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Matthew 13
Matthew 13
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
ओही दिन यीशु घर सँ बहरा कऽ झीलक कछेर पर जा कऽ बैसलाह।
2
हुनका लग लोकक एतेक विशाल भीड़ आबि कऽ जमा भऽ गेल जे ओ नाव पर चढ़ि कऽ बैसलाह आ लोकक भीड़ झीलक कछेर पर ठाढ़ रहल।
3
यीशु विभिन्न तरहक दृष्टान्त सभक द्वारा लोक सभ केँ बहुतो बात सभ कहलथिन। ओ कहलथिन, “एक किसान बीया बाउग करबाक लेल गेल।
4
बीया बाउग करैत काल किछु बीया रस्ताक कात मे खसल आ चिड़ै सभ आबि ओकरा खा लेलकैक।
5
किछु बीया पथराह जमीन पर खसल जतऽ बेसी माटि नहि होयबाक कारणेँ ओ जल्दी जनमि गेल।
6
मुदा रौद लगिते ओ झरकि गेल आ जड़ि नहि पकड़ि सकबाक कारणेँ सुखा गेल।
7
फेर दोसर बीया काँट-कुशक बीच मे खसल मुदा काँट-कुश बढ़ि कऽ ओकरा दबा देलकैक।
8
किछु बीया नीक जमीन पर पड़ल आ फड़ल-फुलायल, कोनो सय गुना फसिल देलक, कोनो साठि गुना आ कोनो तीस गुना।
9
जकरा कान होइक, से सुनओ।”
10
यीशुक शिष्य सभ हुनका लग आबि कऽ पुछलथिन, “अहाँ लोक सभ सँ दृष्टान्त सभ मे किएक बात करैत छी?”
11
यीशु उत्तर देलथिन, “स्वर्गक राज्य जे अछि तकर रहस्यक ज्ञान तँ अहाँ सभ केँ देल गेल अछि, मुदा एकरा सभ केँ नहि देल गेल छैक।
12
तेँ जकरा छैक तकरा आओर देल जयतैक आ ओकरा लग बहुते भऽ जयतैक। मुदा जकरा नहि छैक तकरा सँ जेहो छैक सेहो लऽ लेल जयतैक।
13
हम एकरा सभ सँ दृष्टान्त सभ मे एहि लेल बात करैत छी जे, ‘ई सभ तकितो देखैत नहि अछि; आ सुनितो ने सुनैत अछि आ ने बुझैत अछि।’
14
एकरा सभ मे यशायाहक ई भविष्यवाणी पूरा होइत अछि जे, ‘तोँ सभ सुनैत तँ रहबह मुदा बुझबह नहि, तोँ सभ देखैत तँ रहबह मुदा देखाइ देतह नहि।’
15
‘कारण, एहि लोक सभक मोन मे ठेला पड़ि गेल छैक, ई सभ कान सँ उच्च सुनैत अछि, ई सभ अपन आँखि मुनि लेने अछि, जाहि सँ कतौ एना नहि होअय जे आँखि सँ देखय, कान सँ सुनय, मोन सँ बुझय, आ घूमि कऽ हमरा लग आबय, आ हम ओकरा सभ केँ स्वस्थ कऽ दिऐक।’
16
“मुदा धन्य छी अहाँ सभ जे आँखि सँ देखैत छी आ कान सँ सुनैत छी।
17
हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, अपना समय मे परमेश्वरक एहन बहुतो प्रवक्ता आ धार्मिक लोक सभ रहथि जे सभ चाहलनि जे, जाहि बात सभ केँ अहाँ सभ देखि रहल छी, तकरा देखी, मुदा नहि देखलनि; और जाहि बात सभ केँ अहाँ सभ सुनि रहल छी, से सुनी, मुदा नहि सुनलनि।
18
“आब अहाँ सभ बाउग कयनिहार वला दृष्टान्तक अर्थ सुनू।
19
जखन केओ परमेश्वरक राज्यक शुभ समाचार सुनैत अछि मुदा बुझैत नहि अछि, तखन शैतान आबि कऽ जे किछु ओकरा हृदय मे बाउग कयल गेल रहैत अछि से ओकरा सँ छिनि कऽ लऽ लैत अछि। ई वैह बीया भेल जे रस्ताक कात मे बाउग कयल गेल छल।
20
पथराह जमीन पर बाउग कयल बीया ओ व्यक्ति भेल जे परमेश्वरक शुभ समाचार सुनि कऽ तुरत आनन्दपूर्बक ओकरा ग्रहण कऽ लैत अछि,
21
मुदा ओ वचन ओकरा मे जड़ि नहि पकड़ैत छैक आ ओ कनेके काल स्थिर रहैत अछि। जखन शुभ समाचारक कारणेँ ओकरा कष्ट सहऽ पड़ैत छैक वा ओकरा संग अत्याचार होमऽ लगैत छैक तँ ओ तुरत विश्वास केँ छोड़ि दैत अछि।
22
काँट-कुशक बीच खसल बीया ओ मनुष्य भेल जे शुभ समाचार केँ सुनैत अछि मुदा सांसारिक चिन्ता आ धन-सम्पत्तिक मोह-माया ओहि शुभ समाचार केँ दबा दैत छैक और ओ वचन ओकरा जीवन मे कोनो फल नहि दैत अछि।
23
नीक जमीन मे बाउग कयल बीया ओ सभ अछि जे सभ शुभ समाचार सुनैत अछि और बुझैत अछि। ओ फड़ि-फुला कऽ फसिल दैत अछि, केओ सय गुना, केओ साठि गुना आ केओ तीस गुना।”
24
यीशु लोक सभक समक्ष दोसर दृष्टान्त रखलनि जे, “स्वर्गक राज्यक तुलना ओहि मनुष्य सँ कयल जा सकैत अछि जे अपना खेत मे नीक बीया बाउग कयलनि।
25
मुदा जखन सभ केओ सुति रहल छल तखन हुनकर दुश्मन अयलनि आ ओहि बाउग कयल गहुमक खेत मे जंगली बीया बाउग कऽ चल गेल।
26
जखन बाउग कयल गहुमक बीया जनमल आ ओहि मे बालि निकलल तखन जंगलिआ घास सेहो देखाइ देलक।
27
ई देखि नोकर सभ मालिक केँ कहलकनि, ‘मालिक, की अपने अपना खेत मे बढ़ियाँ बीया बाउग नहि कयने छलहुँ? तँ एहि मे जंगलिआ घास कतऽ सँ आबि गेल?’
28
मालिक कहलथिन, ‘ई कोनो दुश्मनक काज अछि!’ नोकर सभ कहलकनि, ‘तँ की, ओकरा उखाड़ि दिऐक?’
29
ओ कहलथिन, ‘नहि। कतौ एना नहि भऽ जाओ जे जंगलिआ घास उखाड़ैत काल तोँ सभ गहुमोक गाछ सभ केँ उखाड़ि दहक।
30
गहुम कटयबाक समय तक दूनू केँ संग-संग बढ़ऽ दहक। कटनी करयबाक समय मे हम कटनिहार सभ केँ कहबैक जे, पहिने जंगलिआ घासक गाछ सभ केँ जमा कऽ कऽ जरयबाक लेल बोझ बान्हि लैह, तखन गहुम केँ हमरा बखारी मे जमा करह।’ ”
31
यीशु लोक सभ केँ एक आओर दृष्टान्त दैत कहलथिन, “स्वर्गक राज्य सरिसोक दाना जकाँ अछि, जकरा केओ लेलक आ अपना खेत मे बाउग कऽ देलक।
32
दाना सभ मे सरिसोक दाना सभ सँ छोट होइत अछि मुदा जनमि कऽ बढ़लाक बाद सभ साग-पात सँ पैघ भऽ तेहन गाछ भऽ जाइत अछि जे आकाशक चिड़ै सभ आबि कऽ ओकरा ठाढ़ि-पात मे अपन खोंता बना लैत अछि।”
33
यीशु एकटा आओर दृष्टान्त ओकरा सभ केँ देलथिन—“स्वर्गक राज्य रोटी फुलाबऽ वला खमीर जकाँ अछि, जकरा एक स्त्री तीन पसेरी आँटा मे मिला कऽ सनलक; बाद मे खमीरक शक्ति सँ पूरा आँटा फुलि गेलैक।”
34
यीशु अपना लग जमा भेल लोकक भीड़ केँ ई सभ बात दृष्टान्त दऽ-दऽ कऽ कहलथिन। बिनु दृष्टान्त देने ओ ओकरा सभ केँ किछु नहि कहलथिन।
35
ओ एहि लेल एना बात कयलनि जे परमेश्वरक प्रवक्ता द्वारा कहल वचन पूरा होअय— “हम दृष्टान्त सभ दऽ-दऽ कऽ बाजब, सृष्टिक आरम्भ सँ जे बात सभ झाँपल छल से हम कहब।”
36
तकरबाद यीशु लोकक भीड़ केँ छोड़ि कऽ घर मे चल अयलाह। शिष्य सभ हुनका लग आबि कऽ कहलथिन, “खेत मे बाउग कयल जंगलिआ बीयाक दृष्टान्त वला बात केँ हमरा सभ केँ बुझा दिअ।”
37
ओ हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “नीक बीया बाउग कयनिहार छथि मनुष्य-पुत्र।
38
खेत अछि संसार, आ नीक बीया अछि परमेश्वरक राज्यक सन्तान सभ। जंगलिआ बीया अछि दुष्ट शैतानक सन्तान सभ।
39
जंगलिआ बीया बाउग करऽ वला दुश्मन अछि शैतान। कटनीक समय अछि संसारक अन्त आ कटनी कयनिहार सभ छथि स्वर्गदूत सभ।
40
“जाहि तरहेँ जंगलिआ घास केँ जमा कऽ कऽ आगि मे जराओल जाइत अछि तहिना संसारक अन्त मे सेहो कयल जायत।
41
मनुष्य-पुत्र अपना स्वर्गदूत सभ केँ पठौताह आ ओ सभ हुनका राज्य मे सँ सभ प्रकारक पाप मे फँसाबऽ वला बात सभ केँ उखाड़ि कऽ आ कुकर्मी सभ केँ जमा कऽ कऽ
42
आगिक भट्ठी मे फेकि देताह, जतऽ लोक कानत आ दाँत कटकटाओत।
43
तखन धर्मी सभ अपना पिताक राज्य मे सूर्य जकाँ चमकताह। जकरा कान होइक, से सुनओ।
44
“स्वर्गक राज्य खेत मे गाड़ल धन जकाँ अछि, जकरा कोनो मनुष्य पौलक आ फेर माटि सँ झाँपि देलक। ओ एतेक खुश भेल जे ओ अपन सभ धन-सम्पत्ति बेचि कऽ ओहि खेत केँ किनि लेलक।
45
“फेर, स्वर्गक राज्य ओहि व्यापारी सन अछि जे नीक मोतीक खोज मे छल।
46
जखन ओकरा एक बहुत बहुमूल्य मोती भेटलैक तँ जा कऽ अपन सभ किछु बेचि देलक आ ओहि मोती केँ किनि लेलक।
47
“फेर दोसर दृष्टिएँ स्वर्गक राज्य ओहि महाजाल सन अछि जे समुद्र मे खसाओल गेल आ सभ प्रकारक माछ ओहि मे घेरायल।
48
जखन जाल भरि गेल तँ लोक सभ ओकरा कछेर पर अनलक आ बैसि कऽ नीक माछ सभ केँ डाली मे जमा कयलक मुदा खराब माछ सभ केँ फेकि देलक।
49
एहि संसारक अन्त मे सेहो एहिना होयतैक। स्वर्गदूत सभ आबि कऽ दुष्ट सभ केँ धर्मी सभ सँ अलग करताह
50
आ आगिक भट्ठी मे फेकि देताह, जतऽ लोक कानत आ दाँत कटकटाओत।”
51
तखन यीशु शिष्य सभ सँ पुछलथिन, “की अहाँ सभ ई बात सभ बुझलहुँ?” ओ सभ उत्तर देलथिन, “हँ।”
52
ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “तेँ प्रत्येक व्यक्ति जे धर्मशास्त्र केँ बुझैत अछि आ जे स्वर्गक राज्यक शिष्य बनल अछि, से ओहि गृहस्थ जकाँ अछि जे अपन भण्डार घर मे सँ नव आ पुरान दूनू तरहक किमती वस्तु सभ निकालि सकैत अछि।”
53
यीशु ई दृष्टान्त सभ देलाक बाद ओतऽ सँ चल गेलाह।
54
ओ अपना गाम मे आबि कऽ सभाघर मे लोक सभ केँ उपदेश देबऽ लगलाह। लोक सभ हुनकर उपदेशक बात सभ सुनि आश्चर्यित भऽ गेल आ बाजल जे, “एकरा एहि तरहक बुद्धि आ चमत्कार करबाक सामर्थ्य कतऽ सँ भेटलैक?
55
की ई लकड़ी मिस्तिरीक बेटा नहि अछि? की एकर मायक नाम मरियम नहि छैक? आ एकर भाय सभ याकूब, यूसुफ, सिमोन, आ यहूदा नहि अछि?
56
की एकर बहिन सभ अपना सभक बीच नहि रहैत अछि? तखन एकरा ई बात सभ भेटलैक कतऽ सँ?”
57
एहि तरहेँ लोक यीशु सँ डाह करऽ लागल। तखन यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “मात्र अपने गाम आ अपने घर मे परमेश्वरक प्रवक्ताक अनादर होइत छैक।”
58
और ओकरा सभक अविश्वासक कारणेँ यीशु ओतऽ बहुत कम चमत्कार वला काज सभ कयलनि।
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