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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1 Corinthians 2
1 Corinthians 2
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
यौ भाइ लोकनि, हम जखन अहाँ सभक ओतऽ परमेश्वरक विषय मे गवाही देबऽ अयलहुँ तँ शब्दक आडम्बर अथवा सांसारिक ज्ञानक संग नहि अयलहुँ।
2
हम निश्चय कयने छलहुँ जे हम अहाँ सभक बीच यीशु मसीह आ क्रूस पर भेल हुनकर मृत्यु केँ छोड़ि, कोनो आन विषय पर बात नहि करब।
3
हम कमजोर आ डेरायल आ थर-थर कँपैत अहाँ सभक बीच रहलहुँ।
4
हमर शिक्षा आ हमर प्रचार मे विद्वानक प्रभावशाली शब्दक आकर्षण नहि छल, बल्कि परमेश्वरक आत्माक सामर्थ्यक प्रदर्शन छल,
5
जाहि सँ अहाँ सभक विश्वास मनुष्यक ज्ञान पर नहि, बल्कि परमेश्वरक सामर्थ्य पर आधारित होअय।
6
ओना तँ जे लोक सभ आत्मिक रूप सँ बुझनिहार छथि तिनका सभक बीच हम सभ अवश्य ज्ञानक बात सुनबैत छी। मुदा ई ज्ञान ने तँ एहि संसारक अछि आ ने एहि संसारक शासन करऽ वला सभक, जे सभ समाप्त होमऽ पर अछि।
7
हम सभ परमेश्वरेक रहस्यमय ज्ञानक बात सुनबैत छी जे पहिने गुप्त राखल छल, आ जकरा परमेश्वर संसारक सृष्टि सँ पूर्वहिं अपना सभक महिमाक लेल निश्चित कयने छलाह।
8
एहि ज्ञान केँ संसारक शासन करऽ वला सभ मे सँ केओ नहि बुझि पौलक, नहि तँ महिमामय प्रभु केँ क्रूस पर नहि चढ़बितनि।
9
मुदा जेना कि धर्मशास्त्रक लेख अछि, “जे सभ परमेश्वर सँ प्रेम करैत अछि तकरा सभक लेल ओ जे किछु तैयार कयने छथि तकरा केओ कहियो देखलक नहि, केओ कहियो सुनलक नहि आ ने केओ तकर कल्पना कऽ पौलक।”
10
मुदा, परमेश्वर अपन पवित्र आत्मा द्वारा ई ज्ञान अपना सभ पर प्रगट कयने छथि, किएक तँ परमेश्वरक आत्मा सभ बातक, परमेश्वरक रहस्यमय बात सभक सेहो, थाह पाबि लैत छथि।
11
ककरो मोनक बात केँ कोन मनुष्य जानि सकैत अछि? खाली ओकर अपन आत्मा ओकर मोनक बात जनैत अछि। एही प्रकारेँ परमेश्वरक आत्मा केँ छोड़ि परमेश्वरक विचार केओ नहि जनैत अछि।
12
अपना सभ केँ संसारक आत्मा नहि, बल्कि परमेश्वरक दिस सँ आबऽ वला पवित्र आत्मा भेटल छथि जाहि सँ परमेश्वर अपन खुशी सँ अपना सभ केँ की सभ देने छथि तकरा जानि सकी।
13
हम सभ एहि बात सभक व्याख्या करैत काल मानवीय बुद्धि सँ प्रेरित शब्द सभक नहि, बल्कि पवित्र आत्मा द्वारा सिखाओल गेल शब्द सभक प्रयोग करैत छी, अर्थात् आत्मिक बात सभ आत्मिक तरीका द्वारा व्यक्त करैत छी।
14
मुदा जाहि मनुष्य मे परमेश्वरक आत्मा नहि रहैत छथि से परमेश्वरक आत्माक बात सभ केँ स्वीकार नहि करैत अछि, किएक तँ ओ ओहि बात सभ केँ मूर्खता मानैत अछि। ओ ओकरा बुझि नहि सकैत अछि, किएक तँ परमेश्वरक आत्मे द्वारा ओकर थाह पाओल जा सकैत अछि।
15
जाहि मनुष्य मे परमेश्वरक पवित्र आत्मा रहैत छथि से सभ बात जाँचि कऽ बुझैत अछि, मुदा ओ अपने कोनो मनुष्य द्वारा नहि बुझल जाइत अछि।
16
किएक तँ धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे, “प्रभुक सोच-विचार केँ के जनने अछि? हुनकर सल्लाहकार के भऽ सकल अछि?” मुदा अपना सभ केँ तँ मसीहक सोच-विचार भेटल अछि।
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