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Acts 7
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
तखन महापुरोहित स्तिफनुस सँ पुछलथिन, “की ई बात सभ सत्य अछि?”
2
एहि पर स्तिफनुस उत्तर देलथिन, “बाबू-भैया लोकनि, हमर बात सुनू! अपना सभक पूर्वज अब्राहम हारान नगर मे वास करऽ सँ पहिने जखन मेसोपोतामिया क्षेत्र मे रहैत छलाह तखन हुनका महिमामय परमेश्वर दर्शन देलथिन।
3
ओ कहलथिन, ‘तोँ अपन देश सँ निकलि जाह, अपन कुटुम्ब-परिवार केँ छोड़ि दैह और ओहि देश मे जाह जे हम तोरा देखयबह।’
4
तेँ ओ कसदी जातिक लोकक देश छोड़ि कऽ हारान मे आबि कऽ बसलाह। हुनकर पिताक मृत्युक बाद परमेश्वर हुनका हारान नगर सँ एहि देश मे पठौलथिन जतऽ एखन अहाँ सभ रहि रहल छी।
5
एतऽ परमेश्वर उत्तराधिकारक रूप मे हुनका एतबो जमीन अपन कहाबऽ वला नहि देलथिन जतबा पर ओ पयर टेकि सकितथि, मुदा तैयो परमेश्वर हुनका ई वचन देलथिन जे, ‘हम ई देश तोरा आ तोरा बाद तोहर वंशक अधिकार मे कऽ देबह,’ जखन कि ओहि समय मे हुनका कोनो सन्तानो नहि छलनि।
6
परमेश्वर हुनका ई बात कहलथिन, ‘तोहर वंशक लोक सभ आन देश मे प्रवासी भऽ जयतह आ ओतऽ ओ सभ चारि सय वर्ष धरि गुलाम बनि कष्ट सहैत रहतह।’
7
परमेश्वर फेर कहलथिन, ‘जाहि राष्ट्रक लोक ओकरा सभ केँ गुलाम बनाओत तकरा हम दण्ड देबैक। तकरबाद ओ सभ ओहि देश सँ निकलि आओत और एही देश मे आबि कऽ हमर आराधना करत।’
8
तखन परमेश्वर अब्राहमक संग जे विशेष सम्बन्ध स्थापित कयने छलाह, तकर चिन्ह स्वरूप हुनका सँ खतनाक विधि शुरू करबौलनि। तेँ जखन हुनकर पुत्र इसहाकक जन्म भेलनि तँ तकर आठम दिन मे ओ हुनकर खतना करौलनि। बाद मे इसहाकक पुत्र याकूबक जन्म भेलनि और याकूब सँ अपना सभक बारह कुल-पिता जन्म लेलनि।
9
“यैह कुल-पिता लोकनि अपन भाय यूसुफ सँ डाह रखैत हुनका बेचि देलनि और ओ मिस्र देश मे लऽ जायल गेलाह। मुदा परमेश्वर हुनका संग छलथिन।
10
सभ कष्ट और विपत्ति मे ओ हुनका बचौलथिन, और हुनका नीक बुद्धि देलथिन जाहि सँ मिस्रक राजा फरओ हुनका सँ प्रसन्न भेलनि और हुनका मिस्र देशक प्रधानमन्त्री आ अपन सम्पूर्ण राजभवनक मुख्य अधिकारी बनौलथिन।
11
“जखन सम्पूर्ण मिस्र देश आ कनान देश मे भारी रौदी पड़ल तँ अपना सभक पूर्वज लोकनि केँ बड़का कष्ट सहऽ पड़लनि कारण हुनका सभ लग भोजनक लेल कोनो अन्न नहि छलनि।
12
ओहि समय मे याकूब सुनलनि जे मिस्र देश मे अन्न भेटि रहल अछि, तँ ओ अपना सभक कुल-पिता सभ केँ पहिल बेर मिस्र देश सँ अन्न किनबाक लेल पठौलथिन।
13
ओ सभ फेर जखन दोसर बेर अन्न किनबाक लेल ओतऽ गेलाह तँ यूसुफ हुनका सभ केँ अपन परिचय दऽ कऽ ई बात प्रगट कयलनि जे हम अहाँ सभक भाय यूसुफ छी। तखन फरओ केँ सेहो यूसुफक परिवारक बारे मे जानकारी भेलनि।
14
एकर बाद यूसुफ अपन पिता याकूब आ हुनकर सम्पूर्ण परिवार, अर्थात् पचहत्तरियो लोक केँ बजबा लेलथिन।
15
याकूब मिस्र देश गेलाह। ओ और अपना सभक कुल-पिता लोकनि ओतहि मुइलाह।
16
हुनका सभक लास ओतऽ सँ आनि कऽ एहि देशक शकेम नामक स्थान मे ओहि कबर मे राखल गेलनि जे अब्राहम हमोरक पुत्र सभ सँ पाइ दऽ कऽ किनने छलाह।
17
“जँ-जँ ओहि वचन केँ पूर्ण होयबाक समय लगचिआइत गेल जे परमेश्वर अब्राहम केँ देने छलाह तँ-तँ मिस्र मे अपना सभक पूर्वजक संख्या बढ़ैत गेल।
18
ओहि समय मे मिस्र मे एक नव राजा भेलाह जे यूसुफक सम्बन्ध मे नहि किछु जनैत छलाह।
19
ओ राजा अपना सभक जाति केँ धोखा दऽ कऽ अपना सभक पूर्वज लोकनि केँ अपन-अपन बच्चा सभ केँ फेकि देबाक लेल विवश कऽ देलथिन जाहि सँ ओ सभ मरि जाय।
20
“ओही समय मे मूसाक जन्म भेलनि। परमेश्वरक नजरि मे हुनकर विशेष स्थान छलनि। तीन मास धरि हुनकर पालन-पोषण अपन पिताक घर मे भेलनि।
21
मुदा आरो दिन नहि नुका सकबाक कारणेँ हुनका जखन बाहर धऽ देल गेलनि तँ फरओ-राजाक बेटी हुनका पौलक और अपन पुत्र मानि कऽ पोसलक।
22
एहि तरहेँ मूसा मिस्र देशक सम्पूर्ण शिक्षा प्राप्त कयलनि और ओ बात आ काज दूनू मे सामर्थी भेलाह।
23
“मूसा जखन चालिस वर्षक भेलाह तखन हुनका मोन भेलनि जे हम अपन जाति-भाय इस्राएली सभ सँ भेँट-घाँट करी।
24
एक दिन ओ देखलनि जे एक मिस्री लोक हुनकर जाति-भायक संग दुर्व्यवहार कऽ रहल अछि, तेँ ओ अपन भायक पक्ष लैत ओहि मिस्री लोकक खून कऽ कऽ तकर बदला लऽ लेलनि।
25
ओ सोचैत छलाह जे हमर जाति-भाय सभ ई बात बुझि जायत जे परमेश्वर हमरा द्वारा ओकरा सभ केँ मुक्त करौताह मुदा ओ सभ एहि बात केँ नहि बुझलक।
26
प्रात भेने जखन ओ फेर बहरयलाह तँ दू इस्राएली भाय केँ अपने मे लड़ाइ करैत देखलनि। ओ ओकरा सभ केँ मेल-मिलाप कऽ लेबाक लेल बुझौलथिन, ‘सुनू, अहाँ सभ भाय-भाय छी तखन एक-दोसर केँ किएक कष्ट दैत छी?’
27
एहि बात पर ओ जे दोषी छल से मूसा केँ धकिया कऽ कहलकनि, ‘अहाँ केँ के हमरा सभक हाकिम और न्यायाधीश बनौलक?
28
की जहिना अहाँ काल्हि ओहि मिस्री लोकक खून कयलहुँ तहिना हमरो खून कऽ देबऽ चाहैत छी?’
29
मूसा ई बात सुनि मिस्र देश सँ भागि कऽ मिद्यान देश मे परदेशी भऽ कऽ रहऽ लगलाह और ओतहि हुनकर दूटा बेटाक जन्म भेलनि।
30
“चालिस वर्षक बाद सीनय पहाड़ लग निर्जन क्षेत्र मे जरैत झाड़ीक धधरा मे एक स्वर्गदूत मूसा केँ देखाइ देलनि।
31
ई देखि हुनका बड्ड आश्चर्य लगलनि। एहि दृश्य केँ लग सँ देखबाक लेल जखन गेलाह तँ प्रभु हुनका कहलथिन,
32
‘हम तोहर पूर्वजक परमेश्वर, अर्थात् अब्राहम, इसहाक और याकूबक परमेश्वर छी।’ मूसा थर-थर काँपऽ लगलाह और हुनका ओम्हर देखैत रहबाक साहस नहि भेलनि।
33
तखन प्रभु कहलथिन, ‘तोँ अपन चप्पल बाहर कऽ लैह, कारण जतऽ तोँ ठाढ़ छह से पवित्र स्थान अछि।
34
हम देखलहुँ जे मिस्र मे हमरा लोक केँ कोना सताओल जा रहल अछि, हम ओकरा सभक कुहरनाइ सुनलहुँ आ ओकरा सभ केँ मुक्त करयबाक लेल उतरि आयल छी। आब आबह! हम तोरा मिस्र देश मे पठा रहल छिअह।’
35
“ई वैह मूसा छथि जिनका ओ सभ ई कहि कऽ अस्वीकार कयने छलनि जे, अहाँ केँ के हाकिम आ न्यायाधीश बनौलक? हुनका परमेश्वर ओहि स्वर्गदूत द्वारा जे हुनका झाड़ी मे देखाइ देने छलनि हाकिम और मुक्त करौनिहार बना कऽ पठौलथिन।
36
वैह आदमी मिस्र मे, लाल सागर मे आ चालिस वर्ष धरि निर्जन क्षेत्र मे चमत्कारपूर्ण काज आ चिन्ह सभ देखबैत अपन इस्राएली लोक केँ मिस्र सँ बाहर निकालि अनलनि।
37
ई वैह मूसा छथि जे ओकरा सभ केँ कहलथिन, ‘परमेश्वर तोरे सभ मे सँ हमरा सनक प्रवक्ता तोरा सभक लेल पठौथुन।’
38
हँ, ई वैह छथि जे निर्जन क्षेत्र मे अपना सभक पूर्वजक समुदाय मे छलाह आ जिनका सँ सीनय पहाड़ पर स्वर्गदूत बात कयलनि। हुनके जीवनक वचन देल गेलनि जे ओ अपना सभ केँ प्रदान करथि।
39
“मुदा अपना सभक पूर्वज सभ हुनकर बात नहि मानलनि, बल्कि हुनका अस्वीकार कयलथिन आ फेर मिस्र देश घूमि जयबाक इच्छा करैत छलाह।
40
ओ सभ हारून केँ कहलथिन, ‘अहाँ हमरा सभक लेल एहन देवता बना दिअ जे हमरा सभक मार्गदर्शन करथि, कारण ई मूसा जे हमरा सभ केँ मिस्र देश सँ निकालि कऽ अनलनि तिनका नहि जानि की भऽ गेलनि!’
41
ओही समय मे ओ सभ एक बच्छाक मुरुत बना कऽ ओकरा लग बलि-प्रदान कयलनि। ओ सभ अपन हाथक बनाओल मुरुतक लेल एक पैघ उत्सव मनौलनि।
42
एहि पर परमेश्वर हुनका सभ केँ त्यागि देलथिन और आकाशक सूर्य, चन्द्रमा आ तारा सभक पूजा करबाक लेल छोड़ि देलथिन। एही सम्बन्ध मे परमेश्वरक प्रवक्ता सभक लेख मे लिखल अछि, ‘हे इस्राएली लोक सभ, की तोँ सभ निर्जन क्षेत्र मे चालिस वर्ष धरि पशु-बलि आ अन्य चढ़ौना सभ हमरे चढ़ौलह?
43
नहि, तोँ सभ मोलोक देवताक मण्डप केँ और रिफान देवताक तारा सभ केँ अर्थात् मुरुत सभ केँ जकरा तोँ सभ पूजा करबाक लेल बनौने छलह तकरा सभ केँ अपना संग लऽ कऽ घुमैत छलह। तेँ आब हम तोरा सभ केँ बेबिलोनो सँ दूर देश मे भगा देबह।’
44
“निर्जन क्षेत्र मे अपना सभक पूर्वज सभ लग ‘साक्षीक मण्डप’ छलनि। ओ मण्डप ओही नमूनाक अनुसार बनाओल गेल छल जे परमेश्वर मूसा केँ देखौने छलथिन आ ठीक ओहिना बनयबाक आज्ञा देने छलथिन।
45
ओ मण्डप ओहि पुस्त सँ दोसर पुस्त मे आयल, और परमेश्वर जखन एहि देश मे सँ दोसर जाति सभ केँ भगा देलनि आ अपना सभक पूर्वज सभ एहि देश केँ जितलनि तँ ओ सभ यहोशूक संग ओहि मण्डप केँ सेहो एतऽ अनलनि। और ओ मण्डप राजा दाऊदक समय धरि एहि देश मे रहल।
46
राजा दाऊद सँ परमेश्वर विशेष प्रसन्न छलाह। ओ परमेश्वर सँ प्रार्थना कयलनि, ‘हे हमर पूर्वज याकूबक परमेश्वर, हम अहाँक निवासक लेल एक घरक निर्माण करी तकर आज्ञा हमरा दिअ।’
47
मुदा परमेश्वरक ओहि घरक निर्माण करऽ वला हुनकर बेटा सुलेमान भेलाह।
48
“परन्तु परम परमेश्वर मनुष्य द्वारा बनाओल घर सभ मे नहि रहैत छथि, जेना हुनकर एक प्रवक्ताक लेख मे अछि,
49
‘स्वर्ग हमर सिंहासन अछि, और पृथ्वी हमर पयरक चौकी। प्रभु कहैत छथि, तोँ हमरा लेल केहन घर बनयबह? हमर रहबाक स्थान कतऽ होयत?
50
की ई सभ हमरे बनाओल नहि अछि?’
51
“हे जिद्दी आ अशुद्ध मोनक, कानक बहीर लोक सभ! अहाँ सभ एकदम अपन पूर्वज सभ जकाँ छी, सदिखन पवित्र आत्माक विरोध करैत रहैत छी!
52
परमेश्वरक एहन एकोटा प्रवक्ता भेलाह, जिनका अहाँ सभक पूर्वज सभ नहि सतौलकनि? परमेश्वरक धार्मिक सेवकक आगमनक सम्बन्ध मे भविष्यवाणी कयनिहार सभक ओ सभ खून तक कऽ देलकनि। और आब अहाँ सभ ओहि धार्मिक सेवक केँ पकड़बा कऽ हुनकर हत्या कयलहुँ।
53
अहाँ सभ ओ लोक छी जकरा स्वर्गदूतक माध्यम सँ परमेश्वरक धर्म-नियम देल गेल मुदा अहीं सभ ओकरा नहि मानने छी।”
54
ई बात सुनितहि ओ सभ तामसे-पित्ते हुनका पर दाँत पिसऽ लागल।
55
मुदा स्तिफनुस पवित्र आत्मा सँ परिपूर्ण भऽ स्वर्ग दिस ताकऽ लगलाह और ओ ओतऽ परमेश्वरक तेज प्रकाश चमकैत आ परमेश्वरक दहिना कात यीशु केँ ठाढ़ देखलनि।
56
ओ बाजि उठलाह, “हम स्वर्ग केँ खुजल आ परमेश्वरक दहिना कात मनुष्य-पुत्र यीशु केँ ठाढ़ देखि रहल छियनि।”
57
एहि बात पर ओ सभ अपन कान मुनि लेलक और जोर सँ हल्ला करैत हुनका दिस दौड़ल
58
आ हुनका पकड़ि कऽ घिसिअबिते शहर सँ बाहर लऽ गेल और हुनका खून कऽ देबाक लेल पाथर मारऽ लगलनि। गवाह सभ अपन वस्त्र साउल नामक युवक लग रखने छल।
59
जखन ओ सभ स्तिफनुस केँ पाथर मारि रहल छलनि तखन ओ प्रार्थना कऽ रहल छलाह, “हे प्रभु यीशु, हमर आत्मा केँ ग्रहण करू।”
60
ओ ठेहुन रोपि फेर जोर सँ कहलनि, “हे प्रभु, एहि पापक हिसाब एकरा सभ सँ नहि लिऔक।” एतबा कहलाक बाद हुनकर प्राण छुटि गेलन्हि।
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