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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Mark 1
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
परमेश्वर कु नौंनो यीशु मसीह क बारा मा शुभ सन्देश की शुरुवात इन कै हुंद
2
जन कि यशायाह परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वला कि किताब मा लिख्युं च “कि देख, मि अपड़ा दूत तैं तेरु अगनैं भिजणु छौं जु त्वे कु बट्टो सुधारुलो।
3
एकांत जंगल मा एक आदिम की पुकरणे की आवाज सुणौंणी च कि प्रभु कु अपड़ो मन तैयार कैरा वेको बट्टा तैं तैयार कैरा, अर वेकी सड़क तैं सीधी कैरा।”
4
यूहन्ना जु एकांत जंगल म बपतिस्मा दींद अर पापों कि माफी कु अर पापों का रस्ता बट्टी मन फिराव को बपतिस्मा कु प्रचार करदो छो ज्यांला परमेश्वर पापों की माफी दे साको।
5
अर भौत स लोग यहूदिया प्रान्त का अर यरूशलेम शहर का रौंण वला वेमा गैनी अर अपड़ा पाप तैं मांणी के यरदन गाड मा वे बट्टी बपतिस्मा लींनि।
6
यूहन्ना ऊंट का रोम का कपड़ा पैंरयुं अर अपड़ी कमर मा चमड़ा को पठुगा बंधि के रौंदु छो अर टिड्डी अर जंगल कु सौद खांदु छो।
7
अर यु प्रचार करदो छो, “कि मेरा बाद उ औंण वलो च, जु मि से भि जादा महान अर शक्तिशाली च मि त यु लैख भि नि छौं कि वेको दास बंणि के झुकि के वेका जुतों का तंणखा खोलु।
8
मिल त तुम तैं पांणी ल बपतिस्मा दींनि पर उ तुम तैं पवित्र आत्मा ल जु परमेश्वर कु आत्मा च बपतिस्मा दयाला।”
9
ऊं दिनों मा यीशु ल गलील जिला का नासरत नगर बट्टी ऐ के यरदन गाड मा ऐ के यूहन्ना बट्टी बपतिस्मा लींनि।
10
अर जब यीशु पांणी बट्टी भैर निकली के मथि ऐ त तुरंत वेल स्वर्ग तैं खुल्यूं अर आत्मा तैं कबूतर का रूप मा अपड़ा मथि औंण देखि।
11
अर या आकाशवाणी हवे, “अर परमेश्वर ल स्वर्ग बट्टी बोलि कि तु मेरू प्रिय नौंनो छै मि त्वे बट्टी भौत खुश छौं।”
12
यीशु मसीह का बपतिस्मा लींणा का बाद तब पवित्र आत्मा ल तुरंत वे तैं एकांत जंगल कि तरपां भेजि।
13
अर एकांत जंगल मा चालिस दिन अर रात तक शैतान (गुरो) ल वेकी अजमैश कैरी अर उ जंगली जानवरों का दगड़ी रै अर स्वर्गदूत वेकी सेवा-टहल करदां छा।
14
यूहन्ना का पकड़े जांणा का बाद यीशु ल गलील मा ऐ अर लुखुं तैं परमेश्वर का राज्य को शुभ सन्देश कु प्रचार कैरी।
15
अर बोलि, “बगत पूरो हवे गै, अर परमेश्वर को राज्य नजदीक ऐ गै मन फिरावा अर शुभ सन्देश पर विश्वास कैरा।”
16
एक दिन गलील जिला कि झील का छाला ही छाला जै के यीशु ल शमौन पतरस अर वेको भि अन्द्रियास तैं झील मा जाल डल्द देखि “किलैकि उ मछेर छा।”
17
अर यीशु ल ऊंकु बोलि, “मेरा पिछनैं चला मि तुम तैं शिष्य बणोलू अर मनिख्युं तैं शिष्य बंणौण सिखौलु जन तुम माछों तैं पकड़िदयां।”
18
उ अपड़ा कामों अर जालों तैं छोड़ी के वेका चेला बंणि के वेका पिछनै चलि गैनी।
19
अर जरा अगनैं बढ़ी कै अर यीशु ल देखि कि, जब्दी का नौंना, दुई भैय जै को नौं याकूब अर यूहन्ना छा ऊं तैं नाव मा जालों तैं सुधरद देखि।
20
वेल तुरंत ऊं तैं बुलै अर उ अपड़ा बुबा जब्दी अर मजदूरों तैं नाव मा जालों दगड़ी छोड़ी के वेका शिष्य बनण कु यीशु का पिछनै चलि गैनी।
21
यीशु अर वेका शिष्य कफरनहूम शहर मा ऐनी, अर यीशु तुरंत यहूदियों का विश्राम का दिन जु परमेश्वर कु पवित्र दिन यहूदियों का मिलणा का भवन मा जै के उपदेश दींण लगि गै।
22
अर लोग वेका उपदेश से चकित हवेनि किलैकि उ, ऊं तैं मूसा की व्यवस्था तैं सिखांण वला जन न, पर बड़ा अधिकार ल जन उपदेश दींदु छो।
23
अर तभि, यहूदियों का मिलणा का भवन मा एक आदिम छो, जै पर दुष्टात्मा लगिं छै।
24
वेल चिल्लै कै बोलि, “हे यीशु नासरी हम तैं त्वे बट्टी क्य काम? क्य तु हम तैं नाश कनु कु अयीं छै? मि त्वे तैं जंणदु छौं कि तु कु छै? तु परमेश्वर को पवित्र नौंनो छै जु परमेश्वर का तरपां बट्टी अईं छै।”
25
यीशु ल दुष्टात्मा तैं झिड़की के बोलि, “चुप रौ अर वेमा बट्टी दूर हो अर निकली जा।”
26
तब दुष्टात्मा वे तैं मरोड़ि के, अर ऊंची आवाज मा चिल्लै कै वे बट्टी दूर हवे के भैर निकली गै।
27
ईं बात पर सब लोग अचम्भो कैरी कै आपस मा एक दुसरा तैं पुछण लगि गैनी, “कि या क्य बात च? यु त कुई नयो उपदेश च जु बड़ा अधिकार का दगड़ी दुष्टात्मा तैं भि झिड़की दींणु च अर उ वेकी झिड़की मणदी छिन।”
28
अर वेको नौं तुरंत गलील का अमणी-संमणी का प्रदेश मा हर जगह फैली गै।
29
अर उ तुरंत यहूदियों का मिलणा का भवन मा बट्टी भैर निकली के, याकूब अर यूहन्ना का दगड़ी शमौन पतरस अर अन्द्रियास का घौर मा ऐनी अर याकूब, यूहन्ना भि वेका दगड़ी छा।
30
अर शमौन पतरस की सास जौर का कारण पड़ीं छै, अर तब चेलों ल यीशु मा बोलि कि शमौन कि सास बिमार च।
31
तब यीशु ल बिस्तर का संमणी मा जै के वीं को हथ पकड़ी के वीं तैं उठै अर वीं को जौर उतरी गै अर व ठिक हवे गै अर ऊं सभियूं कि सेवा पांणी कन लगि गै।
32
वे दिन शाम बगत जब की विश्राम को दिन बीति गै छो सूरज डुबि गै त वे नगर का भौत सारा लोग जु बिमार छा अर ऊं तैं, भि जौं पर दुष्टात्मा लगिं छै ऊं सभियूं तैं यीशु मा लैनि।
33
अर सैरा लोग शमौन अर अन्द्रियास का घौर का फाटक पर कठ्ठा हवेनि।
34
अर यीशु ल भौतों तैं जु कई किस्मै की बिमारियों से दुखी छा, ऊं तैं खूब कैरी अर भौत दुष्टात्मा तैं निकाली अर दुष्टात्माओं तैं बुल्ण नि दींनि किलैकि दुष्टात्मा, वे तैं पैछाणदी छै की उ परमेश्वर कु पवित्र नौंनो च।
35
अर सुबेर दिन निकलण से भौत पैली, यीशु उठि के निकली, अर एक एकांत जंगल मा गै जख उ पिता परमेश्वर बट्टी प्रार्थना कन लगि गै।
36
तब शमौन पतरस अर वेका दगड़ियों तैं पता चलि कि यीशु उख नि च त उ यीशु तैं खुज्योणु कु गैनी।
37
जब उ मिली त ऊंल वेमा बोलि, कि भौत लोग त्वे तैं खुज्योंणा छिन।
38
यीशु ल चेलों मा बोलि, “आवा हम तैं और भि कई इना उनै का गौं मा जांण चयणु च कि मि उख भि शुभ संदेश कु प्रचार कैरू किलैकि मि इलै निकलयूं छो।”
39
अर यीशु ल जै के गलील जिला का सभि जगहों की यात्रा कैरी जगह-जगह गैनी अर यहूदियों का मिलणा का भवन मा जै के प्रचार करदी अर दुष्टात्मा तैं निकलदी रैनी।
40
“एक दिन एक आदिम यीशु का संमणी ऐ, उ आदिम कोढ़ की बिमारी ल पीड़ित छो” वेमा बिनती कैरी, अर वेका अगनैं घुंडा टेकि के वेमा बोलि, “तु जु चै त मि तैं शुद्ध कैरी सकदी छै।”
41
यीशु ल वे पर तरस खै अर हथ रखि, अर वे तैं छवे के बोलि, “मि चांदु छौं कि तु खूब हवे जा।”
42
अर तुरंत वेको कोढ़ खूब हवे गै अर उ शुद्ध हवे गै।
43
तब वेल वे तैं सचेत कैरी के तुरंत विदा कैरी दींनि।
44
अर वेल बोलि, “देख, कै मा भि कुछ नि बोलि, कि मिल त्वे तैं ठिक कैरी पर जै के अफ तैं यहूदी याजक तैं दिखौ, अर अपड़ा कोढ़ बट्टी शुद्ध हूंणा का बारा मा जु कुछ मूसा ल ठैरे उ सब परमेश्वर तैं बलिदान चढ़ौ, कि ऊं पर गव्है हो।”
45
पर उ भैर जै के यूं बातों कु भौत सारा लुखुं मा प्रचार कन लगि गै, कि यीशु फिर खुलि के और शहरों मा नि जै सैकी, पर भैर एकांत जंगली जगहों मा रै अर सभि जगह बट्टी लोग वेमा औंणा रैनी।
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