bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Marwari
/
Marwari Bible
/
Romans 7
Romans 7
Marwari Bible
← Chapter 6
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 8 →
1
हे विसवासी भाइयो, कांई थै कोनीं जांणौ, म्हैं उण लोगां ऊं कैह रियौ हूं जिकौ व्यवस्था नै जांणै है, की व्यवस्था रौ राज किणी मिनख माथै उण वगत तांई रैवैला, जैड़ी तांई वो जीवतौ है?
2
क्यूंकै ब्याव करयोड़ी लुगाई व्यवस्था रै अनुसार अपणै घरधणी रै जीते जी उण ऊं बंधीयोड़ी है, पण जे धणी मर जावै, तो वां ब्याव री व्यवस्था ऊं छूट जावै है।
3
जे धणी रै जीते जी वां किणी दूजै मिनख री हो जावै, तो वां व्यभिचारणी कहीजै ला, पण जे धणी मर जावै, तो वां उण व्यवस्था ऊं छूट गी, एठै तांई की जे किणी दूजै मिनख री हो जावै, तौभी व्यभिचारणी नीं ठैरैला।
4
व्यौंही हे म्हारै भाइयो, थै भी मसीह री देह रै जरियै व्यवस्था रै लियै मरयोड़ा बणग्या, की उण मसीह रा हो जाओ, जिकौ मरयोड़ौ में ऊं जी उठयौ। ताकी म्हौ परमेसर रै लियै फळ लाओ।
5
क्यूंकै जद म्हौ पुराणै मानखै स्वभाव में जी रिया हा, म्हौरी पापों री वासनाओ जिकौ व्यवस्था रै जरियै आई ही, म्हौरै अंगो ऊपर हावी ही। ताकी म्हौ ऐड़ा कांम करता हा जिणरौ फळ मौत ही।
6
पण जिणरै अधीन म्हौ हा उणरै लियै मरनै, व्यवस्था ऊं ऐड़ा छूट गिया, की पुराणी लिखित व्यवस्था ऊं कोनीं, बल्कि परमेसर री आतमा री नई रीति ऊं अपणै मालिक परमेसर री सेवा करौ हो।
7
तो म्हौ कांई कैवौ? कांई व्यवस्था पाप है? कदैई कोनीं! बल्कि बिना व्यवस्था रै म्हैं पाप नै कोनीं पिछांणतौ। व्यवस्था जे नीं कैवती, की लालच मत कर तो म्हैं लालच नै जांणतौ ही कोनीं।
8
पण पाप नै मौकौ पायनै आग्या रै जरियै म्हारै में सगळै तरैह रौ लालच पैदा कियो, क्यूंकै बिना व्यवस्था रै पाप मुड़दो है।
9
एक वगत म्हैं बिना व्यवस्था रै ही जीवतौ हो, बल्कि जद व्यवस्था रौ आदेस आयौ तो पाप जीवन में भर आयौ, अर म्हैं मर गियौ।
10
वोहीज व्यवस्था रौ आदेस जिकौ जीवन देवण रै लियै हो, म्हारै लियै मौत ले आयौ।
11
क्यूंकै पाप नै मौकौ पायनै उणै उणीज व्यवस्था रै आदेस रै जरियै म्हनै बहकायो, अर उणीज रै जरियै म्हनै मार भी दियौ।
12
इण तरैह व्यवस्था पवितर है। अर आदेस पवितर, धरमी अर उतम है।
13
तो पछै कांई इणरौ ओ अरथ है, की जिकौ उतम है, वोहीज म्हारी मौत रौ कारण बण्यौ? कदैई कोनीं। बल्कि पाप उण उतम रै जरियै म्हारै लियै मौत रौ इण वास्तै कारण बण्यौ की पाप नै पिछांणयौ जा सकै। अर व्यवस्था रै आदेस रै जरियै पाप भयानक पाप पूरौ दिखायौ जा सकै।
14
म्हौ जांणौ हो, की व्यवस्था तो आत्मिक है, पण म्हैं सारीरिक अर पाप रै हाथ बिकयोड़ौ हूं।
15
जिकौ म्हैं करूं हूं उणनै नीं जांणूं, क्यूंकै जिकौ म्हैं चावूं हूं वो नीं किया करूं, पण जिण ऊं म्हैं घिरणा आवै है वोहीज करूं हूं।
16
अर म्हैं वोहीज करूं हूं जिकौ म्हैं नीं करणौ चावूं, तो म्हैं स्वीकार करूं हूं की व्यवस्था उतम है।
17
तो ऐड़ी दसा में उणरौ करणैवाळौ म्हैं कोनीं, बल्कि पाप है, जिकौ म्हारै में बसयोड़ौ है।
18
क्यूंकै म्हैं जांणूं हूं की म्हारै में मतलब म्हारै सरीर में कोई बड़िया चीज वास कोनीं करती। बड़िया कांम करनै इछा तो म्हारी है, पण बड़िया कांम म्हारै ऊं कोनीं होवै।
19
क्यूंकै जिकौ बड़िया कांम म्हैं करणौ चावूं हूं, वो तो नीं करतौ, बल्कि जिकौ म्हैं नीं करणौ चावूं, वो इज भूंडा कांम म्हैं करूं हूं।
20
पण म्हैं वोहीज करूं हूं जिणरी इछा कोनीं करूं, तो उणरौ करणैवाळौ म्हैं नीं हूं, बल्कि वो पाप है जिकौ म्हारै में बसयोड़ौ है।
21
इण तरैह म्हैं ओ नियम पाऊं हूं की जद भलाई करनै री इछा करूं हूं, तो बुराई नै ही पाऊं हूं।
22
क्यूंकै म्हैं अपणी अन्तरात्मा ऊं तो परमेसर री व्यवस्था ऊं घणौ खुस रैवूं हूं।
23
पण म्हनै म्हारै अंगो में दूजै तरैह रौ नियम दिखाई दैवै है, जिकौ म्हारी बुद्धि री व्यवस्था ऊं लड़ै है, अर म्हनै पाप री व्यवस्था रौ बंदी बणा लेवे है जिकौ म्हारै अंगो में है।
24
म्हैं कैड़ौ अभागो मिनख हूं। म्हनै इण मौत रै सरीर ऊं कुण छुड़ावैला?
25
म्हौरै परभु यीसु मसीह रै जरियै परमेसर रौ धन्यवाद हो। इण वास्तै म्हैं खुद बुद्धि ऊं तो परमेसर री व्यवस्था रौ सेवक, पण सरीर ऊं पाप री व्यवस्था रौ गुलाम हूं।
← Chapter 6
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 8 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16