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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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John 16
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
“ई सभ बात हम अहाँ सभ केँ एहि लेल कहि दैत छी जे अहाँ सभ विश्वास केँ नहि छोड़ी।
2
ओ सभ अहाँ सभ केँ सभाघर सँ बारि देत। हँ, ओ समय आबि रहल अछि जे, जे अहाँ सभ केँ जान सँ मारि देत से बुझत जे ओ परमेश्वरक धर्म-कर्म कऽ रहल अछि।
3
ई काज ओ सभ एहि लेल करत जे ओ सभ ने हमरा आ ने हमरा पिता केँ कहियो चिन्हने अछि।
4
मुदा ई सभ बात हम अहाँ सभ केँ कहि दैत छी जाहि सँ जखन ओ समय आओत तखन अहाँ सभ मोन राखब जे हम एहि विषय मे कहि देने छी। “ई बात सभ हम शुरू सँ नहि कहलहुँ, कारण हम अहाँ सभक संग छलहुँ।
5
मुदा आब हम तिनका लग जा रहल छी जे हमरा पठौलनि, तैयो अहाँ सभ मे सँ केओ नहि हमरा सँ पुछैत छी जे, अहाँ कतऽ जा रहल छी,
6
बल्कि हमर एहि कथनक कारणेँ अहाँ सभक मोन शोक सँ भरि गेल अछि।
7
मुदा हम सत्ये कहैत छी जे ई अहाँ सभक हितक लेल अछि जे हम जा रहल छी, किएक तँ जँ हम नहि जायब तँ सहायक नहि औताह, लेकिन जँ हम जायब तँ हम हुनका अहाँ सभ लग पठा देबनि।
8
ओ जखन औताह तँ पाप, धार्मिकता आ न्यायक विषय मे संसारक दोष सिद्ध करथिन।
9
ओकर दोष पापक विषय मे एहि लेल सिद्ध होयतैक, जे ओ सभ हमरा पर विश्वास नहि करैत अछि;
10
धार्मिकताक विषय मे एहि लेल जे हम पिता लग जा रहल छी आ अहाँ सभ हमरा फेर नहि देखब;
11
और न्यायक विषय मे एहि लेल जे, ओ जे एहि संसारक शासक अछि से दोषी ठहरि गेल अछि।
12
“हमरा अहाँ सभ केँ आओर बहुत किछु कहबाक अछि, मुदा एखन अहाँ सभ ओकरा नहि सहि सकैत छी।
13
सत्यक आत्मा जखन औताह तखन ओ अहाँ सभ केँ पूर्ण सत्य बुझौताह, कारण ओ अपना तरफ सँ नहि बजताह, बल्कि जे ओ सुनताह सैह बजताह, और भविष्य मे होमऽ वला बात अहाँ सभ केँ कहि देताह।
14
ओ हमर महिमा प्रगट करताह कारण जतेक बात ओ अहाँ सभ केँ कहताह, से हमरा सँ लऽ लेने रहताह।
15
जे किछु पिताक छनि, से सभ हमर अछि। एहि कारणेँ हम कहलहुँ जे, आत्मा जे किछु अहाँ सभ केँ कहताह से हमरा सँ लऽ लेने रहताह।
16
“आब कनेक काल मे अहाँ सभ हमरा नहि देखब, तखन फेर कनेक कालक बाद हमरा देखब।”
17
एहि पर हुनकर किछु शिष्य एक-दोसर सँ कहऽ लगलाह, “हुनकर एहि कथनक की अर्थ भेल जे ‘कनेक काल मे अहाँ सभ हमरा नहि देखब’, और, ‘तखन तकरा कनेक कालक बाद हमरा फेर देखब’, और एकर जे, ‘कारण, हम पिता लग जा रहल छी’?”
18
ओ सभ कहऽ लगलाह, “हुनकर एहि ‘कनेक काल’क की कहबाक मतलब छनि? हम सभ नहि बुझि पबैत छी जे ओ की कहि रहल छथि।”
19
यीशु जनैत छलाह जे ओ सभ हुनका सँ पुछऽ चाहैत छथि, तेँ ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “की अहाँ सभ एक-दोसर सँ पुछि रहल छी जे हमर की कहबाक अर्थ छल जखन हम कहलहुँ जे, कनेक काल मे अहाँ सभ हमरा नहि देखब, और, तखन तकरा कनेक कालक बाद हमरा फेर देखब?
20
हम अहाँ सभ केँ सत्ये कहैत छी जे अहाँ सभ कन्ना-रोहटि आ विलाप करब जखन कि संसार आनन्द मनाओत। अहाँ सभ शोक मनायब, मुदा अहाँ सभक शोक आनन्द मे बदलि जायत।
21
जखन स्त्री बच्चा केँ जन्म दैत अछि तँ ओकरा दर्द होइत छैक, कारण ओकर समय आबि गेल रहैत छैक, मुदा जखन ओ बच्चा केँ जन्म दऽ दैत अछि तँ ओ एहि खुशी मे जे एक नव बच्चा संसार मे जन्म लेलक, अपना पीड़ा केँ बिसरि जाइत अछि।
22
तहिना, अहाँ सभ एखन शोक मनबैत छी, मुदा हम अहाँ सभ केँ फेर देखब आ तखन अहाँ सभक मोन आनन्द सँ भरि जायत, और अहाँ सभक आनन्द केओ नहि अहाँ सभ सँ छिनत।
23
ओहि समय मे अहाँ सभ हमरा सँ कोनो प्रश्न नहि पुछब। “हम अहाँ सभ केँ विश्वास दिअबैत छी जे, जँ अहाँ सभ पिता सँ किछु माँगब तँ ओ अहाँ सभ केँ हमरा नाम सँ देताह।
24
एखन तक अहाँ सभ हमरा नाम सँ नहि किछु मँगने छी। माँगू और अहाँ सभ प्राप्त करब, आ ताहि सँ अहाँ सभक आनन्द पूर्ण भऽ जायत।
25
“ई सभ बात हम अहाँ सभ केँ झाँपल भाषा मे कहि देने छी। मुदा समय आबि रहल अछि जखन हम झाँपल भाषा मे नहि बाजब, बल्कि पिताक विषय मे अहाँ सभ केँ स्पष्ट कहब।
26
ओहि समय मे अहाँ सभ हमरा नाम सँ माँगब। हम ई नहि कहैत छी जे हम अहाँ सभक लेल पिता सँ माँगब।
27
नहि, पिता अपने अहाँ सभ सँ प्रेम करैत छथि, कारण अहाँ सभ हमरा सँ प्रेम कयने छी आ विश्वास कयने छी जे हम पिता लग सँ अयलहुँ।
28
हम पिता लग सँ संसार मे अयलहुँ, आब फेर संसार केँ छोड़ि कऽ पिता लग जा रहल छी।”
29
तखन हुनकर शिष्य सभ कहलथिन, “हँ, आब अहाँ स्पष्ट बाजि रहल छी, और झाँपल भाषा मे नहि।
30
आब हम सभ जानि गेलहुँ जे अहाँ केँ सभ किछु बुझल अछि और अहाँ केँ इहो आवश्यकता नहि अछि जे केओ अहाँ लग अपन प्रश्न राखय। एहि कारणेँ हम सभ विश्वास करैत छी जे अहाँ परमेश्वर लग सँ आयल छी।”
31
यीशु बजलाह, “की आब विश्वास करैत छी?
32
देखू! ओ समय आबि रहल अछि, हँ, आबिओ गेल, जखन अहाँ सभ छिड़िया जायब। अहाँ सभ अपन-अपन घर भागि कऽ हमरा असगरे छोड़ि देब। तैयो हम असगर नहि छी, कारण पिता हमरा संग छथि।
33
“हम अहाँ सभ केँ ई सभ बात कहि देने छी जाहि सँ हमरा मे अहाँ सभ केँ शान्ति भेटय। संसार मे अहाँ सभ पर संकट आओत, मुदा साहस राखू! हम संसार पर विजयी भऽ गेल छी।”
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