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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1 Corinthians 16
1 Corinthians 16
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
आब प्रभुक लोकक लेल चन्दा जमा करबाक सम्बन्ध मे हम ई कहऽ चाहैत छी जे, अहूँ सभ ओहिना करू जेना हम गलातिया प्रदेशक मण्डली सभ केँ कहि देने छी।
2
सप्ताहक पहिल दिन मे प्रत्येक व्यक्ति अपन कमाइक अनुसार किछु अलग कऽ कऽ जमा करैत जाय। एहि तरहेँ हमरा पहुँचला पर चन्दा जमा करबाक आवश्यकता नहि रहत।
3
जखन हम आयब तँ जकरा सभ केँ अहाँ सभ उपयुक्त बुझब तकरा सभ केँ हम परिचय-पत्र दऽ कऽ अहाँ सभ द्वारा जमा कयल दान यरूशलेम पहुँचयबाक लेल पठा देबैक।
4
आ जँ यैह उचित बुझायत जे हमहूँ जाइ तँ ओ सभ हमरा संग जायत।
5
हम मकिदुनिया प्रदेश दऽ कऽ अहाँ सभक ओतऽ आयब, कारण हमरा मकिदुनियाक यात्रा करबाक कार्यक्रम अछि।
6
सम्भव अछि जे हम अहाँ सभक संग विशेष दिन ठहरी वा जाड़क समय सेहो बिताबी, जाहि सँ ओतऽ सँ हमरा जाहिठाम जयबाक रहत ताहिठामक लेल अहाँ सभ हमरा जयबाक प्रबन्ध कऽ सकी।
7
हम अहाँ सभ सँ एखन रस्ते मे भेँट नहि करऽ चाहैत छी, बल्कि, जँ प्रभुक इच्छा होयतनि, तँ हमरा बेसी दिन तक अहाँ सभक संग रहबाक आशा अछि।
8
मुदा हम पेन्तेकुस्त पाबनि धरि इफिसुसे मे रहब,
9
किएक तँ एतऽ फलदायक काजक लेल हमरा आगाँ एक विशाल द्वारि खुजल अछि, आ बहुत विरोधी सभ सेहो अछि।
10
जँ तिमुथियुस अबथि तँ हुनकर ध्यान रखबनि जे अहाँ सभक बीच हुनका कोनो प्रकारक भय नहि होनि कारण हमरे जकाँ ओहो प्रभुक काज कऽ रहल छथि।
11
एहि लेल केओ हुनका तुच्छ नहि बुझनि। हुनका आशीर्वाद दऽ कऽ हमरा लग पठा देबनि। हम बाट ताकि रहल छी जे भाइ सभक संग ओ कहिया आबि जयताह।
12
आब भाइ अपुल्लोसक सम्बन्ध मे—हम हुनका बहुत आग्रह कयलियनि जे भाइ सभक संग ओ अहाँ सभ लग चल जाथि, मुदा एहि समय मे ओ नहि जाय चाहैत छथि। अवसर भेटला पर ओ जयताह।
13
सतर्क रहू, ओहि सिद्धान्त पर अटल रहू जाहि पर अहाँ सभक विश्वास आधारित अछि। साहसी आ मजगूत बनल रहू।
14
जे किछु करी से प्रेम सँ करू।
15
यौ भाइ लोकनि, अहाँ सभ स्तेफनासक घरक लोक सभ सँ परिचित छी जे ओ सभ अखाया प्रदेश मे पहिल व्यक्ति सभ छथि जे मसीहक विश्वासी भेलाह आ प्रभुक लोक सभक सेवा मे समर्पित छथि।
16
आब हम अहाँ सभ सँ आग्रह करैत छी जे एहन लोकक अगुआइ स्वीकार करू, आ आनो सभक जे सभ हिनका सभ जकाँ प्रभुक काज मे संग दऽ परिश्रम करैत छथि।
17
स्तेफनास, फूरतुनातुस आ अखइकुस केँ आबि गेला सँ हमरा बहुत प्रसन्नता अछि। अहाँ सभ हमरा संग नहि रहि कऽ जे सहायता नहि कऽ सकलहुँ ताहि कमी केँ ओ सभ पूरा कऽ देलनि।
18
ओ सभ हमरो आ अहूँ सभक मोन केँ प्रोत्साहित कऽ देलनि अछि। एहन लोक सभ केँ विशेष मान्यता दिअ।
19
आसिया प्रदेशक मण्डली सभक दिस सँ अहाँ सभ केँ नमस्कार। अक्विला आ प्रिस्किला आ हुनका घर मे जमा होमऽ वला मण्डली प्रभु मे अहाँ सभ केँ हार्दिक नमस्कार कहैत छथि।
20
एतुका सभ भाइ लोकनि अहाँ सभ केँ नमस्कार कहैत छथि। पवित्र मोन सँ एक-दोसर केँ सस्नेह नमस्कार करू।
21
हम, पौलुस, अपन नमस्कार अपने हाथ सँ लिखि रहल छी।
22
जँ केओ प्रभु सँ प्रेम नहि राखय तँ ओ सरापित होअय। हे प्रभु, आउ!
23
प्रभु यीशुक कृपा अहाँ सभ पर बनल रहय।
24
मसीह यीशु मे अहाँ सभ गोटे केँ हमर प्रेम। आमीन।
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