bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Maithili
/
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
/
John 10
John 10
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
← Chapter 9
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 11 →
1
“हम अहाँ सभ केँ विश्वास दिअबैत छी जे, जे द्वारि बाटे भेँड़शाला मे प्रवेश नहि करैत अछि, बल्कि देवाल पर चढ़ि कऽ कोनो दोसर बाटे प्रवेश करैत अछि, से चोर और डाकू होइत अछि।
2
जे द्वारि बाटे प्रवेश करैत छथि, से भेँड़ाक चरबाह छथि।
3
हुनका लेल द्वारपाल द्वारिक फट्टक खोलि दैत छनि, और हुनकर आवाज भेँड़ा चिन्हैत छनि। ओ अपना भेँड़ा केँ नाम लऽ-लऽ कऽ बजबैत छथि, और ओकरा सभ केँ बाहर लऽ जाइत छथि।
4
अपन सभ भेँड़ा केँ निकालि लेला पर ओ ओकरा सभक आगाँ-आगाँ चलैत छथि और ओ सभ हुनका पाछाँ लागि जाइत छनि किएक तँ ओ सभ हुनकर आवाज केँ चिन्हैत छनि।
5
ओ सभ कोनो अपरिचित आदमीक पाछाँ कहियो नहि जायत, बल्कि ओकरा लग सँ भागत, किएक तँ अपरिचित लोकक आवाज ओ सभ नहि चिन्हैत छैक।”
6
यीशु हुनका सभ केँ ई उदाहरण देलनि, मुदा हुनकर की कहबाक अर्थ छलनि, से ओ सभ नहि बुझलनि।
7
तेँ ओ हुनका सभ केँ फेर कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्ये कहैत छी जे, भेँड़ा सभक लेल हमहीं द्वारि छी।
8
आरो सभ जे हमरा सँ पहिने आयल, से चोर और डाकू सभ छल, मुदा भेँड़ा ओकरा सभक बात नहि मानलक।
9
द्वारि हम छी। हमरा बाटे जे प्रवेश करत से सुरक्षित राखल जायत। ओ भीतर-बाहर अबैत-जाइत रहत और चारा पाओत।
10
चोर खाली चोरी करबाक, जान मारबाक, और नष्ट करबाक उद्देश्य सँ अबैत अछि। मुदा हम एहि लेल आयल छी जे मनुष्य जीवन प्राप्त करय और परिपूर्णता सँ प्राप्त करय।
11
“नीक चरबाह हम छी। नीक चरबाह भेँड़ाक लेल अपन प्राण दैत अछि।
12
जऽन-बोनिहार, जे ने चरबाह अछि आ ने भेँड़ाक मालिक अछि से चितुआ केँ अबैत देखि कऽ भेँड़ा सभ केँ छोड़ि कऽ भागि जाइत अछि। तखन चितुआ भेँड़ा केँ पकड़ऽ लगैत छैक और ओकरा सभ केँ छिड़िया दैत छैक।
13
जऽन-बोनिहार एहि लेल भागि जाइत अछि जे ओ खाली जऽन अछि और ओकरा भेँड़ाक लेल कोनो चिन्ता नहि रहैत छैक।
14
“नीक चरबाह हम छी। जहिना पिता हमरा चिन्हैत छथि और हम पिता केँ चिन्हैत छियनि,
15
तहिना हम अपना भेँड़ा सभ केँ चिन्हैत छी और ओ सभ हमरा चिन्हैत अछि। और भेँड़ा सभक लेल हम अपन प्राण दैत छी।
16
हमरा आरो भेँड़ा अछि जे एहि भेँड़शालाक नहि अछि। ओकरो सभ केँ हमरा लयबाक अछि। ओहो सभ हमर आवाज सुनत। तखन एके झुण्ड और एके चरबाह होयत।
17
“पिता हमरा सँ एहि लेल प्रेम करैत छथि जे हम अपन प्राण दैत छी जाहि सँ हम ओकरा फेर लऽ ली।
18
केओ हमर प्राण केँ हमरा सँ नहि छिनि लैत अछि, बल्कि हम अपना इच्छा सँ दऽ रहल छी। हमरा अपन जान देबाक अधिकार अछि और ओकरा फेर लऽ लेबाक अधिकार सेहो अछि। ई आज्ञा हम अपना पिता सँ प्राप्त कयने छी।”
19
एहि बात सभक कारणेँ यहूदी सभ मे फेर मतभेद भऽ गेलनि।
20
बहुत लोक कहैत छलाह, “एकरा मे दुष्टात्मा छैक। ई बताह अछि! एकर बात किएक सुनबैक?”
21
मुदा दोसर सभ कहैत छलाह, “जकरा मे दुष्टात्मा छैक, से की एहन बात सभ कहत? की दुष्टात्मा कतौ आन्हरक आँखि खोलि सकैत अछि?”
22
तखन यरूशलेम मे “मन्दिरक समर्पण” नामक पाबनि आबि गेल।
23
जाड़क मास छल, और यीशु मन्दिर मे ओहि असोरा पर टहलैत छलाह जे “सुलेमानक असोरा” कहबैत अछि।
24
यहूदी सभ हुनका चारू कात सँ घेरि कऽ कहलथिन, “कहिया तक अहाँ हमरा सभ केँ दुबिधा मे रखने रहब? अहाँ जँ परमेश्वरक मसीह छी तँ हमरा सभ केँ स्पष्ट कहि दिअ।”
25
यीशु बजलाह, “हम अहाँ सभ केँ कहिए देने छी, मुदा अहाँ सभ विश्वास नहि करैत छी। जे काज हम अपना पिताक नाम सँ करैत छी, से हमर गवाही दैत अछि।
26
मुदा अहाँ सभ विश्वास नहि करैत छी किएक तँ अहाँ सभ हमर भेँड़ा नहि छी।
27
हमर भेँड़ा हमर आवाज सुनैत अछि। हम ओकरा सभ केँ चिन्हैत छी और ओ सभ हमरा पाछाँ लागि जाइत अछि।
28
हम ओकरा सभ केँ अनन्त जीवन दैत छी और ओ सभ कहियो नाश नहि होयत। हमरा हाथ सँ केओ ओकरा सभ केँ नहि छिनि लेत।
29
हमर पिता, जे ओकरा सभ केँ हमरा देने छथि, से आरो सभ सँ शक्तिशाली छथि, तेँ हमरा पिताक हाथ सँ ओकरा सभ केँ केओ नहि छिनि सकैत अछि।
30
हम और पिता एक छी।”
31
एहि पर यहूदी सभ फेर हुनका मारि देबाक लेल पाथर उठाबऽ लगलाह,
32
मुदा यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ पिताक तरफ सँ बहुत नीक-नीक काज कऽ कऽ देखा देलहुँ। एहि सभ मे सँ कोन काजक लेल हमरा मारि देबऽ चाहैत छी?”
33
यहूदी सभ हुनका उत्तर देलथिन, “कोनो नीक काजक लेल तोरा नहि मारऽ चाहैत छिऔ, बल्कि परमेश्वरक निन्दाक लेल, कारण तोँ मनुष्ये भऽ कऽ अपना केँ परमेश्वर कहैत छैं।”
34
यीशु बजलाह, “की अहाँ सभक धर्मशास्त्र मे नहि लिखल अछि जे, ‘हम कहलहुँ जे तोँ सभ ईश्वर छह’?
35
जँ तकरा सभ केँ ओ ‘ईश्वर’ कहलथिन जकरा सभ केँ परमेश्वरक वचन देल गेल—और धर्मशास्त्र कहियो गलत नहि ठहरि सकैत अछि—
36
तँ जकरा पिता अपना पवित्र काजक लेल चुनि कऽ संसार मे पठौलथिन, तकरा पर परमेश्वरक निन्दा करबाक दोष किएक लगबैत छी जखन ओ कहैत अछि जे, ‘हम परमेश्वरक पुत्र छी’?
37
जँ हम अपना पिताक काज नहि कऽ रहल छी, तँ हमरा पर विश्वास नहि करू।
38
मुदा जँ हम कऽ रहल छी, तँ हमरा पर जँ नहिओ विश्वास करब, तँ हमर काज पर विश्वास करू, जाहि सँ अहाँ सभ जानब और बुझब जे पिता हमरा मे छथि और हम पिता मे छी।”
39
ओ सभ हुनका फेर पकड़ऽ चाहैत छलनि, मुदा ओ हुनका सभक हाथ सँ बचि कऽ निकलि गेलाह।
40
तखन यीशु फेर यरदन नदीक ओहि पार गेलाह जाहिठाम यूहन्ना शुरू मे बपतिस्मा दैत छलाह। ओ ओहिठाम रहलाह
41
और बहुत लोक हुनका लग आयल। ओ सभ कहलक, “ओना तँ यूहन्ना कोनो चमत्कारपूर्ण चिन्ह नहि देखौलनि, तैयो जतेक बात ओ एहि व्यक्तिक बारे मे कहलनि, से सभ सत्य छल।”
42
और ओहिठाम बहुत लोक यीशु पर विश्वास कयलकनि।
← Chapter 9
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 11 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21