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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1 Corinthians 12
1 Corinthians 12
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
हे विश्वासी भयों, पवित्र आत्मा का द्वारा ऊं मिलण वला वरदानों का बारा मा जु तुम ल मि बट्टी पूछि छा, मि चांदु छों तुम यांका बारा मा अच्छो के जांणा।
2
तुम जंणदा छा, कि तुम विश्वासी बनण से पैली कन जीवन ज्यूंदा छा, तुम ऊं बेजान मूर्तियों कि आराधना कन कु कई बातों का द्वारा प्रभावित हवे छा।
3
इलै मि तुम तैं चांदु छों कि तुम जणिल्या, कि जु कुई पिता परमेश्वर कि आत्मा कि अगुवाई बट्टी बुल्दो च, उ नि बुल्दो कि यीशु श्रापित च; पर पवित्र आत्मा ही च, अर पवित्र आत्मा का द्वारा ही उ बोलि सकद की “यीशु ही प्रभु च।”
4
बनि-बनि तरौं का वरदान छिनी, अर पिता परमेश्वर कि आत्मा ऊं सभि वरदानों तैं दींद।
5
अर अलग-अलग ढंग छिनी ज्यां बट्टी हम प्रभु की सेवा कैर सकदां, पर लोग एक ही प्रभु कि सेवा करदा छिनी।
6
पिता परमेश्वर का हमारा जीवन मा काम कना का अलग-अलग ढंग छिनी, पर यु उ ही पिता परमेश्वर च जु हम सभियूं का द्वारा काम करद।
7
पिता परमेश्वर ल हम सभियूं तैं एक दुसरा विश्वासी भैय-बैणयूं की मदद कनु कु वरदान द्ये, जु पवित्र आत्मा की हूजूरी तैं प्रगट करद।
8
पवित्र आत्मा एक मनिख तैं बुद्धि का द्वारा संदेश बुल्णु कु वरदान दींद, अर ऊई पवित्र आत्मा दुसरा मनिख तैं ज्ञान का द्वारा संदेश बुल्णु कु वरदान दींद।
9
उ एक मनिख तैं मसीह मा विश्वास कनु कु वरदान दींद; अर दुसरा मनिख तैं पवित्र आत्मा चंगाई कु वरदान दींद।
10
पवित्र आत्मा एक मनिख तैं चमत्कार का काम कने की शक्ति दींद; अर कै तैं भविष्यवाणी कु; अर कै तैं आत्माओं की परख, अर कै तैं भौत प्रकार कि भाषा बुल्ण; अर कै तैं कि भाषाओं कु मतलब बतांण कु।
11
पर यु सब प्रभावशाली काम उ ही एक आत्मा करदो, अर उ हर एक तैं यु क्षमता व्यक्तिगत रूप से बांटि दींद।
12
किलैकि जन कै मनिख की देह एक च अर वेका अंग भौत छिनी, भौत हूंण पर भि सभि मिल कै एक ही देह च उन के ही मसीह भि अर वे पर विश्वास कन वला विश्वासी भि एक ही छिनी।
13
किलैकि हम सभियूं मा क्य यहूदी, क्य यूनानी अन्यजाति, क्य दास, क्य स्वतंत्र एक ही आत्मा का द्वारा एक देह हूंणो कु बपतिस्मा ल्या, हम सभियूं ल वीं पवित्र आत्मा पै जै तैं हम सभि एक ही कटोरा बट्टी अंगूरों कु रस पिंदयां।
14
इलै कि हमारा देह मा एक ही अंग न, बल्कि भौत सा छिनी।
15
मणिल्या, जु खुट्टा बोला, कि मि हथ नि छौं इलै मि देह कु अंग नि छौं, त क्य वेको इन बुल्ण बट्टी उ देह कु अंग नि रौंद?
16
अर जु कन्दूड़ बोलु, “मि आंख नि इलै मि देह कु अंग नि छौं” त क्य वेको इन बुल्ण बट्टी उ देह कु अंग नि रौंद?
17
जु सैरा देह आंख ही हूंदी त सुनण कख बट्टी हूंद? जु सैरा देह कन्दूड़ ही हूंद त सुघंण कख बट्टी हूंद?
18
पर सचमुच मा पिता परमेश्वर ल हमारा देह का सभि अंगों तैं अपड़ी मनसा का अनुसार देह मा उन ही जगह द्ये।
19
जु एक ही अंग हो, त कुई देह नि होली?
20
इलै देह का कई अंग छिनी, फिर भि एक त एक ही च।
21
आंख हथ बट्टी नि बोलि सकदी, “मि तैं तेरी जरूरत नि च” अर न मुंड खुट्टा बट्टी बोलि सकदु, “मि तैं तेरी जरूरत नि च।”
22
पर देह का उ अंग जु दुसरों बट्टी कमजोर दिखयोदींनि, भौत ही जरुरी छिनी।
23
अर देह का जौं अंगों तैं हम कम आदरयोग्य समझदां ऊं तैं ही हम जादा आदर दींदयां; अर हमारा शोभाहीन अंग और भि भौत शोभयमान हवे जंदींनि, अर जौं अंगों तैं हम कम आदर का योग्य मंणदयां ऊं तैं सबसे जादा ध्यान ल कपड़ा पैरोदयां। इलै हम ध्यान से ऊं हिस्सों की रक्षा करदां जौं तैं नि दिखै जांण चयणु च, जबकि जादा आदरयोग्य हिस्सों तैं यु विशेष देखभाल की जरुरत नि हूंदी। इलै पिता परमेश्वर ल देह तैं यु हिसाब से बणै कि ऊं हिस्सों तैं जादा सम्मान अर देखभाल दिये जौं जौको महत्व कम च।
25
पिता परमेश्वर ल इन इलै कैरी, कि देह का कुछ अंगों मा एक-दुसरा का दगड़ी झगड़ा नि हो, पर ऊं तैं एक-दुसरा कु चिंता भि हूंण चयणी च।
26
जु देह कु एक अंग दुःख पौंदु त वे दगड़ी देह का सभि अंग भि दुखी हूंदींनि। जु कै एक अंग कु सम्मान बढ़दो च त सभि अंग भि आनन्द मणौंदींनि।
27
इन कै तुम सभि मिलिके मसीह की देह छा अर तुम मा बट्टी हरेक वेका देह का अंग छा।
28
अर पिता परमेश्वर ल मण्डलि मा अलग-अलग आदिम नियुक्त करयां छिनी; पैला प्रेरित, दुसरा परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वलो, तिसरा शिक्षक, फिर चमत्कार का काम कन वला, फिर चंगा कन वला, अर उपकार कन वला, अर प्रधान, अर बनि-बनि भाषा बुल्ण वला।
29
कुछ ही छिनी जु प्रेरित छिनी, अर कुछ ही छिनी जु परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वला छिनी, अर कुछ ही छिनी जु उपदेशक छिनी, अर कुछ ही छिनी जु चमत्कार का काम कन वला छिनी।
30
कुछ ही छिनी, जौं तैं चंगा कनु कु वरदान मिल्युं च, कुछ ही छिनी जु बनि-बनि किस्मै की भाषा बुल्दींनि।
31
कुछ ही छिनी जु अनुवाद करदींनि, अर तुम तैं बड़ा सा बड़ा वरदानों कि इच्छा कन चयणी च, पर मि तुम तैं अर भि सबसे बढ़िया ढंग बतौंदु।
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