे, “तोहर नाम की छह?” ओ कहलक जे, “हमर नाम अछि ‘सेना’, किएक तँ हम सभ बहुत गोटे छी।”
10
तखन ओ हुनका सँ विनती करऽ लागल जे, “हमरा सभ केँ एहि इलाका सँ बाहर नहि निकालू।”
11
ओहीठाम लग मे पहाड़ पर सुगरक बड़का झुण्ड चरि रहल छल।
12
दुष्टात्मा सभ यीशु सँ विनती कयलकनि जे, “हमरा सभ केँ ओहि सुगर सभ मे पठा दिअ, ओकरा सभ मे हमरा सभ केँ पैसऽ दिअ।”
13
यीशु ओकरा सभ केँ अनुमति दऽ देलथिन। ओ सभ ओहि आदमी मे सँ निकलि आयल और सुगर सभ मे प्रवेश कऽ गेल। पूरा झुण्ड—लगभग दू हजार सुगर—बताह भऽ पहाड़ पर सँ धरफरा कऽ झील मे खसल और सभ पानि मे डुबि कऽ मरि गेल।
14
सुगर चराबऽ वला तुरत भागि एहि घटनाक बारे मे नगर आ देहातो मे सुनौलक। एहि घटना केँ देखऽ लेल बहुतो लोक आयल।
15
यीशु लग पहुँचि कऽ ओहि आदमी केँ जकरा मे दुष्टात्मा पहिने रहैत छलैक कपड़ा पहिरने आ स्वस्थ मोने यीशु लग बैसल देखलक। ई देखि लोक सभ भयभीत भऽ गेल।
16
जे सभ ई घटना देखने छल से सभ विस्तारपूर्बक लोक सभ केँ कहि देलक जे कोना दुष्टात्मा लागल आदमी नीक भेल और सुगर सभ केँ की भेलैक।
17
तखन लोक सभ यीशु सँ ओहि इलाका सँ चल जयबाक लेल विनती करऽ लगलनि।
18
यीशु जखन नाव पर चढ़ऽ लगलाह तखन ओ आदमी जकरा मे पहिने दुष्टात्मा सभ रहैत छलैक से हुनका सँ विनती कयलकनि जे, “अपना संग हमरो चलऽ देल जाओ।”
19
मुदा यीशु ओकरा मना करैत कहलथिन, “तोँ अपना घर जाह, और प्रभु तोरा पर कतेक पैघ दया कयलथुन अछि से अपना आदमी सभ केँ सुनबहक।”
20
ओ आदमी “दस नगर” क्षेत्र मे जा कऽ, यीशु ओकरा लेल जे-जतेक कयने रहथिन से सुनाबऽ लागल। जे सभ ई बात सुनलक से सभ बहुत आश्चर्य-चकित भेल।
21
यीशु नाव मे झीलक एहि पार अयलाह। हुनकर चारू कात बड़का भीड़ जमा भऽ गेल। जखन यीशु झीलक कात मे ठाढ़ छलाह,
22
ओही समय मे सभाघरक याइरस नामक एक अधिकारी ओहिठाम अयलाह। यीशु केँ देखि कऽ हुनकर पयर पर खसैत
23
निवेदन कयलथिन जे, “हमर बेटी मरि रहल अछि। हमरा घर चलि कऽ ओकरा पर हाथ राखि कऽ ठीक कऽ देल जाओ, जाहि सँ ओ जीबय।” यीशु हुनका संग विदा भऽ गेलाह।
24
हुनका संग बड़का भीड़ चलल। चारू कात सँ लोक सभ यीशु केँ पिचऽ लगलनि।
25
भीड़ मे एक स्त्री छलि जकरा बारह वर्ष सँ खून खसऽ वला बिमारी छलैक।
26
ओ बहुतो वैद्य सँ इलाज कराबऽ मे बड्ड कष्ट सहल छलि और अपन सभ सम्पत्ति खर्च कऽ देने छलि। मुदा तैयो ओकरा कनेको गुण नहि कयलकैक। बल्कि ओकर अवस्था आओर अधलाहे होइत गेलैक।
27
यीशुक बारे मे ओ सुनने छलि। ओ हुनका पाछू आबि, हुनकर वस्त्रक कोर छुबि
28
मोन मे सोचलक जे, “जँ हम हुनकर वस्त्रो केँ छुबि लेब तँ हम ठीक भऽ जायब।”
29
हुनकर वस्त्र छुबिते ओकर खून बहनाइ बन्द भऽ गेलैक। ओकरा अपनो अनुभव भेलैक जे हम रोग सँ मुक्त भऽ गेल छी।
30
यीशु केँ सेहो तुरत अनुभव भेलनि जे हमरा मे सँ सामर्थ्य निकलि गेल अछि। ओ भीड़ दिस घूमि कऽ पुछलथिन जे, “हमरा वस्त्र केँ के छुलक?”
31
हुनकर शिष्य सभ हुनका कहलकनि जे, “अहाँ देखिते छी जे कतेक लोक अहाँ केँ दबा रहल अछि, तँ कोना पुछैत छी जे हमरा के छुलक?”
32
मुदा यीशु ई बुझबाक लेल जे ई के कयलक, चारू दिस अपन नजरि खिरौलनि।
33
तखन ओ स्त्री ई बुझि जे हमरा संग की भेल, डर सँ कँपैत आगू आयल आ यीशुक पयर पर खसैत हुनका सभ बात सत्य-सत्य कहि देलकनि।
34
यीशु ओकरा कहलथिन, “बेटी! तोहर विश्वास तोरा स्वस्थ कऽ देलकह। शान्तिपूर्बक जाह और अपन रोग सँ मुक्त रहह!”
35
यीशु ई बात कहिए रहल छलथिन कि अधिकारी याइरसक घर सँ किछु गोटे आबि कऽ याइरस केँ कहलकनि जे, “अहाँक बेटी मरि गेल। आब गुरुजी केँ आरो कष्ट देला सँ कोन लाभ?”
36
यीशु ई बात सुनि लेलथिन और सभाघरक अधिकारी केँ कहलथिन, “अहाँ डेराउ नहि! मात्र विश्वास राखू!”
37
ओ अपना संग पत्रुस, याकूब और याकूबक भाय यूहन्ना केँ छोड़ि आरो ककरो नहि आबऽ देलथिन।
38
सभाघरक अधिकारीक घर पहुँचि कऽ ओ लोक सभ केँ बहुत कनैत आ जोर सँ विलाप करैत देखलनि।
39
घर मे अबिते यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ हल्ला किएक करैत छी और कनैत किएक छी? बच्ची मरल नहि अछि—ओ सुतल अछि।” मुदा लोक सभ हुनका पर हँसऽ लागल।
40
तखन यीशु सभ लोक केँ बाहर हटा कऽ बच्चीक माय-बाबू केँ और अपन शिष्य सभ केँ अपना संग लऽ कऽ ओहि घर मे गेलाह जाहिठाम ओ बच्ची छल।
41
यीशु ओकर हाथ पकड़ि ओकरा कहलथिन, “तलीथा कूम!” जकर अर्थ अछि, “हे बच्ची! हम तोरा कहैत छिऔक, तोँ उठ!”
42
बच्ची तुरत उठि गेल और बुलऽ लागल—ओ तँ बारह वर्षक छल। ओ सभ बहुत आश्चर्य-चकित भेलाह।
43
यीशु एहि घटना केँ केओ नहि बुझय ताहि लेल दृढ़तापूर्बक आदेश देलथिन, आ कहलथिन जे बच्ची केँ किछु खयबाक लेल देल जाय।
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