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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Mark 7
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
किछु फरिसी आ धर्मशिक्षक लोकनि जे यरूशलेम सँ आयल छलाह यीशु सँ भेँट करऽ लेल अयलाह।
2
ओ लोकनि देखलनि जे हुनकर किछु शिष्य सभ बिना हाथ धोने भोजन करैत छथि, जे हुनका लोकनिक अनुसार धर्म-विरोध वला बात छल।
3
सभ यहूदी, ओहू मे खास कऽ फरिसी लोकनि, पुरखा सँ आबि रहल चलन केँ पालन करैत छथि—जाबत तक ओ लोकनि अपन हाथ केँ रीतिक अनुसार धोइत नहि छथि ताबत तक भोजन नहि करैत छथि।
4
जखन बजार सँ अबैत छथि तँ रीतिक अनुसार बिना स्नान कयने किछु नहि खाइत छथि। ओहिना पुरखाक आओर बहुत चलन केँ मानैत छथि, जेना बाटी, लोटा और कठौत केँ विशेष प्रकार सँ शुद्ध कयनाइ।
5
तँ फरिसी और धर्मशिक्षक लोकनि यीशु सँ पुछलनि जे, “अहाँक शिष्य सभ पुरखाक चलन सभ किएक नहि मानैत अछि? ओ सभ अशुद्ध हाथ सँ किएक भोजन करैत अछि?”
6
ओ उत्तर देलथिन जे, “हे पाखण्डी सभ! यशायाह अहाँ सभक बारे मे एकदम ठीक भविष्यवाणी कयलनि, जेना धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे, ‘ई सभ मुँह सँ हमर आदर करैत अछि, मुदा एकर सभक हृदय हमरा सँ दूर छैक।
7
ई सभ बेकार हमर उपासना करैत अछि। ई सभ जे शिक्षा दैत अछि, से मात्र मनुष्यक बनाओल नियम सभ अछि।’
8
अहाँ लोकनि परमेश्वरक आज्ञा केँ अवहेलना करैत छी लेकिन मनुष्यक बनाओल रीति-रिवाज केँ पकड़ने रहैत छी।”
9
यीशु आगाँ कहऽ लगलाह जे, “अहाँ सभ अपन चलन चलयबाक लेल कतेक चलाकी सँ परमेश्वरक आज्ञा सभक उल्लंघन करैत छी!
10
मूसा तँ कहने छलाह जे, ‘अपन माय-बाबूक आदर करह,’ और ‘जे केओ अपन माय-बाबूक निन्दा करय तकरा मृत्युदण्ड देल जाय।’
11
मुदा अहाँ सभ कहैत छी जे, जँ केओ अपना बाबू वा माय सँ कहैत अछि, ‘जे किछु अहाँ सभ हमरा सँ सहायता प्राप्त करितहुँ से आब “कुर्बान” अछि’, अर्थात्, परमेश्वर केँ अर्पित,
12
आ जँ ओ किछु करहो चाहैत अछि तँ अहाँ सभ ओकरा अपन माय-बाबूक लेल कोनो कर्तव्य पूरा नहि करऽ दैत छिऐक।
13
जे चलन अहाँ केँ पुरखा सँ भेटल अछि, तकरा द्वारा अहाँ परमेश्वरक वचन केँ निरर्थक ठहरबैत छी। और एतबे नहि—आरो एहन-एहन बहुत काज करैत छी।”
14
तखन यीशु भीड़क लोक केँ अपना लग बजा कऽ कहलथिन, “अहाँ सभ गोटे हमर बात सुनू और बुझू!
15
कोनो एहन वस्तु नहि होइत छैक जे बाहर सँ मनुष्य मे प्रवेश कऽ कऽ ओकरा अशुद्ध बना सकय, बल्कि जे मनुष्यक मोनक भीतर सँ बहराइत छैक से ओकरा अशुद्ध बनबैत छैक।
16
[जे सुनि सकैत अछि से सुनए!] ”
17
बाद मे भीड़ केँ छोड़ि यीशु घर गेलाह। हुनकर शिष्य सभ एहि उदाहरणक बारे मे हुनका सँ पुछलथिन।
18
यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “की, अहूँ सभ नहि बुझैत छी? की ई बुझऽ मे नहि अबैत अछि जे, जे किछु खाइत काल मनुष्य मे प्रवेश करैत अछि से ओकरा अशुद्ध नहि कऽ सकैत अछि?
19
किएक तँ ओ मोन मे नहि प्रवेश करैत अछि, ओ पेट मे जाइत अछि और फेर देह सँ बहरा जाइत अछि।” (ओ ई कहि कऽ सभ भोजन-वस्तु केँ शुद्ध ठहरा देलथिन।)
20
ओ आगाँ कहऽ लगलाह, “जे मनुष्य मे सँ निकलैत छैक से ओकरा अशुद्ध करैत छैक।
21
किएक तँ मनुष्यक भीतर मे सँ, अर्थात् हृदय मे सँ सभ प्रकारक अधलाह बात सभ निकलैत छैक, जेना गलत विचार सभ, गलत शारीरिक सम्बन्ध, चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन,
22
लोभ, दुष्कर्म, धोखा, निर्लज्जता, ईर्ष्या, निन्दा, घमण्ड, और मूर्खता।
23
ई सभ बात मनुष्यक भीतर मे सँ निकलैत अछि और ओकरा अशुद्ध करैत अछि।”
24
ओतऽ सँ यीशु सूर आ सीदोन नगरक इलाका मे चल गेलाह। एकटा घर मे जा कऽ ओहिठाम डेरा रखलनि। ओ चाहैत छलाह जे लोक ई नहि बुझए जे ओ कतऽ छथि, लेकिन लोक जल्दी सँ बुझि गेलनि जे ओ एहि घर मे छथि।
25
एकटा स्त्री जकर छोट बेटी दुष्टात्मा सँ ग्रसित छल हुनका विषय मे सुनिते हुनका ओहिठाम जा कऽ हुनका समक्ष मे खसल।
26
ओ स्त्री यहूदी जातिक नहि, यूनानी छल। ओकर जन्म सीरिया प्रदेशक फीनिकी क्षेत्र मे भेल छलैक। ओ यीशु सँ विनती कयलकनि जे, हमर बेटी मे सँ दुष्टात्मा केँ निकालू।
27
यीशु ओकरा कहलथिन, “सभ सँ पहिने बच्चे सभ केँ इच्छापूर्बक खाय दिऔक, किएक तँ बच्चा सभक लेल जे रोटी अछि तकरा कुकुरक आगाँ फेकि देब से ठीक बात नहि।”
28
ओ लेकिन उत्तर देलकनि जे, “ठीके कहैत छी, प्रभु, मुदा कुकुरो सभ तँ बच्चा सभक टेबुल सँ खसल चुर-चार खाइते अछि।”
29
यीशु ओकरा कहलथिन, “एहन उत्तर दैत छह तँ जा सकैत छह!—दुष्टात्मा तोरा बेटी मे सँ निकलि गेल छह!”
30
ओ घर जा कऽ अपना बेटी केँ ओछायन पर पड़ल देखलक। दुष्टात्मा ओकरा मे सँ निकलि गेल छल।
31
तकरबाद यीशु सूर क्षेत्र सँ घूरला पर सीदोन नगर और “दस नगर” क्षेत्र दऽ कऽ गलील झील तक अयलाह।
32
लोक सभ कोनो एक आदमी केँ यीशु लग अनलनि जे बहीर छल और ठीक सँ बाजिओ नहि सकैत छल। ओ सभ यीशु सँ प्रार्थना कयलनि जे ओकरा पर हाथ राखि कऽ ओकरा नीक कऽ देल जाओ।
33
यीशु ओकरा भीड़ सँ अलग लऽ कऽ ओकर कान मे अपन आङुर राखि देलथिन और अपन थूक ओकरा जीह पर लगा देलथिन।
34
स्वर्ग दिस ताकि आ जोर सँ साँस लैत ओहि आदमी केँ कहलथिन, “एफफाता,” जकर अर्थ छैक, “खुजि जो!”
35
ओकर कान तुरत खुजि गेलैक। ओकर जीह सेहो ठीक भऽ गेलैक और स्पष्ट बाजऽ लागल।
36
यीशु एहि घटनाक बारे मे लोक सभ केँ कहबाक लेल ओकरा मना कयलथिन, लेकिन जतेक बेसी ओ मना करैत छलाह, ततेक बेसी एहि घटनाक प्रचार भेलैक।
37
सभ लोक एकदम आश्चर्य-चकित भऽ कऽ कहऽ लागल जे, “देखू! सभ काज ओ नीक जकाँ करैत छथि। बहीरो सभ केँ सुनबाक और बौको सभ केँ बजबाक शक्ति दैत छथिन!”
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