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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1 Corinthians 6
1 Corinthians 6
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
जखन अहाँ सभक बीच आपस मे विवाद होइत अछि तँ तकर न्यायक लेल प्रभुक लोक सभक बदला अधर्मी सभक सामने जयबाक दुःसाहस अहाँ सभ कोना करैत छी?
2
की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे एक दिन प्रभुक लोक सभ संसारक न्याय करताह? अहाँ सभक द्वारा जँ संसारक न्याय कयल जायत तँ की अहाँ सभ छोट-मोट विवाद सभक न्याय करबाक योग्य नहि छी?
3
की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अपना सभ स्वर्गदूत सभक न्याय करब? तखन की एहि जीवन सँ सम्बन्धित बात सभक न्याय कयनाइ कोनो बड़का बात अछि?
4
जँ अहाँ सभक बीच कोनो एहन विवाद अछि तँ की अहाँ सभ ओहन लोक सभ केँ पंच बनबैत छी जकरा सभ केँ मण्डली मे कोनो स्थान नहि छैक?
5
हम अहाँ सभ केँ लज्जित करबाक लेल ई बात कहि रहल छी। की ई सम्भव अछि जे अहाँ सभक बीच एको गोटे एहन बुद्धिमान नहि होइ जे भाइ-भाइक बीच फैसला कऽ सकी?
6
मुदा तकरा बदला मे एक विश्वासी भाइ दोसर भाइ पर मोकदमा करैत छी आ सेहो अविश्वासी सभक सामने!
7
वास्तव मे जखन अहाँ सभ एक-दोसर पर मोकदमा चलबैत छी, तँ ताहि सँ स्पष्ट होइत अछि जे अहाँ सभ एखने पूर्ण रूप सँ हारि गेल छी। तकर बदला मे अहाँ सभ अन्याय किएक नहि सहि लैत छी? अपन हानि किएक नहि होमऽ दैत छी?
8
मुदा अहाँ सभ तँ तकर विपरीत जा कऽ स्वयं अन्याय करैत छी आ दोसराक हक मारैत छी—सेहो अपन मसीही भाइ सभक!
9
की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे अधर्मी लोक परमेश्वरक राज्य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि होयत? अपना केँ धोखा नहि दिअ! अनैतिक शारीरिक सम्बन्ध रखनिहार, मूर्तिक पूजा कयनिहार, परस्त्रीगमन कयनिहार, वेश्या सनक काज कयनिहार पुरुष, समलैंगिक सम्बन्ध रखनिहार लोक,
10
चोर, लोभी, पिअक्कड़, गारि पढ़निहार आ धोखेबाज सभ परमेश्वरक राज्य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि होयत।
11
आ से अहाँ सभ मे सँ किछु गोटे छलहुँ, मुदा अहाँ सभ आब प्रभु यीशु मसीहक नाम सँ आ अपना सभक परमेश्वरक आत्मा द्वारा धोअल गेलहुँ, पवित्र कयल गेलहुँ आ निर्दोष ठहराओल गेलहुँ।
12
“सभ किछु करबाक हमरा स्वतन्त्रता अछि”—मुदा सभ किछु हितकर नहि अछि। “सभ किछु करबाक हमरा स्वतन्त्रता अछि”—मुदा हम कोनो बातक गुलाम नहि बनब।
13
“भोजन पेटक लेल अछि आ पेट भोजनक लेल”—मुदा परमेश्वर दूनू केँ समाप्त कऽ देताह। शरीर अनैतिक सम्बन्धक लेल नहि, बल्कि प्रभुक सेवाक लेल अछि आ प्रभु शरीरक कल्याणक लेल।
14
परमेश्वर जहिना अपना सामर्थ्य सँ प्रभु यीशु केँ मृत्यु मे सँ जिऔलथिन तहिना ओ हमरो सभ केँ जिऔताह।
15
की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर मसीहक अंग सभ अछि? तँ की हम मसीहक अंग लऽ कऽ तकरा वेश्याक अंग बना दिऐक? किन्नहुँ नहि!
16
की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे वेश्याक संग जे केओ अपन शरीर जोड़ैत अछि से ओकरा संग एक शरीर भऽ जाइत अछि? किएक तँ धर्मशास्त्र कहैत अछि जे, “दूनू एक शरीर भऽ जायत।”
17
मुदा जे प्रभु सँ संयुक्त भऽ जाइत अछि से हुनका संग आत्मा मे एक बनि जाइत अछि।
18
अनैतिक सम्बन्ध सँ दूर रहू। आरो सभ पाप जे मनुष्य करैत अछि, से शरीर सँ हटल अछि, मुदा जे ककरो संग अनैतिक सम्बन्ध रखैत अछि से अपना शरीरेक विरुद्ध पाप करैत अछि।
19
की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर परमेश्वरक पवित्र आत्माक मन्दिर अछि, जे आत्मा अहाँ सभ मे वास करैत छथि आ जे अहाँ सभ केँ परमेश्वर सँ प्राप्त भेल छथि? अहाँ सभ अपन नहि छी।
20
अहाँ सभ दाम दऽ कऽ किनल गेल छी। एहि लेल अपना शरीर द्वारा परमेश्वरक सम्मान करू।
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