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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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Ezekiel 34
Ezekiel 34
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
प्रभु का यह सन्देश मुझे मिला। प्रभु ने मुझसे कहा,
2
‘ओ मानव! इस्राएल देश के राजाओं-नेताओं के विरुद्ध नबूवत कर। उनसे तू यह कहना, स्वामी-प्रभु यों कहता है: ओ इस्राएल देश के चरवाहो, तुम अपनी भेड़ों की चिन्ता न कर स्वयं का पेट भर रहे हो। क्या चरवाहा पहले अपनी भेड़ों का पेट नहीं भरता है?
3
ओ इस्राएली राष्ट्र के चरवाहो, तुम बढ़िया भोजन करते हो। तुम कीमती ऊनी वस्त्र पहनते हो। सबसे मोटे-ताजे पशु का मांस खाते हो। किन्तु अपनी जनता के मुंह में अन्न का दाना भी नहीं डालते!
4
तुमने निर्बल को बलवान नहीं बनाया। तुमने बीमार को स्वस्थ नहीं किया। तुमने घायल के घावों की मलहम-पट्टी नहीं की। तुम भटकी हुई भेड़ को वापस नहीं लाए। जो खो गई है, उसको नहीं खोजा। किन्तु तुमने जनता पर जोर-जबरदस्ती से शासन किया।
5
चरवाहा न होने के कारण भेड़ें तितर-बितर हो गईं, और जंगली जानवरों का आहार बन गईं।
6
‘मेरी भेड़ें तितर-बितर हो गई हैं। वे पहाड़ों पर, ऊंची-ऊंची पहाड़ियों पर भटक रही हैं। ‘मेरी भेड़ें पृथ्वी के सब देशों में तितर-बितर हो गई हैं। उनकी खोज-खबर लेनेवाला, उनको ढूंढ़कर लानेवाला कोई चरवाहा नहीं है।
7
‘इसलिए, ओ इस्राएल देश के चरवाहो! मुझ-प्रभु का यह वचन सुनो:
8
मुझे अपने जीवन की सौगन्ध है! मेरी भेड़ों को शिकारियों ने मार डाला। वे जंगली पशुओं का आहार बन गईं; क्योंकि उनकी देखभाल करनेवाला चरवाहा नहीं था। मैंने जिनको उन का चरवाहा नियुक्त किया था, उन चरवाहों ने भी भेड़ों की खोज-खबर नहीं ली। उन्होंने उनको चराया नहीं, बल्कि अपना ही पेट भरा।
9
इसलिए ओ इस्राएल देश के चरवाहो! मुझ-प्रभु का यह वचन सुनो:
10
मैं, स्वामी-प्रभु यों कहता हूं: देखो, मैं तुम-चरवाहों के विरुद्ध हूँ। मैं तुमसे अपनी भेड़ों का हिसाब लूंगा। मैं अपनी भेड़ों को चराने की जिम्मेदारी तुमसे वापस ले लूंगा, और तुम उनको फिर न चरा सकोगे। मैं तुम को पेट भर खाना न दूंगा। मैं तुम्हारे मुंह से अपनी भेड़ों को छुड़ाऊंगा। वे फिर तुम्हारा आहार न बनेंगी।
11
‘स्वामी-प्रभु यों कहता है: देखो, मैं स्वयं अपनी भेड़ों की सुधि लूंगा, और उनको ढूंढ़ने जाऊंगा।
12
जब किसी चरवाहे की भेड़ें झुण्ड में से निकल कर यहां-वहां खो जाती हैं, तब चरवाहा उन खोई हुई भेड़ों को ढूंढ़ता है। वैसे ही मैं चरवाहे की तरह अपनी भेड़ों को खोजूंगा। वे सघन अंधकार के दिन, घोर घटाओं के दिन भटक गई थीं। मैं उनको सब स्थानों से छुड़ा कर लाऊंगा।
13
मैं अपने निज लोगों को, अपनी भेड़ों को भिन्न-भिन्न जातियों के मध्य से निकाल कर लाऊंगा। मैं उनको सब देशों से एकत्र करूँगा, और उनको उनके देश में लाऊंगा। मैं अपनी भेड़ों को इस्राएल देश के पहाड़ों पर और इस्राएल देश के सब आबाद स्थानों पर चराऊंगा।
14
मैं उनको हरे-भरे चरागाह में चराऊंगा। इस्राएल देश के ऊंचे पठारों पर उनके चरागाह होंगे। वहां वे हरे-भरे घास के मैदान में आराम करेंगी। उन्हें इस्राएल के पहाड़ों के उत्तम चरागाह में पेटभर आहार प्राप्त होगा।
15
मैं स्वयं अपनी भेड़ों का मेषपाल होऊंगा, और, मैं उनको हरे-भरे चरागाह में विश्राम कराऊंगा। मैं, स्वामी-प्रभु, यही कहता हूँ:
16
मैं खोई हुई भेड़ को ढूंढ़ूंगा। भटकी हुई भेड़ के घावों पर पट्टी बांधूंगा। मैं निर्बल को बलवान बनाऊंगा। मैं मोटी-ताजी, स्वस्थ भेड़ की रक्षा करूंगा । मैं उनको उचित रीति से चराऊंगा।
17
‘ओ मेरी भेड़ो! मैं, तुम्हारा स्वामी-प्रभु, तुमसे यों कहता हूं: देखो, मैं भेड़ों और भेड़ों तथा मेढ़ों और बकरों के मध्य न्याय कर रहा हूँ।
18
क्या यह उचित बात है कि तुम हरे-भरे चरागाह को चर लो और पेट भरने के बाद शेष चरागाह को अपने पैरों से रौंद दो? स्वच्छ जल को पीने के बाद पैरों से उसको गंदला कर दो? क्या तुम्हारा यह कार्य ठीक है?
19
जिसको तुमने अपने पैरों से रौंद दिया, क्या मेरी भेड़ें उसको खाएंगी? जिस स्वच्छ जल को तुमने गंदला कर दिया, क्या उस को मेरी भेड़ें पीएंगी?
20
‘इसलिए स्वामी-प्रभु उनसे यह कहता है: देखो, मैं स्वयं मोटी और दुबली भेड़ों के मध्य न्याय करूंगा।
21
तुम दुर्बल भेड़ों को पांजर और सींग से मार-मार कर भगा देते हो, और वे यहां-वहां बिखर जाती हैं।
22
अत: मैं अपनी भेड़ों की रक्षा करूंगा, और वे तुम्हारा शिकार नहीं होंगी। मैं भेड़ों और भेड़ों के मध्य न्याय करूंगा।
23
मैं उनके ऊपर एक ही चरवाहे, अपने सेवक दाऊद को नियुक्त करूंगा और वह उनको चराएगा। दाऊद ही उनका चरवाहा होगा, और उनको चराएगा।
24
मैं स्वयं प्रभु उनका परमेश्वर होऊंगा, और मेरा सेवक दाऊद उनके मध्य में प्रशासक होगा। मैं-प्रभु ने यह कहा है।
25
‘मैं अपनी भेड़ों के साथ शान्ति का विधान स्थापित करूंगा। मैं उनके देश से जंगली पशुओं को निकाल दूंगा। तब वे निर्जन प्रदेश में निश्चिन्त होकर निवास करेंगी, और जंगल में सोएंगी।
26
मैं उनको और अपनी पहाड़ी के आसपास के स्थानों को आशिष का कारण बनाऊंगा। मैं वर्षा के मौसम पर वर्षा करूंगा, और यह वर्षा आशिष की वर्षा होगी।
27
मैदान और उद्यानों के वृक्षों में फल लगेंगे, और खेतों में भरपूर फसल होगी। भूमि अपनी उपज देगी। मेरे निज लोग अपने देश में निरापद निवास करेंगे। जब मैं उनकी गुलामी के जूए को तोड़कर उन्हें स्वतन्त्र करूंगा, जब मैं उनको गुलाम बनाने वाले शत्रु के हाथ से मुक्त करूंगा, तब उन्हें ज्ञात होगा कि मैं ही प्रभु हूं।
28
तब वे विश्व के राष्ट्रों का शिकार नहीं बनेंगे, और जंगली जानवर उनको मार कर नहीं खाएंगे। निस्सन्देह वे अपने देश में निरापद निवास करेंगे, और उनको फिर कोई भयभीत नहीं करेगा।
29
मैं अपने निज लोगों के लिए उपजाऊ खेतों और उद्यानों की व्यवस्था करूंगा। तब वे अपने देश में भूख से नहीं मरेंगे, और न ही उनके पड़ोसी राष्ट्र उन का मजाक उड़ाएंगे।
30
तब उनको मालूम होगा कि मैं-प्रभु, उनका परमेश्वर, उनके साथ हूं, और वे इस्राएल के वंशज मेरे निज लोग हैं। मैं, स्वामी-प्रभु यही कहता हूं।
31
ओ मेरे निज लोगो, तुम मेरी भेड़ें हो, मेरे चरागाह की भेड़ें हो, और मैं तुम्हारा परमेश्वर हूं।’ स्वामी-प्रभु की यही वाणी है।
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