bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Maithili
/
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
/
John 12
John 12
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
← Chapter 11
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 13 →
1
फसह-पाबनि सँ छओ दिन पहिने, यीशु बेतनिया गाम अयलाह, जाहिठाम लाजर रहैत छलाह, जिनका मरलाक बाद यीशु जीवित कऽ देने रहथिन।
2
ओहिठाम यीशुक अयबाक खुशी मे भोज कयल गेल। मार्था सेवा-सत्कारक काज मे लागल छलीह, और यीशुक संग भोजन करऽ वला सभ मे लाजर सेहो बैसल छलाह।
3
तखन मरियम विशुद्ध जटामासीक लगभग आधा सेर बहुत दामी सुगन्धित तेल लऽ यीशुक पयर पर ढारि देलनि और हुनकर पयर अपना केश सँ पोछि देलथिन। ओहि तेलक सुगन्ध सँ सौंसे घर गमकि उठल।
4
मुदा हुनकर एकटा शिष्य, यहूदा इस्करियोती, जे बाद मे हुनका संग विश्वासघात करऽ वला भेल, से बाजल,
5
“ई तेल किएक नहि बेचि देल गेल? एहि सँ एक वर्षक मजदूरीक बराबरि मूल्य भेटैत, आ गरीब सभ मे बाँटल गेल रहैत!”
6
ओ ई बात एहि लेल नहि कहलक जे ओकरा गरीब सभक लेल चिन्ता छलैक, बल्कि एहि लेल जे ओ चोर छल। ओकरा लग हुनका सभक पाइक बटुआ रहैत छलैक, और ओहि मे जे किछु राखल जाइत छल, ताहि मे सँ ओ चोरा लैत छल।
7
यीशु उत्तर देलथिन, “हिनका छोड़ि दिऔन! हम जे कबर मे राखल जायब तकर तैयारीक लेल हिनका ई तेल रखने रहबाक छलनि।
8
गरीब सभ तँ अहाँ सभक संग सभ दिन रहत, मुदा हम अहाँ सभक संग सभ दिन नहि रहब।”
9
जखन यहूदी सभक बड़का भीड़ केँ पता लगलैक जे यीशु एतऽ छथि, तँ ओ सभ देखबाक लेल आयल, मुदा खाली यीशुए केँ देखबाक लेल नहि, बल्कि लाजर केँ सेहो, जिनका मरलाक बाद यीशु जीवित कयने रहथिन।
10
तखन मुख्यपुरोहित सभ लाजर केँ सेहो खून कऽ देबाक योजना बनाबऽ लगलाह,
11
किएक तँ हुनके कारण बहुत यहूदी अपना धर्मगुरु सभ केँ छोड़ि कऽ यीशु पर विश्वास करैत छलनि।
12
दोसरे दिन बड़का भीड़ जे पाबनिक लेल आयल छल, से सुनलक जे यीशु यरूशलेम आबि रहल छथि।
13
ओ सभ खजूरक छज्जा लऽ कऽ हुनका सँ भेँट करबाक लेल शहर सँ बहरायल। ओ सभ हुनकर जयजयकार करैत छल, “जय जय! धन्य छथि ओ जे प्रभुक नाम सँ अबैत छथि! धन्य छथि इस्राएलक राजा!”
14
यीशु एक गदहीक बच्चा पर बैसल छलाह, जेना धर्मशास्त्रक लेख अछि,
15
“हे सियोन नगर! भयभीत नहि होअह! देखह! तोहर राजा गदहीक बच्चा पर बैसल आबि रहल छथुन!”
16
एहि समय मे हुनकर शिष्य सभ ई सभ बात नहि बुझलनि, मुदा यीशु जखन स्वर्गक महिमा मे उठा लेल गेलाह तखन हुनका सभ केँ मोन पड़लनि जे ई सभ बात यीशुएक बारे मे लिखल गेल छल और हुनका संग तहिना कयलो गेलनि।
17
जे लोक सभ ओहि समय मे यीशुक संग छल जखन ओ लाजर केँ कबर मे सँ बहरयबाक लेल कहि कऽ जीवित कऽ देने रहथिन, से सभ एहि बातक बारे मे सभ लोक केँ कहैत छल।
18
एहि कारणेँ एतेक लोक यीशु सँ भेटबाक लेल बहरायल छल। ओ सभ सुनने छल जे यीशु ई चमत्कारपूर्ण चिन्ह देखौने छथि।
19
तेँ फरिसी सभ एक-दोसर केँ कहऽ लगलाह, “देखैत छी कि नहि! अहाँ सभ जे कऽ रहल छी ताहि सँ कनेको फायदा नहि! देखू! सौंसे संसार ओकरा पाछाँ दौड़ि रहल छैक!”
20
जे लोक पाबनि मे आराधना करबाक लेल आयल छल, ताहि मे किछु लोक यूनानी जातिक छल।
21
ओ सभ फिलिपुस लग आयल, जे गलील प्रदेशक बेतसैदा नगरक छलाह। ओ सभ हुनका सँ ई निवेदन कयलकनि, “मालिक, हम सभ यीशु केँ देखितहुँ।”
22
फिलिपुस जा कऽ अन्द्रेयास केँ कहि देलनि, और अन्द्रेयास फिलिपुसक संग जा कऽ यीशु केँ कहलनि।
23
यीशु बजलाह, “मनुष्य-पुत्रक महिमा प्रगट होयबाक घड़ी आबि गेल अछि।
24
हम अहाँ सभ केँ सत्ये कहैत छी जे, जाबत धरि गहुमक दाना जमीन मे खसि कऽ मरि नहि जाइत अछि, ताबत धरि ओ असगर रहैत अछि। मुदा जँ मरि जायत, तँ आओर बहुत दाना केँ उत्पादन करत।
25
जे अपना जीवन केँ प्रिय बुझैत अछि, से ओकरा गमबैत अछि, और जे एहि संसार मे अपना जीवन केँ तुच्छ बुझैत अछि, से ओकरा अनन्त जीवनक लेल सुरक्षित रखैत अछि।
26
जे हमर सेवा करत, से हमरा पाछाँ आबय। और हम जतऽ होयब, ततऽ हमर सेवक सेहो होयत। जे केओ हमर सेवा करत, तकरा हमर पिता आदर करथिन।
27
“आब हमर आत्मा अति व्याकुल भऽ गेल अछि। हम की कहू?—ई जे, ‘यौ पिता, एहि घड़ी सँ हमरा बचाउ!’? नहि! हम तँ एही लेल एहि घड़ी तक आयल छी!
28
यौ पिता, अपन नामक महिमा केँ प्रगट करू!” एहि पर स्वर्ग सँ ई आवाज सुनाइ देलक जे, “हम ओकरा प्रगट कयने छी और फेर प्रगट करब।”
29
लग मे ठाढ़ भेल भीड़ ई सुनलक और कहलक, “मेघ बाजल।” दोसर लोक कहलक, “हुनका सँ स्वर्गदूत बजलनि।”
30
यीशु बजलाह, “ई आवाज हमरा लेल नहि, अहीं सभक लेल भेल।
31
आब एहि संसारक न्यायक समय आबि गेल अछि, आब एहि संसारक शासक केँ पराजित कऽ देल जयतैक।
32
मुदा हम जखन पृथ्वीक उपर लटकाओल जायब तँ हम अपना लग सभ लोक केँ खीचि लेब।”
33
ओ ई कहि कऽ संकेत कऽ देलथिन जे हुनकर मृत्यु कोन तरहक होयतनि।
34
एहि पर भीड़क लोक बाजल, “हम सभ धर्म-नियम सँ सिखने छी जे उद्धारकर्ता-मसीह अनन्त काल तक रहताह। तँ अहाँ कोना कहैत छी जे मनुष्य-पुत्रक ऊपर लटकाओल जयनाइ आवश्यक अछि? की मनुष्य-पुत्र आ उद्धारकर्ता-मसीह दूनू एके नहि छथि?”
35
यीशु ओकरा सभ केँ कहलनि, “इजोत कनेके काल आओर अहाँ सभक बीच मे अछि। जा धरि इजोत अछि ता धरि चलिते रहू, नहि तँ अन्हार अहाँ सभ केँ लपकि लेत। जे अन्हार मे चलैत अछि, से नहि जनैत अछि जे ओ कतऽ जा रहल अछि।
36
जा धरि इजोत अहाँ सभक संग अछि, इजोत पर विश्वास राखू, जाहि सँ इजोतक सन्तान बनब।” यीशु ई सभ बात कहि कऽ चल गेलाह और ओकरा सभ सँ नुका रहलाह।
37
ओकरा सभक समक्ष मे एतेक चमत्कारपूर्ण चिन्ह देखौलाक बादो, ओ सभ यीशु पर विश्वास नहि करैत छल।
38
ई एहि लेल भेल जे परमेश्वरक प्रवक्ता यशायाहक ई कथन पूरा होअय जे, “यौ प्रभु, हमरा सभ द्वारा सुनाओल गेल उपदेशक बात पर के विश्वास कयने अछि? और प्रभुक बल ककरा पर प्रगट भेल छैक?”
39
तेँ ओ सभ विश्वास नहि कऽ सकल, कारण, जेना यशायाह दोसर ठाम कहैत छथि,
40
“प्रभु ओकरा सभक आँखि आन्हर कऽ देने छथिन, और ओकरा सभक मोन कठोर कऽ देने छथिन, जाहि सँ ओ सभ ने आँखि सँ देखय, ने मोन सँ बुझय, आ ने हमरा दिस घूमि कऽ आबय कि हम ओकरा सभ केँ स्वस्थ कऽ दिऐक।”
41
यशायाह ई बात कहलनि किएक तँ ओ यीशुक महिमा देखलनि और हुनका बारे मे बजलाह।
42
ई बात होइतो यहूदी सभक अधिकारी सभ मे सँ सेहो बहुत गोटे हुनका पर विश्वास कयलनि, मुदा फरिसी सभक कारणेँ ओ सभ अपना विश्वास केँ खुलि कऽ स्वीकार नहि कयलनि, एहि डरेँ जे सभाघर सँ बारि देल जाएब,
43
कारण ओ सभ परमेश्वरक प्रशंसा सँ मनुष्यक प्रशंसा प्रिय बुझैत छलाह।
44
तखन यीशु जोर सँ कहलनि, “जे केओ हमरा पर विश्वास करैत अछि, से हमरे पर नहि, बल्कि हमरा जे पठौलनि, तिनको पर विश्वास करैत अछि।
45
और जे हमरा देखैत अछि, से तिनका देखैत छनि जे हमरा पठौलनि।
46
हम इजोत भऽ कऽ संसार मे आयल छी जाहि सँ जे केओ हमरा पर विश्वास करत से अन्हार मे नहि रहय।
47
“हमर वचन जँ केओ सुनैत अछि, लेकिन मानैत नहि अछि, तँ हम ओकर न्याय नहि करैत छी, कारण हम संसारक न्याय करबाक लेल नहि अयलहुँ, बल्कि ओकरा बचयबाक लेल।
48
जे हमरा अस्वीकार करैत अछि और हमर वचन ग्रहण नहि करैत अछि, तकर न्याय करऽ वला एक अछि—जे वचन हम कहने छी, वैह अन्तिम दिन मे ओकर न्याय करतैक।
49
कारण हम अपना दिस सँ नहि बजलहुँ, बल्कि जे पिता हमरा पठौलनि सैह हमरा आदेश देलनि जे हम की कही और कोना बाजी।
50
और हम जनैत छी जे हुनकर आदेश अनन्त जीवन अछि। तेँ हम जे किछु बजैत छी, से वैह अछि जे ओ हमरा बजबाक लेल कहने छथि।”
← Chapter 11
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 13 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21