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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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2 Kings 14
2 Kings 14
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
इस्राएल प्रदेश के राजा यहोआश बेन-यहोआहाज के राज्य-काल के दूसरे वर्ष में यहूदा प्रदेश के राजा योआश का पुत्र अमस्याह राज्य करने लगा।
2
जब उसने राज्य करना आरम्भ किया तब वह पच्चीस वर्ष का था। उसने राजधानी यरूशलेम में उन्तीस वर्ष तक राज्य किया। उसकी मां का नाम यहोअद्दीन था। वह यरूशलेम नगर की थी।
3
अमस्याह ने वही किया, जो प्रभु की दृष्टि में उचित था। फिर भी उसने अपने पूर्वज दाऊद के समान कार्य नहीं किया। उसने अपने सब कार्यों से अपने पिता योआश का अनुसरण किया,
4
किन्तु पहाड़ी शिखर की वेदियां नहीं तोड़ी गईं। लोग उन पर पशु-बलि चढ़ाते और सुगन्धित धूप-द्रव्य जलाते रहे।
5
जब राज-सत्ता अमस्याह के हाथ में दृढ़ हो गई, तब उसने अपने पिता के हत्यारे दरबारियों का वध कर दिया।
6
परन्तु उसने प्रभु की आज्ञा के अनुसार, जो मूसा के व्यवस्था-ग्रन्थ में लिखी है, उन हत्यारों के पुत्रों का वध नहीं किया। प्रभु ने यह आज्ञा दी थी: ‘पुत्रों के पाप के लिए पिता को मृत्यु-दण्ड नहीं दिया जाएगा, और न पिता के पाप के लिए पुत्रों को मृत्यु-दण्ड दिया जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को उसके ही पाप के लिए मृत्यु-दण्ड दिया जाएगा।’
7
अमस्याह ने लवण घाटी में दस हजार एदोमी सैनिकों को पराजित कर दिया, और युद्ध में सेला नगर को जीत लिया। उसने सेला का नाम योक्तएल नगर रखा। आज भी उसका यही नाम है।
8
तब अमस्याह ने इस्राएल प्रदेश के राजा यहोआश के पास दूत भेजे। यहोआश येहू का पौत्र और यहोआहाज का पुत्र था। अमस्याह ने उसको यह सन्देश भेजा: ‘आओ, हम युद्ध में अपनी शक्ति आजमाएं।’
9
इस्राएल के राजा यहोआश ने यहूदा प्रदेश के राजा अमस्याह को यह उत्तर भेजा; ‘एक दिन लबानोन प्रदेश की एक झड़बेरी ने लबानोन प्रदेश के देवदार को यह सन्देश भेजा: “अपनी पुत्री का विवाह मेरे पुत्र के साथ कर।” उसी क्षण एक वन-पशु वहां से गुजरा, और उसने झड़बेरी को रौंद डाला।
10
तुमने निश्चय ही एदोमी सेना को पराजित किया है; पर तुम्हारा हृदय गर्व से फूल उठा है। अपनी अभूतपूर्व विजय से सन्तुष्ट हो, और घर में ही रहो। तुम अपने अनिष्ट को क्यों बुला रहे हो? इससे तुम्हारा पतन होगा, और तुम्हारे साथ समस्त यहूदा प्रदेश का भी।’
11
परन्तु अमस्याह ने यहोआश की बात नहीं मानी। अत: इस्राएल प्रदेश के राजा यहोआश ने आक्रमण कर दिया। यहूदा प्रदेश के बेत-शेमेश नगर में इस्राएल प्रदेश के राजा यहोआश और यहूदा प्रदेश के राजा अमस्याह का आमना-सामना हुआ।
12
यहूदा प्रदेश का राजा इस्राएल प्रदेश के राजा से हार गया। उसके सैनिक अपने-अपने घर भाग गए।
13
इस्राएल प्रदेश के राजा यहोआश ने यहूदा प्रदेश के राजा अमस्याह को, जो अहज्याह का पौत्र और योआश का पुत्र था, बेत-शेमेश नगर में बन्दी बना लिया। वह यरूशलेम नगर में आया। उसने एफ्रइम प्रवेश-द्वार से कोने वाले प्रवेश-द्वार तक, लगभग एक सौ अस्सी मीटर, यरूशलेम की शहरपनाह तोड़ दी।
14
जो सोना-चांदी और जो पात्र उसको प्रभु-भवन में तथा राज-भवन के कोषागारों में मिले, उसने उनको लूट लिया। उसने राजपुत्रों का भी अपहरण कर लिया, और अपनी राजधानी सामरी नगर को लौट गया।
15
यहोआश के शेष कार्यों का, उसके समस्त कार्यों का विवरण, उसके वीरतापूर्ण कार्यों का, यहूदा प्रदेश के राजा अमस्याह से लड़े गए युद्ध का विवरण, ‘इस्राएल प्रदेश के राजाओं का इतिहास-ग्रन्थ’ में लिखा हुआ है।
16
यहोआश अपने मृत पूर्वजों के साथ सो गया। उसको इस्राएल प्रदेश के राजाओं के साथ सामरी नगर में गाड़ा गया। उसका पुत्र यारोबआम उसके स्थान पर राज्य करने लगा।
17
इस्राएल प्रदेश के राजा यहोआश बेन-यहोआहाज की मृत्यु के पश्चात् यहूदा प्रदेश का राजा अमस्याह बेन-योआश पन्द्रह वर्ष तक जीवित रहा।
18
अमस्याह के शेष कार्यों का विवरण आदि से अन्त तक ‘यहूदा प्रदेश के राजाओं का इतिहास-ग्रन्थ’ में लिखा हुआ है।
19
लोगों ने यरूशलेम नगर में अमस्याह के विरुद्ध षड्यन्त्र रचा। वह लाकीश नगर की ओर भागा। षड्यन्त्रकारियों ने उसके पीछे-पीछे लाकीश नगर में हत्यारों को भेजा, जिन्होंने वहां उसकी हत्या कर दी।
20
वे उसका शव घोड़ों पर लाद कर यरूशलेम नगर में लाए, और उसको उसके मृत पूर्वजों के साथ दाऊदपुर में गाड़ दिया।
21
तब यहूदा प्रदेश की समस्त जनता ने अमस्याह के पुत्र अजर्याह को चुना, और उसको उसके पिता के स्थान पर राजा बनाया। वह उस समय सोलह वर्ष का था।
22
अजर्याह ने अपने पिता राजा अमस्याह की मृत्यु के पश्चात् एलोत नगर का निर्माण कर उसको पुन: यहूदा राज्य के अधिकार में कर लिया।
23
यहूदा प्रदेश के राजा अमस्याह बेन-योआश के राज्य-काल के पन्द्रहवें वर्ष में इस्राएल प्रदेश का राजा यारोबआम बेन-यहोआश सामरी नगर में राज्य करने लगा। उसने इकतालीस वर्ष तक राज्य किया।
24
परन्तु जो कार्य प्रभु की दृष्टि में बुरा था, उसने वही किया। जैसे यारोबआम बेन-नबाट ने इस्राएली जनता से पाप कराया था, वैसे उसने भी कराया। वह यारोबआम बेन-नबाट के पाप-मार्ग से विमुख नहीं हुआ।
25
यारोबआम बेन-यहोआश ने इस्राएली राज्य की सीमा, हमात घाटी की सीमा से मृत सागर तक, पुन: स्थापित कर ली। यह इस्राएली राष्ट्र के प्रभु परमेश्वर के वचन के अनुसार सम्पन्न हुआ। प्रभु ने गत-हेफेर नगर के अपने सेवक नबी योना बेन-अमित्तय के मुख से ऐसा ही कहा था।
26
प्रभु ने यह देखा था कि इस्राएली जनता की पीड़ा कितनी असहनीय है। वहां न स्वतन्त्र और न गुलाम व्यक्तियों में इस्राएली जनता की सहायता करने वाला कोई रह गया था।
27
प्रभु ने यह नहीं कहा था कि वह धरती से इस्राएली जनता का नामोनिशान मिटा देगा। अत: उसने यारोबआम बेन-यहोआश के हाथ से उनकी रक्षा की।
28
यारोबआम के शेष कार्यों का विवरण, उसके समस्त कार्यों का, उसके वीरतापूर्ण कार्यों का विवरण, ‘इस्राएल प्रदेश के राजाओं का इतिहास-ग्रन्थ’ में लिखा हुआ है। उसने किस प्रकार दमिश्क और हमात नगरों को जीतकर इस्राएली राज्य में सम्मिलित किए थे, इसका भी विवरण उस ग्रन्थ में लिखा हुआ है।
29
यरोबआम अपने मृत पूर्वजों, इस्राएल प्रदेश के राजाओं के साथ सो गया। उसका पुत्र जकर्याह उसके स्थान पर राज्य करने लगा।
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