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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Matthew 9
Matthew 9
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
तखन यीशु नाव मे चढ़ि कऽ झील पार कयलनि आ फेर अपना नगर मे चल अयलाह।
2
किछु लोक सभ एकटा लकवा मारल आदमी केँ खाट पर लदने यीशु लग अनलकनि। यीशु ओकरा सभक विश्वास देखि लकवा मारल आदमी केँ कहलथिन, “हौ बेटा, साहस राखह, तोहर पाप माफ भेलह।”
3
ई सुनि किछु धर्मशिक्षक सभ अपना मोन मे सोचऽ लगलाह, “ई व्यक्ति तँ अपना केँ परमेश्वरक तुल्य बुझि हुनकर निन्दा करैत अछि!”
4
यीशु हुनकर सभक मोनक बात जानि कहलथिन, “अहाँ सभ अपना मोन मे अधलाह बात किएक सोचैत छी?
5
आसान की अछि—ई कहब जे, ‘तोहर पाप क्षमा भेलह’, वा ई कहब जे, ‘उठि कऽ चलह-फिरह’?
6
मुदा जाहि सँ अहाँ सभ ई बात बुझि जाइ जे मनुष्य-पुत्र केँ पृथ्वी पर पाप माफ करबाक अधिकार छनि, हम एकरा कहैत छी...” तखन ओ लकवाक रोगी केँ कहलथिन, “उठह, अपन खाट उठाबह आ घर चल जाह!”
7
ओ उठल आ घर चल गेल।
8
लोक सभ ई देखि भयभीत भेल आ एहि लेल परमेश्वरक प्रशंसा करऽ लागल जे ओ मनुष्य केँ एहन अधिकार देने छथिन।
9
ओहिठाम सँ आगाँ बढ़ला पर यीशु मत्ती नामक एक आदमी केँ कर असूल करऽ वला स्थान मे बैसल देखलथिन। यीशु हुनका कहलथिन, “हमरा पाछाँ आउ।” ओ उठि कऽ यीशुक संग चलऽ लगलथिन।
10
जखन यीशु मत्तीक घर मे भोजन करबाक लेल बैसलाह तँ बहुतो कर असूल कयनिहार आ “पापी” सभ आबि हुनका और हुनकर शिष्य सभक संग भोजन करबाक लेल बैसल।
11
ई देखि फरिसी सभ यीशुक शिष्य सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभक गुरु कर असूल कयनिहार और पापी सभक संग किएक खाइत-पिबैत छथि?”
12
यीशु हुनकर सभक बात सुनि कहलथिन, “वैद्यक आवश्यकता स्वस्थ लोक केँ नहि होइत छैक, बल्कि बिमार सभ केँ!
13
अहाँ सभ जा कऽ प्रभुक कहल एहि वचनक अर्थ सिखू जे, ‘अहाँ सभक द्वारा अर्पित चढ़ौना वा बलि-प्रदान हम नहि चाहैत छी, बल्कि अहाँ सभ दयालु बनू, से।’ हम धार्मिक सभ केँ नहि, बल्कि पापी सभ केँ बजयबाक लेल आयल छी।”
14
बपतिस्मा देनिहार यूहन्नाक शिष्य सभ यीशु लग आबि कऽ पुछलथिन, “की कारण अछि जे हम सभ आ फरिसी सभ तँ उपास करैत रहैत छी, मुदा अहाँक शिष्य सभ उपास नहि करैत छथि?”
15
यीशु हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “जाबत तक वरियातीक संग वर अछि ताबत तक की वरियाती शोक मनाओत? नहि! मुदा ओ समय आओत जहिया वर ओकरा सभक बीच सँ हटा लेल जायत। ओ सभ तहिये उपास करत।
16
केओ पुरान कपड़ा पर नयाँ कपड़ाक चेफरी नहि लगबैत अछि, कारण, ओ चेफरी घोकचि कऽ पुरान कपड़ा केँ खिचत और ओ कपड़ा पहिनहु सँ बेसी फाटि जायत।
17
एहि तरहेँ लोक नव दारू पुरान चमड़ाक थैली मे नहि रखैत अछि। कारण, एना जँ करत तँ चमड़ाक थैली फाटि जयतैक; दारू बहि जयतैक, आ थैलिओ नष्ट भऽ जयतैक। नहि! नव दारू नये थैली मे राखल जाइत अछि। एहि तरहेँ दारू आ थैली दूनू सुरक्षित रहैत अछि।”
18
यीशु हुनका सभ केँ ई बात सभ कहिए रहल छलाह कि सभाघरक एक अधिकारी अयलथिन आ हुनका सामने ठेहुन रोपि कऽ कहलथिन, “हमर बेटी एखने तुरत मरि गेलि अछि, मुदा तैयो अपने चलि कऽ अपन हाथ ओकरा पर राखि देल जाओ—तँ ओ जीबि जायत।”
19
यीशु उठि कऽ अपना शिष्य सभक संग हुनका पाछाँ विदा भऽ गेलाह।
20
तखने एक स्त्री जकरा बारह वर्ष सँ खून खसऽ वला बिमारी छलैक, से पाछाँ सँ आयल आ यीशुक कपड़ाक कोर छुबि लेलक।
21
ओ अपना मोन मे सोचि रहल छलि जे, “हम जँ हुनकर कपड़ो केँ छुबि लेब तँ स्वस्थ भऽ जायब।”
22
यीशु पाछाँ घूमि कऽ ओकरा देखलनि आ कहलथिन, “बेटी, साहस राखह, तोहर विश्वास तोरा स्वस्थ कऽ देलकह।” ओ स्त्री ओही घड़ी स्वस्थ भऽ गेलि।
23
यीशु सभाघरक अधिकारीक ओहिठाम पहुँचलाह तँ ओतऽ शोक मे बाँसुरी बजौनिहार सभ आ आरो लोक सभ केँ हल्ला-गुल्ला करैत देखलथिन।
24
ओ कहलथिन, “हटै जाइ जाउ, बच्ची मरल नहि अछि; सुतल अछि।” एहि पर लोक सभ हुनका पर हँसऽ लागल।
25
लोकक भीड़ जखन बाहर कयल गेल तँ यीशु घरक भीतर गेलाह। ओ बच्चीक हाथ पकड़ि कऽ उठौलथिन और बच्ची उठि बैसलि।
26
ई समाचार ओहि प्रान्तक कोना-कोना मे पसरि गेल।
27
यीशु ओतऽ सँ आगाँ बढ़लाह तँ दू आन्हर व्यक्ति एहि तरहेँ सोर पारैत हुनका पाछाँ-पाछाँ चलऽ लगलनि जे, “यौ दाऊदक पुत्र, हमरा सभ पर दया करू!”
28
यीशु जखन घर मे गेलाह तँ ओ आन्हर व्यक्ति सभ हुनका लग अयलनि। यीशु ओकरा सभ सँ पुछलथिन, “की तोरा सभ केँ विश्वास छह जे हम ई काज कऽ सकैत छी?” ओ सभ कहलकनि, “हँ, प्रभु।”
29
तखन यीशु ओकर सभक आँखि केँ छुबैत कहलथिन, “जेहन तोहर सभक विश्वास छह तहिना तोरा सभक लेल होअह।”
30
एतबा कहैत देरी ओकर सभक आँखि ठीक भऽ गेलैक। यीशु ओकरा सभ केँ चेतावनी देलथिन जे, “सुनह, ई बात ककरो नहि कहिअहक।”
31
मुदा ओ सभ घर सँ निकलि कऽ सम्पूर्ण जिला मे हुनकर कीर्ति सुना देलकनि।
32
ओ दूनू व्यक्ति केँ घर सँ निकलिते किछु लोक दुष्टात्मा सँ ग्रसित एक बौक आदमी केँ यीशु लग अनलकनि।
33
दुष्टात्मा केँ ओकरा मे सँ निकालि देल गेलाक बाद ओ बौक आदमी बाजऽ लागल। ई देखि भीड़क लोक सभ आश्चर्यित भऽ कहऽ लागल जे, “इस्राएल मे एहन बात कहियो नहि भेल छल।”
34
मुदा फरिसी सभ कहऽ लगलाह जे, “ई दुष्टात्मा सभक मुखियाक शक्ति सँ दुष्टात्मा सभ केँ निकालैत अछि।”
35
यीशु नगर-नगर, गाम-गाम घुमऽ लगलाह। ओ यहूदी सभक सभाघर सभ मे उपदेश दैत छलाह, परमेश्वरक राज्यक शुभ समाचार सुनबैत छलाह आ लोक सभ केँ सभ तरहक कष्ट-बिमारी सँ मुक्त करैत छलाह।
36
लोकक भीड़ केँ देखि कऽ हुनका दया होइत छलनि, कारण ओ सभ पीड़ित आ असहाय छल—ओहि भेँड़ी सभ जकाँ जकर केओ चरबाह नहि होइक।
37
तखन ओ अपना शिष्य सभ केँ कहलथिन, “पाकल फसिल तँ बहुत अछि, मुदा काटऽ वला मजदूर कम अछि।
38
तेँ खेतक मालिक सँ प्रार्थना करिऔन जे ओ अपना खेत मे आरो मजदूर पठबथि।”
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