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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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Ezekiel 17
Ezekiel 17
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
प्रभु का यह वचन मुझे मिला। उसने मुझसे कहा,
2
‘ओ मानव, तू इस्राएली कुल से यह पहेली और दृष्टांत कह:
3
स्वामी-प्रभु यों कहता है: ‘एक विशाल बाज पक्षी लबानोन प्रदेश में आया। वह देवदार वृक्ष की फुनगी पर बैठ गया। उसके डैने लम्बे-लम्बे, रंग-बिरंगे और पंखों से भरे थे।
4
उसने फुनगी की नयी टहनी को तोड़ा, और उसको व्यापारियों के देश में ले गया। उसने नयी टहनी को लेनदेन करनेवालों के महानगर में रोप दिया।
5
तब उसने देश के बीज को लिया और उसको उपजाऊ भूमि में बो दिया। उसने बीज बोया, उमड़ते जलाशय के तट पर बोया; उसने मजनूं वृक्ष के सदृश बीज को बोया।
6
बीज में अंकुर फूटे, और वह छोटी फैलनेवाली अंगूर-बेल में बदल गया। बेल की शाखाएं बाज की ओर झुकीं, किन्तु उसकी जड़ें वहीं रहीं, जहां बीज बोया गया था, यों वह अंगूर-बेल बन गया; उसमें शाखाएं फूटीं और पत्ते निकले।
7
‘एक और विशाल बाज था। उसके डैने भी लम्बे-लम्बे और सघन परों से भरे थे। अंगूर-बेल ने अपनी जड़ें उसकी ओर फैलाईं उसने वहां से अपनी शाखाएं उसकी ओर झुकाईं, जहां वह लगाई गई थी, कि वह उसको पानी से सींचे।
8
बाज ने उसको उपजाऊ भूमि पर लगाया था, उसने उसको उमड़ते जलाशय के तट पर बोया था, कि उसके अंकुर फूटें, बेल बने, और बेल में शाखाएं निकलें, और वह अंगूर के गुच्छों से भर जाए और फलवंत अंगूर-बेल बने।
9
किन्तु स्वामी-प्रभु कहता है, क्या यह बेल फूलेगी-फलेगी? कदापि नहीं! क्या उसको जड़-मूल से नहीं उखाड़ा जाएगा? वह उसकी शाखाएं काट कर आग में झोंक देगा, और यों उसकी हरी-हरी पत्तियां सूख जाएंगी। बेल को जड़ से उखाड़ने के लिए अधिक बल की जरूरत नहीं पड़ेगी, और न ही अनेक लोगों की आवश्यकता होगी।
10
यदि उसको उखाड़कर दूसरे स्थान पर लगाया जाए, तो क्या वह पुन: लग सकेगी? क्या वह फूलेगी-फलेगी? नहीं! जब पूर्वी पवन बहेगा तब उसके प्रहार से वह पूर्णत: सूख जाएगी, उसी में वह सूख जाएगी।’
11
तब प्रभु का यह सन्देश मुझे मिला। उसने मुझसे कहा,
12
‘अब तू विद्रोही इस्राएली कुल से यह कह: क्या तुम अब भी इस पहेली और दृष्टांत का अर्थ नहीं समझे? सुनो, इसका यह अर्थ है: बेबीलोन देश का राजा यरूशलेम में आया। उसने यरूशलेम के राजा, और उसके उच्चाधिकारियों को बन्दी बनाया, और उनको अपने देश में ले गया।
13
उसने राजवंश के एक पुरुष को लिया, और उससे सन्धि स्थापित की। उसने उससे वचन लिया कि वह उसके अधीन रहेगा। (वह देश के प्रमुख व्यक्तियों को भी बन्दी बनाकर ले गया था।
14
उसका उद्देश्य यह था कि इस्राएली राज्य उसके पैरों के नीचे दबा रहे, और अपना सिर न उठा सके, और सन्धि की शर्तों का पालन करते हुए बना रहे।)
15
किन्तु उसने बेबीलोन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया, और मिस्र देश को अपने दूत भेजे ताकि वह उसकी मदद करे, और उसको घोड़े और विशाल सेना भेजे। क्या वह अपने विद्रोह में सफल होगा? ऐसे काम करनेवाला मनुष्य क्या भाग कर अपने प्राण बचा सकेगा? सन्धि की शर्तों को तोड़नेवाला क्या बच सकेगा?
16
मेरे जीवन की सौगन्ध! मैं, स्वामी-प्रभु यह कहता हूं, जिस देश के राजा ने उसको राजा बनाया था, और जिस देश के राजा के वचन को वह तुच्छ समझता है, और जिसकी सन्धि को उसने तोड़ा है, उसी राजा के देश में वह मरेगा!
17
‘जब युद्ध में हजारों लोगों का वध करने के लिए बेबीलोन के राजा की सेना नगर के चारों ओर मोर्चाबन्दी करेगी और दमदमा बांधेगी, तब मिस्र देश के राजा फरओ की शक्तिशाली और विशाल सेना भी यरूशलेम के राजा की सहायता नहीं कर पाएगी।
18
उसने बेबीलोन के राजा के वचन को तुच्छ समझा, सन्धि की शर्तों का उल्लंघन किया; उसने हाथ पर हाथ रख वचन दिया था कि वह बेबीलोन के राजा के अधीन रहेगा, तो भी उसने विद्रोह के ये कार्य किए, इसलिए वह प्राण बचाकर भाग नहीं सकेगा।
19
स्वामी-प्रभु यों कहता है: मेरे जीवन की सौगन्ध! उसने मेरी शपथ को तुच्छ समझा, और मेरी संधि का उल्लंघन किया; इसलिए, मैं इनका प्रतिफल उसके सिर पर डालूंगा।
20
मैं उस पर अपना जाल फैलाऊंगा, और वह मेरे फन्दे में फंस जाएगा। मैं उसको बेबीलोन देश में लाऊंगा, और जो विश्वासघात उसने मेरे साथ किया है, उसके लिए मैं उस पर बेबीलोन में मुकदमा चलाऊंगा।
21
उसके सैन्य-दल का प्रत्येक नायक तलवार से मौत के घाट उतारा जाएगा, और बचे हुए सैनिक सब दिशाओं में तितर-बितर हो जाएंगे। तब तुम्हें मालूम होगा कि मैं ही प्रभु हूं, जिसने यह कहा है।’
22
स्वामी-प्रभु यों कहता है: ‘मैं भी देवदार वृक्ष की ऊंची फुनगी से एक टहनी लूंगा, और उसको भूमि पर लगाऊंगा। मैं उसकी सबसे ऊंची शाखा में से एक टहनी तोड़ूंगा, और उसको एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर लगाऊंगा।
23
सुनो, मैं उसको इस्राएल प्रदेश के उच्चतम पर्वत पर रोपूंगा; तब उसमें डालियां फूटेंगी, और उसमें फल लगेंगे। वह एक शानदार देवदार वृक्ष बन जाएगी। उसके नीचे सब जाति के पशु आश्रय लेंगे; उसकी घनी शाखाओं में सब प्रकार के पक्षी अपना घोंसला बनाएंगे।
24
तब विश्व के सब वृक्षों को ज्ञात होगा कि मैं-प्रभु छोटे वृक्ष को बड़ा बनाता हूं, और बड़े वृक्ष को छोटा! मैं हरे वृक्ष को सुखा डालता हूं और सूखे हुए वृक्ष को हरा-भरा कर देता हूं। मेरी यही वाणी है। मैं-प्रभु जो कहता हूं, उसको पूरा करता हूं।’
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