bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Chhattisgarhi
/
Chhattisgarhi
/
Ezekiel 28
Ezekiel 28
Chhattisgarhi
← Chapter 27
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 29 →
1
यहोवा के ये बचन मोर मेर आईस:
2
“हे मनखे के बेटा, सूर के सासन करइया ले कह, ‘परमपरधान यहोवा ह ये कहत हे: “ ‘अपन मन म घमंड करके तेंह कहिथस, “मेंह एक ईस्वर अंव; मेंह समुंदर के बीच ईस्वर के सिंघासन म बईठथंव।” पर तेंह सिरिप एक मरनहार जीव अस, ईस्वर नो हस, हालाकि तेंह सोचथस कि तेंह ईस्वर के सहीं बुद्धिमान अस।
3
का तेंह दानिएल ले जादा होसियार अस? का तोर ले कोनो भेद के बात छुपे नइं ए?
4
अपन बुद्धि अऊ समझ के दुवारा तेंह अपन बर धन कमाय हस अऊ अपन खजाना म सोन अऊ चांदी जमा करे हस।
5
बेपार म अपन बड़े कुसलता के दुवारा तेंह अपन संपत्ति बढ़ाय हस, अऊ तोर धन के कारन तोर मन ह घमंडी हो गे हवय।
6
“ ‘एकरसेति परमपरधान यहोवा ह ये कहत हे: “ ‘काबरकि तें सोचथस कि तें ईस्वर सहीं बुद्धिमान अस,
7
एकरसेति मेंह परदेसीमन ले तोर बिरोध करवाहूं, जेमन जम्मो जातिमन म सबले जादा निरदयी अंय; ओमन तोर सुघरता अऊ बुद्धिमानी ऊपर अपन तलवार चलाहीं अऊ तोर चमकत सोभा ला नास कर दीहीं।
8
ओमन तोला खाल्हे खंचवा म ले आहीं, अऊ समुंदर के बीच म तें भयंकर मिरतू ले मरबे।
9
जेमन तोला मार डालहीं, ओमन के आघू म तब का तें कहिबे, “मेंह ईस्वर अंव?” जेमन तोला मार डालथें, ओमन के हांथ म तें एक मरनहार अस, ईस्वर नइं।
10
तेंह परदेसीमन के हांथ म खतनारहित मनखेमन असन मारे जाबे। मेंह कहे हंव, परमपरधान यहोवा ह घोसना करत हे।’ ”
11
यहोवा के ये बचन मोर मेर आईस:
12
“हे मनखे के बेटा, सूर के राजा के बिसय म एक बिलापगीत ले अऊ ओला कह: ‘परमपरधान यहोवा ह ये कहत हे: “ ‘तें बुद्धि ले भरे अऊ बहुंत सुघर, उत्तमता के मुहर रहय।
13
तेंह परमेसर के बगीचा, अदन म रहय; हर एक कीमती रत्न ले तोला सजाय गे रिहिस: मानिक, हीरा अऊ पन्ना, पुखराज, गोमेदक अऊ मनि, नीलमनि, फिरोजा अऊ मरकत। तोर बईठे के जगह अऊ बईठकमन सोन के बने रिहिन; जऊन दिन तोला बनाय गीस, ओहीच दिन ओमन ला तियार करे गीस।
14
एक अविभावक करूब के रूप म तोर राजतिलक होईस, इही काम बर मेंह तोर अभिसेक करेंव। तें परमेसर के पबितर पहाड़ म रहय; तेंह आगी कस चमकनेवाला पथरामन के बीच चलत-फिरत रहय।
15
अपन सिरजे गय दिन ले तेंह अपन चालचलन म निरदोस रहय जब तक कि तोर दुस्टता नइं पाय गीस।
16
तोर बेपार के फईले होय के कारन तेंह हिंसा ले भर गे रहय, अऊ तेंह पाप करय। एकरसेति मेंह तोला कलंक म परमेसर के पहाड़ ले भगा देंव, अऊ हे अविभावक करूब, मेंह तोला आगी कस चमकत पथरामन के बीच ले निकाल देंव।
17
तोर सुघरता के कारन तोर मन ह घमंडी हो गीस, अऊ तोर सोभा के कारन तोर बुद्धि ह बिगड़ गीस। एकरसेति मेंह तोला भुइयां म फटिक देंव; मेंह तोला राजामन के आघू म एक तमासा बना देंव।
18
अपन बहुंत पाप अऊ बेईमानी के बेपार ले तेंह अपन पबितर-स्थानमन ला अपबितर कर दे हस। एकरसेति मेंह तोर म ले ही एक अइसन आगी ला बनांय, जऊन ह तोला जलाके नास कर दीस, अऊ जेमन तोला देखत रिहिन, ओ जम्मो के आघू म मेंह तोला भुइयां म राख बना देंव।
19
ओ जम्मो जाति के मनखे जेमन तोला जानत रिहिन तोर हालत ले डरा गीन; तोर एक भयानक अन्त होय हवय अऊ अब तोर नामोनिसान नइं रहय।’ ”
20
यहोवा के ये बचन ह मोर मेर आईस:
21
“हे मनखे के बेटा, अपन मुहूं ला सीदोन सहर कोति कर; ओकर बिरूध म अगमबानी कर
22
अऊ कह: ‘परमपरधान यहोवा ये कहत हे: “ ‘हे सीदोन, मेंह तोर बिरूध हवंव, अऊ तोर बीच म मेंह अपन महिमा परगट करहूं। जब मेंह तोला दंड दूहूं तब तेंह जानबे कि मेंह यहोवा अंव, अऊ तोर ही बीच म मेंह पबितर ठहिरहूं।
23
मेंह तोर बीच म महामारी पठोहूं अऊ तोर गलीमन म खून बहाहूं। चारों कोति ले तोर बिरूध तलवार चलही, अऊ मारे गय मनखेमन तोरेच बीच म गिरहीं। तब तेंह जानबे कि मेंह यहोवा अंव।
24
“ ‘तब इसरायली मनखेमन के अइसे पड़ोसी नइं होहीं, जेमन पीरा देवइया कंटिली झाड़ी अऊ तेज गड़नेवाला कांटा सहीं अंय। तब ओमन जानहीं कि मेंह परमपरधान यहोवा अंव।
25
“ ‘परमपरधान यहोवा ह ये कहत हे: जब मेंह इसरायल के मनखेमन ला ओ जातिमन ले इकट्ठा करहूं, जेमन के बीच म ओमन तितिर-बितिर हो गे हवंय, त में ओमन के जरिये ओ जातिमन के मनखे के नजर म पबितर ठहिरहूं। तब ओमन अपन खुद के देस म रहिहीं, जेला मेंह अपन सेवक याकूब ला देय रहेंव।
26
ओमन उहां सुरकछित रहिहीं अऊ घर बनाहीं अऊ अंगूर के बारी लगाहीं; ओमन सुरकछित रहिहीं जब में ओमन के ओ जम्मो परोसीमन ला दंड दूहूं, जेमन ओमन ले बईरता रखत रिहिन। तब ओमन जानहीं कि में यहोवा ओमन के परमेसर अंव।’ ”
← Chapter 27
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 29 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41
42
43
44
45
46
47
48