bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
Awadhi
/
2 Chronicles 7
2 Chronicles 7
Awadhi
← Chapter 6
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 8 →
1
जब सुलैमान पराथना पूरी किहस तउ अकासे स सागी उतरी अउर उ होमबलि अउर बलियन क बारेस। यहोवा क तेज मन्दिर क भर दिहस।
2
याजक यहोवा क मन्दिर मँ नाहीं जाइ सकत रहेन काहेकि यहोवा क तेज ओका भरि दिहे रहा।
3
इस्राएल क सबहिं लोग आकासे स आगी क उतरत लखेन। इस्राएल क लोग मन्दिर पइ भी यहोवा क तेज क लखेन। उ पचे अपने चेहरे क चबूतरे क भुइंया तलक निहुराएन। उ पचे यहोवा क उपासना किहन अउ ओका धन्यवाद दिहन। उ पचे गाएन, “यहोवा भला बा, अउर ओकर दाया सदा रहत ह।”
4
तब राजा सुलैमान अउ इस्राएल क सबहिं लोग बलि यहोवा क समन्वा चढ़ाएन।
5
राजा सुलैमान बाईस हजार बर्धा अउ एक लाख बीस हजार भेड़िन भेंट किहस। राजा अउ सबहिं लोग परमेस्सर क मन्दिर क समर्पित किहेस।
6
याजक आपन कार्य करइ बरे तइयार खड़े रहेन। लेवीबंसी भी यहोवा क वाद्य यंत्र क संग खड़े रहेन। इ सबइ यंत्र राजा दाऊद क जरिये यहोवा क धन्नवाद देइ बरे बनाए गए रहेन। याजक अउ लेवीबंसी कहत रहेन, “यहोवा क स्तुति करा काहेकि ओकर पिरेम हमेसा रहत हीं।” याजकन लेवीबंसियन क दूसरी कइँती खड़े रहेन।, तउ याजकन अपनी तुरहियन बजाएन अउर इस्राएल क सबहिं लोग खड़े रहेन।
7
सुलैमान यहोवा क मन्दिर क समन्वा वाले आँगन क मध्य हींसा क भी पवित्तर किहस। इ उहइ जगह अहइ जहाँ सुलैमान होमबलि अउर मेलबलि क चर्बी चढ़ाएस। सुलैमान आँगन क बीच क हींसा काम मँ लिहस काहेकि काँसे क वेदी पइ जेका सुलैमान बनाए रहा, सारी होमबलि, अन्नबलि अउ चर्बी नाहीं आइ सकत रही काहेकि भेंटन बहोत जियादा रहिन।
8
सुलैमान अउ इस्राएल क सबहिं लोग सात दिना तलक दावतन क उत्सव मानएन। सुलैमान क संग लोगन क एक बहोत बड़ा समूह रहा। उ सबइ लोग उत्तर दिसा क हमथ नगर क प्रवेस दुआर अउ दक्खिन क मिस्र क झरनन जइसे सुदूर पहँटन स आए रहेन।
9
वेदी क पवित्तर करइ, अउर कुटीर क त्यौहार क सात दिना क उत्सव मनाइ क पाछे, उ पचे अठएँ दिन एक ठु पवित्तर सभा किहे रहेन।
10
सातवें महीने क तेईसवे दिन सुलैमान लोगन क वापस ओनके घरे पठइ दिहस। लोग बड़े खुस रहेन अउर ओनकर हिरदइ आनन्द स भरा रहा काहेकि यहोवा दाऊद, सुलैमान अउर अपने इस्राएल क लोगन क बरे बहोत भला रहा।
11
सुलैमान यहोवा क मन्दिर अउ राजमहल ज पूरा कइ लिहस। सुलैमान यहोवा क मन्दिर अउर अपने आवास मँ जउन कछू करइ क जोजना बनाए रहा ओहमाँ ओका कामयाबी मिली।
12
तब यहोवा सुलैमान क लगे राति मँ परगट भवा। यहोवा ओहसे कहेस, “सुलैमान, मइँ तोहार पाराथना सुनेउँ ह अउर मइँ इ जगह क अपने बरे मन्दिर क रूप मँ भेंट चढ़ावइ बरे चुनेउँ ह।
13
जब मइँ अकास क बंद करत हउँ तउ बरखा नाहीं होत या मइँ टिड्डियन क आदेस देत हउँ कि उ सबइ फसल क खाइ जा या अपने लोगन मँ बेरामी पठवत हउँ,
14
अउर मोरे नाउँ स गोहरावइ जाइवाले लोग जदि बिनम्र होतेन अउर पराथना करत हीं, अउर मोका हेरत हीं अउर अपने बुरे राहन स दूर हट जात हीं तउ मइँ सरग स ओनकर सुनब अउर मइँ ओनके पापन क छिमा करब अउर ओनके देस क नीक कइ देब।
15
अब, मोरी आँखिन खुली अहइँ अउर मोरे कान इ जगह पइ कीन्ह गइ पराथना पइ धियान देइहीं।
16
मइँ इ मन्दिर क चुनेउँ ह अउर मइँ एका पवित्तर किहेउँ ह जेहसे मोर नाउँ हिआँ सदा ही रहइ। हाँ, मोर आँखिन अउर मोर हिरदइ इ मन्दिर मँ सदा रही।
17
अब सुलैमान, जदि तू मोरे समन्वा वइसे ही रहब्या जइसे तोहार बाप दाऊद रहा, जदि तू ओन सबहिं क पालन करब्या जेनके बरे मइँ आदेस दिहेउँ ह अउर जदि तू मोर बिधियन अउ नेमन क पालन करब्या।
18
तब मइँ तोहका सक्तीसाली राजा बनाउब अउर तोहार राज्ज महान होइ। इहइ वाचा अहइ जउन मइँ तोहरे बाप दाऊद स कीन्ह अहइ। मइँ ओहसे काहे रहेउँ, ‘दाऊद, तू अपने परिवार मँ एक ठु अइसा मनई सदा पउब्या जउन इस्राएल मँ राजा होइ।’
19
“किन्तु जदि तू मोरे नेमन अउर आदेसन क नाहीं मनब्या जेनका मइँ दिहेउँ ह अउर तू दूसर देवतन क पूजा अउर सेवा करब्या, अउर ओकर समन्वा निहुरब्या,
20
तब मइँ इस्राएल क लोगन क अपने उ देस स बाहेर करब जेका मइँ ओनका दिहेउँ ह। अउर मइँ इ मन्दिर क जेका मइँ आपन नाउँ बरे पवित्तर बनाएउँ ह अस्वीकार कइ देब। मइँ इ मन्दिर क सबहिं रास्ट्रन बरे मज़ाक अउर सम्मानहीन बनाइ देब।
21
हर एक मनई जउन एकर पास स गुजरी इ प्रतिस्ठित मन्दिर देखिके चकित होइ जाई। उ पचे कहिहीं, ‘यहोवा अइसा भयंकर काम इ देस अउ इ मन्दिर क संग काहे किहस?’
22
तब लोग जवाब देइहीं, ‘काहेकि इस्राएल क लोगन यहोवा, परमेस्सर जेकरी आग्या क पालन ओनके पुरखन करत रहेन, ओकरी आग्या क पालन करइ स इन्कार कइ दिहस। उ ही परमेस्सर अहइ जउन ओनका मिस्र क बाहेर लइ आवा। किन्तु इस्राएल क लोग दूसर देवतन क अपनाएस। उ पचे मूर्ति रुप मँ देवतन क पूजा अउर सेवा किहस। इहइ कारण अहइ कि यहोवा इस्राएल क लोगन पइ ऍतना सब भयंकर घटित कराएस ह।’”
← Chapter 6
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 8 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36