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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Acts 11
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
मसीह-दूत सभ और यहूदिया प्रदेशक आरो विश्वासी भाय सभ जखन सुनलनि जे गैर-यहूदी सभ सेहो परमेश्वरक वचन स्वीकार कयने अछि,
2
तँ पत्रुस केँ यरूशलेम अयला पर यहूदी विश्वासी सभ हुनका पर दोष लगाबऽ लगलथिन।
3
ओ सभ कहलथिन, “अहाँ गैर-यहूदी सभक घर मे प्रवेश कयलहुँ आ ओकरा सभक संग भोजनो कयलहुँ!”
4
तखन पत्रुस, कोना की भेल छल, से सभ बात हुनका सभ केँ शुरू सँ सुनाबऽ लगलाह।
5
ओ कहलथिन, “याफा नगर मे प्रार्थना करैत काल हम ध्यान-मग्न भऽ गेलहुँ और हमरा सामने एक दृश्य प्रगट भेल। हम एक बड़का चद्दरि सनक कोनो चीज चारू खूँट सँ बान्हल स्वर्ग सँ उतारल जाइत देखलहुँ। ओ वस्तु हमरा लग आबि कऽ रूकल।
6
हम जखन गौर सँ देखऽ लगलहुँ तँ ओहि मे हमरा घरैया-पशु, जंगली जानबर, जमीन मे ससरऽ वला जीव-जन्तु, और आकाशक चिड़ै सभ देखाइ पड़ल।
7
तखन हमरा ई आवाज सुनाइ देलक, ‘पत्रुस, उठह! एहि मे सँ मारि कऽ खाह!’
8
मुदा हम उत्तर देलियनि जे, ‘नहि नहि, प्रभु! हम कोनो अपवित्र वा अशुद्ध वस्तु कहियो नहि खयने छी।’
9
तखन दोसर बेर फेर स्वर्ग सँ आवाज सुनाइ देलक जे, ‘जाहि वस्तु केँ परमेश्वर शुद्ध ठहरौने छथिन, तकरा तोँ अशुद्ध नहि कहक।’
10
एहिना तीन बेर भेल, आ तकरबाद ओ सभ वस्तु फेर स्वर्ग दिस उठा लेल गेल।
11
“ताही क्षण मे तीन आदमी जे हमरा बजयबाक लेल कैसरिया सँ पठाओल गेल छल, से सभ ओहि घर लग पहुँचल जतऽ हम रहैत छलहुँ।
12
पवित्र आत्मा हमरा आदेश देलनि जे, कोनो खराब बात नहि सोचि कऽ ओकरा सभक संग जाह। ई छओटा विश्वासी भाय सेहो हमरा संग गेलाह और हम सभ ओहि आदमीक घर मे गेलहुँ जे हमरा बजबौने छलाह।
13
ओ हमरा सभ केँ कहलनि जे कोना हुनका अपना घर मे स्वर्गदूत दर्शन देलथिन आ कहलथिन जे, ‘ककरो याफा नगर पठा कऽ सिमोन जकर दोसर नाम पत्रुस छैक, तकरा बजबा लिअ।
14
ओ आबि कऽ अहाँ केँ उपदेश देत जाहि द्वारा अहाँ सपरिवार उद्धार प्राप्त करब।’
15
“हम जखन उपदेश देनाइ शुरुए कयने छलहुँ तखने पवित्र आत्मा हुनका सभ पर उतरि अयलाह, ठीक ओहिना जेना अपना सभ पर शुरू मे अयलाह।
16
तुरत प्रभुक कहल ओ बात हमरा मोन पड़ल जे, ‘यूहन्ना लोक केँ पानि सँ बपतिस्मा देलनि मुदा अहाँ सभ केँ पवित्र आत्मा सँ बपतिस्मा देल जायत।’
17
जँ परमेश्वर हुनका सभ केँ वैह दान देलनि जे दान अपना सभ जखन प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कयलहुँ तखन अपना सभ केँ देलनि, तँ हम परमेश्वरक काज केँ रोकऽ वला के छी!”
18
ई सुनि ओ सभ सन्तुष्ट भऽ गेलाह आ परमेश्वरक स्तुति करैत बजलाह, “तखन तँ परमेश्वर दोसरो जाति सभ केँ सेहो अपना पापक लेल पश्चात्ताप आ हृदय-परिवर्तन करबाक वरदान देलथिन जाहि सँ ओहो सभ जीवन प्राप्त करय!”
19
स्तिफनुस केँ मारल गेलाक बाद मसीही विश्वासी सभ पर जखन अत्याचार बढ़ऽ लागल तँ ओ सभ जहाँ-तहाँ छिड़िया गेलाह आ फीनिकी प्रदेश, साइप्रस द्वीप और अन्ताकिया नगर तक पहुँचलाह। मुदा विशेष काल ओ सभ मात्र यहूदी सभक बीच शुभ समाचारक प्रचार करैत छलाह।
20
परन्तु हुनका सभ मे सँ किछु लोक, जे साइप्रस आ कुरेनक निवासी छलाह, से सभ अन्ताकिया नगर जा कऽ यूनानी सभ सँ सेहो सम्पर्क कऽ ओकरा सभ केँ प्रभु यीशुक सम्बन्ध मे शुभ समाचार सुनाबऽ लगलथिन।
21
प्रभुक शक्ति हुनका सभक संग छलनि, आ बहुतो लोक प्रभु पर विश्वास कऽ कऽ हुनकर रस्ता पर आबि गेलनि।
22
अन्ताकिया मे भेल सभ बातक खबरि जखन यरूशलेमक विश्वासी मण्डली लग पहुँचल तँ ओ सभ बरनबास केँ अन्ताकिया पठौलनि।
23
ओ विश्वास और पवित्र आत्मा सँ परिपूर्ण एक नीक लोक छलाह। ओहिठाम पहुँचला पर जखन ओहिठामक लोकक बीच परमेश्वरक कृपाक परिणाम देखलनि तँ बरनबास अति आनन्दित भेलाह, आ सभ केँ प्रोत्साहित कयलनि जे अहाँ सभ पूरा तन-मन-धन सँ प्रभुक लेल ठोस विश्वासक संग स्थिर रहू। एहि तरहेँ ओहिठामक बहुतो लोक प्रभु यीशु पर विश्वास कयलक।
25
तखन बरनबास साउल केँ तकबाक लेल तरसुस नगर गेलाह।
26
हुनका सँ भेँट भेला पर, ओ हुनका ओतऽ सँ अन्ताकिया लऽ अनलथिन। ओ दूनू गोटे वर्ष दिन ओतऽ मण्डलीक संगति मे रहलाह आ बहुत लोक केँ प्रभुक विषय मे शिक्षा देलथिन। ओतहि, अर्थात् अन्ताकिए मे, सभ सँ पहिने प्रभु यीशु मसीहक शिष्य सभ केँ “मसीही” कहबाक प्रथा शुरू भेल।
27
ओहि समय मे यरूशलेम सँ परमेश्वरक किछु प्रवक्ता सभ अन्ताकिया अयलाह।
28
ओहि मे सँ एक, अगबुस नामक प्रवक्ता उठि कऽ परमेश्वरक आत्माक प्रेरणा सँ भविष्यवाणी कयलनि जे सम्पूर्ण राज्य मे भयंकर रौदी पड़त। (ई बात सम्राट क्लौदियुसक शासन काल मे पूरा भेल।)
29
तेँ प्रभुक शिष्य सभ निर्णय कयलनि जे हम सभ अपन-अपन सामर्थ्यक अनुसार यहूदिया प्रदेशक भाय सभक लेल किछु मदति करी।
30
ओ सभ एहिना करबो कयलनि, आ बरनबास और साउलक हाथेँ अपन दान मण्डलीक देख-रेख कयनिहार सभ लग पठा देलथिन।
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