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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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John 18
John 18
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
ई सभ बात कहलाक बाद यीशु अपना शिष्य सभक संग विदा भेलाह और किद्रोन नामक बरसाती नदी केँ पार कयलनि। ओहि पार एक गाछी छल, जाहि मे ओ अपना शिष्य सभक संग गेलाह।
2
हुनका पकड़बाबऽ वला, यहूदा, ई जगह जनैत छल, किएक तँ यीशु बहुत बेर अपना शिष्य सभक संग ओहिठाम जाइत छलाह।
3
तेँ सेनाक एक दल केँ, और मुख्यपुरोहित आ फरिसी सभक दिस सँ उपलब्ध कराओल गेल सिपाही सभ केँ लऽ कऽ, यहूदा ओहि गाछी मे आयल। संग मे ओ सभ लालटेम, मशाल, और हाथ-हथियार रखने छल।
4
यीशु ई जनैत जे हुनका संग की सभ घटत, आगाँ बढ़ि कऽ ओकरा सभ सँ पुछलथिन, “अहाँ सभ ककरा ताकि रहल छी?”
5
ओ सभ उत्तर देलकनि, “नासरत-निवासी यीशु केँ।” यीशु कहलथिन, “ओ हमहीं छी।” (हुनका पकड़बाबऽ वला, यहूदा, ओतऽ ओकरा सभक संग ठाढ़ छल।)
6
जखने यीशु कहलथिन जे, ओ हमहीं छी, ओ सभ पाछाँ हटि कऽ जमीन पर खसि पड़ल।
7
तँ यीशु फेर पुछलथिन, “ककरा ताकि रहल छी?” और ओ सभ कहलकनि, “नासरत-निवासी यीशु केँ।”
8
यीशु बजलाह, “हम अहाँ सभ केँ कहिए देने छी जे, ओ हमहीं छी। हमरा जँ ताकि रहल छी तँ हिनका सभ केँ जाय दिऔन।”
9
(ई एहि लेल भेल जे हुनकर ई कहल वचन पूरा होअय जे, अहाँ जिनका सभ केँ हमरा देलहुँ, तिनका सभ मे सँ हम एकोटा केँ नाश नहि होमऽ देलहुँ। )
10
तखन सिमोन पत्रुस, जिनका लग तरुआरि छलनि, से तरुआरि निकालि कऽ महापुरोहितक नोकर पर चला कऽ ओकर दहिना कान उड़ा देलनि। ओहि नोकरक नाम मलखुस छल।
11
यीशु पत्रुस केँ कहलथिन, “अहाँ अपन तरुआरि म्यान मे राखि लिअ! की हम ओहि बाटी केँ नहि पिबू जे पिता हमरा देने छथि?”
12
तखन सेनाक दल और ओकर कप्तान आ यहूदी सभक सिपाही सभ यीशु केँ पकड़लकनि और हुनका बान्हि लेलकनि।
13
पहिने हुनका हन्ना लग लऽ गेलनि, जे ओहि वर्षक महापुरोहित काइफाक ससुर छलाह।
14
काइफा वैह छथि जे यहूदी सभ केँ सल्लाह देने छलाह, जे जनताक लेल एक व्यक्तिक मरनाइ नीक होइत।
15
सिमोन पत्रुस आ एक आरो शिष्य यीशुक पाछाँ-पाछाँ गेलाह। ई शिष्य महापुरोहित सँ परिचित होयबाक कारणेँ यीशुक संग सोझे आङन मे चल गेलाह।
16
मुदा पत्रुस द्वारिक बाहरे ठाढ़ रहलाह। तखन ओ शिष्य जे महापुरोहित सँ परिचित छलाह, से फेर आबि द्वारिक चौकीदारी करऽ वाली टहलनी सँ बात कऽ कऽ पत्रुस केँ भीतर लऽ अयलाह।
17
ओ टहलनी पत्रुस केँ पुछलकनि, “कहीं अहूँ एहि आदमीक शिष्य तँ नहि छी?” ओ कहलथिन, “हम नहि छी।”
18
जाड़क मास छल, और नोकर आ सिपाही सभ कोइलाक घूर लगा चारू कात ठाढ़ भऽ कऽ आगि तपैत छल। पत्रुसो ओकरा सभक संग आगि तपैत ठाढ़ छलाह।
19
एहि बीच महापुरोहित यीशु सँ हुनकर शिष्य सभक बारे मे और सिद्धान्तक विषय मे पूछ-ताछ कयलथिन।
20
यीशु हुनका उत्तर देलथिन, “हम तँ खुलल रूपेँ सभ सँ बात कयने छी। हम सदिखन सभाघर सभ मे और मन्दिर मे जाहिठाम सभ यहूदी जुटि जाइत अछि शिक्षा दैत रहलहुँ। हम गुप्त रूप सँ किछु नहि कहलहुँ।
21
हमरा किएक पुछैत छी? जे हमर बात सुनने अछि, तकरा सभ सँ पुछि लिऔक जे हम की शिक्षा देलहुँ। ओ सभ जनैत अछि जे हम की कहलहुँ।”
22
हुनकर ई कहला पर, लग मे ठाढ़ एक सिपाही हुनका एक चमेटा मारलकनि और कहलकनि, “महापुरोहित केँ तोँ एहि प्रकारेँ उत्तर दैत छहुन?”
23
यीशु बजलाह, “जँ हम अनुचित बाजल छी, तँ तकर प्रमाण दिअ। मुदा जँ हम ठीक कहने छी तँ हमरा किएक मारैत छी?”
24
तखन हन्ना यीशु केँ बान्हले महापुरोहित काइफा लग पठा देलथिन।
25
एम्हर सिमोन पत्रुस आगि तपैत ठाढ़ छलाह। तँ लोक सभ हुनका पुछलकनि, “की अहूँ ओकरे चेला सभ मे सँ नहि छी?” ओ अस्वीकार करैत बजलाह, “हम नहि छी।”
26
महापुरोहितक एकटा नोकर, जे ओहि आदमीक सम्बन्धी छल जकरा पत्रुस कान छपटि देने छलाह, से हुनका सँ पुछलकनि, “की हम अहाँ केँ ओकरा संग गाछी मे नहि देखने छलहुँ?”
27
पत्रुस फेर अस्वीकार कयलनि, और तुरत मुर्गा बाजि उठल।
28
तखन यीशु केँ काइफाक ओहिठाम सँ रोमी राज्यपालक भवन मे लऽ गेलनि। आब भोर भऽ गेल छल, और एहि डरेँ जे छुआ जायब आ फसह-भोज नहि खा सकब, यहूदी सभ अपने राजभवन मे नहि पैसल।
29
तेँ पिलातुस ओकरा सभ लग बाहर अयलाह और पुछलथिन, “एहि व्यक्ति पर की दोष लगबैत छी?”
30
ओ सभ उत्तर देलक, “ओ जँ अपराधी नहि रहैत तँ हम सभ ओकरा अहाँ केँ नहि सौंपितहुँ!”
31
पिलातुस कहलथिन, “अहीं सभ ओकरा लऽ जा कऽ अपन धर्म-नियमक अनुसार ओकर न्याय करिऔक।” यहूदी सभ उत्तर देलक, “ककरो मृत्युदण्ड देनाइ हमरा सभक अधिकार मे नहि अछि।”
32
ई एहि लेल भेल जे यीशुक कहल बात पूरा होअय जाहि द्वारा ओ संकेत देने रहथि जे हुनकर मृत्यु कोन तरहेँ होयतनि।
33
तखन पिलातुस राजभवन मे फेर गेलाह और यीशु केँ अपना सामने मे बजा कऽ पुछलथिन, “की अहाँ यहूदी सभक राजा छी?”
34
यीशु उत्तर देलथिन, “की ई बात अहाँ अपना दिस सँ पुछि रहल छी, वा दोसर लोक हमरा बारे मे कहने अछि?”
35
पिलातुस बजलाह, “की हम यहूदी छी? अहींक लोक और अहींक मुख्यपुरोहित सभ अहाँ केँ हमरा हाथ मे सौंपि देने अछि। अहाँ की कयने छी?”
36
यीशु कहलथिन, “हमर राज्य एहि संसारक नहि अछि। जँ हमर राज्य एहि संसारक रहैत तँ हमर सेवक सभ लड़ैत जाहि सँ हम यहूदी सभक हाथ नहि पड़ितहुँ। मुदा नहि! हमर राज्य एहि संसारक नहि अछि!”
37
तखन पिलातुस बजलाह, “तखन राजा तँ छी?” यीशु उत्तर देलथिन, “से अहीं कहि रहल छी। हम एहि लेल जन्म लेलहुँ और संसार मे अयलहुँ जे हम सत्यक गवाही दी, और जे सभ सत्यक पक्ष मे छथि से सभ हमर बात सुनैत छथि।”
38
पिलातुस बजलाह, “सत्य अछि की?” आ फेर यहूदी सभ लग बाहर अयलाह और ओकरा सभ केँ कहलथिन, “ओकरा मे हम दोष लगयबाक कोनो आधार नहि पबैत छी।
39
लेकिन अहाँ सभक एक प्रथा अछि जे फसह-पाबनिक अवसर पर हम अहाँ सभक लेल एक कैदी केँ छोड़ैत छी। तँ की अहाँ सभ चाहैत छी जे हम अहाँ सभक लेल ‘यहूदी सभक राजा’ केँ छोड़ि दी?”
40
एहि पर ओ सभ जोर-जोर सँ हल्ला कऽ कऽ कहऽ लागल, “नहि! एकरा नहि! बरब्बा केँ!” बरब्बा एक क्रान्तिकारी अपराधी छल।
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