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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Acts 12
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
एही समय मे राजा हेरोद मण्डलीक किछु विश्वासी सभ पर अत्याचार करबाक लेल हुनका सभ केँ बन्दी बना लेलनि।
2
ओ यूहन्नाक भाय याकूब केँ तरुआरि सँ मरबा देलनि।
3
जखन ओ देखलनि जे एहि घटना सँ यहूदी सभ प्रसन्न भेल अछि तँ ओ पत्रुस केँ सेहो पकड़बा लेलनि। ई “बिनु खमीरक रोटी वला पाबनि”क समय मे भेल।
4
पत्रुस केँ बन्दी बना कऽ जहल मे रखबा देलनि, आ चारि-चारि सैनिकक चारिटा दलक पहरा मे राखि देलनि। हेरोद सोचलनि जे पत्रुस केँ फसह-पाबनिक बाद जनताक सामने न्यायक लेल उपस्थित करायब।
5
तँ पत्रुस जहल मे छलाह, मुदा एम्हर विश्वासी सभ पूरा मोन सँ पत्रुसक लेल परमेश्वर सँ प्रार्थना कऽ रहल छलाह।
6
जाहि दिन राजा हेरोद पत्रुस केँ जनताक समक्ष अनबाक विचार कयने छलाह, ओहि सँ पहिलुके राति मे पत्रुस दू सैनिकक बीच, दूनू कात जिंजीर सँ बान्हल, सुतल छलाह। द्वारि लग सेहो सैनिक सभ पहरा दऽ रहल छल।
7
एकाएक प्रभुक एक स्वर्गदूत पत्रुस लग जहल मे ठाढ़ भेलाह। सम्पूर्ण कोठली प्रकाशमय भऽ गेल। स्वर्गदूत पत्रुस केँ हिला कऽ जगौलनि आ कहलथिन, “जल्दी उठह!” तुरत हिनकर दूनू हाथ सँ जिंजीर खुजि कऽ खसि पड़ल।
8
स्वर्गदूत कहलथिन, “कपड़ा सम्हारि लैह, आ चप्पल पहिरि लैह।” पत्रुस ओहिना कयलनि। तखन स्वर्गदूत कहलथिन, “चद्दरि ओढ़ि लैह आ हमरा पाछाँ आबह।”
9
ओ हुनका पाछाँ-पाछाँ जहल सँ बाहर अयलाह, मुदा हुनका निश्चित भान नहि भऽ रहल छलनि जे स्वर्गदूत जे कऽ रहल छथि से सही घटना अछि—हुनका होइत छलनि जे हम कोनो तरहक सपना देखि रहल छी।
10
ओ सभ पहिल और दोसर पहरेदार केँ टपि कऽ लोहाक मुख्य फाटक लग पहुँचलाह। हुनका सभ केँ पहुँचतहि ओ फाटक अपने सँ खुजि गेल, और ओ सभ निकलि कऽ शहर मे प्रवेश कऽ गेलाह। ओ सभ जखन गलीक अन्त तक गेलाह तँ स्वर्गदूत एकाएक पत्रुस केँ छोड़ि कऽ चल गेलाह।
11
तखन हिनका होश भेलनि आ बजलाह, “आब तँ निश्चय जानि गेलहुँ जे ठीके प्रभु अपन स्वर्गदूत पठा कऽ हेरोदक हाथ सँ और जे बात यहूदी सभ चाहैत छल, ताहि सभ सँ हमरा बचौलनि।”
12
ई बात बुझि ओ यूहन्ना, जिनकर दोसर नाम मरकुस छलनि, तिनकर माय मरियमक ओतऽ गेलाह, जतऽ बहुत लोक जमा भऽ कऽ प्रार्थना कऽ रहल छलाह।
13
पत्रुस बाहर सँ केबाड़ खटखटौलनि। एक नोकरनी, जकर नाम रोदा छलैक, से केबाड़ खोलबाक लेल आयल।
14
पत्रुसक आवाज चिन्हि कऽ ओ ततेक खुश भेल जे बिनु केबाड़ खोलनहि ओ ई कहैत भीतर दौड़ि कऽ गेल जे, “पत्रुस बाहर छथि!”
15
ओ सभ ओकरा कहलथिन, “तोँ बताहि छह!” मुदा ओ जखन बहुत जोर दऽ कऽ कहैत रहल जे वैह छथि तखन ओ सभ बजलाह, “हुनकर रक्षा करऽ वला स्वर्गदूत होयतनि।”
16
एम्हर पत्रुस केबाड़ खटखटबिते रहलाह। ओ सभ जखन खोलि कऽ हुनका देखलथिन तँ चकित रहि गेलाह।
17
पत्रुस हुनका सभ केँ शान्त होयबाक लेल हाथ सँ संकेत कयलनि आ कहऽ लगलथिन जे प्रभु कोना जहल सँ मुक्त कऽ देलनि। तखन कहलथिन, “ई सभ बात याकूब और दोसरो भाय सभ केँ कहि देबनि।” ई कहि ओ ओतऽ सँ दोसर ठाम चल गेलाह।
18
प्रात भेने जहल मे पहरेदारक बीच बड़का खलबली मचि गेल जे पत्रुस की भऽ गेल?
19
राजा हेरोद हुनका खोजबाक हुकुम देलथिन, मुदा ओ नहि भेटलथिन। तेँ हेरोद सैनिक सभ सँ पूछ-ताछ कऽ कऽ ओकरा सभ केँ मृत्युदण्डक आज्ञा देलथिन। तखन हेरोद यहूदिया प्रदेश छोड़ि कैसरिया नगर जा कऽ रहऽ लगलाह।
20
हेरोद सूर और सीदोनक लोक सभ पर खिसिआयल छलाह। तेँ ओ सभ मिलि कऽ हेरोद सँ भेँट करबाक लेल पहुँचल। राजभवनक मुख्यकर्मचारी ब्लास्तुस केँ अपना पक्ष मे कऽ कऽ हुनका माध्यम सँ राजा लग मेल करबाक प्रस्ताव रखलक, कारण ओकरा सभक भोजनक वस्तु हेरोदक देश सँ अबैत छलैक।
21
निश्चित कयल दिन अयला पर राजा हेरोद राजसी वस्त्र पहिरने ओकरा सभक सामने सिंहासन पर बैसलाह और भाषण देलनि।
22
भाषण सुनि लोक सभ जोर-जोर सँ प्रशंसा करऽ लागल जे, “ई तँ मनुष्य नहि, देवते बाजि रहल छथि!”
23
एहि पर परमेश्वरक स्वर्गदूत हेरोद केँ ओही क्षण कष्ट सँ पीड़ित कऽ देलथिन, कारण जे स्तुति-प्रशंसा परमेश्वर केँ देबाक चाही से ओ नहि देलथिन। और हुनका देह मे पिलुआ फड़ि गेलनि और ओ मरि गेलाह।
24
मुदा परमेश्वरक वचन पसरैत गेल और लोक सभ मे ओकर प्रभाव बढ़ैत गेल।
25
एम्हर बरनबास और साउल दान पहुँचाबऽ वला काज पूरा कऽ कऽ यरूशलेम सँ घूमि अयलाह आ अपना संग यूहन्ना जिनकर दोसर नाम मरकुस छलनि, तिनको लेने अयलाह।
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