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Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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Mark 6
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
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1
तब यीशु कफरनहूम गौं बट्टी निकली के अपड़ा घौर नासरत नगर मा ऐ अर वेका चेला भि वेका पिछनै औंणा छा।
2
यहूदियों का विश्राम का दिन जु परमेश्वर कु पवित्र दिन यीशु यहूदियों का मिलणा का भवन मा परमेश्वर का वचन की शिक्षा दींण लगि गै अर भौत लोग भैंचक मा पड़ी गैनी अर बुल्ण बैठी गैनी कि येल यु बात कख बट्टी सिखिनि? अर यु ज्ञान अर चमत्कार का काम कनै की सामर्थ यु तैं कैल दींनि?
3
यीशु कु अपमान कैरी के ऊंल यु बोलि, क्य यु उ ही बड़ैइ नि च जु मरियम कु नौंनो अर याकूब अर योसेस अर यहूदा अर शमौन को बड़ो भैय नि च? अर क्य वेकी बैंण इख हमारा बीच मा नि रौदींनि? इलै ऊंल वे तैं अस्वीकार कैरी।
4
यीशु ल ऊंमा बोलि, कि परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वलो कु अपड़ा देश अर अपड़ा कुटुम्ब अर अपड़ा घौर तैं छोड़ी के ऊंको सब जगह आदर हूंद।
5
अर ऊंका अविश्वास का कारण, और कुछ सामर्थ का काम का चमत्कार नि कैर साकी यीशु ऊं पर हथ रख कर भस कुछ ही लुखुं तैं ठिक नि कैरी साकी।
6
अर यीशु ऊंका अविश्वास तैं देखि के भैंचक हवे के चारों तरपां गौं बट्टी दुसरा गौं मा वचन की शिक्षा दींद फिरी।
7
अर यीशु ल बारह चेलों तैं अफ मा बुलै के ऊं तैं द्वी-द्वी कैरी कै अलग-अलग गौं मा भिजण लगि गै अर ऊं तैं दुष्टात्मा तैं निकलण कु अधिकार दींनि।
8
अर यीशु ल ऊं तैं निर्देश दींनि कि बट्टा म कु भस लाठो रखा और न खांणु कु रुट्टि न झोला अर न पठुका मा पैसा।
9
पर जुत्ता पैरा अर द्वी कुर्ता नि रखा।
10
अर वेल यीशु ल ऊंमा बोलि, जब तुम कै घौर मा बुलै जैला त तब तक उख बट्टी विदा नि हुयां अर उखि ठैरंय्यां रावा।
11
जीं जगह का लोग तुम तैं स्वीकार नि कैरो अर तुम्हरी नि सुनणु त जब तुम वीं जगह तैं छोड़ी कै जा त उख बट्टी निकली कै अपड़ा खुट्टों की धूल उखि झाड़ी दियां ज्यां ल मिलण वली सजा का उ जु परमेश्वर दींद उ अफी जिम्मेदार छिन।
12
अर चेलों ल जै के लुखुं तैं प्रचार कैरी कि दुखी हवे के अर अपड़ा पाप बट्टी अर अपड़ा बुरा कामों से मन फिरावा अर परमेश्वर मा आवा।
13
अर भौत दुष्टात्मा तैं निकाली अर भौत बिमारों पर जैतून को तेल मळी के ऊं तैं खूब कैरी।
14
तब राजा हेरोदेस ल भि ऊंकी कामों की चर्चा सूंणि जु यीशु कनु छो किलैकि भौत लोग यीशु का बारा मा जंणदा छा अर वेका कामों की चर्चा कना छा, ऊंकु नौं फैली गै छो अर वेल बोलि, कि “यूहन्ना बपतिस्मा दींण वलो मुरयां लुखुं मा बट्टी ज्यूँदो हवे गै किलैकि वेमा चमत्कार कनै की सामर्थ च।”
15
बकि और लुखुं ल बोलि, “यु परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वलो पैली बगत को एलिय्याह च या परमेश्वर का तरपां बट्टी बुल्ण वलो मा बट्टी कुई एक च।”
16
राजा हेरोदेस ल यु सूंणि अर बोलि, “जै यूहन्ना बपतिस्मा दींण वलो को मुंड मिल कटवै छो उ ही मुरयां बट्टी ज्यूँदो हवे गै”
17
किलैकि हेरोदेस ल अपड़ा भैय फिलिप्पुस की जनन हेरोदियास का बानौं जैं बट्टी वेल ब्यो कैरेली छो अर मूसा का व्यवस्था का अनुसार भैय का ज्यून्दा हूंण पर वेकी जनन तैं रखण पापा छो ईं बात का कारण हेरोदेस का भितर यूहन्ना कु बैरी छो, तब वेला लुखुं तैं भेजि के यूहन्ना तैं पकड़वै के जेल मा डाळेली छो किलैकि यूहन्ना ल हेरोदेस कु बोलि, छो कि “अपड़ा भैय कि जनन तैं रखण त्वे कु ठिक नि च।”
19
इलै हेरोदियास यूहन्ना बट्टी बैर रखदि छै कि वे तैं मरवै डालो पर इन नि हवे सैकी
20
किलैकि राजा हेरोदेस यूहन्ना तैं धर्मी अर पवित्र मनिख जांणि के वे बट्टी डरदु छो अर वेकी रक्षा करद छो अर वेकी बातों तैं सूंणि के भौत घबरांदु छो फिर भि खुशी से वे तैं सुंणदु छो।
21
पर एक दिन जब ठिक बगत ऐ जबकि हेरोदेस अपड़ा जन्मदिन पर अपड़ा प्रधान अर सेनापतियों कु अर गलील जिला का बड़ा लुखुं तैं आमंत्रण दींनि।
22
त हेरोदियास की नौंनि भितर ऐ अर नाचि के हेरोदेस तैं अर वे दगड़ी बैठण वला मेहमनों तैं खुश कैरी तब राजा ल वीं नौंनि कु बोलि, “तु जु चांणि छै मि बट्टी मांग मि त्वे तैं दयुलु।”
23
अर वीं बट्टी सौं खै “मि अपड़ा राज्य कु अधा तक भि जु कुछ तु मि बट्टी चैलि मि त्वे तैं दयुलु।”
24
वीं ल भैर जै के अपड़ी ब्वे बट्टी पूछि मि क्य मांगो? त वीं ल बोलि, “वेकु बोल यूहन्ना बपतिस्मा दींण वला को मुंड काटि के मि तैं दे।”
25
व तुरंत राजा का संमणी भितर ऐ अर वे बट्टी बिनती कैरी कि “मि चांणु छौं कि तु अभि यूहन्ना बपतिस्मा दींण वला को मुंड काटि के एक थाळ मा मि कु मंगवै दे।”
26
तब यु सूंणि के राजा भौत उदास हवे पर अपड़ी सौं का कारण अर दगड़ा मा बैठण वला मेहमनों का कारण वीं कि बात से मना नि कैरी साकी।
27
तब राजा ल तुरंत एक सिपै तैं आज्ञा दे के भेजि कि वेको मुंड कटवै के लौ।
28
वेल जेल मा जै के वेको मुंड काटि अर एक थाळ मा रखि के लै अर वीं नौंनि तैं दे दींनि अर वीं नौंनि ल अपड़ी ब्वे तैं दींनि।
29
जब यूहन्ना का चेलों तैं यु पता चलि अर उ वेकी लांश तैं ली गैनी अर कब्र मा रखि।
30
जु प्रेरित भेजि छा उ यीशु मा वापिस ऐनी, अर यीशु का संमणी कठ्ठा हवे के जु कुछ ऊंल कैरी अर सिखै छो सब यीशु तैं बतै।
31
किलैकि भौत लोग आंणा-जांणा छा अर ऊं तैं खांणु खांण को भि बगत नि मिलणु छो यीशु ल ऊंमा बोलि, “आवा की एकांत जंगल मा जै के जरा आराम करुला।”
32
इलै उ नाव मा चढ़ी के एकांत जंगल मा चलि गैनी।
33
अर भौत लुखुं ल ऊं तैं जांण देखि के पछयांणी दींनि की उ कख जांणा छा अर सब शहरों बट्टी कट्ठा हवे के उख पैदल अटगिनि अर यीशु अर वेका चेलों से पैली पौंछि गैनी।
34
जब यीशु नाव बट्टी उतरी, वेला एक बड़ी भीड़ देखि अर ऊं पर तरस खै किलैकि उ ऊं ढिबरों का जन छा जौं को कुई देखभाल कन वलो नि छो अर उ, ऊं तैं पिता परमेश्वर का राज्य बट्टी भौत सैरी बात सिखांण लगि गै।
35
जब शाम हवे गै त वेका चेला वेमा ऐ के बुल्ण लगि गैनी “यु एकांत जंगल च अर रुमुक हवे गै।
36
इलै लुखुं तैं विदा कैरा कि चारों तरपां का गौं मा अर बस्तियों मा जै के अफ कु कुछ खांणु मोल ल्योनु।”
37
यीशु ल जवाब दींनि तुम ही ऊं तैं खांणु कु द्या खास चेलों ल यीशु मा बोलि क्य हम रुट्टि मोल ल्यां अर ऊं तैं खिलां? यु त द्वी सौ दिन की मजदूरी से भि जादा च।
38
यीशु ल चेलों तैं पूछि, कि तुम मा कथग रुट्टि छिनी ऊंल पता कैरी कै बोलि “पाँच रुट्टि छिन अर द्वी माछा भि छिनी।”
39
तब यीशु ल ऊं सभियूं तैं हरयां घास का झुण्डों मा बांटि कै बैठण कु बोलि।
40
उ सौ-सौ कैरी के अर पचास-पचास कैरी के झुण्ड मा बैठी गैनी।
41
यीशु ल ऊं पाँच रुट्टियुं तैं अर द्वी माछों तैं अपड़ा हथ मा लींनि अर स्वर्ग जनै देखि के परमेश्वर कु धन्यवाद कैरी अर रुट्टियुं तैं टुकड़ों मा तोड़ी-तोड़ी के चेलों तैं दींद गै कि उ लुखुं तैं परोसुनु अर उ द्वी माछा भि ऊं सभियूं मा बांटि दींनि।
42
अर सभि खै के तृप्त हवे गैनी
43
अर जब ऊं सभियूं ल खांणु खएली छो तब चेलों ल रुठी अर माछों का बारह भुरयां ठुपरा उठैनि।
44
जौंन रुट्टि खै उ पाँच हजार आदिम छा ज्यांमा औरत अर छुटा नौंना गिनती मा नि छिनी।
45
तब यीशु ल तुरंत अपड़ा खास चेलों तैं नाव पर चढ़ौणु कु मजबूर कैरी, कि उ ऊं बट्टी पैली छाला बैतसैदा नगर कु चलि जौनु जब तक कि ऊंल लुखुं तैं विदा नि कैरी उ पिछनै नि हटीनि।
46
लुखुं तैं विदा कैरी कै उ एक एकांत डांडा मा पिता परमेश्वर बट्टी प्रार्थना कनु कु गै।
47
अर जब रुमुक हवे त नाव गलील झील का बीच मा छै अर यीशु इखुली झील का छाला मा नाव बट्टी काफी दूर पर छै।
48
जब यीशु ल देखि कि उ नाव तैं चलौंद-चलौंद घबराणा छिनी किलैकि बथौं ऊंका उल्टी तरपां छो त राती खुलणा का बगत उ गलील झील पर चलदी ऊंका संमणी ऐ अर ऊं दगड़ा जांण चांणु छो।
49
पर चेलों ल यीशु तैं झील मा चलद देखि के सोचि कि उ दुष्टात्मा च अर चिल्लांण लगि गैनी
50
किलैकि सब यीशु देखि के घबरै गै छा पर यीशु ल तुरंत ऊं दगड़ी बात कैरी अर बोलि, “ढाडस बांधा: मि छौं डैरा न”
51
तब यीशु ऊंकी नाव पर चढ़ी अर बथौं थमि गै अर उ भैंचक मा पड़ि गैनी।
52
ऊंल यीशु की सामर्थ तैं देखि छो, जब वेल पाँच हजार लुखुं तैं खांणु खिलै छो पर रुट्टियुं का बारा मा नि समझी छा किलैकि ऊंका ह्रदय कठोर हवे गै छा।
53
जब यीशु अर वेका चेला गलील की झील मा अगनैं बढिनि त उ गन्नेसरत का छाला मा पौंछिनी अर नाव तैं छाला पर लगै।
54
जब उ नाव मा बट्टी उतरिनि त लोग तुरंत वे तैं पछयांणी के
55
ऊंका अमणी-संमणी का पूरा जिला मा जल्दी-जल्दी गैनी अर बिमारों तैं खाटुं पर डाली के जख-जख समाचार पै कि यीशु उख च ऊं बिमारों तैं लैंनि।
56
अर जख कखि यीशु गौं मा शहरों मा य बस्तियों मा जांदु छो लोग बिमारों तैं बजारों मा रखि के वे मा बिनती करदां छा कि उ, ऊं तैं अपड़ा कपड़ा का चौला तैं छूंण द्यो अर जथग वे तैं छूंदा छा उ सभि खूब हवे जांदा छा।
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