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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1 Corinthians 9
1 Corinthians 9
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
की हम स्वतन्त्र नहि छी? की हम मसीह-दूत नहि छी? की हम अपना सभक प्रभु, यीशु, केँ नहि देखने छी? की अहाँ सभ प्रभुएक शक्ति द्वारा कयल हमर परिश्रमक परिणाम नहि छी?
2
दोसर सभक दृष्टि मे हम मसीह-दूत नहिओ होइ, मुदा अहाँ सभक लेल तँ अवश्य छी, किएक तँ अहाँ सभ अपने एहि बात केँ प्रमाणित करऽ वला “छाप” छी जे हम प्रभुक पठाओल मसीह-दूत छी।
3
हमरा सम्बन्ध मे पूछ-ताछ कयनिहार सभक लेल अपन सफाइ मे हमर यैह उत्तर अछि—
4
की हमरा सभ केँ खयबाक-पिबाक लेल खर्च पयबाक अधिकार नहि अछि?
5
की हमरा सभ केँ ई अधिकार नहि अछि जे हमहूँ सभ कोनो मसीही स्त्री सँ विवाह कऽ कऽ जतऽ जाइ ततऽ संग लऽ जाइ, जेना कि आन मसीह-दूत सभ आ प्रभु यीशुक भाय सभ और पत्रुस करैत छथि?
6
की हम आ बरनबास मात्रे अपन जीवन-निर्वाहक लेल काज करैत रहबाक लेल बाध्य छी?
7
एहन के अछि जे अपने खर्च सँ सेना मे सेवा करैत होअय? के अछि जे अंगूरक बगान लगा कऽ ओकर फल नहि खाइत होअय? के अछि जे भेँड़-बकरी सभ केँ चरबाही कऽ कऽ ओकर दूध नहि पिबैत होअय?
8
की हम मनुष्यक दृष्टिकोण सँ मात्र ई बात कहैत छी? की धर्म-नियम सेहो यैह बात नहि कहैत अछि?
9
किएक तँ मूसा केँ देल गेल धर्म-नियम मे लिखल अछि जे, “दाउन करैत बरदक मुँह मे जाबी नहि लगाउ।” की बरदे सभक लेल परमेश्वर चिन्ता करैत छथि?
10
की ओ अपना सभक लेल ई नहि कहने छथि? हँ, ई निश्चय अपने सभक लेल लिखल गेल अछि। किएक तँ ई उचित अछि जे हऽर जोतऽ वला आ दाउन करऽ वला अपन काज एही आशा मे करय जे हम उपजा-बाड़ीक हिस्सा पायब।
11
जखन हम सभ अहाँ सभक बीच आत्मिक बीया बाउग कयने छी तँ की अहाँ सभ सँ भोजन-वस्त्र रूपी फसिलक आशा कयनाइ कोनो बड़का बात भेल?
12
जँ दोसर लोक केँ अहाँ सभ सँ एहि तरहेँ सहयोग पयबाक अधिकार छनि तँ की हुनका सभक अपेक्षा हमरे सभ केँ बेसी अधिकार नहि अछि? तैयो हम सभ एहि अधिकारक उपयोग नहि कयने छी। तकरा बदला मे हम सभ केहनो बात सहैत छी जाहि सँ मसीहक शुभ समाचारक प्रभाव मे हमरा सभक द्वारा बाधा नहि पड़य।
13
की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे मन्दिर मे सेवा कयनिहार लोक मन्दिर सँ भोजन पबैत छथि आ बलि-वेदीक कार्य कयनिहार लोक वेदी परक बलिक हिस्सेदार रहैत छथि?
14
एही तरहेँ प्रभु ई व्यवस्था कयलनि जे शुभ समाचारक प्रचार कयनिहार लोक शुभ समाचारक प्रचारक काज द्वारा अपन जीविका चलयबाक लेल खर्च पाबय।
15
मुदा हम एहि अधिकार सभ मे सँ एकोटाक प्रयोग नहि कयलहुँ। हम ई बात सभ एहि लेल नहि लिखि रहल छी जे आब हमरा लेल ई सभ कयल जाय। हम भलेही मरि जाइ, मुदा केओ हमरा एहि गौरव सँ वंचित नहि करय जे हम बिनु किछु पौने शुभ समाचार सुनौलहुँ।
16
हम एहि बात पर गौरव नहि करैत छी जे हम शुभ समाचारक प्रचार करैत छी। हमरा तँ सैह करबाक अछि। धिक्कार हमरा, जँ हम शुभ समाचारक प्रचार नहि करी!
17
जँ हम अपने सँ प्रचारक काज चुनि कऽ करितहुँ तँ हमरा पुरस्कारक आशा होइत। मुदा हम अपने इच्छा सँ नहि करैत छी, बल्कि हमरा जाहि काजक जिम्मा देल गेल अछि, बस, तकरे पूरा कऽ रहल छी।
18
तँ फेर की अछि हमर पुरस्कार? ओ यैह अछि जे हम प्रभु यीशुक शुभ समाचारक प्रचार बिनु पारिश्रमिक लऽ करी आ ओहि सँ सम्बन्धित अधिकार अपना लेल उपयोग मे नहि लाबी।
19
हम ककरो बन्हन मे नहि, स्वतन्त्रे छी, तैयो हम अपना केँ सभक गुलाम बना लेने छी जाहि सँ हम बेसी सँ बेसी लोक केँ प्रभु लग आनि सकी।
20
यहूदी सभक बीच हम यहूदी सनक बनि गेलहुँ जाहि सँ यहूदी सभ केँ प्रभु लग आनि सकी। जे लोक सभ मूसाक धर्म-नियमक अधीन अछि, तकरा सभक बीच हम धर्म-नियमक अधीन नहिओ रहैत स्वयं धर्म-नियमक अधीन सनक बनि गेलहुँ जाहि सँ धर्म-नियमक अधीन मे रहऽ वला लोक सभ केँ प्रभु लग आनि सकी।
21
जाहि समाजक लोक लग मूसाक धर्म-नियम नहि अछि तकरा सभ केँ प्रभु लग अनबाक लेल हम ओकरे सभ सनक बनि गेलहुँ, ओना तँ हम मसीहक नियमक अधीन रहबाक कारणेँ वास्तव मे परमेश्वरक नियम सँ स्वतन्त्र नहि छी।
22
हम दुर्बल सभक बीच दुर्बल बनि गेलहुँ जाहि सँ हम ओकरा सभ केँ प्रभु लग आनि सकी। हम सभक लेल सभ किछु बनि गेल छी जाहि सँ कोनो ने कोनो तरहेँ हम किछु लोक केँ बँचा सकी।
23
हम ई सभ बात शुभ समाचारक प्रभाव केँ बढ़यबाक लेल करैत छी जाहि सँ शुभ समाचारक आशिष मे हम सहभागी बनि जाइ।
24
की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे दौड़ प्रतियोगिता मे सभ प्रतियोगी दौड़ैत अछि, मुदा पुरस्कार मात्र एके गोटे केँ भेटैत छैक? तेँ अहाँ सभ एहि तरहेँ दौड़ू जे पुरस्कार प्राप्त करी।
25
खेल प्रतियोगिता मे भाग लेबऽ वला खेलाड़ी सभ प्रत्येक बातक संयम रखैत अछि। ओ सभ ओहन जय-माला पयबाक लेल ई सभ करैत अछि जे टिकत नहि, मुदा अपना सभ अविनाशी मुकुट पयबाक लेल एना करैत छी।
26
एहि लेल हम एहन खेलाड़ी जकाँ छी जे सामने राखल लक्ष्य पर सँ नजरि नहि हटा कऽ दौड़ैत अछि। हम एहन मुक्केबाजीक खेलाड़ी जकाँ नहि छी जे हवे मे मुक्का मारैत अछि।
27
हम अपना शरीर केँ कष्ट दऽ कऽ वश मे रखैत छी। नहि तँ कतौ एना नहि भऽ जाय जे दोसर लोक केँ उपदेश देलाक बाद हम स्वयं पुरस्कार पयबाक लेल अयोग्य ठहरी।
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