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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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Ezekiel 33
Ezekiel 33
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
प्रभु ने मुझे यह सन्देश दिया। उसने कहा,
2
‘ओ मानव, तू अपने जाति-भाई-बहिनों से बोल। तू उनसे यह कहना: जब मैं किसी देश पर उसके शत्रु के द्वारा आक्रमण करवाता हूं, तब वहां की जनता अपने में से किसी व्यक्ति को चुनती है, और उसको अपने देश का पहरेदार नियुक्त करती है।
3
यदि यह पहरेदार देखेगा कि उसके देश पर शत्रु का आक्रमण होने वाला है, और यदि वह जनता को सावधान करने के लिए नरसिंगा फूंकेगा
4
और चेतावनी के नरसिंगे की आवाज सुनने पर भी यदि कोई व्यक्ति सावधान नहीं होगा, और शत्रु का आक्रमण होने पर वह उसकी तलवार से मारा जाएगा, तो उसके खून का दोष उसके ही सिर पड़ेगा।
5
क्योंकि उसने नरसिंगे की आवाज सुनी थी, फिर भी वह सावधान नहीं हुआ। अत: वह अपनी हत्या का जिम्मेदार स्वयं ठहरा। किन्तु यदि वह पहरेदार की चेतावनी पर ध्यान देता, तो वह अपने प्राण बचा लेता।
6
‘यदि पहरेदार यह देखता है कि उसके देश पर शत्रु का आक्रमण होनेवाला है और वह जनता को सावधान करने के लिए नरसिंगा नहीं फूंकता है, और लोग सावधान नहीं होते हैं और शत्रु का आक्रमण होने पर यदि एक भी व्यक्ति उसकी तलवार से मारा जाएगा, तो मरनेवाला यद्यपि अपने अधर्म में मरेगा तो भी मैं पहरेदार को उसकी मौत का जिम्मेदार ठहराऊंगा और उससे खून का लेखा लूंगा।
7
‘इसी प्रकार ओ मानव, मैंने तुझको इस्राएल के वंश का पहरेदार नियुक्त किया है। जब कभी तू मेरे मुंह से इस्राएल के लिए चेतावनी के वचन सुनता है, यह तेरा दायित्व है कि तू मेरी ओर से उनको सावधान करे।
8
यदि मैं दुर्जन से कहूंगा, “ओ दुर्जन, तू निस्सन्देह मरेगा”, और यदि तू दुर्जन को सावधान नहीं करेगा कि वह अपना बुरा मार्ग छोड़ दे, तो ओ मानव-पुत्र, वह दुर्जन तो अपने अधर्म में मरेगा ही, किन्तु मैं उसकी मौत का जिम्मेदार तुझे ठहराऊंगा, और उसके खून का लेखा तुझ से लूंगा।
9
यदि तू उसको चेतावनी देगा कि वह अपना बुरा आचरण छोड़ दे, और वह तेरी चेतावनी पर ध्यान न देगा, बुरे मार्ग से मुंह नहीं मोड़ेगा, तो वह निस्सन्देह अपने अधर्म में मरेगा, परन्तु तेरा प्राण बच जाएगा।
10
‘ओ मानव, तू यह बात इस्राएल के वंश से कह: तुम लोगों ने कहा है, “हमारे अपराधों और हमारे पापों का बोझ हमारे ऊपर है, और उनको ढोते-ढोते हम क्षीण हो गए हैं। हम कैसे जीवित रह सकते हैं?”
11
ओ मानव, तू उनसे यह कह: “मैं स्वयं स्वामी-प्रभु बोल रहा हूँ: मुझे अपने जीवन की सौगन्ध है! मैं किसी भी दुर्जन की मृत्यु से प्रसन्न नहीं होता हूँ। किन्तु मुझे तब प्रसन्नता होती है, जब दुर्जन अपना बुरा आचरण छोड़ देता है और मरने से बच जाता है। इसी प्रकार ओ इस्राएल के वंशजो, अपने बुरे आचरण को छोड़ दो, अपने बुरे मार्ग से पीठ फेर लो। तुम क्यों मरना चाहते हो?”
12
‘ओ मानव, तू अपने जाति-भाई-बहिनों से बोल: जब कोई धार्मिक मनुष्य अपराध करता है तब उसकी धार्मिकता उसको अपराध के दण्ड से नहीं बचा सकती। यदि दुर्जन अपना बुरा आचरण छोड़ दे तो वह निस्सन्देह पाप के दण्ड से बचेगा। यदि धार्मिक मनुष्य पाप करे तो उसकी धार्मिकता उसको मरने से नहीं बचा सकेगी।
13
‘यदि मैं धार्मिक मनुष्य से कहूँ कि तू जीवित रहेगा, और वह अपनी धार्मिकता पर भरोसा करके अधर्म करे, तो उस के सत्कर्म उसको नहीं बचा सकेंगे। मैं उन को स्मरण नहीं करूंगा। वह अपने अधर्म में मरेगा।
14
‘मैं दुर्जन से यह कहूँ, “तू निस्सन्देह मरेगा,” और वह अपना पापमय आचरण छोड़ दे, न्याय और धर्म का यह आचरण अपना ले:
15
गिरवी की वस्तु लौटा दे, और उनका माल लौटा दे जिनसे उसने लूट लिया है, वह दुष्कर्मों को त्याग कर जीवन देनेवाले धर्म-नियमों के अनुसार आचरण करने लगे और फिर अधर्म के कामों में हाथ न डाले, तो वह निस्सन्देह जीवित रहेगा, और मरेगा नहीं।
16
उसने जितने दुष्कर्म किए हैं, मैं उनको स्मरण नहीं करूंगा, और उसको दण्ड नहीं दूंगा। उसने न्याय और धर्म के काम किए हैं, वह निस्सन्देह जीवित रहेगा।
17
‘फिर भी तेरे जाति-भाई-बहिन कहते हैं: “प्रभु का व्यवहार न्यायपूर्ण नहीं है।” किन्तु स्वयं उनका आचरण न्यायपूर्ण नहीं है।
18
यदि कोई धार्मिक मनुष्य न्याय और धर्म के आचरण को छोड़कर अधर्म के कार्य करेगा, तो वह उसके कारण अवश्य मरेगा।
19
किन्तु यदि दुर्जन अपने बुरे आचरण को छोड़कर न्याय-धर्म के कार्य करेगा, तो वह अपने इस आचरण के कारण जीवित रहेगा।
20
फिर भी तुम, ओ इस्राएल के वंशजो, कहते हो, “प्रभु का व्यवहार न्यायपूर्ण नहीं है।” जबकि मैं तुम में से प्रत्येक व्यक्ति का न्याय उसके आचरण के अनुसार करता हूँ।’
21
बेबीलोन में निष्कासन के बारहवें वर्ष के दसवें महीने की पांचवीं तारीख को एक आदमी मेरे पास आया। वह यरूशलेम नगर से प्राण बचा कर भाग आया था। उसने मुझ से कहा, ‘यरूशलेम नगर का पतन हो गया।’
22
जिस दिन यरूशलेम से भागा हुआ आदमी मेरे पास आया, उससे पूर्व सन्धया के समय प्रभु की सामर्थ्य मुझ पर प्रबल हुई थी, और जब वह मनुष्य सबेरे मुझ से मिला, तब प्रभु ने उसी समय मेरा मुंह खोल दिया। प्रभु की सामर्थ्य से मेरा मुंह खुल गया और मेरा गूंगापन दूर हो गया।
23
प्रभु का यह सन्देश मुझे मिला। प्रभु ने मुझसे कहा,
24
‘ओ मानव, इस्राएली देश के उजड़े हुए प्रदेशों के निवासी अब तक यह कह रहे हैं: “हमारे कुल-पिता अब्राहम तो अकेले आदमी थे, तो भी उन्होंने सम्पूर्ण कनान देश पर कब्जा कर लिया था। हम तो अनेक हैं। यह देश निस्सन्देह हमारे पैतृक-अधिकार के लिए दिया गया है।”
25
इसलिए तू उनसे यह कह, स्वामी-प्रभु यों कहता है: जिन कामों को न करने का मैंने तुम्हें आदेश दिया था, वही तुम करते हो: तुम रक्त के साथ मांस खाते हो। तुम सहायता के लिए देवी-देवताओं की मूर्तियों की ओर दृष्टि करते हो। तुम हत्या करते हो। फिर भी तुम सोचते हो कि तुम इस्राएल देश पर कब्जा कर सकोगे?
26
तुम्हें मुझ पर नहीं, बल्कि अपनी तलवार पर भरोसा है। तुम पूजा-पाठ करते हो। अपने पड़ोसी की पत्नी की इज्जत लूटते हो। फिर भी तुम सोचते हो कि तुम इस्राएल देश पर अधिकार कर सकोगे?
27
ओ मानव, तू उनसे यह कह, स्वामी-प्रभु यों कहता है: मुझे अपने जीवन की सौगन्ध है: इस्राएल देश के उजाड़ प्रदेशों में रहनेवाले निस्सन्देह तलवार से मौत के घाट उतारे जाएंगे। जो आदमी खेत में होगा, उसको मैं जंगली पशु के मुंह में डाल दूंगा, और वह उसको खा जाएगा। जो गढ़ों और गुफाओं में रहते होंगे, वे महामारी से मारे जाएंगे।
28
मैं उनके देश को निर्जन और उजाड़ कर दूंगा और यों उनके बल का गर्व चूर-चूर हो जाएगा। इस्राएल देश के पहाड़ इतने उजाड़ हो जाएंगे कि वहाँ से कोई भी नहीं गुजरेगा।
29
जब मैं उन बचे हुए इस्राएलियों के घृणित कार्यों के कारण उन के देश को निर्जन और उजाड़ कर दूंगा, तब उनको मालूम होगा कि मैं ही प्रभु हूँ।
30
‘ओ मानव, इन लोगों की दृष्टि में तू क्या है? ये चहारदीवारी पर बैठे हुए, घरों की ड्योढ़ी पर बैठे हुए एक-दूसरे से तेरे विषय में बातें करते हैं। वे आपस में एक-दूसरे को निमन्त्रण दे कर कहते हैं, “आओ चलें, और नबी के मुंह से प्रभु का सन्देश सुनें।”
31
वे झुण्ड के झुण्ड तेरे पास आते हैं। वे मेरे निज लोगों के समान तेरे सामने बैठते हैं। वे तेरी बातें सुनते हैं, पर मेरे सन्देश के अनुसार आचरण नहीं करते। “वाह! कितने सुन्दर वचन हैं!”, वे मुंह से यह कहते हैं, किन्तु उनका हृदय स्वार्थ में डूबा हुआ है।
32
सुन, तू उन के लिए क्या है? प्रेम के गीत गानेवाला गायक, जिसके गले में मीठी आवाज है, जो वाद्य-यन्त्र को कुशलता से बजाता है! ओ मानव, वे तेरी बातें सुनते हैं, किन्तु उनके अनुसार आचरण नहीं करते।
33
जब मेरा कथन पूरा होगा, वह निस्सन्देह पूरा होगा, तब उनको पता चलेगा कि उन के मध्य में एक नबी हुआ था।
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