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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Acts 20
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
ई खलबली वला बात शान्त भेलाक बाद, पौलुस शिष्य सभ केँ बजा कऽ हुनका सभ सँ प्रोत्साहनक किछु शब्द कहि विदा लेलनि आ मकिदुनियाक लेल प्रस्थान कयलनि।
2
मकिदुनिया प्रदेश दऽ कऽ जाइत काल ओ ओतुक्का विश्वासी सभ केँ बहुत बात द्वारा उत्साह बढ़ौलनि, और अन्त मे यूनान देश मे पहुँचलाह।
3
यूनान मे तीन मास धरि रहलाक बाद, ओ सीरियाक लेल पानि जहाज सँ विदा होमऽ पर छलाह, तखने पता चललनि जे यहूदी सभ हमरा विरोध मे षड्यन्त्र रचि रहल अछि। तेँ ओ फेर मकिदुनिया दऽ कऽ फिरि जयबाक निश्चय कयलनि।
4
हुनका संग ईहो सभ छलाह—पिरुसक बेटा सोपात्रस, जे बिरीयाक निवासी छलाह, थिसलुनिकाक निवासी अरिस्तर्खुस आ सिकुन्दुस, दरबे नगरक निवासी गयुस, तिमुथियुस, और आसिया प्रदेशक तुखिकुस आ त्रोफिमुस।
5
हुनकर ई संगी सभ हमरा सभ सँ आगाँ बढ़लाह आ त्रोआस नगर जा कऽ हमरा सभक प्रतीक्षा करऽ लगलाह।
6
एम्हर हम सभ “बिनु खमीरक रोटी वला पाबनि”क बाद फिलिप्पी नगर सँ विदा भेलहुँ, आ पानि जहाजक पाँच दिनक यात्राक बाद हुनका सभ लग त्रोआस मे पहुँचलहुँ। ओतऽ हम सभ सात दिन रहलहुँ।
7
सप्ताहक पहिल दिन हम सभ विश्वासी सभक संग प्रभु-भोज करबाक लेल एक ठाम जमा भेलहुँ। पौलुस लोक सभ सँ बात-चीत करऽ लगलाह, आ दुपहर राति तक बजैत रहलाह, कारण हुनका प्रात भेने विदा होयबाक छलनि।
8
ऊपर वला कोठली जाहि मे हम सभ जमा भेल छलहुँ ताहि मे बहुते दीप सभ जरि रहल छल।
9
खिड़की मे युतखुस नामक एक युवक बैसल छल। पौलुसक बात सुनैत-सुनैत ओ औँघाय लागल आ अन्त मे भारी निन्द आबि गेला सँ ओ ओहि तीनमहला पर सँ खसि पड़ल। लोक सभ ओकरा मरल उठौलक।
10
पौलुस नीचाँ गेलाह, आ झुकि कऽ ओकरा भरि पाँज कऽ धऽ लेलथिन। तखन बजलाह, “नहि घबड़ाउ! ई जीविते अछि।”
11
तखन पौलुस फेर जा कऽ प्रभु-भोज कयलनि और भोजन कऽ कऽ लोक सभ सँ भोर तक बात-चीत करैत रहलाह आ विदा भऽ गेलाह।
12
लोक सभ बहुत खुश भऽ कऽ ओहि युवक केँ जीविते घर लऽ गेल।
13
हम सभ आब जहाज पर चढ़ि कऽ आगाँ असुस नगरक लेल विदा भेलहुँ। पौलुस हमरा सभक लेल एना सोचने छलाह जे हम सभ आगाँ पानि जहाज सँ जाइ आ असुस मे हुनका जहाज पर चढ़ा लियनि, कारण ओ असुस तक पैदले आबऽ चाहैत छलाह।
14
असुस मे ओ हमरा सभ सँ भेँट कयलनि, आ हम सभ हुनका जहाज पर लऽ, मितुलेन नगर तक अयलहुँ।
15
दोसरे दिन ओतऽ सँ विदा भऽ खियुस द्वीपक सामने पहुँचलहुँ, आ तकर प्रात भेने सामोस द्वीप तक अयलहुँ। फेर दोसरे दिन मिलेतुस नगर मे अयलहुँ।
16
पौलुस निर्णय कयने छलाह जे हम सभ इफिसुस नगर केँ छोड़ैत निकलि जायब जाहि सँ आसिया प्रदेश मे देरी नहि होअय। ओ एहि लेल जल्दी मे छलाह जे, जँ सम्भव होअय तँ पेन्तेकुस्त दिन तक यरूशलेम पहुँचि जाइ।
17
मिलेतुस सँ पौलुस इफिसुसक मण्डलीक देख-रेख कयनिहार लोकनि केँ खबरि पठा कऽ बजबौलनि।
18
ओ सभ जखन आबि गेलाह तँ पौलुस हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ जनिते छी जे जाहि दिन हम आसिया प्रदेश मे अयलहुँ ताहि दिन सँ अहाँ सभक संग रहि कऽ हम अपन समय कोना व्यतीत कयने रही।
19
बहुत नम्रतापूर्बक आ नोर बहा-बहा कऽ ओहि संकटक घड़ी मे, जे यहूदी सभक षड्यन्त्रक कारणेँ हमरा पर आयल छल, हम प्रभुक सेवा करैत रहलहुँ।
20
जे कोनो बात अहाँ सभक हितक लेल छल, से सभ बात अहाँ सभ केँ खुलि कऽ कहलहुँ और सभा सभ मे आ घरो-घर जा-जा कऽ अहाँ सभ केँ उपदेश दैत रहलहुँ।
21
हम यहूदी आ यूनानी दूनू केँ दृढ़तापूर्बक चेतावनी दैत रहलहुँ जे ओ अपना पापक लेल पश्चात्ताप कऽ परमेश्वरक दिस फिरय आ अपना सभक प्रभु यीशु पर विश्वास करय।
22
“और आब हम पवित्र आत्माक आज्ञाक अनुसार यरूशलेम जा रहल छी। ओतऽ हमरा संग की होयत, से नहि जनैत छी।
23
एतबे जनैत छी जे प्रत्येक शहर मे पवित्र आत्मा हमरा चेतावनी दऽ रहल छथि जे जहल आ कष्ट तोहर प्रतीक्षा मे छह।
24
मुदा हमरा लेल हमर प्राणक कोनो महत्व नहि अछि। हमरा एकेटा एही बात सँ मतलब अछि जे हम ओहि दौड़ केँ अन्त धरि दौड़ी आ ओहि काज केँ पूरा करी जे प्रभु यीशु हमरा देने छथि। ओ काज अछि परमेश्वरक कृपा सम्बन्धी शुभ समाचारक गवाही देनाइ।
25
“हम आब जनैत छी जे अहाँ सभ, जिनका बीच मे हम परमेश्वरक राज्यक प्रचार करैत घुमलहुँ-फिरलहुँ, हमर मुँह फेर कहियो नहि देखब।
26
तेँ हम आइ अहाँ सभक सामने ई बात गम्भीरतापूर्बक कहैत छी जे जँ अहाँ सभ मे सँ केओ नाश होयब तँ तकर उत्तरदायी हम नहि होयब।
27
कारण, हम अहाँ सभ केँ परमेश्वरक पूरा योजना सुनाबऽ मे किछु बाँकी नहि रखलहुँ।
28
“अहाँ सभ जे सभ मण्डलीक जिम्मेवार लोक छी, अपन आत्मिक जीवनक ध्यान राखू आ तकरो सभक जकरा सभ केँ पवित्र आत्मा अहाँ सभक जिम्मा मे राखि देने छथि। परमेश्वरक एहि भेँड़ाक मण्डली, जकरा ओ अपन पुत्रक खून सँ किनलनि, तकर अहाँ सभ चरबाह छी।
29
हम जनैत छी जे हमरा चल गेलाक बाद अति खतरनाक जंगली जानबर सभ अहाँ सभक बीच मे आओत आ भेँड़ा सभ केँ नहि छोड़त।
30
अहाँ सभक अपनो बीच सँ एहन लोक ठाढ़ होयत जे विश्वासी सभ केँ अपना दिस खीचि अपन चेला बनयबाक लेल सत्य केँ टेढ़-मेढ़ कऽ देत।
31
तेँ सतर्क रहू! आ मोन राखू जे कोना हम तीन वर्ष धरि दिन-राति नोर बहा-बहा कऽ अहाँ सभ मे सँ एक-एक गोटे केँ बुझबैत रहलहुँ।
32
“और आब हम अहाँ सभ केँ परमेश्वरक जिम्मा मे छोड़ि रहल छी आ हुनकर कृपापूर्ण वचनक सुरक्षा मे सौंपि दैत छी, जे वचन अहाँ सभ केँ मजगूत बना सकैत अछि आ परमेश्वरक सभ पवित्र कयल लोकक संग अहाँ सभक उत्तराधिकार अहाँ सभ केँ दऽ सकैत अछि।
33
हम ककरो सोना-चानी वा वस्त्रक लोभ कहियो नहि कयलहुँ।
34
अहाँ सभ स्वयं जनैत छी जे हम अपन एहि हाथ सभ सँ परिश्रम कऽ कऽ अपन आ अपन संगी सभक आवश्यकता पूरा कयलहुँ।
35
हम अपन सभ काज मे अहाँ सभ केँ देखा देलहुँ जे कोना एहि तरहक परिश्रम कऽ कऽ अपना सभ केँ निर्बल सभक सहयोग करबाक अछि, आ प्रभु यीशुक कहल बात केँ मोन रखबाक अछि जे ओ अपने बाजल छलाह, ‘लेबऽ सँ देबऽ मे आशिष अछि।’ ”
36
एतबा कहि पौलुस सभक संग ठेहुनिया दऽ कऽ प्रार्थना कयलनि।
37
तखन ओ सभ कानि-कानि कऽ आ पंजिया-पंजिया कऽ हुनका चुम्मा लेबऽ लगलनि।
38
हुनका सभ केँ सभ सँ बेसी दुःख हुनकर एहि बात सँ भेलनि जे, अहाँ सभ हमर मुँह फेर कहियो नहि देखब। तकरबाद ओ सभ हुनका अरियाति कऽ जहाज तक पहुँचा देलनि।
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