bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Chhattisgarhi
/
Chhattisgarhi
/
Ezekiel 18
Ezekiel 18
Chhattisgarhi
← Chapter 17
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 19 →
1
यहोवा के ये बचन मोर मेर आईस:
2
“इसरायल देस के बारे म ये कहावत कहे के तुमन के का मतलब ए: “ ‘खट्टा अंगूर त खाईन दाई-ददामन, अऊ दांत खट्टा होईस लइकामन के’?
3
“मोर जिनगी के कसम, परमपरधान यहोवा ह कहत हे, तुमन ला इसरायल म फेर ये कहावत कहे के अवसर नइं मिलही।
4
काबरकि हरेक जन मोर अंय, दाई-ददा के संग लइका घलो—दूनों एके सहीं मोर अंय। एकरसेति जऊन ह पाप करथे, ओही ह मरही।
5
“मानलो, एक धरमी मनखे हवय, जऊन ह ओ काम करथे, जेह उचित अऊ सही अय।
6
ओह पहाड़ के पूजा के जगह म नइं खावय या इसरायल के मूरतीमन कोति नइं देखय। ओह अपन परोसी के घरवाली ला असुध नइं करय या कोनो माईलोगन के संग ओकर महिना के बेरा सारीरिक संबंध नइं बनाय।
7
ओह काकरो ऊपर अतियाचार नइं करय, पर गिरवी रखे चीज के करजा ला लहुंटा देथे। ओह डाका नइं डालय पर अपन जेवन भूखा मनखे ला देथे अऊ नंगरा ला ओनहा देथे।
8
ओह बिगर बियाज के पईसा उधार देथे, या ओमन ले फायदा नइं उठाय। ओह गलत काम करे ले अपन हांथ ला रोकथे अऊ मनखेमन के बीच सही नियाय करथे।
9
ओह मोर बिधिमन म चलथे अऊ बिसवासयोग्यता के संग मोर कानूनमन के पालन करथे। ओ मनखे ह धरमी अय; ओह जरूर जीयत रहिही, परमपरधान यहोवा ह घोसना करत हे।
10
“मानलो, ओकर एक हिंसा करइया बेटा हे, जऊन ह हतिया करथे या येमा के कोनो अऊ काम करथे
11
(हालाकि ओकर ददा ह येमा के कोनो भी काम नइं करे हवय): “ओह पहाड़ के पूजा के जगह म खाथे। ओह अपन परोसी के घरवाली ला असुध करथे।
12
ओह गरीब अऊ जरूरतमंद ऊपर अतियाचार करथे। ओह लूट-पाट करथे। ओह गिरवी म रखे चीज ला नइं लहुंटाय। ओह मूरतीमन कोति देखथे। ओह घिनौना काम करथे।
13
ओह बियाज म रूपिया देथे अऊ लाभ उठाथे। का अइसने आदमी जीयत रहिही? ओह नइं जीयय! काबरकि ओह ये सब घिनौना काम करे हवय, ओह जरूर मार डारे जावय; ओकर खून के दोस ओकरे मुड़ ऊपर पड़ही।
14
“पर मानलो, ये मनखे के एक बेटा हवय, जऊन ह अपन ददा के ये जम्मो पाप ला देखथे, अऊ हालाकि ओह ओ पापमन ला देखथे, पर ओह अइसने कोनो पाप नइं करय:
15
“ओह पहाड़ के पूजा के जगह म नइं खावय या इसरायल के मूरतीमन ला नइं देखय। ओह अपन परोसी के घरवाली ला असुध नइं करय।
16
ओह काकरो ऊपर अतियाचार नइं करय या करजा देय बर कोनो चीज ला गिरवी नइं रखय। ओह लूट-पाट नइं करय पर अपन जेवन भूखा मनखे ला देथे अऊ नंगरा ला ओनहा देथे।
17
ओह गरीबमन ला सताय ले अपन हांथ रोके रहिथे अऊ ओमन ले कोनो बियाज या फायदा नइं उठाय। ओह मोर कानूनमन ला मानथे अऊ मोर बिधिमन म चलथे। ओह अपन ददा के पाप के कारन नइं मरय; ओह जरूर जीयत रहिही।
18
पर ओकर ददा ह अपन खुद के पाप के कारन मरही, काबरकि ओह अवैध वसूली करिस, अपन भाई ला लूटिस अऊ ओ काम करिस, जऊन ह ओकर मनखेमन के बीच गलत अय।
19
“तभो ले, तुमन पुछथव, ‘बेटा ह अपन ददा के दोस के भागीदार काबर नइं होवय?’ जब बेटा ह उचित अऊ सही काम करे हवय अऊ धियान देके मोर जम्मो बिधिमन के पालन करे हवय, त ओह जरूर जीयत रहिही।
20
जऊन ह पाप करथे, ओही ह मरही। कोनो लइका ह अपन दाई-ददा के दोस के भागीदार नइं होही, अऊ न ही दाई-ददा अपन लइका के दोस के भागीदार होहीं। धरमी के धरमीपन के फर ओ धरमी ला ही मिलही, अऊ दुस्ट के दुस्टता के फर ओ दुस्ट ला ही मिलही।
21
“पर यदि कोनो दुस्ट मनखे अपन जम्मो पाप ला छोंड़ देथे अऊ मोर जम्मो बिधिमन के पालन करथे अऊ ओ काम करथे जऊन ह उचित अऊ सही अय, त ओ मनखे ह जरूर जीयत रहिही; ओह नइं मरय।
22
ओह जतेक पाप करे हवय, ओमन फेर सुरता नइं करे जावंय। जऊन धरमी काम ओह करे हवय, ओकर कारन ओह जीयत रहिही।
23
का मेंह कोनो दुस्ट के मिरतू ले खुस होथंव? परमपरधान यहोवा ह घोसना करत हे। बल्कि, का मेंह खुस नइं होवंव, जब ओह खराप काम ला छोंड़के जीयत रहिथे?
24
“पर यदि कोनो धरमी मनखे अपन धरमीपन ला छोंड़के पाप करथे अऊ ओही घिनौना काम करे लगथे, जेला एक दुस्ट मनखे करथे, त का ओह जीयत रहिही? ओकर दुवारा करे गय कोनो भी धरमी काम ला सुरता नइं करे जाही। जऊन बिसवासघात ओह करे हवय, ओकर खातिर ओह दोसी अय अऊ जऊन पाप ओह करे हवय, ओकर कारन ओह मरही।
25
“तभो ले तुमन कहिथव, ‘परभू के नीति ह उचित नो हय।’ हे इसरायलीमन, तुमन सुनव: का मोर नीति ह अनुचित अय? का ये तुम्हर नीतिमन नो हंय, जेमन अनुचित अंय?
26
यदि कोनो धरमी मनखे अपन धरमीपन ला छोंड़के पाप करथे, त ओह अपन दुस्ट काम के कारन मरही; अपन करे गय पाप के कारन ओह मरही।
27
पर यदि कोनो दुस्ट मनखे अपन दुस्ट काममन ला छोंड़ देथे अऊ ओ काम करथे, जऊन ह उचित अऊ सही अय, त ओह अपन जिनगी ला बचाही।
28
काबरकि ओह अपन करे गय जम्मो पाप ऊपर सोच-बिचार करथे अऊ ओमन ला छोंड़ देथे, ये खातिर ओ मनखे ह जरूर जीयत रहिही; ओह नइं मरय।
29
तभो ले इसरायलीमन कहिथंय, ‘परभू के नीति ह उचित नो हय।’ हे इसरायल के मनखेमन, का मोर नीतिमन अनुचित अंय? का येमन तुम्हर नीति नो हंय, जेमन अनुचित अंय?
30
“एकरसेति, हे इसरायलीमन, मेंह तुमन म ले हर एक मनखे के नियाय ओकर खुद के चालचलन के मुताबिक करहूं, परमपरधान यहोवा ह घोसना करत हे। पछताप करव! अपन जम्मो पाप ला छोंड़ दव; तब पाप ह तुम्हर पतन होय के कारन नइं होही।
31
अपन करे गय जम्मो अपराध ले दूरिहा हो जावव अऊ एक नवां हिरदय अऊ एक नवां आतमा ले लव। हे इसरायल के मनखेमन, तुम्हर मिरतू काबर होवय?
32
काबरकि मोला काकरो मिरतू ले खुसी नइं होवय, परमपरधान यहोवा ह घोसना करत हे। एकरसेति पछताप करव अऊ जीयत रहव!
← Chapter 17
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 19 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41
42
43
44
45
46
47
48