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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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Deuteronomy 6
Deuteronomy 6
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
‘जो आज्ञाएं, संविधियाँ और न्याय-सिद्धान्त तुम्हें सिखाने के लिए तुम्हारे प्रभु परमेश्वर ने मुझे आज्ञा दी थी, वे ये ही हैं। तुम उस देश में इनके अनुसार कार्य करना, जिसको तुम अपने अधिकार में करने के लिए वहाँ जा रहे हो।
2
यदि तुम और तुम्हारे पुत्र-पुत्रियाँ तथा पौत्र-पौत्रियाँ अपने प्रभु परमेश्वर की जीवन-भर भक्ति करेंगे, यदि तुम उसकी सब संविधियों और आज्ञाओं का पालन करोगे, जिनका आदेश आज मैं तुम्हें दे रहा हूँ, तो तुम्हारे पुत्र-पुत्रियों और पौत्र-पौत्रियों की आयु लम्बी होगी।
3
अत: ओ इस्राएल, इन्हें सुन, और इनका पालन करने के लिए सदा तत्पर रह! इससे तेरा भला होगा और जैसा तेरे पूर्वजों का प्रभु परमेश्वर तुझसे बोला था, उसके अनुसार तू दूध और शहद की नदियोंवाले देश में असंख्य हो जाएगा।
4
‘ओ इस्राएल, सुन! हमारा प्रभु परमेश्वर, एक ही प्रभु है।
5
तू प्रभु, अपने परमेश्वर को अपने सम्पूर्ण हृदय, सम्पूर्ण प्राण और अपनी सम्पूर्ण शक्ति से प्रेम करना।
6
ये वचन, जो आज मैं तुझे आदेश-रूप में सुना रहा हूँ, तेरे हृदय पर अंकित रहें।
7
तू इन्हें अपने बच्चों के हृदय में बैठा देना। जब तू अपने घर में बैठता है, अथवा मार्ग पर चलता है, जब तू लेटता है अथवा उठता है, तब तू इन्हीं की चर्चा करना।
8
तू इनको चिह्न स्वरूप अपने हाथ पर बांधना। ये तेरी दोनों आंखों के मध्य शिरोबंद होंगे।
9
तू इन्हें अपने घर की चौखट के बाजुओं और नगर के प्रवेश-द्वारों पर लिखना।
10
‘जब तेरा प्रभु परमेश्वर तुझे उस देश में लाएगा, जिसकी शपथ उसने तेरे पूर्वजों, अब्राहम, इसहाक, और याकूब से खाई थी कि वह तुझे उसे प्रदान करेगा; इसके साथ-साथ जब वह तुझे ये प्रदान करेगा; बड़े और अच्छे नगर, जिनको तूने नहीं बनाया;
11
अच्छी-अच्छी वस्तुओं से भरे हुए घर, जिनको तूने नहीं भरा; खोदे गए कुएं, जिनको तूने नहीं खोदा; अंगूर के उद्यान और जैतून के वृक्ष, जिनको तूने नहीं लगाया; और जब तू इन वस्तुओं को खाकर तृप्त होगा,
12
तब तू सावधान रहना! ऐसा न हो कि तू उस प्रभु को भूल जाए जो तुझे मिस्र देश से, दासत्व के घर से बाहर निकाल लाया है।
13
तू अपने प्रभु परमेश्वर से डरना और उसकी भक्ति करना। तू उसकी सेवा करना, और उसके नाम की शपथ खाना।
14
तू दूसरे देवताओं का, उन जातियों के देवताओं का, जो तुम्हारे चारों ओर हैं, अनुसरण मत करना;
15
क्योंकि तेरे मध्य निवास करने वाला तेरा प्रभु परमेश्वर, एक ईष्र्यालु ईश्वर है। ऐसा न हो कि तेरे प्रभु परमेश्वर का क्रोध तेरे विरुद्ध भड़क उठे, और वह तुझे धरती की सतह से मिटा डाले।
16
‘तू अपने प्रभु परमेश्वर को मत परखना, जैसा तूने उसे मस्सा में परखा था।
17
तू अपने प्रभु परमेश्वर की आज्ञाओं, सािक्षयों और संविधियों का सावधानी से पालन करना, जैसी उसने तुझे आज्ञा दी है।
18
जो कार्य प्रभु की दृष्टि में उचित और भला है, उसी को करना, जिससे तेरा भला हो और तू उस उत्तम देश में प्रवेश कर उसको अपने अधिकार में कर सके, जिसकी शपथ प्रभु ने तेरे पूर्वजों से खाई थी
19
कि वह तेरे सम्मुख से तेरे समस्त शत्रुओं को बाहर निकाल कर तुझे प्रदान करेगा; जैसा प्रभु बोला था।
20
‘जब भविष्य में तेरी संतान तुझसे पूछेगी, “इन सािक्षयों, संविधियों, न्याय-सिद्धान्तों का, जिनकी आज्ञा हमारे प्रभु परमेश्वर ने हमें दी है, क्या अर्थ है?”
21
तब तू अपनी सन्तान से कहना, “हम मिस्र देश में फरओ के गुलाम थे; और प्रभु अपने भुजबल से हमें मिस्र देश से बाहर निकाल लाया था।
22
प्रभु ने हमारी आंखों के सामने, समस्त मिस्र देश के विरुद्ध, फरओ तथा उसके परिवार के विरुद्ध महान और आतंकमय चिह्न दिखाए और आश्चर्यपूर्ण कार्य किए थे।
23
उसने हमें वहाँ से बाहर निकाला था कि वह हमें उस देश में ले आए जिसकी शपथ उसने हमारे पूर्वजों से खाई थी कि वह उसको हमें प्रदान करेगा।
24
प्रभु ने हमें आज्ञा दी है कि हम इन संविधियों के अनुसार कार्य करें, अपने प्रभु परमेश्वर से डरें और उसकी भक्ति करें। तब सदा हमारा भला होगा, और हम जीवित रहेंगे, जैसा आज भी हम हैं।
25
हमारे लिए धार्मिकता से जीवन व्यतीत करने का यह अर्थ है: अपने प्रभु परमेश्वर के सम्मुख इन समस्त आज्ञाओं का पालन करना और इनके अनुसार कार्य करना, जैसी उसने हमें आज्ञा दी है।
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