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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Mark 8
Mark 8
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
एक दिन जब यीशु ल दिकापुलिस जै कु मतलब च दस शहर ऊख छो तब लोग वेमा ऐनी अर वेमा जमा हवे गैनी, अर ऊंमा कुछ खांण कु नि छो त वेल चेलों तैं अफ मा बुलै के ऊंमा बोलि
2
“मि तैं ईं भीड़ पर दया औंणि च किलैकि यु लोग तीन दिन बट्टी बराबर मि दगड़ी छिन अर अब ऊंमा खांण कु भि कुछ नि च।
3
जु मि ऊं तैं भुखी ऊंका घौर भेजि दयुलु त बट्टा मा थकि के उखि रै जाला किलैकि यूं मा बट्टी कुई-कुई त भौत दूर बट्टी अयां छिन।”
4
यीशु का चेलों ल वे तैं जवाब दींनि कुई भि इख सुनसान जंगल मा सब लुखुं कु रुट्टि कख बट्टी लौ कि उ तृप्त हवे जौनु?
5
यीशु ल ऊंमा पूछि, तुम मा कथग रुट्टि छिन ऊंल बोलि “सात।”
6
फिर वेल लुखुं तैं धरती पर भुय्यां बैठणैं कि आज्ञा दींनि अर उ बैठ गैनी यांका बाद ऊं तैं सात रुट्टियुं तैं अपड़ा हथ मा ले के परमेश्वर कु धन्यवाद कैरी कै रुट्टि तोड़ी के टुकड़ा वेल अपड़ा चेलों तैं दींनि अर ऊं लुखुं का अगनैं परोसि दींनि।
7
ऊंमा थोड़ा सी छुटा माछा भि छा तब यीशु ल परमेश्वर कु धन्यवाद कैरी कै रुठी अपड़ा चेलों तैं दींनि अर बोलि, यूं तैं लुखुं तैं बांटि द्या।
8
तब सभि लोग खै के तृप्त हवे गैनी अर चेलों ल फिर बाद मा बचयां रुटियों का टुकड़ों का सात ठुपरा कठ्ठा करिनी।
9
अर लोग चार हजार का लगभग छा तब यीशु ल ऊं तैं विदा कैरी फिर उ अर वेका चेला नाव पर चलि गै
10
यीशु तुरंत अपड़ा चेलों का दगड़ी नाव मा चढ़ी के दलमनूता जिला मा चलि गै।
11
फिर फरीसी वे दगड़ी बहस कन लगि गैनी अर वेमा सामर्थ का काम का चमत्कार कनु कु बोलि, अपड़ा अधिकार तैं साबित कनु कु हम तैं कुई स्वर्गीय चिन्ह देखो, किलैकि उ वे तैं फंसाण चांदा छा।
12
यीशु ल ऊंका अविश्वास का कारण निराश हवे के बोलि “यु बगत का लोग चमत्कार का काम का चिन्ह किलै खुज्योंदींनि? मि तुम मा सच बुल्णु छौं कि यु बगत का लुखुं तैं कुई चिन्ह नि दिये जालो।”
13
फिर वेल फरीसियों तैं छोड़ी के अपड़ा चेलों दगड़ी नाव पर चढ़ी के गलील झील का पल्या छाला पर चलि गै।
14
यीशु का चेला और रुट्टि लिजांण बिसरी गै छा अर नाव मा ऊंमा एक ही रुट्टि छै अर वीं रुट्टि का अलावा ऊंमा कुछ नि छो।
15
यीशु ल ऊं तैं चितै “देखा तुम फरीसियों का खमीर से अर राजा हेरोदेस का खमीर से सचेत रावा।”
16
उ आपस मा विचार कैरी कै बुल्ण लगि गैनी “वेल यु इलै बोलि, किलैकि हम मा रुट्टि नि च।”
17
यु जांणि के यीशु ल ऊंमा बोलि, “तुम आपस मा किलै यु विचार कना छा कि हम मा रुट्टि नि च? क्य तुम ल अपड़ा जिकुड़ा ढीट कैरेली की तुम अब तक नि समझ सक्यां?”
18
क्य तुमारा आँखा अंधा अर कंदूड़ बैहरा छिनी? क्य तुम तैं कुछ भि याद नि च।
19
जब मिल पाँच हजार लुखुं कु पाँच रुट्टि तोड़ी छै त तुम ल टुकड़ों का कथग ठुपरा कठ्ठा करिनी? चेलों ल यीशु मा बोलि कि, “बारह ठुपरा।”
20
अर जब चार हजार लुखुं कु सात रुट्टि छै त तुम ल टुकड़ो का कथग ठुपरा भोरिके उठै छा ऊंल यीशु मा बोलि सात ठुपरा।
21
तब यीशु ल ऊंमा बोलि, कि तुम अभि तक भि नि समझयां कि मि कु छो?
22
तब यीशु अर वेका चेला बैतसैदा नगर मा ऐ अर लोग एक अंधा आदिम तैं वेमा लैंनि अर वे बट्टी बिनती कैरी कि वे आदिम तैं छवे के ठिक कैरी दे।
23
यीशु वे अंधा आदिम का हथ पकड़ी के गौं का भैर लीगि अर वेका आँखों पर थूकी अर हथ रखिनि अर वेमा पूछि क्य तु कुछ दिखणी छै?
24
वेल आंखा उठै के बोलि, “मि मनिख्युं तैं देख सकदु छौं उ मि तैं जन कि डालो हिटणा होला उन दिखेंणा छिन।”
25
तब यीशु ल दुबारा वेका आँखों पर हथ रखिनि अर अंधा ल ध्यान से देखि कि उ खूब हवे गै अर सब कुछ साफ-साफ दिखण लगि गै।
26
यांका बाद यीशु ल वे तैं यु बोलि, कि अपड़ा घौर चलि जा अर “गौं का लुखुं तैं कुछ भि नि बतै।”
27
यीशु अर वेका चेला बैतसैदा शहर तैं छोड़ी के कैसरिया फिलिप्पी नगर का नजीक गौं मा चलि गैनी, बट्टा मा ऊंल अपड़ा चेलों मा पूछि, कि लोग मि कु क्य बुल्दींनि कि मि कु छो?
28
चेलों ल जवाब दींनि, कुछ लोग बुल्दा “तु यूहन्ना बपतिस्मा दींण वलो पर कुई-कुई सुचदींनि कि एलिय्याह परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्दो छो अर कुई-कुई पुणा जु परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वला मा बट्टी कुई एक भि बुल्दींनि।”
29
फिर यीशु ल ऊंमा पूछि, कि तुम मेरा बारा मा कि सुचदियां की मि कु छो, पतरस ल वे तैं जवाब दींनि, “तू परमेश्वर कु भिज्युं मसीह छै।”
30
तब यीशु ल ऊं तैं चितै के बोलि, कि मेरा बारा मा यु कै मा नि बुल्यां की मि मसीह छो।
31
तब यीशु अपड़ा चेलों तैं सिखौंण लगि गै, “कि मि मनिख का नौंनो तैं जरूरी च कि उ भौत दुःख उठौ अर लुखुं का दाना-सयाणों अर प्रधान याजक अर मूसा की व्यवस्था तैं सिखांण वलो वे तैं तुच्छ जांणि के मारि दयूंनु अर उ तीन दिन का बाद मौत से फिर ज्यूँदो हवे जालो।”
32
यीशु ल या बात अपड़ा चेलों मा साफ-साफ बोलि दींनि ईं बात पर पतरस वे तैं अलग मा लिजै के झिड़कंण लगि गै
33
पर यीशु ल पिछनै फरिकी के अपड़ा चेलों जनै देखि अर पतरस तैं झिड़की के बोलि, “हे शैतान मेरा संमणी बट्टी दूर हवे जा किलैकि तु परमेश्वर का तरपां बट्टी नि सुचणी बल्कि मनिख्युं कि तरपां बट्टी सुचणी छै।”
34
वेल भीड़ तैं अपड़ा चेलों का समेत अपड़ा संमणी बुलै के ऊंमा बोलि “जु कुई मेरा पिछनैं आंण चौ उ अपड़ी इच्छाओं तैं छोड़ी के अर अपड़ो सूली उठै के मेरा पिछनैं हवे जौं।
35
किलैकि जु कुई अपड़ो जीवन बचौण चौ त उ वे तैं गवांलू पर जु कुई मेरा बाना अर शुभ सन्देश का बाना अपड़ा आत्मा तैं गवांलू उ अनन्त जीवन तैं पालो।
36
ऊं कु कुई कीमत नि च जु मनिख सैरा दुनिया तैं पै ल्यो अर अपड़ा प्राण अर आत्मा तैं ख्वे द्यो।
37
क्य यु हवे सकद की मनिख अनन्त जीवन पांणु कु कुछ दे साको उ अपड़ा आत्मा का बदला क्य दे सकद?
38
जु कुई यु व्यभिचारी अर पापी जाति का बीच मा मि अर मेरी बातों सै शर्मालो मि मनिख कु नौंनो भि जब उ पवित्र स्वर्गदूत का दगड़ा मा अपड़ा बुबा बड़ी महिमा का प्रकाश मा आलो त तब उ भि ऊंको इन्कार कैरी दयालो।”
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