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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Acts 23
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
पौलुस धर्म-महासभाक दिस एकटक लगा कऽ देखलनि आ बजलाह, “भाइ लोकनि, हम जाहि तरहेँ आजुक दिन धरि अपन जीवन व्यतीत कयने छी, ताहि सम्बन्ध मे हम अपना केँ परमेश्वरक नजरि मे निर्दोष बुझैत छी।”
2
एहि पर महापुरोहित हननियाह पौलुसक लग मे ठाढ़ लोक सभ केँ आदेश देलथिन जे, मारू ओकरा मुँह पर थप्पड़।
3
तखन पौलुस हुनका कहलथिन, “यौ चुनक-पोतल देवाल, परमेश्वर अहीं केँ मारताह! अहाँ धर्म-नियमक अनुसार हमर न्याय करबाक लेल एतऽ बैसल छी, और अहाँ अपने धर्म-नियमक विरोध मे हमरा मारबाक लेल आज्ञा दैत छिऐक!”
4
पौलुसक लग ठाढ़ लोक सभ हुनका कहलकनि, “की अहाँ परमेश्वरक ठहराओल महापुरोहित केँ अपमानित करैत छियनि?”
5
पौलुस उत्तर देलथिन, “भाइ लोकनि, हमरा नहि बुझल छल जे ई महापुरोहित छथि। धर्मशास्त्रक लेख अछि, ‘तोँ अपन समाजक शासक केँ अपशब्द नहि कहबह।’ ”
6
पौलुस जनैत छलाह जे उपस्थित लोक सभ मे सदुकी आ फरिसी दूनू पंथक लोक अछि, आ तेँ ओ सभा मे बाजऽ लगलाह, “भाइ लोकनि, हम फरिसी छी, आ फरिसीक पुत्र छी। हमर न्याय एखन एहि लेल कयल जा रहल अछि जे हमर विश्वासपूर्ण आशा अछि जे मुइल सभ फेर जिआओल जायत।”
7
हुनकर ई बात सुनिते, फरिसी आ सदुकी सभ अपने मे झगड़ा करऽ लगलाह, आ सभा मे फूट पड़ि गेल।
8
कारण, सदुकी सभक कथन अछि जे मुइल सभ नहि जिआओल जायत, और ने स्वर्गदूत अछि आ ने कोनो तरहक आत्मा होइत अछि, मुदा फरिसी सभ एहि तीनू बात केँ मानैत अछि।
9
तँ एहि तरहेँ बड़का हल्ला मचि गेल। फरिसी पंथक किछु धर्मशिक्षक सभ उठि बहुत जोर दऽ कऽ कहऽ लगलाह, “हम सभ एहि व्यक्ति मे कोनो खराबी नहि देखैत छी। आ मानि लिअ जे एकरा सँ कोनो स्वर्गदूत वा आत्मा बात कयने होथि, तखन?”
10
ई झगड़ा ततेक ने बढ़ि गेल जे सेनापति केँ डर होमऽ लगलनि जे, कतौ ई सभ पौलुस केँ टुकड़ा-टुकड़ा नहि कऽ दैक। तेँ ओ सैनिक सभ केँ आज्ञा देलथिन जे सभा मे जा कऽ ओकरा जबरदस्ती छोड़ाबह आ गढ़ मे लऽ आनह।
11
ओही राति प्रभु पौलुसक लग मे ठाढ़ भऽ कऽ कहलथिन, “साहस राखह! जहिना तोँ यरूशलेम मे हमरा विषय मे गवाही देलह, तहिना रोम मे सेहो तोरा गवाही देबाक छह।”
12
भोर भेला पर यहूदी सभ षड्यन्त्र रचलक आ सपत खयलक जे, जा धरि पौलुस केँ जान सँ नहि मारि देब, ता धरि किछु नहि खायब-पीब।
13
ई षड्यन्त्र रचनिहार सभ चालिस सँ बेसी गोटे छल।
14
ओ सभ मुख्यपुरोहित सभ आ बूढ़-प्रतिष्ठित लोकनि लग जा कऽ कहलकनि, “हम सभ भारी सपत खयलहुँ जे, जा धरि पौलुस केँ मारि नहि देब, ता धरि किछु नहि खायब-पीब।
15
तेँ अहाँ सभ धर्म-महासभाक संग मिलि कऽ सेनापति सँ निवेदन करू जे ओ पौलुस केँ एम्हर लऽ अबथि, एहि बहाना सँ जे हम सभ ओकर आरो ठीक सँ जाँच करऽ चाहैत छी। और हम सभ जे छी, से ओकरा एतऽ पहुँचऽ सँ पहिनहि ओकरा मारि देबाक लेल तैयार रहब।”
16
मुदा पौलुसक भागिन एहि षड्यन्त्रक बारे मे सुनि लेलक। ओ तुरत्ते गढ़ मे जा कऽ पौलुस केँ ई बात कहि देलकनि।
17
तखन पौलुस एक कप्तान केँ बजा कऽ कहलथिन, “एकरा सेनापति लग लऽ जाउ, ई हुनका किछु कहऽ चाहैत अछि।”
18
तँ कप्तान ओकरा सेनापति लग लऽ जा कऽ कहलथिन, “बन्दी पौलुस हमरा बजा कऽ कहलक जे हम एहि लड़का केँ अपनेक लग लऽ जाइ, कारण एकरा अपने सँ किछु कहबाक छैक।”
19
सेनापति ओहि लड़का केँ हाथ पकड़ि कऽ एकान्त मे लऽ गेलाह आ पुछलथिन, “तोँ हमरा कोन बात कहऽ चाहैत छह?”
20
ओ उत्तर देलकनि, “यहूदी सभ नियारने अछि जे पौलुस केँ काल्हिखन धर्म-महासभाक सामने अनबाक लेल अपने सँ निवेदन करी, एहि बहाना सँ जे, हम सभ ओकर आरो ठीक सँ जाँच करऽ चाहैत छी।
21
मुदा ओकर सभक निवेदन अपने स्वीकार नहि करब, कारण, ओकरा सभ मे सँ चालिस सँ बेसी लोक हुनकर घात करबाक ताक मे अछि। ओ सभ ई सपत खयने अछि जे, जा धरि पौलुस केँ जान सँ नहि मारि देब, ता धरि किछु नहि खायब-पीब। एखनो ओ सभ तैयार अछि, खाली अपनेक आज्ञाक प्रतीक्षा कऽ रहल अछि।”
22
सेनापति युवक केँ ई कहि कऽ विदा कऽ देलथिन जे, “ककरो नहि बुझऽ दहक जे तोँ हमरा एहि बातक खबरि देलह।”
23
तखन सेनापति दूटा कप्तान केँ बजा कऽ आज्ञा देलथिन, “अहाँ सभ दू सय पैदल-सैनिक, सत्तरि घोड़सवार आ दू सय भालाधारी सैनिक केँ आइ नौ बजे राति तक कैसरिया विदा होयबाक लेल तैयार करू,
24
और पौलुसक लेल सेहो घोड़ाक व्यवस्था करू, जाहि सँ ओ सभ ओकरा सुरक्षित राज्यपाल फेलिक्स लग पहुँचाबय।”
25
ओ राज्यपालक लेल ई पत्र लिखलनि—
26
परम श्रेष्ठ राज्यपाल फेलिक्स केँ क्लौदियुस लुसियासक दिस सँ सादर प्रणाम।
27
एहि आदमी केँ यहूदी सभ पकड़ने छल, और एकर खून करऽ पर लागल छल, मुदा तखने हम सैनिक सभक संग ओतऽ पहुँचि एकरा छोड़ौलहुँ, कारण हमरा पता लागल छल जे ई रोमी नागरिक अछि।
28
हम जानऽ चाहैत छलहुँ जे ओ सभ एकरा विरोध मे की आरोप लगा रहल अछि, तेँ ओकरा सभक धर्म-महासभाक सामने एकरा उपस्थित करौलिऐक।
29
ओतऽ हमरा बुझऽ मे आयल जे ओकरा सभक अपन धर्म सँ सम्बन्धित जे विवादक बात सभ अछि ताहि विषय मे एकरा पर आरोप लगाओल जा रहल अछि, नहि कि कोनो एहन बातक विषय मे जाहि लेल एकरा मृत्युदण्ड देल जाय वा जहलो मे राखल जाय।
30
आब हमरा पता लागल जे एकर हत्याक लेल षड्यन्त्र रचल गेल अछि। तेँ एकरा अपनेक ओहिठाम तुरत पठयबाक निर्णय कयलहुँ। और एकरा पर जे सभ आरोप लगा रहल अछि, तकरा सभ केँ हम सेहो आदेश देने छिऐक जे ओ सभ अपन आरोप अपनेक समक्ष प्रस्तुत करय।
31
सैनिक सभ सेनापतिक आदेशक अनुसार पौलुस केँ राता-राती लऽ गेलनि और अन्तिपत्रिस नगर तक पहुँचा देलकनि।
32
प्रात भेने ओ सभ घोड़सवार सैनिक सभ केँ पौलुस केँ आगाँ लऽ जयबाक लेल छोड़ि देलक आ ओ सभ स्वयं गढ़ पर घुरि गेल।
33
कैसरिया मे पहुँचला पर घोड़सवार सैनिक सभ राज्यपाल केँ पत्र देलकनि आ पौलुस केँ हुनका जिम्मा मे लगा देलकनि।
34
पत्र पढ़लाक बाद राज्यपाल पौलुस सँ पुछलथिन, “अहाँ कोन प्रदेशक छी?” पौलुसक ई उत्तर सुनि जे, हम किलिकिया प्रदेशक छी,
35
राज्यपाल कहलथिन, “अहाँ पर आरोप लगौनिहार सभ जखन एतऽ आबि जायत, तखन हम अहाँक मोकदमा सुनब।” तखन ओ आदेश देलनि जे पौलुस केँ हेरोद-दरबार मे पहरा मे राखल जाय।
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