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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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John 20
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
सप्ताहक पहिल दिन भोरे अन्हरोखे मरियम मग्दलीनी कबर पर गेलीह और देखलनि जे कबरक मुँह पर सँ पाथर हटाओल गेल अछि।
2
ई देखि ओ दौड़ैत-दौड़ैत सिमोन पत्रुस और ओहि दोसर शिष्य लग जिनका सँ यीशु प्रेम करैत छलाह, गेलीह और कहलनि, “ओ सभ कबर मे सँ प्रभु केँ उठा कऽ लऽ गेल छनि, और हम सभ नहि जनैत छी जे हुनका कतऽ रखने छनि!”
3
एहि पर पत्रुस और दोसर शिष्य कबर दिस विदा भेलाह।
4
दूनू संग-संग दौड़लाह, मुदा दोसर शिष्य पत्रुस सँ आगाँ बढ़ि कऽ कबर पर पहिने पहुँचलाह।
5
ओ निहुड़ि कऽ भीतर तकलनि और ओतऽ पड़ल मलमल वला पट्टी सभ देखलनि, मुदा भीतर नहि गेलाह।
6
तखन सिमोन पत्रुस हुनका पाछाँ-पाछाँ पहुँचलाह, और कबर मे पैसलाह।
7
ओ पट्टी सभ केँ ओतऽ पड़ल देखलनि, और ओहि गमछा केँ सेहो, जाहि सँ यीशुक मूड़ी लपेटल छल। गमछा पट्टी सभक संग नहि, बल्कि हटले एक जगह चौपेतल राखल छल।
8
तखन ओ दोसर शिष्य जे कबर पर पहिने पहुँचल छलाह, सेहो भीतर गेलाह। ओ देखलनि और विश्वास कयलनि।
9
(एखनो तक ओ सभ तँ नहि बुझैत छलाह जे धर्मशास्त्रक कथनानुसार हुनकर मृत्यु मे सँ जीबि उठनाइ आवश्यक छल।)
10
तखन ओ शिष्य सभ अपन-अपन घर चल गेलाह।
11
मुदा मरियम कबरक बाहर कनिते ठाढ़ रहलीह। कनैत-कनैत ओ निहुड़ि कऽ कबर मे तकलनि।
12
ओ उज्जर वस्त्र पहिरने दू स्वर्गदूत केँ ओहिठाम बैसल देखलनि जाहिठाम यीशुक लास राखल गेल छल, एक सीरहान लग और दोसर पौथान लग।
13
ओ सभ हुनका सँ पुछलथिन, “बहिन, अहाँ किएक कनैत छी?” ओ उत्तर देलथिन, “ओ सभ हमरा प्रभु केँ उठा कऽ लऽ गेल अछि, और हम नहि जनैत छी जे हुनका कतऽ रखने छनि।”
14
ई कहि, ओ घुमलीह और लग मे ठाढ़ यीशु केँ देखलनि, मुदा ओ नहि चिन्हलनि जे ई यीशु छथि।
15
यीशु हुनका कहलथिन, “बहिन, अहाँ कनैत किएक छी? किनका खोजि रहल छिऐन?” ओ हुनका माली बुझि कऽ कहलथिन, “यौ मालीजी, अहीं जँ हुनका उठा कऽ लऽ गेल छिऐन तँ हमरा कहू जे कतऽ रखने छिऐन। हम जा कऽ हुनका लऽ अनबनि।”
16
यीशु बजलाह, “मरियम!” ओ हुनका दिस घुरि कऽ इब्रानी भाषा मे कहलथिन, “रब्बुनी!” (जकर अर्थ अछि “गुरुजी!”)
17
यीशु कहलथिन, “हमरा नहि पकड़ू! कारण हम एखन पिता लग ऊपर नहि गेल छी। आब हमर भाय सभक ओहिठाम जा कऽ कहि दिऔन जे, हम अपना पिता और अहाँ सभक पिता, अपना परमेश्वर और अहाँ सभक परमेश्वर लग ऊपर जा रहल छी।”
18
मरियम मग्दलीनी जा कऽ शिष्य सभ केँ कहलनि, “हम प्रभु केँ देखने छी!” और ओ हुनका सभ केँ हुनकर कहल बात सुनौलथिन।
19
ओहि दिनक साँझ, अर्थात् सप्ताहक पहिल दिन, जखन शिष्य सभ यहूदी सभक डरेँ घरक केबाड़ सभ बन्द कऽ कऽ एक संग बैसल छलाह, तखन यीशु आबि कऽ हुनका सभक बीच ठाढ़ भऽ गेलाह और कहलथिन, “अहाँ सभ केँ शान्ति भेटय।”
20
ई कहि ओ हुनका सभ केँ अपन हाथ और पाँजर देखौलथिन। प्रभु केँ देखि शिष्य सभक आनन्दक कोनो सीमा नहि रहलनि।
21
ओ हुनका सभ केँ फेर कहलथिन, “अहाँ सभ केँ शान्ति भेटय। जेना हमरा पिता पठौने छथि, तहिना हमहूँ अहाँ सभ केँ पठबैत छी।”
22
ई कहि ओ हुनका सभ पर फुकलथिन और कहलथिन, “पवित्र आत्मा केँ लिअ।
23
जँ ककरो पाप माफ कऽ देबैक, तँ ओकर पाप माफ भेलैक। जँ ककरो पाप माफ नहि कऽ देबैक तँ ओकर पाप माफ नहि भेलैक।”
24
मुदा बारह शिष्य मे सँ एक, थोमा, जे “जौंआ” कहबैत छथि, से आरो शिष्य सभक संग ओहि समय मे नहि छलाह जखन यीशु आयल छलाह।
25
जखन ओ सभ हुनका कहऽ लगलनि, “हम सभ प्रभु केँ देखने छी,” तँ ओ कहलथिन, “जा धरि हम हुनका हाथ मे काँटीक चेन्ह देखि ओहि छेद मे अपन आङुर नहि पैसायब आ हुनकर पाँजर मे अपन हाथ नहि धऽ लेब, ता धरि हम किन्नहुँ नहि विश्वास करब।”
26
आठ दिनक बाद शिष्य सभ फेर घर मे छलाह, और थोमा सेहो संग छलाह। केबाड़ सभ बन्द रहितो, यीशु अयलाह और हुनका सभक मध्य ठाढ़ भऽ बजलाह, “अहाँ सभ केँ शान्ति भेटय।”
27
तखन थोमा केँ कहलथिन, “एहिठाम अपन आङुर धऽ लिअ, और हमर हाथ देखि लिअ। अपन हाथ लाउ और हमरा पाँजर मे धऽ लिअ। अविश्वासी नहि, विश्वासी बनू।”
28
थोमा उत्तर देलथिन, “हे हमर प्रभु, हे हमर परमेश्वर!”
29
यीशु हुनका कहलथिन, “अहाँ हमरा देखबाक कारणेँ विश्वास करैत छी, धन्य छथि ओ सभ जे बिनु देखनहि विश्वास करैत छथि।”
30
यीशु आरो बहुत चमत्कारपूर्ण चिन्ह अपना शिष्य सभक समक्ष देखौलनि जे एहि पुस्तक मे नहि लिखल अछि।
31
मुदा जे सभ लिखल अछि से एहि लेल जे अहाँ सभ विश्वास करी जे यीशु उद्धारकर्ता-मसीह और परमेश्वरक पुत्र छथि, और जे विश्वास कयला सँ अहाँ सभ केँ हुनका द्वारा जीवन प्राप्त होअय।
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