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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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Deuteronomy 18
Deuteronomy 18
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
‘लेवीय पुरोहितों का, अर्थात् समस्त लेवी कुल का, शेष इस्राएली कुलों के साथ कोई भाग अथवा पैतृक भूमि-भाग नहीं होगा। वे प्रभु को अग्नि में अर्पित बलि तथा उसका देय-भाग खाया करेंगे।
2
उनका अपने भाई-बन्धुओं के मध्य कोई पैतृक भूमि-भाग नहीं होगा। प्रभु ही उनका पैतृक भूमि-भाग है, जैसे प्रभु ने उन्हें वचन दिया था।
3
जो लोग बैल अथवा भेड़ की बलि चढ़ाते हैं, उनकी बलि में से पुरोहितों का न्यायोचित भाग यह है। वे लोग पुरोहित को बलि-पशु का कंधा, दोनों गाल और जांघ के जोड़ का मांस देंगे।
4
तू अपनी उपज का प्रथम अन्न, अंगूर का प्रथम रस और तेल का प्रथम भाग और भेड़ का सबसे पहले काटा गया ऊन उसे देना;
5
क्योंकि तेरे प्रभु परमेश्वर ने, अपने सम्मुख प्रस्तुत रहने और अपने नाम से सेवा करने के लिए, सब कुलों में से उसको और उसके वंशजों को सदा के लिए चुना है।
6
‘यदि कोई लेवीय जन इस्राएल के किसी भी नगर से, जहां वह प्रवास करता है, उस स्थान में आता है (जब उसकी इच्छा हो, वह आ सकता है) जिसको प्रभु चुनेगा,
7
तो वह अपने लेवीय भाइयों के समान, जो वहां प्रभु के सम्मुख उपस्थित रहकर सेवा-कार्य करते हैं, अपने प्रभु परमेश्वर के नाम से सेवा-कार्य कर सकता है।
8
अपने पूर्वजों की पैतृक-सम्पत्ति बेचकर जो आमदनी उसकी होगी, उसके अतिरिक्त वह उनके साथ समान भोजन-अंश प्राप्त करेगा।
9
‘जब तू उस देश में प्रवेश करेगा, जो तेरा प्रभु परमेश्वर तुझे दे रहा है, तब उन राष्ट्रों की घृणित प्रथाओं को मत सीखना।
10
तेरे मध्य ऐसा व्यक्ति नहीं पाया जाएगा, जो अग्नि में अपने पुत्र या पुत्री को चढ़ाता है, जो शकुन विचारता है, भविष्य बताता है, शुभ-अशुभ मुहूर्त्त निकालता है, जो जादूगर है,
11
जो सम्मोहिनी विद्या जानता है, जो ओझा है, जो भूत-प्रेत को बुलाता है, जो मृतकों को जगाता है।
12
ऐसे कार्य करने वाले व्यक्ति से प्रभु घृणा करता है। ये घृणित प्रथाएं हैं। इन्हीं घृणित प्रथाओं के कारण तेरा प्रभु परमेश्वर इस देश में बसने वाली जातियों को तेरे सामने से निकाल रहा है।
13
तू अपने प्रभु परमेश्वर के सम्मुख निर्दोष बने रहना।
14
इन जातियों ने, जिन्हें तू निकाल रहा है, शकुन विचारने वालों और भविष्य बताने वालों की बातें सुनी थीं, परन्तु तेरे प्रभु परमेश्वर ने तुझे यह कार्य नहीं करने दिया।
15
‘तेरा प्रभु परमेश्वर तेरे मध्य से, तेरे जाति-भाइयों में से मेरे समान एक नबी को तेरे लिए उत्पन्न करेगा। तू उसकी बातें सुनना।
16
यह तूने सभा के दिन होरेब पर्वत पर अपने प्रभु परमेश्वर से मांगा था। तूने कहा था, “भला हो कि मैं अपने प्रभु परमेश्वर की वाणी फिर न सुनूं, और यह विशाल अग्नि फिर न देखूं, अन्यथा मैं मर जाऊंगा।”
17
तब प्रभु ने मुझ से कहा था, “जो कुछ ये बोले, अच्छा ही बोले।
18
मैं इनके जाति-भाइयों के मध्य से इनके लिए तेरे समान एक नबी को उत्पन्न करूंगा। मैं अपने वचन उसके मुंह में डालूंगा। जो आज्ञा मैं उसे दूंगा, वही वह उन्हें बताएगा।
19
जो मनुष्य मेरे उन वचनों को, जो वह मेरे नाम से बोलेगा, नहीं सुनेगा, उससे मैं लेखा लूंगा।
20
परन्तु जो नबी ढिठाई से मेरे नाम से ऐसे वचन कहेगा जिनको बोलने की आज्ञा मैंने नहीं दी है, अथवा जो दूसरे देवताओं के नाम से बोलेगा, उस नबी का वध किया जाएगा।”
21
यदि तू अपने हृदय में यह प्रश्न पूछे, “जो वचन प्रभु ने नहीं कहा है, उसको हम किस प्रकार जानेंगे?”
22
तो उसकी यह पहचान है: जब नबी प्रभु के नाम से बोलता है, और वचन के अनुसार कार्य नहीं होता, अर्थात् उसका वचन सत्य प्रमाणित नहीं होता है, तब उस वचन को प्रभु ने नहीं कहा था, वरन् नबी ने ढिठाई से उसको कहा था। तू उससे मत डरना।
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