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1
जदी वीं मन्दर मेंऊँ निकळरिया हा, तो ईसू के एक चेले क्यो, “गरुजी, देको ईं भाटा अन मेड़्या कतरी गजब की हे?”
2
ईं बात पे ईसू वाँने क्यो, “थूँ आ मोटी मेड़्या ने देकरियो हे, अटे एक भाटा पे दूज्यो भाटो टक्यो ने रेई, एक-एक भाटो हड़ा दिदो जाई।”
3
जदी वो जेतुन का मंगरा पे मन्दर का हामे बेटो हो, तो वींने पतरस, याकूब, यहुन्ना अन अन्दरियास एकेला में जान पूँछ्यो,
4
“माने बता, ओ हारोई कदी वेई? जदी ओ हारोई पूरो वेई, तो वींको निसाण कस्यान वेई?”
5
ईं बात पे ईसू क्यो, “हूँस्यार रेवो, कुई थाँकाऊँ छळ ने कर लेवे।
6
मारा नामऊँ घणा जणा आई अन थाँने बताई के, ‘मूँ मसी हूँ’, अन अस्यान वीं घणा जणा ने धोको देई।
7
जद्याँ थें लड़ायाँ अन लड़ायाँ का बारा में हुणो, तो घबराज्यो मती। अस्यान तो वेई, पण ओ अन्त कोयने हे।
8
एक देस दूजाँ देसऊँ लड़ेलो अन एक राज दूजाँ राज पे चड़ई केरी। कई जगाँ भूकम आई अन काळ पेड़ी। अस्यान दुक अन पिड़ा की सरुआत वेई।
9
“आपणाँ वाते खुद हेंचेत रेवो। वे मनक थाँने पकड़न कोरट में पेस केरी अन पछे थाँने वाँका परातना घर में मारी कुटी अन मारा वाते थाँने हाकम अन राजा के आगे ऊबो वेणो पेड़ी। ईंऊँ थाँ वाँने मारो हव हमच्यार हुणा सको।
10
पण, अन्त आबा का पेल्याँ ओ जरूरी हे के, हारा देसा में मारा हव हमच्यार को परच्यार किदो जावे।
11
अन जदी वीं थाँने पकड़न थाँका पे मुकदमो चलाई, तो पेल्याँ ओ होच मत करज्यो के, थाँने कई केणो हे? वी टेम थाँने ज्यो बात बतई जाई, वाँ बात बोलणी। काँके बोलबावाळा थें कोयने, पण पुवितर आत्मा हे।
12
भई, भई ने धोकाऊँ पकड़ान मरवाई। बाप बेटा ने धोकाऊँ मरवाई, छोरा-छोरी आपणाँ बई-बापू का खिलाप ऊबा वेन वाँने मरवाई।
13
मारा वाते हारई जणा थाँकाऊँ दसमणी राकी। पण, ज्यो अन्त तक सेण करी, वो बंचायो जाई।
14
“तद्याँ थें ‘उजाड़ करबावाळी अबकी चिजाँ ने’, जटे ने वेणी छावे, वटे ऊबी देको। (भणबावाळा हमज ले ईंको कई मतलब हे) जदी ज्यो मनक यहूदियाँ देस में वेई, वींने मंगरा में भाग जाणो छावे।
15
ज्यो मनक आपणाँ घर की मेड़ी पे वेई, वे घर मयने जान कई भी चीज वाँके लारे लेबा का वाते टेम खराब ने करे।
16
अन ज्यो खेता में वेई, वो आपणाँ जब्बो लेबा के वाते घरे ने जावे।
17
वे लुगायाँ जी गरबवती वेई अन ज्याँके दूद पीता बाळक वेई, वाँका वाते वे दन घणा दुक भरिया वेई।
18
थें परातना करो के, ओ हारई हियाळा का दनाँ में ने वेवे।
19
काँके वाँ दनाँ में अस्यी अबकी टेम आई, जस्यी अबकी टेम परमेसर ईं धरती ने रची हे, वींका पेल्याँऊँ आज तईं ने अई अन ने कदी आई।
20
अन जदी परमेसर वाँ दनाँ ने कम ने किदा वेता, तो ईं धरती पे कुई ने बंच सकतो। पण, वाँ गण्या-चुण्या मनक का वाते, जाँने वणा चुण्या हे, वाँ दनाँ ने कम किदा हे।
21
“वाँ दनाँ जदी कुई थाँने केवे ‘देको, ओ हे मसी अन वो हे मसी।’ तो वाँका पे विस्वास मत करज्यो।
22
काँके जूटा मसी अन जूटा मनक परमेसर का आड़ीऊँ बोलबावाळा आई। वे अस्या अस्या गजब का परच्या बतई अन अस्या अचम्बा में नाकबा का काम करी के, वे सके तो वे परमेसर का चुण्या तका लोगाँ ने भी डापा में नाक देई।
23
ईं वाते थें हूँस्यार रेज्यो। ईं हारी बाताँ में थाँने बगतऊँ पेल्याँई बता दिदी हे।
24
“वाँ दनाँ दक-पीड़ा की बगत के पछे सुरज काळो पड़ जाई अन चाँदऊँ वींकी चाँदणी जाती रेई।
25
आकासऊँ तारा नीचे पड़बा लाग जाई अन आकास की हारी सगत्याँ हाल जाई।
26
तद्याँ लोग, मनक का पूत ने सगती अन घणी मेमा के लारे बादळा में आता तका देकी।
27
पछे वे आपणाँ हरग दुताँ ने खन्दाई अन वीं धरती की च्यारई दिसा मेंऊँ अन बादळा का खुणाऊँ आपणाँ गण्या-चुण्या लोगाँ ने अगेटा केरी।
28
“अंजीर का रूँकड़ा की ईं केणीऊँ हिक लेवो। जदी वाँकी डाळयाँ कँवळी वे जावे, अन वींपे कूँपळा फूटबा लागे, तो थें जाण जावो के, उनाळो आबा में हे।
29
अस्यानीस थें वे हारी बाताँ वेती देको, तो जाण जाज्यो के, अबे वाँ टेम भडे़ आगी हे, वो बगत चालूँ वेबा मेंईस हे।
30
मूँ थाँने हाँची केरियो हूँ के, ईं पिड़ीयाँ का मनकाँ के मरबा के पेल्याँई हारी बाताँ वे जाई।
31
धरती अन आकास टळ जाई, पण मारो बचन कदी ने टळी।
32
“वीं दन का बारा में किंने पतो ने हे, ने हरग का दुताँ ने अन ने परमेसर का पूत ने। बेस, बापू परमेसरई जाणे हे।
33
देको, हूँस्यार अन जागता रो, काँके थाँ ने जाणो हो के, वा बगत कदी आई।
34
ओ अस्यानीस हे, जस्यान कुई मनक कस्यी यातरा पे जातो तको आपणाँ नोकराँ ने आपणो घर हूँप जावे, अन हारा ने न्यारो-न्यारो काम हूँप दे अन चोकीदार ने ओ हुकम दे के, वो जागतो रेवे।
35
ईं वाते थें भी जागता रो, काँके थाँ ने जाणो हो के मालिक कदी आ जावे। हाँज पड़्या आई कन आदी रात को। कूकड़ो बोलबा की टेम कन दन उगाँ।
36
अस्यो ने वे जावे के, वो अणाचेत को आ जावे, अन थें हूँता तका मलो।
37
ज्यो मूँ थाँने कूँ हूँ, वो हाराऊँ भी केऊँ के, जागता रो।”
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