bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Garhwali
/
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
/
1 Corinthians 7
1 Corinthians 7
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
← Chapter 6
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 8 →
1
अब ऊं सवालों का बारा मा जु तुम ल अपड़ी चिठ्ठियूं मा पूछि छा, हम कु क्य यु ठिक च कि ब्यो नि कैरा?
2
पर व्यभिचार की अजमैश मा पुडण से बढ़िया च, कि हर आदिम ब्यो कैरी ल्यो, अर अपड़ी जनन दगड़ी वफादार रौ।
3
आदिम अपड़ी जनन कु अपड़ो कर्तव्य पूरो कैरो; अर उन ही जनन भि अपड़ा आदिम कु कर्तव्य पूरा करे।
4
जनन तैं अपड़ी देह पर अधिकार नि च, पर वेका आदिम कु अधिकार च; उन ही आदिम तैं भि अपड़ी देह पर अधिकार नि च, पर जनन कु अधिकार च।
5
तुम एक-दुसरा बट्टी अलग नि रावा; पर भस कुछ बगत कु अपड़ी आपसी बातचित ल कि पिता परमेश्वर बट्टी प्रार्थना कु छुट्टी मिलो, अर तब फिर साधारण ब्यो का आपसी संबंध तैं फिर से शुरू कैरा; कि शैतान अनैतिक जीवन जींणु कु तुम्हरी अजमैश नि कैरो, जु उ अजमैश करलो त तुम अपड़ी इच्छाओं तैं काबू मा नि रखि सकला।
6
पर मि यु जु बुल्द मेरी एक सलाह च, न कि आज्ञा।
7
मि यु चांदु कि, जन मिल ब्यो नि कैरी, उन ही सभि मनिख हूंनु; पर हर मनिख तैं पिता परमेश्वर की तरपां बट्टी विशेष वरदान मिलयां छिनी; पिता परमेश्वर कुछ लुखुं तैं ब्यो कनु कु वरदान दींद अर कुछ तैं ब्यो नि कनु कु वरदान दींद।
8
ब्यो नि कन वलो तैं अर विधवाओं तैं मेरी सलाह य च, कि उ मि जन ब्यो नि कैरा त ऊंकु यु उत्तम च।
9
पर जु उ आत्म-संयम नि रखि साका, त ब्यो कैरा; किलैकि ब्यो कन कमुकता कन से अच्छो च।
10
जौं कु ब्यो हवे गै, ऊं तैं मि न, पर प्रभु आज्ञा दींद, कि जनन अपड़ा आदिम से तलाक दे के अलग नि हो।
11
(अर जु तलाक दे के अलग भि हवे जु, त बगैर दुसरो ब्यो करयां रौ; या अपड़ा आदिम बट्टी फिर मेल कैरी ल्यो) अर न आदिम अपड़ी जनन तैं तलाक द्यो।
12
पर अब या प्रभु की आज्ञा नि च, पर मि वेका विश्वास कन वला लुखुं तैं बुल्ण चांणु छो, जौको ब्यो विश्वास नि कन वला लुखुं दगड़ी हवे गै; जु कै मसीह भैय की जनन मसीह पर विश्वास नि करदी अर वे दगड़ी रौंण चांदी, त उ आदिम वीं जनन तैं तलाक नि द्यो।
13
अर जीं जनन कु आदिम विश्वास नि रखद हो, अर उ वे दगड़ी रौंण मा खुश हो; उ अपड़ा आदिम तैं तलाक नि द्यो।
14
किलैकि जु तुम एक विश्वासी जनन छा जु अविश्वासी आदिम दगड़ी रौंदां, त तुम्हरो आदिम भि तुम्हरा विश्वासी हूंणा का कारण प्रभु कु च; अर जु तुम एक इन विश्वासी आदिम छा, जु अविश्वासी जनन दगड़ी रौंदो, त व जनन भि विश्वासी हूंणा का कारण प्रभु की च। जु यु सच नि हूंद कि अविश्वासी आदिम अर जनन पिता परमेश्वर का छिनी, त ऊंका बच्चा भि पिता परमेश्वर का नि हूंदा अर अशुद्ध हूंदा। पर अब तुम्हरा बच्चा भि पिता परमेश्वर का छिनी।
15
पर जु आदिम विश्वास नि करद, अर जु उ तलाक दे के अलग हूंण चौ, त वे तैं अलग हूंण द्या, जब इन हूंद त, विश्वासी वे ब्यो का सम्बंध बट्टी छुट्टी जांद, तब उ बंधन मा नि छिनी; पर पिता परमेश्वर ल त हम तैं मेल-मिलाप कु बुलै।
16
हे जननों तुम तैं याद रौंण चयणु च कि तुम्हरा कारण तुम्हरा आदिम भि बची जां अर हे आदिमों तुम तैं भि याद रौंण चयणु च, कि तुम्हरा कारण तुम्हरी जनन भि बची जां।
17
जु मि बुल्णु छों वेको मतलब यु च; कि, हरेक आदिम तैं वीं स्थिति मा बणयूं रौंण चयणु च, जै तैं पिता परमेश्वर ल मसीह पर विश्वास करदी बगत द्ये छै; उन ही उ चलो; अर मि सभि मण्डलियों मा इन ही ठैरांदु।
18
एक उदाहरण कु, जु कुई यहूदी प्रभु यीशु पर विश्वास करदो, त वे तैं अपड़ा यहूदी हूंणै की पहचाण छुड़णै की जरूरत नि च; अर उन ही जु कुई अन्यजाति का मनिख यीशु मसीह पर विश्वास कैरो त वे तैं यहूदी बनण कु खतना कनै की जरूरत नि च।
19
कै कु खतना हवे या नि हवे यां बट्टी कुई फर्क नि पुड़दो, पर पिता परमेश्वर की आज्ञाओं तैं मनणु भौत जरूरी च।
20
हर एक मनिख जीं दशा मा बुलै गै हो, वीं ही दशा मा रौ।
21
जु तुम दास की दशा मा बुलै ग्यां, त चिन्ता नि कैरा; पर जु तुम आजाद हवे साका, त इन ही काम कैरा।
22
किलैकि जु दास की हालत मा पिता परमेश्वर ल चुणि अर बुलै, त उ एक आजाद आदिम का जन च किलैकि प्रभु यीशु ल वे तैं वेका पापों बट्टी मुक्त कैरेले, अर उन ही जु आजादी की दशा मा बुलै गै, उ मसीह का दास बंणि गैनी।
23
पिता परमेश्वर ल तुम कु एक बड़ी कीमत चुकै के छुड़ै, मनिख्युं का दास नि बणा पर पिता परमेश्वर का दास बणा।
24
हे विश्वासी भयों, जु कुई जै भि दशा मा बुलै गै, उ वीं ही दशा मा पिता परमेश्वर का दगड़ी रौ।
25
अणबिवाकों नौंनियों का बार मा प्रभु की कुई भि आज्ञा मि तैं नि मिली, पर पिता परमेश्वर ल अपड़ी दया का अनुसार मि तैं ज्ञान द्ये, जै पर विश्वास किये जै सकद अर मि अपड़ी सलाह दींदु।
26
किलैकि यूं दिनों मा हर जगह विश्वासियों कु मुश्किल चीज हूंणी छिनी, मि तैं लगद कि तुम तैं इन कन ठिक च, कि अणबिवाकों लुखुं तैं मि यु सलाह दींणु छों कि उ अणबिवाक ही रा।
27
जु कै कु ब्यो हुयुं च अर वेकी जनन च, त वीं बट्टी तलाक ले के अलग हूंणो कु कोशिश नि कैर; अर जु तेरु ब्यो नि हवे अर जनन नि च, त जनन की खोज नि कैर।
28
पर जु तुम्हरो ब्यो हवे भि जौं, त पाप नि च; अर जु अणबिवाक नौंनि कु ब्यो करे जौं त कुई पाप नि च; ब्यो हुयां लुखुं तैं ईं दुनिया मा अपड़ा जीवन मा दर्दनाक चीजों कु अनुभव कन पुड़लो अर मि नि चांदु कि तुम यूं मुशीबतों मा पोड़ा।
29
हे विश्वासी भयों, मि बुल्दो कि, ईं दुनिया मा हम मा जादा बगत नि च, यु कारण की तुम्हरी जनन च या नि च, यांका बारा मा जादा परेशान नि व; पर प्रभु की सेवा कना का बारा मा सुचणां रा।
30
जु लोग रूंदा छिनी या जु लोग खुश छिनी या जु लोग अफ कु चीजों तैं खरीद दींनि ऊं तैं यूं सभि चीजों का बारा मा जादा चिंता नि कन चयणी च (किलैकि यु सभि बातों बट्टी तुम प्रभु की सेवा कनु कु भूली जैला)
31
अर ईं दुनिया मा जु कुछ भि हम म च, हम तैं वे तैं जादा कीमती नि समझण चयणु च, किलैकि उ सब ईं दुनिया मा जादा लम्बा बगत नि चललो।
32
मि चांदु, कि तुम यु जीवन का रोज का मसलों का बारा मा चिंता नि कन पोडो, अणबिवाक आदिम, पिता परमेश्वर की सेवा कन कै कैरो अर प्रभु तैं कन कै खुश रखो, ईं बातों की चिन्ता मा रौंदो।
33
पर जौं कु ब्यो हुयुं च उ मनिख दुनिया की बातों की चिन्ताओं मा रौंदो, कि अपड़ी जनन तैं कन कै खुश रखो।
34
अणबिवाक अर जूंको ब्यो हुयुं च द्वीयूँ मा भेद च; अणबिवाक प्रभु की सेवा कन कै कैरो ईं बात कि चिंता मा रौंदो, कि उ देह मा अर आत्मा द्वीयूँ मा पवित्र हो, पर जूंको ब्यो हुयुं च उ सांसारिक चिन्ताओं मा रौन्दींनि, कि व अपड़ा आदिम तैं कन कै खुश रखो।
35
मि यु बात तुम्हरा भलै कु बुल्णु छों, न कि तुम तैं फसांणु कु, पर जन की ठिक च; कि तुम एक मन हवे के प्रभु की सेवा मा लगयां रां।
36
जु कै तैं इन लगौ कि, उ अपड़ी नौंनि का ब्यो कन मा अबेर कना का कारण वीं नौंनि दगड़ी अन्यो कनु च, किलैकि वींकी उम्र जादा हवे गै, उ उन ही कैरो जु वे तैं ठिक लगद, अर वीं तैं ब्यो कन द्यो, यु कुई पाप नि च।
37
पर जु उ अपड़ा मन मा फैसला करद, कि वेकी नौंनि कु ब्यो नि कन बढ़िया च, अर कैल भि वे तैं इन कन कनु कु मजबूर नि कैरी, त वेमा उन कनु कु अधिकार च जु वेल तय करूं च। अर इलै जु उ वीं तैं अणबिवाक रखणों कु फैसला करद, त उ (पिता परमेश्वर की नजर मा) अच्छो काम कनु च।
38
त जु अणबिवाक नौंनि कु ब्यो करद, त उ ठिक करद अर जु ब्यो नि करद, उ भि ठिक करद।
39
जब तक कैं जनन कु आदिम ज्यूँदो रौंदु, तब तक व वे दगड़ी बंधन मा बंधि च, पर जु वीं कु आदिम मोरि जौं, त व जै दगड़ी चौ ब्यो कैरी सकदी च, पर भस वे बट्टी जु प्रभु मा विश्वास करदु हो।
40
पर जु व दुबरा ब्यो नि करदी, त मेरा विचारों मा व धन्य च, अर मि समझदु, कि जब मि तुम बट्टी यु बुल्द त मि पिता परमेश्वर का आत्मा का द्वारा तुम तैं सलाह दींणु छो।
← Chapter 6
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 8 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16