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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Acts 25
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
फेस्तुस अपना प्रदेश मे अयलाक तीन दिनक बाद कैसरिया सँ यरूशलेम गेलाह।
2
ओतऽ यहूदी सभक मुख्यपुरोहित और अगुआ लोकनि हुनका समक्ष पौलुसक विरोध मे अपन अभियोग प्रस्तुत कयलनि,
3
और हुनका सँ विनती कयलनि जे ओ पौलुस केँ मोकदमाक लेल फेर यरूशलेम पठयबाक कृपा करथि। तकर कारण ई छल जे ओ सभ रस्ते मे पौलुसक हत्या करबाक योजना बना रहल छलाह।
4
मुदा फेस्तुस उत्तर देलथिन, “पौलुस कैसरिया मे बन्दी अछि, आ हम अपने जल्दिए ओतऽ जा रहल छी।
5
तेँ अहाँ सभ मे सँ जे प्रमुख व्यक्ति सभ होथि, से सभ हमरा संग चलथु और जँ ओ कोनो अनुचित काज कयने अछि तँ ओतहि ओकरा पर अभियोग लगबथु।”
6
फेस्तुस हुनका सभक बीच आठ-दस दिन बिता कऽ फेर कैसरिया घूमि अयलाह। प्राते भेने ओ न्यायासन पर बैसि कऽ आज्ञा देलनि जे पौलुस केँ उपस्थित कयल जाय।
7
पौलुस केँ अयला पर यरूशलेम सँ आयल यहूदी सभ हुनका चारू कात ठाढ़ भऽ कऽ हुनका पर भारी-भारी आरोप लगाबऽ लगलनि, जकरा प्रमाणित नहि कऽ सकलाह।
8
तखन पौलुस अपना पक्षक बात सुनौलनि, “हम ने तँ यहूदी सभक धर्म-नियमक विरोध मे, ने मन्दिरक विरोध मे आ ने सम्राट-कैसरक विरोध मे कोनो अपराध कयने छी।”
9
फेस्तुस यहूदी सभ केँ खुश करबाक लेल पौलुस सँ पुछलथिन, “की तोँ यरूशलेम जयबाक लेल तैयार होयबह जे ओतहि हमरा सामने मे एहि बात सभक सम्बन्ध मे तोहर न्याय होयतह?”
10
मुदा पौलुस उत्तर देलथिन, “हम एखन सम्राट-कैसरक न्यायासनक सामने ठाढ़ छी। एतहि हमर न्याय होयबाक चाही। जेना कि अपने नीक जकाँ जनैत छी, हम यहूदी सभ केँ कोनो हानि नहि पहुँचौने छी।
11
हम जँ मृत्युदण्डक योग्य कोनो अपराध कयने होइ तँ मरबाक लेल हम एकदम तैयार छी। मुदा जँ हिनका सभक द्वारा लगाओल अभियोग मे किछु सत्ये नहि अछि तँ हमरा हिनका सभक हाथ सौंपबाक अधिकार किनको नहि छनि। हम सम्राट लग अपील करैत छी!”
12
तखन फेस्तुस अपन सल्लाहकार सभ सँ विचार-विमर्श कऽ कऽ उत्तर देलथिन, “तोँ सम्राट लग अपील कयलह, तोँ सम्राटे लग जयबह!”
13
किछु दिनक बाद राजा अग्रिप्पा और बरनिकी फेस्तुस केँ नव पदक शुभकामना देबाक लेल कैसरिया अयलाह
14
आ हुनका ओतऽ बहुते दिन रहलाह। एहि सँ फेस्तुस केँ पौलुसक मोकदमाक विषय मे राजा केँ बुझयबाक मौका भेटलनि। ओ कहलथिन, “एतऽ एक आदमी अछि जकरा फेलिक्स बन्दिए छोड़ि गेल छथि।
15
हम जखन यरूशलेम गेलहुँ तँ यहूदी सभक मुख्यपुरोहित और बूढ़-प्रतिष्ठित सभ हमरा लग आबि एकरा पर लगाओल आरोप सभ सुनौलनि आ माँग कयलनि जे ओकरा दण्ड देल जाय।
16
मुदा हम हुनका सभ केँ उत्तर देलियनि जे, हम सभ जे रोमी छी, तकरा सभक ई प्रथा नहि अछि जे बन्दी केँ ओहिना ककरो हाथ सौंपि दिऐक। कोनो व्यक्ति पर जँ आरोप लगाओल गेल अछि, तँ पहिने ओकरा आरोप लगाबऽ वला सभक समक्ष अपन पक्षक वयान देबाक अवसर देल जाइत छैक, तकरा बादे फैसला कयल जाइत अछि, ओना नहि।
17
ओ सभ हमरा संग एतऽ अयलाह तँ हम विलम्ब नहि कऽ कऽ प्राते भेने न्यायासन पर बैसि कऽ एहि आदमी केँ उपस्थित करयबाक आज्ञा देलहुँ।
18
मुदा ओकर विरोधी सभ जखन आरोप लगयबाक लेल ठाढ़ भेलाह, तँ ओ सभ एहन कोनो अपराधक आरोप ओकरा पर नहि लगौलनि जेना हम सोचने छलहुँ।
19
एतबे बात छल जे ओकरा सँ हुनका सभ केँ अपन धर्मक कोनो बात सभ मे मतभेद छलनि, और यीशु नामक एक मुइल आदमी, जकरा पौलुस जीविते कहैत छलैक, तकरा विषय मे विवाद छलनि।
20
हमरा फुरयबे नहि करैत छल जे एहन बात सभक छानबीन कोना कयल जाय। तेँ हम ओकरा सँ पुछलिऐक जे, की तोँ यरूशलेम जयबाक लेल तैयार होयबह जाहि सँ ओतहि एहि बात सभक सम्बन्ध मे तोहर न्याय होयतह?
21
मुदा ओ अपील कयलक जे ओ सम्राटक न्याय आ निर्णयक लेल संरक्षण मे राखल जाय, तँ हम आदेश देलहुँ जे जाबत तक हम ओकरा सम्राट लग नहि पठा दैत छी ताबत तक ओ पहरा मे राखल जाय।”
22
एहि पर अग्रिप्पा फेस्तुस केँ कहलथिन, “हम अपने एहि आदमीक बात सुनितहुँ।” फेस्तुस उत्तर देलथिन, “अहाँ काल्हिए ओकर बात सुनि लेबैक।”
23
तँ प्रात भेने अग्रिप्पा आ बरनिकी बड़का धूम-धामक संग सेनापति सभ आ शहरक गणमान्य व्यक्ति सभक संग सभा भवन मे प्रवेश कयलनि। फेस्तुसक आज्ञा पर पौलुस केँ बजाओल गेलनि।
24
तखन फेस्तुस बजलाह, “राजा अग्रिप्पा आ समस्त उपस्थित आदरणीय लोक सभ, ई आदमी, जकरा एतऽ देखैत छी, तकरा सम्बन्ध मे यरूशलेम मे और एतौ सम्पूर्ण यहूदी जातिक लोक सभ जोर-जोर सँ हल्ला कऽ कऽ हमरा सँ ई माँग कयने अछि जे ई आदमी जीवित रहबाक योग्य नहि अछि।
25
मुदा हम एहि निश्चय पर पहुँचल छी जे ई आदमी मृत्युदण्डक योग्य कोनो काज नहि कयने अछि। लेकिन ई अपने जखन सम्राट लग अपील कयलक तँ हम एकरा रोम पठयबाक निर्णय कयलहुँ।
26
मुदा हमरा लग एकरा विषय मे महाराजाधिराज केँ लिखबाक लेल कोनो निश्चित बात नहि अछि। एहि कारणेँ हम अपने सभक सम्मुख, आ खास कऽ, यौ राजा अग्रिप्पा, अपनेक सम्मुख, एहि आदमी केँ उपस्थित करौने छी, जाहि सँ एकर जाँच कयलाक बाद हमरा किछु लिखबाक लेल भेटय।
27
कारण, कोनो बन्दी केँ बिनु ओकर अभियोग-पत्र तैयार कयने सम्राट लग पठायब हमरा तर्कसंगत नहि बुझाइत अछि।”
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