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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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2 Kings 11
2 Kings 11
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
जब अहज्याह की माता अतल्याह ने देखा कि उसके पुत्र की हत्या कर दी गई, तब वह उठी, और उसने यहूदा में राज-परिवार के सब सदस्यों का संहार कर दिया।
2
किन्तु राजा योराम की पुत्री यहोशाबा ने, जो अहज्याह की बहिन थी, अपने भतीजे योआश का अन्य राजकुमारों के मध्य से, जिनकी हत्या की जानेवाली थी, अपहरण कर लिया। उसने योआश और उसकी धाय को शयनागार में छिपा दिया। यों उसने अतल्याह की दृष्टि से उसको छिपा दिया। अत: योआश का वध नहीं हुआ।
3
योआश प्रभु के भवन में अपनी फूफी के साथ छ: वर्ष तक छिपा रहा। इस अवधि में अतल्याह यहूदा प्रदेश पर राज्य करती रही।
4
सातवें वर्ष में पुरोहित यहोयादा ने दूत भेजकर कारी जाति के सैनिकों और अंगरक्षकों के शतपतियों को बुलाया। पुरोहित यहोयादा ने उन्हें प्रभु के भवन में आने दिया। उसने उनसे सन्धि की। उसने प्रभु के भवन में उनको शपथ दिलाई। तत्पश्चात् उसने उनको राजपुत्र दिखाया।
5
पुरोहित यहोयादा ने उनको आदेश दिया, ‘तुम्हें यह काम करना होगा: तुममें से जो सैनिक विश्राम-दिवस पर कार्यरत रहते हैं, उनके एक-तिहाई सैनिक राजमहल पर पहरा देंगे।
6
शेष सैनिक प्रभु के भवन पर विशेष रूप से पहरा देंगे: एक तिहाई भवन के सूर दरवाजे पर, और एक तिहाई अंगरक्षकों के पीछे दरवाजे पर पहरा देंगे।
7
तुम्हारे दो दल, जो विश्राम-दिवस पर छुट्टी पर रहते हैं, प्रभु के भवन में राजकुमार पर पहरा देंगे।
8
तुम राजकुमार को चारों ओर से घेरे रहोगे: प्रत्येक सैनिक सशस्त्र होगा। जो व्यक्ति सेना-पंिक्त के समीप आएगा, उसको तत्काल मौत के घाट उतार देना। जहां-कहीं राजकुमार जाए अथवा लौटकर वहां से आए, तुम उसके साथ रहना।’
9
शतपतियों ने पुरोहित यहोयादा के आदेश के अनुसार कार्य किया। वे अपने सब सैनिकों को, जो विश्राम-दिवस पर कार्यरत थे और जो विश्राम-दिवस पर छुट्टी पर थे, लेकर पुरोहित यहोयादा के पास आए।
10
यहोयादा ने उनको राजा दाऊद के भाले और ढाल सौंप दिए। ये शस्त्र प्रभु के भवन में सुरक्षित रखे हुए थे।
11
पहरेदार अपने हाथ में शस्त्र थामकर मन्दिर के दक्षिणी कोने से उत्तरी कोने तक, मन्दिर तथा वेदी को घेर कर खड़े हो गए।
12
तत्पश्चात् यहोयादा ने राजकुमार योआश को बाहर निकाला। उसने राजकुमार के सिर पर मुकुट रखा, उसको साक्षी-पत्र सौंपा और उसका अभिषेक किया। जनता ने ताली बजाकर जय-जयकार किया। उन्होंने कहा, ‘राजा चिरायु हो!’
13
रानी अतल्याह ने अंगरक्षकों और जनता की आवाजी सुनी। वह प्रभु के भवन में लोगों के पास गई।
14
उसने देखा, राजा प्रथा के अनुसार मंच पर खड़ा है। शतपति और तुरही-वादक भी राजा के समीप खड़े हैं। आम जनता आनन्द मना रही है। वे नरसिंगे फूंक रहे हैं। अतल्याह ने आतंक प्रकट करने के लिए अपने राजसी वस्त्र फाड़ दिए और वह चिल्लाई, ‘यह राज-द्रोह है!’
15
पुरोहित यहोयादा ने शतपतियों को, जो सेनापति नियुक्त किए गए थे, यह आदेश दिया, ‘सेना-पंिक्त के मध्य से अतल्याह को बाहर निकालो। जो व्यक्ति उसका पक्ष ले, उसको तलवार से मौत के घाट उतार दो।’ पुरोहित यहोयादा यह सोचता था कि प्रभु के भवन में उसकी हत्या नहीं होनी चाहिए।
16
अत: शतपतियों ने रानी अतल्याह को पकड़ा। वे उसको अश्व-द्वार से राजमहल में ले गए, और वहां उसका वध कर दिया।
17
तत्पश्चात् पुरोहित यहोयादा ने प्रभु और राजा तथा लोगों के मध्य विधान की धर्मविधि सम्पन्न की, जिससे लोग प्रभु के निज लोग बनें। उसने राजा और प्रजा के मध्य भी सन्धि स्थापित की।
18
इसके बाद समस्त जनता बअल देवता के मन्दिर में आई। उन्होंने मन्दिर को खण्डहर बना दिया। उन्होंने उसकी वेदियों और मूर्तियों के टुकड़े-टुकड़े कर दिये। उन्होंने वेदियों के सम्मुख ही बअल देवता के पुरोहित मत्तान का वध किया। उसके पश्चात् पुरोहित यहोयादा ने प्रभु के भवन के लिए पहरेदार नियुक्त किये।
19
पुरोहित यहोयादा ने शतपतियों, कारी जाति के सैनिकों, अंगरक्षकों और समस्त जनता को अपने साथ लिया। वे राजा को प्रभु के मन्दिर से बाहर लाए। वे उसके साथ-साथ अंगरक्षकों के द्वार से होते हुए राजमहल में गए। राजा सिंहासन पर विराजमान हुआ और
20
समस्त जनता ने आनन्द मनाया। नगर में शान्ति थी। इस प्रकार अतल्याह को राजमहल में तलवार से मौत के घाट उतारा गया।
21
जब योआश ने राज्य करना अरम्भ किया तब वह सात वर्ष का था।
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