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1 Corinthians 15
1 Corinthians 15
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
यौ भाइ लोकनि, आब हम अहाँ सभ केँ ओहि सुसमाचारक स्मरण करबैत छी जकर प्रचार हम अहाँ सभक बीच कयने छलहुँ, जकरा अहाँ सभ मानि लेलहुँ आ जाहि पर अहाँ सभक विश्वास आधारित अछि।
2
जँ अहाँ सभ ओहि वचन पर अटल रहैत छी जे हम अहाँ सभ केँ सुनौने छी, तँ एहि सुसमाचार द्वारा अहाँ सभक उद्धार अछि। नहि तँ अहाँ सभक विश्वास कयनाइ व्यर्थ भेल।
3
कारण, जे बात हमरा भेटल तकरा हम मुख्य सत्यक रूप मे अहाँ सभ लग पहुँचा देलहुँ, अर्थात् ई जे, मसीह धर्मशास्त्रक भविष्यवाणीक अनुसार अपना सभक पापक प्रायश्चित्तक लेल मरलाह,
4
गाड़ल गेलाह, धर्मशास्त्रक भविष्यवाणीक अनुसार तेसर दिन जिआओल गेलाह
5
आ पत्रुस केँ देखाइ देलथिन आ तखन बारहो मसीह-दूतक समूह केँ सेहो।
6
तकरबाद ओ एके समय मे पाँच सय सँ बेसी भाइ सभ केँ देखाइ देलथिन। ओहि मे सँ अधिकांश आइओ जीवित अछि, ओना तँ किछु लोक मरिओ गेल अछि ।
7
बाद मे ओ याकूब केँ आ फेर सभ मसीह-दूत लोकनि केँ देखाइ देलथिन,
8
आ अन्त मे हमरो देखाइ देलनि, मानू जे हम असमयक जन्मल लोक छी।
9
हम ई एहि लेल कहलहुँ जे हम मसीह-दूत सभ मे सभ सँ छोट छी आ मसीह-दूत कहयबा जोगरक सेहो नहि छी, कारण हम परमेश्वरक मण्डली पर अत्याचार कयने छी।
10
मुदा हम जे किछु छी से परमेश्वरक कृपा सँ छी आ हमरा पर जे हुनका द्वारा कृपा कयल गेल से व्यर्थ नहि भेल। हम आन सभ मसीह-दूत सँ बढ़ि कऽ परिश्रम कयलहुँ—ओना तँ हम नहि कयलहुँ, बल्कि ई परमेश्वरक ओहि कृपा द्वारा भेल जे हमरा पर रहल।
11
चाहे हम होइ वा ओ सभ होथि, हम सभ केओ एही सुसमाचारक प्रचार करैत छी आ एही पर अहाँ सभ विश्वास कयने छी।
12
मुदा जँ मसीहक विषय मे हम सभ प्रचार करैत छी जे ओ मृत्यु सँ जीबि उठाओल गेल छथि तँ अहाँ सभ मे सँ किछु व्यक्ति कोना कहैत छी जे मरल सभ केँ जिआओल नहि जायत?
13
जँ मरल सभ जिआओल नहि जायत तँ मसीहो नहि जिआओल गेल छथि।
14
आ जँ मसीह नहि जिआओल गेल छथि तँ हमरा सभक प्रचार कयनाइ व्यर्थ अछि और अहाँ सभक विश्वास कयनाइ सेहो व्यर्थ अछि।
15
तखन एतबे नहि, हम सभ परमेश्वरक विषय मे झुट्ठा गवाह सेहो ठहरि गेलहुँ, किएक तँ हम सभ परमेश्वरक सम्बन्ध मे ई गवाही देने छी जे ओ मसीह केँ फेर जीवित कयलथिन। मुदा जँ वास्तव मे मरल सभ फेर जिआओल नहि जाइत अछि तँ परमेश्वर मसीह केँ सेहो फेर जीवित नहि कयलथिन।
16
कारण, जँ मरल सभ जिआओल नहि जाइत अछि तँ मसीह सेहो नहि जिआओल गेल छथि।
17
जँ मसीह फेर जिआओल नहि गेल छथि तँ अहाँ सभक विश्वास बेकार अछि आ अहाँ सभ केँ पापक दोष एखनो लागले अछि।
18
एतबे नहि, तखन तँ ओहो लोक, जे सभ मसीह पर विश्वास करैत मरि गेल छथि, तिनको सभक विनाश भेल अछि।
19
जँ मसीह पर अपना सभक आशा मात्र एही जीवन तक सीमित अछि तँ समस्त मनुष्य जाति मे अपने सभक दशा सभ सँ खराब अछि।
20
मुदा मसीह निश्चय जिआओल गेल छथि। हँ, जे सभ मरि गेल छथि तिनका सभ मे सँ ओ “प्रथम फल” भेलाह।
21
किएक तँ जखन मृत्यु एक मनुष्य द्वारा संसार मे आयल तँ एक मनुष्ये द्वारा मुइल सभक जीबि उठनाइ सेहो अछि।
22
जाहि तरहेँ सभ लोक आदम सँ सम्बन्धित भऽ मरैत अछि ताही तरहेँ सभ लोक जे मसीह सँ संयुक्त अछि, जिआओल जायत।
23
मुदा हर एक निर्धारित क्रमक अनुसार अपन-अपन पार पर जिआओल जायत—सभ सँ पहिने मसीह, जे “प्रथम फल” छथि, तकरबाद जखन ओ फेर औताह तखन ओ सभ जे हुनकर लोक अछि।
24
तखन एहि संसारक अन्त भऽ जायत आ मसीह सभ प्रकारक शासन, अधिकार आ सामर्थ्य केँ समाप्त कऽ अपन राज्य पिता परमेश्वरक हाथ मे सौंपि देथिन।
25
किएक तँ जाबत तक मसीह अपन सभ शत्रु केँ पयरक तर मे नहि कऽ लेथि, ताबत तक हुनका राज्य कयनाइ आवश्यक छनि।
26
ओहि मे अन्तिम नष्ट होमऽ वला शत्रु अछि मृत्यु।
27
किएक तँ धर्मशास्त्रक कथन अछि जे, “ओ सभ किछु हुनकर पयरक तर मे कयने छथि।” जखन ई कहल गेल जे “सभ किछु” हुनकर अधीन कयल गेल अछि तखन एहि कथन मे निःसन्देह परमेश्वर केँ छोड़ि देल गेल छनि। वैह तँ सभ किछु मसीहक अधीन कयने छथिन।
28
जखन सभ किछु पुत्रक अधीन कऽ देल जायत तखन पुत्र स्वयं तिनकर अधीन भऽ जयताह जे सभ किछु पुत्रक अधीन कऽ देलनि, जाहि सँ सभ बात मे परमेश्वरे सभ किछु रहथि।
29
जँ ई सभ बात होमऽ वला नहि अछि तँ जे व्यक्ति सभ मरल सभक लेल बपतिस्मा लैत अछि से की करत? जँ मरल सभ जिआओले नहि जाइत अछि तँ फेर तकरा सभक लेल लोक बपतिस्मा किएक लैत अछि?
30
आ हमहूँ सभ किएक प्रति क्षण संकटक सामना करैत छी?
31
सभ दिन हम मृत्युक सामना करैत छी। हँ, यौ भाइ लोकनि, ई ततेक निश्चित अछि जतेक निश्चित इहो अछि जे अहाँ सभ अपना सभक प्रभु यीशु मसीह मे हमर गौरव छी।
32
जँ हम इफिसुस मे हिंसक पशु सभ सँ लड़लहुँ तँ मनुष्यक दृष्टिकोण सँ हमरा की लाभ भेल? जँ मरल सभ जिआओल नहि जायत तँ, “आउ, खाइ आ पिबी, किएक तँ काल्हि तँ मरहेक अछि।”
33
धोखा नहि खाउ—“अधलाह संगति नीक चरित्र केँ भ्रष्ट कऽ दैत अछि।”
34
सही काज करबाक लेल होश मे आउ आ पाप कयनाइ छोड़ि दिअ। अहाँ सभ मे किछु लोक परमेश्वरक सम्बन्ध मे एकदम अनजान छी। ई अहाँ सभक लेल लाजक बात होयबाक चाही।
35
मुदा आब केओ ई पुछत जे, “मरल सभ कोना जिआओल जायत? ओ सभ केहन शरीर धारण कऽ कऽ आओत?”
36
ई प्रश्नो मूर्खताक बात अछि! अहूँ जे कोनो बीया बाउग करैत छी से बिनु मरने कहाँ जीवित होइत अछि?
37
अहाँ जे बाउग करैत छी से बाद मे जाहि रूपक होयतैक ताहि रूप मे बाउग नहि करैत छी, बल्कि मात्र बीया बाउग करैत छी—ओ गहुमक होअय वा कोनो आन अनाजक।
38
मुदा परमेश्वर अपन इच्छाक अनुसार ओकरा कोनो रूप प्रदान करैत छथि—प्रत्येक बीया केँ ओकर अपन अलग रूपक गाछ होइत अछि।
39
सभ प्राणी केँ एक समानक शरीर नहि होइत अछि। मनुष्यक शरीर एक प्रकारक होइत अछि, पशुक शरीर दोसर प्रकारक, चिड़ै सभक फेर दोसर और माछ सभक दोसर प्रकारक होइत अछि।
40
स्वर्गिक शरीर होइत अछि आ पृथ्वी वला शरीर सेहो होइत अछि, मुदा स्वर्गिक शरीरक शोभा एक प्रकारक अछि आ पृथ्वी वलाक शोभा दोसर प्रकारक।
41
सूर्यक शोभा एक प्रकारक होइत अछि, चन्द्रमाक शोभा दोसर प्रकारक आ तरेगन सभक शोभा आन प्रकारक, एतऽ तक जे एक ताराक शोभा दोसर ताराक शोभा सँ भिन्न होइत अछि।
42
मरल सभक जीबि उठनाइ सेहो एहने बात अछि। जे शरीर मृत्यु द्वारा “बाउग कयल जाइत अछि” से मरऽ आ सड़ऽ वला अछि। जखन जिआओल जाइत अछि तँ मरैत आ सरैत नहि अछि।
43
अनादरपूर्ण दशा मे “बाउग कयल जाइत अछि,” महिमा सँ मण्डित भऽ जिआओल जाइत अछि। कमजोर दशा मे “बाउग कयल जाइत अछि”, जिआओल जा कऽ सामर्थी होइत अछि।
44
जे शरीर “बाउग कयल जाइत अछि” से प्राकृतिक वस्तु अछि आ जखन जिआओल जाइत अछि तँ ओ आत्मिक वस्तु अछि। जँ प्राकृतिक शरीर होइत अछि तँ आत्मिक शरीर सेहो होइत अछि।
45
धर्मशास्त्रक लेख सेहो यैह अछि जे, “पहिल मनुष्य, आदम, जीवित प्राणी बनि गेल।” “अन्तिम आदम”, अर्थात् मसीह, जीवनदायक आत्मा बनलाह।
46
पहिने आत्मिक बात नहि, बल्कि प्राकृतिक बात आयल, तकरबादे आत्मिक बात।
47
पहिल मनुष्य माटिक बनल छल, पृथ्वी सँ छल, मुदा दोसर मनुष्य स्वर्ग सँ छथि।
48
पृथ्वी वला ओ मनुष्य जेहन छल तेहने ओ सभ लोक अछि जे पृथ्वी पर रहैत अछि आ स्वर्ग सँ आयल ओ मनुष्य जेहन छथि तेहने ओ सभ लोक होयत जे स्वर्ग मे रहत।
49
अपना सभ जहिना पृथ्वी वला मनुष्यक रूप धारण कयने छी तहिना स्वर्ग वला मनुष्यक रूप सेहो धारण करब।
50
यौ भाइ लोकनि, हमर कहबाक तात्पर्य ई अछि जे, माँसु आ खून वला शरीर परमेश्वरक राज्य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि भऽ सकैत अछि। जे किछु विनाश होमऽ वला अछि से तकरा पयबाक अधिकारी नहि भऽ सकैत अछि जे अविनाशी अछि।
51
सुनू, हम अहाँ सभ केँ एकटा बात कहैत छी जे पहिने गुप्त राखल गेल छल—अपना सभ मे सँ सभ केओ नहि मरब, मुदा सभ बदलि देल जायब।
52
ई एक क्षण मे, पलक मारिते, धुतहूक अन्तिम आवाज होइते भऽ जायत। किएक तँ धुतहू बाजत, मरल सभ अविनाशी भऽ जीवित कयल जायत आ अपना सभ बदलि देल जायब।
53
ई आवश्यक अछि जे, जे सड़ऽ वला अछि से एहन रूप धारण करय जे नहि सरैत अछि, जे मरऽ वला अछि, से एहन रूप धारण करय जे नहि मरैत अछि।
54
जखन ई नाश होमऽ वला शरीर अविनाशी वला केँ, आ ई मरणशील शरीर अमरता केँ धारण कऽ लेत तखन धर्मशास्त्रक ई बात पूरा भऽ जायत जे, “मृत्यु पर विजय भऽ गेल अछि! ओ आब समाप्त भेल।”
55
“हे मृत्यु, तोहर विजय कतऽ छौक? हे मृत्यु, कतऽ छौक तोहर डंक?”
56
पाप अछि मृत्युक डंक, आ पाप धर्म-नियमक आधार पर मृत्युक कारण बनैत अछि।
57
मुदा परमेश्वर केँ धन्यवाद होनि! ओ अपना सभक प्रभु यीशु मसीह द्वारा अपना सभ केँ विजय प्रदान करैत छथि।
58
एहि लेल, यौ प्रिय भाइ लोकनि, स्थिर और अटल बनल रहू। अपना केँ पूर्ण रूप सँ प्रभुक काजक लेल सदत समर्पित कयने रहू, किएक तँ अहाँ सभ जनैत छी जे अहाँ सभक परिश्रम प्रभु मे व्यर्थ नहि अछि।
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