bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Garhwali
/
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
/
Mark 4
Mark 4
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 5 →
1
यीशु फिर गलील की झील का छाला पर उपदेश दींण लगि गै; अर इन बड़ी भीड़ वेका संमणी कठ्ठा हवे गै अर एक नाव पर चढ़ी के बैठी गै अर सैरी भीड़ झील का छाला पर सुखीं भूमि मा खड़ी छै।
2
अर उ, ऊं तैं मिसाल दे के भौत सैरी बात सिखौण लगि गै, अर अपड़ा उपदेश का द्वारा ऊंमा बोलि।
3
सूंणा एक बुतै कन वलो बीज बुतुणु कु अपड़ा पुंगडा मा गै।
4
अर बुतुण बगत कुछ बीज त बट्टा का किनारा पर छिलरेनी अर चलखुडों ल ऐ के ऊं बीजों तैं खै दींनि।
5
अर कुछ बीज पथरीली जगह पर छिलरेनी जख ऊं तैं जादा माटो नि मिली अर गैहरु माटो नि मिलण का वजह से जल्दी जमि गैनी।
6
अर जब सूरज की गर्मी निकली त फुके गैनी अर जौड़ा कमजोर हूंण का कारण जल्दी सूखि-सूखि गैनी।
7
अर कुछ झिबलांण मा छिलारेनी अर जख झिबलाड़न ल बढ़ि के ऊं तैं दबै दींनि अर उ बीज फलि नि सकिनि।
8
पर कुछ बीज अच्छी भूमि मा पोड़िन अर उ जमि के अर बड़ी के फलवन्त हवेनि कुई तीस गुणा कुई साठ गुणा अर कुई सौ गुणा फल लै।
9
अर वेल बोलि, जु कुई ईं बात तैं सूंणि सकदु जु मि बुल्ण छौं उ यु तैं समझ भि ल्यो।
10
जब यीशु यखुली रै गै त वेका दगड़ियों ल उ जु वेका नजीक छा अर ऊं बारहों चेलों समेत वे बट्टी ईं मिसाल का बारा मा पूछि की यांको क्य मतलब च।
11
यीशु ल ऊंमा बोलि तुम तैं त परमेश्वर का राज्य कि सचै की समझ दियीं च पर मि पर भरोसो नि रखण वलो कु सब बात मिसाल मा हूंदी।
12
इलै जु परमेश्वर का वचन मा लिख्युं च, उ देखि के दिखुनु पर ऊं तैं समझी नि सकुनु अर सूंणि के भि सुणुनु पर बींगी नि सकुनु इन नि हो कि उ अपड़ा पापों से फिरुनु अर माफ करे जलो।
13
फिर यीशु ल ऊंमा बोलि, जु तुम ईं मिसाल तैं नि समझयां? त फिर और मिसालों तैं कनि कै समझिला?
14
एक बीज बुतण वलो इन च जन लुखुं तैं परमेश्वर को वचन तैं बतौंण।
15
कुछ लोग वे बट्टा जन छिन जख कि वचन को बीज बुतै जांद उ यु छिनी कि जब ऊंल सूंणि त शैतान तुरंत ऐ के वे वचन तैं जु ऊंमा बुतै छो उठै के ले के चलि जांदु।
16
कुछ लोग उ ही पथरीली भूमि जन छिन ज्यां पर बीज गिरदो पर यु उ छिनी कि जु वचन तैं सूंणि के तुरंत खुशी से स्वीकार कैरी दींदीनी।
17
पर यु अपड़ा भितर दिल मा परमेश्वर का वचन तैं जौड़ा बट्टी पकड़ण नि दींदीनी एलै वचन कुछ ही दिनों कु रांदो यांका बाद जब ऊं पर क्लेश या बिपदा औंदि त तब उ तुरंत छोड़ी दींदिनि।
18
कुछ जु झिबलांण मा बुतै गैनी उ यु छिनी जु परमेश्वर को वचन तैं सूंणि दींनि।
19
पर धरती पर जीवन कि चिंता अर धन दौलत को धोखा ज्यां बट्टी उ प्रेम करदींनि अर कई चीजों तैं पाणै की चाह, परमेश्वर का वचन मा ए के दबै जांदी, अर ऊंका जीवन मा कुछ भि फैदा नि हूंद।
20
कुछ जु अच्छी जगह मा बुतै गैनी उ यु छिनी जु वचन तैं सूंणि के स्वीकार करदींनि अर फल लंदिनि कुई तीस गुणा डाला जन कुई साठ गुणा डाला जन अर कुई सौ गुणा डाला जन।
21
यीशु ल ऊंमा बोलि, क्य दिवडा तैं इलै बलदिन कि ब्यांरा तौळा या खाटि का तौळा रखे जौं? या फिर ज्यां ल कि ब्यांरा पर रखे जौं इलै की सब लुखुं तैं वेको उज्यला फूंजी साको
22
इन ही जु कुछ छिपयूं च प्रगट हवे जौं अर हर गुप्त बात प्रगट हवे जौं
23
यीशु ऊंमा बोलि, जु कुई ईं बात तैं सूंणि सकदु जु मि बुल्ण छौं उ यु तैं समझ भि ल्यो।
24
फिर यीशु ल ऊंमा बोलि, सचेत रावा कि क्य सुंणदा? जै नाप से तुम नपदा छा वे ही नाप से तुम कु भि नपे जालो अर तुम तैं बिजां दिये जालो।
25
जु कुई भि या बात समझणै की इच्छा रखद कि मि क्य बुल्णु छों, पिता परमेश्वर वे तैं और जादा समझणै की समझ दयालो; पर जै मा थोड़ा भि नि च वेमा बट्टी उ भि लिये जालो जु वेमा छैं च।
26
फिर यीशु ल बोलि, परमेश्वर कु राज्य इन च जन कि एक बीज बुतण वलो पुंगड़ा मा बीज बूतो।
27
हर राती सेइ जौं अर हर दिन मा बिंज्यु रौ अर काम कैरी अर उ बीज इन जमौ अर बड़ो कि उन ही जंणदु कि उ कब बढ़दो।
28
जमींन अफी इन फल लौंदि कि पैली अंकुर तब बलड़ा अर तब बलडों मा ग्यूं का बीज अर वे बट्टी तैयार बीज।
29
पर जब फसल पक्की जंदींनि तब उ तुरंत दथड़ो लगौंदु किलैकि लवैइ कु बगत ऐ गै।
30
फिर यीशु ल बोलि, “हम परमेश्वर का राज्य कि तुलना इन कै कैर सकद्यां मि एक मिसाल दे के तुम तैं सुणौदु।
31
परमेश्वर कु राज्य धरती पर सभि बीजों मा सबसे छुटा बीज का जन च जन रैई कु बीज कि जब धरती मा बुतै जांदु त धरती का सभि बाजों से छुटो हूंद।
32
पर जब बुतै गै त उगि के सब सागपात से भि बड़ो हवे जांदु अर वेका इन बड़ा फौंका निकली जंदींनि कि आसमान का चलखुडा भि वेका छैल मा घोल बणै के बसेरा कैरी सकदींनि।”
33
अर उ, ऊं तैं इन ही भौत सैरी मिसाल दे के ऊंकी समझ का अनुसार वचन सुंणौदु छो।
34
उ भीड़ तैं मिसाल मा ही शिक्षा दींदो छो अर बगैर मिसाल का परमेश्वर का राज्य का बारा मा कुछ नि बुल्द छो पर एकुंत मा अपड़ा चेलों तैं सब बातों कु मतलब बतौंदु छो।
35
वे दिन जब रुमुक हवे त यीशु ल ऊंमा बोलि, आवा हम गलील झील का दुसरा छाला पर जन्द्यां।
36
अर उ वीं भीड़ तैं पिछनै छोड़ी के चेला भि वीं नाव मा ए गैनी ज्यांमा यीशु बैठयूँ छो अर उ चलि गै छा, अर कुछ और लुखुं मा और भि नाव छै।
37
तब बड़ी आंधी का कारण नाव म अतरोळ-बतरोळ हवे अर बौछार इख तक लगिनि कि नाव पांणी ल भुरेण लगि गै छै अर नाव डुबण लगि गै छो।
38
अर यीशु अफ पिछनै कि तरपां गद्दी पर सियूं छो, तब ऊंल वे तैं बिजालि के वेमा बोलि “हे गुरु नाव डुबण वली च अर हम ल भि डुबी जांण क्य त्वे तैं कुछ भि चिंता नि च?”
39
तब यीशु उठि अर वेल अतरोळ-बतरोळ से उठयां लहरों तैं झिड़की, अर बोलि, शांत रौ थमि जा, अर अतरोळ-बतरोळ थमि गै अर समुद्र शांत हवे गै।
40
तब यीशु ल चेलों तैं पूछि तुम किलै डरणा छा? क्य तुम तैं अभि तक विश्वास नि च?
41
अर उ भौत डौर गैनी अर आपस मा बुल्ण लगि गैनी यु कन्दरो आदिम च जु कि अतरोळ-बतरोळ भि अर लहर भि वेको आज्ञा तैं मणदींनि।
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 5 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16