bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
/
2 Kings 9
2 Kings 9
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
← Chapter 8
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 10 →
1
एलीशा ने नबी-संघ में से एक नबी को बुलाया। उन्होंने उससे यह कहा, ‘तुम जाने के लिए तैयार हो जाओ। अपने हाथ में तेल की यह कुप्पी लो, और रामोत-गिलआद नगर को जाओ।
2
जब तुम वहां पहुंचोगे तब तुम निम्शी के पौत्र और यहोशाफट के पुत्र येहू का पता लगाना। तुम उसके पास जाना, और उससे निवेदन करना कि वह अपने साथियों के मध्य से उठे। तुम उसको भीतर के कमरे में ले जाना।
3
तत्पश्चात् तेल की कुप्पी लेना, और उसके सिर पर तेल को उण्डेल देना। तुम यह कहना, “प्रभु यों कहता है: मैं तुझे इस्राएल का राजा अभिषिक्त करता हूँ।” इसके बाद तुम द्वार खोलना, और भाग आना। वहां मत रुकना।’
4
अत: युवा नबी रामोत-गिलआद नगर को गया।
5
जब वह आया, तब उसने देखा कि अनेक सेनापति बैठे हुए हैं। युवा नबी ने येहू को पुकारा, ‘सेनापति जी, मैं आपके लिए एक सन्देश लाया हूँ।’ येहू ने पूछा, ‘हममें से किसके लिए?’ नबी ने बताया, ‘आपके लिए, सेनापति जी।’
6
येहू उठा। वह घर के भीतर गया। युवा नबी ने उसके सिर पर तेल उण्डेला, और उससे यह कहा, ‘इस्राएल का प्रभु परमेश्वर यों कहता है: मैं तुझको अपने निज लोग इस्राएलियों का राजा अभिषिक्त करता हूँ।
7
तू अपने स्वामी अहाब के राज-परिवार का वध करेगा, और यों, मैं ईजेबेल से अपने सेवक नबियों और अपने सब भक्तों की हत्या का बदला लूंगा।
8
अहाब का समस्त राज-परिवार नष्ट हो जाएगा। मैं इस्राएल प्रदेश से अहाब परिवार के प्रत्येक सदस्य को, चाहे वह स्वतन्त्र हो अथवा गुलाम, काट दूंगा।
9
मैं अहाब के राज-परिवार को यारोबआम बेन-नबाट, और बाशा बेन-अहियाह के राज-परिवर के सदृश बना दूंगा।
10
कुत्ते यिज्रएल नगर की सीमा में ईजेबेल का मांस खाएंगे। उसको दफनाने वाला भी कोई नहीं होगा।’ इतना कहकर उसने द्वार खोला, और भाग गया।
11
येहू कमरे से बाहर निकला। वह अपने स्वामी के दरबारियों के पास आया। उन्होंने उससे पूछा, ‘सब सकुशल है?’ येहू ने उनसे कहा, ‘तुम उस आदमी को जानते हो। तुम यह भी जानते हो कि वह किस प्रकार बकवास करता है।’
12
परन्तु दरबारियों ने उसे विवश किया, ‘यह झूठ है। अब हमें सच बात बताओ।’ येहू बोला, ‘उसने मुझसे जो भी कहा, वह यह है: “प्रभु यों कहता है: मैं तुझको इस्राएलियों का राजा अभिषिक्त करता हूं।” ’
13
तत्काल हरएक व्यक्ति ने अपना अंगरखा उतार कर येहू को बैठाने के लिए उसे सीढ़ियों पर ही बिछा दिया। उन्होंने नरसिंगा फूंका, और यह जयघोष किया, ‘येहू राजा है!’
14
यों निम्शी के पौत्र और यहोशाफट के पुत्र येहू ने यहोराम के विरुद्ध षड्यन्त्र रचा। (इस समय यहोराम अपनी समस्त इस्राएली सेना के साथ सीरिया के राजा हजाएल से रामोत-गिलआद नगर की रक्षा कर रहा था।
15
परन्तु जब वह सीरियाई राजा हजाएल से लड़ते समय सीरियाई सैनिकों के हाथ से घायल हुआ, तब वह अपने घावों का इलाज करवाने के लिए यिज्रएल नगर को लौट गया।) अत: येहू ने कहा, ‘यदि तुम-सब की यही इच्छा है, तो अब किसी भी व्यक्ति को नगर से बचकर भागने मत देना। ऐसा न हो कि वह यिज्रएल नगर जाकर सब बातें बता दे।’
16
तत्पश्चात् येहू अपने रथ पर चढ़ा। वह यिज्रएल नगर को गया; क्योंकि यहोराम वहां घायल पड़ा था। यहूदा प्रदेश का राजा अहज्याह भी यहोराम को देखने के लिए आया था।
17
पहरेदार यिज्रएल नगर की मीनार पर खड़ा था। जब येहू आ रहा था तब पहरेदार ने येहू के दल-बल को देखा। उसने राजा यहोराम को बताया, ‘मुझे एक दल दिखाई दे रहा है।’ यहोराम ने आदेश दिया, ‘एक घुड़सवार को बुलाओ, और उसको दल से भेंट करने के लिए भेजो। वह उनसे यह पूछेगा, “क्या सब कुशल-मंगल है?” ’
18
अत: एक घुड़सवार गया। उसने येहू से भेंट की। उसने कहा, ‘महाराज यों कहते हैं, “क्या सब कुशल-मंगल है?” ’ येहू ने कहा, ‘तुम्हें कुशल-मंगल से क्या लेना-देना? मुड़ो और मेरे पीछे-पीछे आओ।’ पहरेदार ने राजा को बताया, ‘महाराज, सन्देशवाहक घुड़सवार उन तक तो पहुंच गया; परन्तु वह वापस नहीं आ रहा है।’
19
तब राजा यहोराम ने दूसरा घुड़सवार भेजा। वह उनके पास आया। उसने पूछा, ‘महाराज ने यों कहा है, “क्या सब कुशल-मंगल है?” ’ येहू ने उत्तर दिया, ‘तुम्हें कुशल-मंगल से क्या लेना-देना? मुड़ो और मेरे पीछे-पीछे आओ।’
20
पहरेदार ने पुन: खबर दी, ‘घुड़सवार उन तक तो पहुंच गया; परन्तु वह वापस नहीं आ रहा है। घोड़े की चाल से ऐसा दिखाई दे रहा है जैसा येहू बेन-निम्शी घोड़े पर सवार हैं; क्योंकि वह घोड़े को बड़ा तेज दौड़ाते हैं।’
21
यहोराम ने आदेश दिया, ‘मेरा रथ जोतो।’ उसके सेवकों ने उसका रथ जोता। अत: इस्राएल प्रदेश का राजा यहोराम, और यहूदा प्रदेश का राजा अहज्याह अपने-अपने रथ पर सवार हुए। वे येहू से मिलने के लिए गए। वे येहू से यिज्रएल-वासी नाबोत की पैतृक भूमि पर मिले।
22
यहोराम ने येहू को देखा। वह उससे बोला, ‘येहू, सब कुशल-मंगल तो है?’ येहू ने उत्तर दिया, ‘जब तक तुम्हारी माता ईजेबेल के द्वारा संचालित पूजा-स्थानों से संबंधित वेश्यालय उपस्थित हैं और देश में इतना जादू-टोना होता है, तब तक कुशल-मंगल का प्रश्न ही नहीं उठता।’
23
यहोराम ने लगाम रोकी, और वह भागा। उसने अहज्याह से कहा, ‘अहज्याह, देश-द्रोह!’
24
येहू ने पूरी शक्ति से धनुष की प्रत्यंचा कान तक खींची, और यहोराम के कन्धों के मध्य में तीर मारा। तीर उसके हृदय में घुस गया। यहोराम रथ पर लुढ़क गया।
25
येहू ने अपने अंगरक्षक बिद्कर से कहा, ‘उसके शव को उठाओ, और यिज्रएल-वासी नाबोत की भूमि पर फेंक दो। स्मरण करो: जब मैं और तुम यहोराम के पिता अहाब के पीछे घोड़ों पर सवार होकर साथ-साथ चल रहे थे, तब प्रभु ने अहाब के विरुद्ध यह दण्ड की घोषणा की थी:
26
“मैं-प्रभु यों कहता हूं: मैंने निश्चय ही नाबोत और उसके पुत्रों के रक्त पर दृष्टि की है। मैं इसी भूमि पर तुझ से इस हत्या का बदला लूंगा।” अत: अब तुम उसका शव उठाओ, और प्रभु के वचन के अनुसार उसको इस भूमि पर फेंक दो।’
27
जब यहूदा प्रदेश के राजा अहज्याह ने यह देखा तब वह बेत-हग्गान नगर की ओर भागा। येहू ने उसका पीछा किया। येहू ने अपने सैनिकों को आदेश दिया, ‘इसको भी तीर से मारो।’ जब अहज्याह यिब्लआम नगर के समीप गूर नामक चढ़ाई पर चढ़ रहा था, तब येहू के सैनिकों ने रथ में ही तीर से उसे बेध दिया। वह मगिद्दो नगर की ओर भागा, और वहां उसकी मृत्यु हो गई।
28
उसके सेवक उसके शव को रथ में यरूशलेम नगर ले गए। उन्होंने उसे उसके पूर्वजों के साथ दाऊदपुर में, उसकी कबर में गाड़ दिया।
29
यहोराम बेन-अहाब के राज्य-काल के ग्यारहवें वर्ष अहज्याह ने यहूदा प्रदेश पर राज्य करना आरम्भ किया था।
30
येहू यिज्रएल नगर में आया। ईजेबेल ने यह समाचार सुना। उसने अपनी आंखों में काजल लगाया और अपने सिर के बालों को संवारा। तत्पश्चात् उसने खिड़की से नीचे झांका।
31
उसी समय येहू ने महल के प्रवेश-द्वार पर कदम रखा। ईजेबेल ने पुकारा, ‘अपने स्वामी की हत्या करने वाले ओ जिम्री! सब कुशल-मंगल तो है?’
32
येहू ने खिड़की की ओर अपना मुंह उठाया। उसने पूछा, ‘मेरे पक्ष में कौन है? कौन है मेरे पक्ष में?’ दो-तीन खोजों न झांककर उसको देखा।
33
येहू ने आदेश दिया, ‘उसको नीचे फेंक दो।’ अत: उन्होंने ईजेबेल को उठाकर नीचे फेंक दिया। उसके रक्त के छींटे दीवार पर और घोड़ों पर लग गए। घोड़ों ने उसके शरीर को रौंद डाला।
34
तब येहू महल के भीतर आया और उसने खाया-पीया। तत्पश्चात् उसने अपने सेवकों को आदेश दिया, ‘जाओ, उस अभिशप्त स्त्री को देखो। उसको दफना देना; क्योंकि वह राजा की बेटी है।’
35
सेवक उसको गाड़ने के लिए चले गए। परन्तु उनको ईजेबेल की खोपड़ी, पैर, और हथेली के अतिरिक्त कुछ नहीं मिला।
36
सेवक लौटे। उन्होंने येहू को यह बताया। येहू ने कहा, ‘प्रभु का यह वचन है, जो उसने अपने सेवक, तिश्बे नगर के रहने वाले एलियाह से कहा था: “यिज्रएल नगर की सीमा में कुत्ते ईजेबेल का मांस खाएंगे।
37
ईजेबेल का शव यिज्रएल के सीमा-क्षेत्र के खेत में गोबर की तरह पड़ा रहेगा। उसको देखकर कोई व्यक्ति यह नहीं कहेगा, ‘यह ईजेबेल है’!” ’
← Chapter 8
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 10 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25