bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Maithili
/
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
/
Mark 14
Mark 14
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
← Chapter 13
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 15 →
1
फसह-पाबनि और “बिनु खमीरक रोटी वला पाबनि” होमऽ मे दू दिन बाँकी छल। मुख्यपुरोहित और धर्मशिक्षक सभ यीशु केँ कोन तरहेँ छल सँ पकड़ब और मारि देब, तकर उपाय तकैत छलाह।
2
मुदा ओ सभ कहलनि जे, “पाबनिक समय मे नहि। एना नहि होअय जे जनता उपद्रव करय।”
3
यीशु बेतनिया गाम मे सिमोन नामक एक आदमी, जिनका पहिने कुष्ठ-रोग भेल छलनि, तिनका घर मे भोजन करैत छलाह। तखने एकटा स्त्रीगण संगमरमरक बर्तन मे जटामासी नामक बहुत दामी तेल अनलनि। बर्तन फोड़ि कऽ तेल हुनका माथ पर ढारि देलथिन।
4
लेकिन ओहिठाम बैसल किछु लोक खिसिआ कऽ एक-दोसर केँ कहऽ लागल जे, “ई दामी तेल किएक बरबाद कयल गेल?
5
ई तँ एक वर्षक मजदूरी सँ बेसी मे बेचि कऽ गरीब सभ मे बाँटल जा सकैत छल!” और ओहि स्त्री केँ डाँटऽ लागल।
6
मुदा यीशु कहलथिन, “हिनका छोड़ि दिऔन! हिनका किएक तंग करैत छिऐन? हमरा लेल बहुत बढ़ियाँ काज कयलनि।
7
गरीब सभ तँ अहाँ सभक संग सभ दिन रहत, और अहाँ सभ केँ जहिया मोन होयत तहिया ओकरा सभक सहायता कऽ सकब। मुदा हम अहाँ सभक संग सभ दिन नहि रहब।
8
ई जे किछु कऽ सकैत छलीह से कयलनि। ई पहिनहि सँ हमरा देह मे तेल लगा कऽ हम जे कबर मे राखल जायब तकर तैयारी कयलनि।
9
हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, संसार भरि मे जतऽ कतौ हमर शुभ समाचारक प्रचार कयल जायत, ततऽ एहि स्त्रीगणक स्मरण मे हिनकर एहि काजक चर्चा सेहो कयल जायत।”
10
तखन यहूदा इस्करियोती, जे बारह शिष्य मे सँ एक छल, यीशु केँ मुख्यपुरोहित सभक हाथ मे पकड़यबाक योजना बनयबाक लेल हुनका सभक ओहिठाम गेल।
11
यहूदाक बात सुनि कऽ मुख्यपुरोहित सभ बहुत खुश भऽ गेलाह और ओकरा ई काज करबाक लेल पैसा देबाक वचन देलथिन। तेँ ओ यीशु केँ पकड़बयबाक अनुकूल अवसरक ताक मे रहऽ लागल।
12
बिनु खमीरक रोटी वला पाबनिक पहिल दिन, जाहि दिन मे फसह-भोजक भेँड़ा बलिदान करबाक प्रथा छल, शिष्य सभ यीशु सँ पुछलथिन जे, “फसह-पाबनिक भोजक व्यवस्था अहाँक लेल हम सभ कतऽ ठीक करू?”
13
यीशु दूटा शिष्य सभ केँ ई कहि कऽ पठौलनि जे, “शहर मे जाउ। ओतऽ घैल मे पानि लऽ जाइत एक पुरुष अहाँ सभ केँ भेटत, ओकरा पाछाँ-पाछाँ जाउ।
14
जाहि घर मे ओ प्रवेश करत ओहि घरक मालिक केँ कहबनि जे, ‘गुरुजी पुछैत छथि जे हमर अतिथि-घर कतऽ अछि जतऽ हम अपना शिष्य सभक संग फसह-भोज खायब?’
15
ओ अहाँ सभ केँ उपरका तल्ला पर एक नमहर कोठली देखौताह जाहि मे सभ किछु तैयार रहत। ओतहि अहाँ सभ अपना सभक भोजक तैयारी करू।”
16
दूनू शिष्य विदा भऽ कऽ शहर मे पहुँचलाह, और जहिना यीशु हुनका सभ केँ कहने छलथिन, ठीक ओहिना सभ किछु भेटलनि, और ओ सभ ओतऽ फसह-भोजक तैयारी कयलनि।
17
ओहि साँझ मे यीशु अपन बारहो शिष्यक संग ओतऽ पहुँचलाह।
18
भोजन करैत काल यीशु कहऽ लगलाह जे, “हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, अहाँ सभ मे सँ एक गोटे हमरा पकड़बा देत, एक गोटे जे हमरा संग भोजन सेहो कऽ रहल अछि।”
19
शिष्य सभ दुखी भऽ कऽ एक-एक कऽ हुनका सँ पुछऽ लगलनि जे, “ओ हम तँ नहि छी?!”
20
यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “ओ अहाँ बारहो मे सँ एक अछि जे हमरा संग बट्टा मे रोटी केँ बोड़ैत अछि।
21
मनुष्य-पुत्रक सम्बन्ध मे जहिना धर्मशास्त्र मे लिखल गेल अछि तहिना तँ ओ चलिए जायत, मुदा धिक्कार अछि ओहि मनुष्य केँ जे मनुष्य-पुत्र केँ पकड़बा रहल अछि। ओकरा लेल तँ नीक ई रहितैक जे ओ जन्मे नहि लेने रहैत।”
22
ओ सभ जखन भोजन कऽ रहल छलाह तँ यीशु रोटी लेलनि आ परमेश्वर केँ धन्यवाद देलनि। ओ रोटी केँ तोड़ि कऽ शिष्य सभ केँ देलथिन आ कहलथिन, “लिअ, ई हमर देह अछि।”
23
तखन बाटी हाथ मे लेलनि, और परमेश्वर केँ धन्यवाद दऽ कऽ हुनका सभ केँ देलथिन। ओ सभ गोटे ओहि मे सँ पिलनि।
24
ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “ई परमेश्वर आ मनुष्यक बीच विशेष सम्बन्ध स्थापित करऽ वला हमर खून अछि, जे बहुत लोकक लेल बहाओल जा रहल अछि।
25
हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, जाबत तक परमेश्वरक राज्य मे हम नवका अंगूरक रस नहि पीब, ताबत तक अंगूरक रस फेर नहि पीब।”
26
तकरबाद एक भजन गाबि कऽ ओ सभ जैतून पहाड़ पर चल गेलाह।
27
तखन यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ गोटे अपना विश्वास मे डगमगायब, किएक तँ धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे परमेश्वर कहने छथि, ‘हम चरबाह केँ मारि देबैक, और भेँड़ा सभ छिड़िया जायत।’
28
मुदा मृत्यु सँ फेर जीवित भऽ गेलाक बाद हम अहाँ सभ सँ पहिने गलील प्रदेश जायब।”
29
एहि पर पत्रुस हुनका कहलथिन, “चाहे सभ केओ विश्वास मे डगमगायत, मुदा हम नहि डगमगायब!”
30
यीशु हुनका कहलथिन, “हम अहाँ केँ सत्य कहैत छी जे, आइए राति मे, अहाँ हमरा अस्वीकार करब। मुर्गा केँ दू बेर बाजऽ सँ पहिने अहाँ तीन बेर लोक केँ कहबैक जे, हम ओकरा चिन्हबो नहि करैत छिऐक।”
31
मुदा पत्रुस आरो जोर सँ कहलथिन जे, “हमरा जँ अहाँक संग मरहो पड़त तैयो हम किन्नहुँ नहि अहाँ केँ अस्वीकार करब।” आरो सभ शिष्य सेहो यैह बात कहलथिन।
32
ओ सभ गतसमनी नामक एक जगह पर गेलाह। यीशु अपना शिष्य सभ केँ कहलथिन, “जाबत हम प्रार्थना करैत छी, ताबत अहाँ सभ एहिठाम बैसल रहू।”
33
ओ पत्रुस, याकूब और यूहन्ना केँ अपना संग लऽ गेलाह। ओ मानसिक वेदना सँ व्याकुल होमऽ लगलाह,
34
आ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हमर मोन व्यथा सँ एतेक व्याकुल अछि—मानू जे हम दुःख सँ मरऽ पर छी। अहाँ सभ एहिठाम रहि कऽ जागल रहू।”
35
एतेक कहि ओ कनेक आगाँ जा मुँह भरे खसि कऽ प्रार्थना कयलनि जे, सम्भव होअय तँ ई दुःखक समय हमरा लग सँ दूर भऽ जाय।
36
ओ प्रार्थना करैत कहलनि जे, “हे बाबूजी! हे पिता! अहाँ तँ सभ किछु कऽ सकैत छी—ई दुःखक बाटी हमरा सँ हटा लिअ, मुदा तैयो हमर इच्छा नहि, अहींक इच्छा पूरा होअय।”
37
तकरबाद अपन शिष्य सभ लग आबि कऽ हुनका सभ केँ सुतल देखलथिन। ओ पत्रुस केँ कहलथिन, “सिमोन! सुतल छी की? की एको घण्टा जागल रहितहुँ से अहाँ केँ पार नहि लागल?
38
परीक्षा मे नहि पड़ि जाउ ताहि लेल अहाँ सभ जागल रहू आ प्रार्थना करैत रहू। आत्मा तँ तैयार अछि मुदा शरीर कमजोर।”
39
यीशु फेर जा कऽ पहिने जकाँ प्रार्थना कयलनि।
40
ओ जखन प्रार्थना कऽ कऽ शिष्य सभ लग अयलाह तँ ओ सभ फेर सुतल छलाह। हुनकर सभक आँखि नीन सँ भारी भऽ गेल छलनि। आब यीशु केँ की जबाब दिऔन से हिनका सभ केँ किछु नहि फुरयलनि।
41
यीशु फेर तेसर बेर हुनका सभ लग अयलाह और कहलथिन, “एखनो तक सुतिए रहल छी आ आरामे कऽ रहल छी? आब भऽ गेल! समय आबि गेल—देखू आब मनुष्य-पुत्र पापी सभक हाथ मे पकड़बाओल जा रहल अछि।
42
उठू-उठू! चलू! देखू, हमरा पकड़बाबऽ वला आबि गेल अछि!”
43
यीशु ई कहिए रहल छलाह कि यहूदा, जे बारह शिष्य मे सँ एक छल, पहुँचि गेल। ओकरा संग लोकक भीड़ छलैक, और सभक हाथ मे तरुआरि और लाठी छल। ओकरा सभ केँ मुख्यपुरोहित, धर्मशिक्षक, और बूढ़-प्रतिष्ठित लोकनि पठौने छलाह।
44
यीशु केँ पकड़बाबऽ वला ओकरा सभ केँ ई संकेत देने छलैक जे, “हम जकरा चुम्मा लेब, वैह होयत—अहाँ सभ ओकरे पकड़ू आ घेरि कऽ पहरा मे लऽ जायब।”
45
यहूदा तुरत यीशुक लग मे जा कऽ कहलकनि, “गुरुजी!” आ हुनका चुम्मा लेलकनि।
46
ओ सभ हुनका तुरत पकड़ि कऽ बन्दी बना लेलकनि।
47
ओहि ठाम ठाढ़ एक आदमी तरुआरि निकालि कऽ महापुरोहितक टहलू पर चला कऽ ओकर एकटा कान उड़ा देलनि।
48
यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “की अहाँ सभ हमरा विद्रोह मचाबऽ वला बुझि कऽ, लाठी और तरुआरि लऽ कऽ पकड़ऽ अयलहुँ?
49
सभ दिन हम मन्दिर मे शिक्षा दैत अहाँ सभक संग छलहुँ, ततऽ अहाँ सभ हमरा नहि पकड़लहुँ। मुदा ई सभ एना एहि लेल भेल जे धर्मशास्त्र मे लिखल बात पूरा होअय।”
50
तखन सभ शिष्य हुनका छोड़ि कऽ भागि गेलनि।
51
ओहिठाम एक नवयुवक सेहो छल जे यीशुक पाछाँ-पाछाँ चलैत छल। ओ अपना देह पर मात्र चद्दरि लपेटने रहय। लोक सभ ओकरो पकड़ऽ लागल
52
लेकिन ओ चद्दरि ओकरा सभक हाथ मे छोड़ि कऽ नंगटे दौड़ैत भागल।
53
तखन यीशु केँ महापुरोहितक ओहिठाम लऽ गेलनि, जाहिठाम सभ मुख्यपुरोहित, बूढ़-प्रतिष्ठित लोक और धर्मशिक्षक सभ जमा भेल छलाह।
54
पत्रुस सेहो किछु दूरे रहि कऽ यीशुक पाछाँ-पाछाँ महापुरोहितक अङने मे पैसि गेलाह। ओ सिपाही सभक संग घूर लग बैसि कऽ आगि तापऽ लगलाह।
55
मुख्यपुरोहित सभ और पूरा धर्म-महासभाक सदस्य सभ यीशु केँ मृत्युदण्डक जोगरक बनयबाक लेल हुनका विरोध मे प्रमाण सभ तकैत छलाह, मुदा किछु नहि भेटलनि।
56
कारण बहुत लोक हुनका विरोध मे झूठ गवाही देलक लेकिन ओकरा सभक बात एक-दोसर सँ नहि मिललैक।
57
तखन किछु लोक उठि कऽ हुनका विरोध मे झूठ गवाही दैत कहलक जे,
58
“हम सभ ओकरा ई कहैत सुनलहुँ अछि जे, ‘ई हाथ सँ बनाओल मन्दिर केँ हम तोड़ि देब और तीन दिनक बाद हम दोसर बनायब जे मनुष्यक हाथ सँ बनाओल नहि होयत।’ ”
59
मुदा तैयो ओकरा सभक बात एक-दोसर सँ नहि मिलैत छल।
60
तखन महापुरोहित सभाक बीच मे ठाढ़ भऽ कऽ यीशु सँ पुछलथिन जे, “की अहाँ कोनो उत्तर नहि देब? ई गवाह सभ अहाँक विरोध मे केहन बात सभ कहि रहल अछि?”
61
मुदा यीशु चुप रहि कऽ कोनो उत्तर नहि देलथिन। फेर महापुरोहित हुनका पुछलथिन जे, “की अहाँ उद्धारकर्ता-मसीह छी? परमधन्य परमेश्वरक पुत्र छी?”
62
यीशु कहलथिन, “हँ, हम छी। और अहाँ सभ मनुष्य-पुत्र केँ सर्वशक्तिमान परमेश्वरक दहिना कात बैसल और आकाशक मेघ मे अबैत देखब।”
63
ई सुनि महापुरोहित अपन वस्त्र फाड़ि कऽ कहलथिन, “आब आरो गवाह सभक की आवश्यकता?
64
अहाँ सभ एकरा परमेश्वरक निन्दा करैत सुनबे कयलहुँ—आब अहाँ सभक की विचार?” सभ हुनका मृत्युदण्डक जोगरक ठहरौलकनि।
65
किछु लोक हुनका पर थूक फेकऽ लगलनि, हुनका आँखि पर पट्टी बान्हि कऽ हुनका मुक्का मारऽ लगलनि और कहलकनि जे, “यौ अन्तर्यामी, कहल जाओ! अपने केँ के मारलक?” सिपाही सभ सेहो हुनका थप्पड़ मारलकनि।
66
एहि समय मे पत्रुस नीचाँ आङन मे छलाह। महापुरोहितक एक टहलनी आबि कऽ
67
पत्रुस केँ आगि तपैत देखि हुनकर मुँह ठिकिअबैत कहलकनि जे, “अहूँ एहि नासरत-निवासी यीशुक संग छलहुँ!”
68
मुदा पत्रुस अस्वीकार करैत कहलथिन, “तोँ की बाजि रहल छेँ से हमरा बुझहो मे नहि अबैत अछि आ ने ओहि बात केँ हम जनैत छी।” और ओहिठाम सँ हटि कऽ आङनक मुँह पर चल गेलाह, आ मुर्गा बाजल।
69
फेर ओ टहलनी हुनका देखि कऽ ओहिठाम ठाढ़ लोक सभ केँ कहलकैक जे, “ई आदमी ओकरे सभ मे सँ केओ अछि!”
70
मुदा पत्रुस फेर अस्वीकार कयलनि। किछु कालक बाद ओहिठाम ठाढ़ लोक सभ पत्रुस केँ कहलकनि जे, “निश्चय तोँ ओकरे सभ मे सँ छह! तोँहूँ तँ गलीले प्रदेशक छह!”
71
एहि पर ओ सपत खा कऽ अपना केँ सरापऽ लगलाह और कहलथिन, “जाहि व्यक्तिक बारे मे अहाँ सभ बाजि रहल छी, तकरा हम नहि चिन्हैत छी!”
72
तखने मुर्गा दोसर बेर बाजि उठल। तखन पत्रुस केँ ओ बात मोन पड़ि गेलनि जे यीशु हुनका कहने छलथिन जे, “मुर्गा केँ दू बेर बाजऽ सँ पहिने अहाँ हमरा तीन बेर अस्वीकार करब।” और ओ भोकासी पाड़ि कऽ कानऽ लगलाह।
← Chapter 13
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 15 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16