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Matthew 26
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
ई सभ बात जखन कहल भऽ गेलनि तँ यीशु अपना शिष्य सभ केँ कहलथिन,
2
“अहाँ सभ जनैत छी जे दू दिनक बाद फसह-पाबनि अछि। ओहि समय मे मनुष्य-पुत्र क्रूस पर लटका कऽ मारबाक लेल पकड़बाओल जायत।”
3
ओम्हर काइफा नामक महापुरोहित जे छलाह तिनका आङन मे मुख्यपुरोहित आ समाजक बूढ़-प्रतिष्ठित सभ जमा भऽ कऽ
4
अपना मे विचार-विमर्श करऽ लगलाह जे कोन तरहेँ छल सँ यीशु केँ पकड़ि कऽ मारल जाय।
5
ओ सभ कहैत छलाह जे, “मुदा पाबनिक समय मे नहि। एना नहि होअय जे जनता उपद्रव करय।”
6
यीशु जखन बेतनिया गाम मे सिमोन नामक एक आदमी, जिनका पहिने कुष्ठ-रोग भेल छलनि, तिनका ओहिठाम छलाह,
7
तँ एक स्त्री बेसकिमती सुगन्धित तेल एकटा संगमरमरक बर्तन मे लऽ कऽ अयलीह। यीशु भोजन करैत छलाह तखने ओ स्त्री ओहि सुगन्धित तेल केँ यीशुक माथ पर ढारि देलथिन।
8
ई देखि हुनकर शिष्य सभ खिसिआइत बजलाह, “एहन नीक वस्तु किएक एना बरबाद कयल गेल?
9
एहि तेल केँ बढ़ियाँ दाम मे बेचि कऽ बहुतो गरीबक सहायता कयल जा सकैत छल।”
10
शिष्य सभक बात बुझि यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “एहि स्त्री केँ अहाँ सभ किएक डाँटि रहल छी? ई तँ हमरा लेल बहुत बढ़ियाँ काज कयलनि।
11
गरीब सभ तँ अहाँ सभक संग सभ दिन रहत, मुदा हम अहाँ सभक संग सभ दिन नहि रहब।
12
ई सुगन्धित तेल हमरा मूड़ी पर ढारि कऽ ई स्त्रीगण हम जे कबर मे राखल जायब, तकर तैयारी कयलनि।
13
हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी जे, संसार भरि मे जतऽ कतौ हमर शुभ समाचारक प्रचार कयल जायत, ततऽ एहि स्त्रीगणक स्मरण मे हिनकर एहि काजक चर्चा सेहो कयल जायत।”
14
तकरबाद यीशुक बारह शिष्य मे सँ एक जकर नाम यहूदा इस्करियोती छलैक से मुख्यपुरोहित सभ लग जा कऽ कहलकनि,
15
“हम जँ यीशु केँ अहाँ सभक हाथ मे पकड़बा देब तँ अहाँ सभ हमरा की देब?” एहि पर ओ सभ तीसटा चानीक सिक्का ओकरा देलथिन।
16
ओहि समय सँ यहूदा यीशु केँ पकड़बयबाक अनुकूल अवसरक ताक मे रहऽ लागल।
17
“बिनु खमीरक रोटी वला पाबनि”क पहिल दिन यीशुक शिष्य सभ हुनका लग आबि पुछलथिन, “फसह-पाबनिक भोजक व्यवस्था अहाँक लेल हम सभ कतऽ ठीक करू?”
18
यीशु कहलथिन, “शहर मे फलानाक ओतऽ जाउ आ कहू, ‘गुरुजी कहलनि अछि जे हमर समय आब लगचिआ गेल अछि। हम अपन शिष्य सभक संग अहाँक ओतऽ फसह-भोज खायब।’ ”
19
शिष्य सभ यीशुक कथनानुसार सभ बात कऽ कऽ फसह-पाबनिक भोजक व्यवस्था ओतहि कयलनि।
20
साँझ पड़ला पर यीशु अपन बारहो शिष्यक संग भोजन करबाक लेल बैसलाह।
21
भोजन करैत समय यीशु अपना शिष्य सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्य कहैत छी, अहाँ सभ मे सँ एक गोटे हमरा पकड़बा देब।”
22
ई सुनि शिष्य सभ बहुत उदास भऽ गेलाह। ओ सभ बेरा-बारी हुनका सँ पुछऽ लगलनि जे, “हे प्रभु, ओ हम तँ नहि छी?”
23
यीशु उत्तर देलथिन, “हमरा संग जे बट्टा मे हाथ रखने अछि सैह हमरा पकड़बाओत।
24
मनुष्य-पुत्रक सम्बन्ध मे जहिना धर्मशास्त्र मे लिखल गेल अछि तहिना तँ ओ चलिए जायत, मुदा धिक्कार अछि ओहि मनुष्य केँ जे मनुष्य-पुत्र केँ पकड़बा रहल अछि। ओकरा लेल तँ नीक ई रहितैक जे ओ जन्मे नहि लेने रहैत।”
25
एहि पर हुनका पकड़बाबऽ वला यहूदा कहलकनि, “गुरुजी, की अहाँ हमरा बारे मे तँ नहि कहि रहल छी?” यीशु उत्तर देलथिन, “अहाँ स्वयं कहि देलहुँ।”
26
ओ सभ जखन भोजन कऽ रहल छलाह तँ यीशु रोटी लेलनि आ परमेश्वर केँ धन्यवाद देलनि। ओ रोटी केँ तोड़ि कऽ शिष्य सभ केँ देलथिन आ कहलथिन, “लिअ, खाउ, ई हमर देह अछि।”
27
तकरबाद ओ बाटी लेलनि आ परमेश्वर केँ धन्यवाद दऽ कऽ शिष्य सभ केँ दैत कहलथिन, “अहाँ सभ केओ एहि मे सँ पिबू।
28
ई परमेश्वर आ मनुष्यक बीच विशेष सम्बन्ध स्थापित करऽ वला हमर खून अछि, जे बहुत लोकक पापक क्षमादानक लेल बहाओल जा रहल अछि।
29
हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, ई अंगूरक रस हम आजुक बाद ताबत तक फेर नहि पीब जाबत तक हम अपन पिताक राज्य मे अहाँ सभक संग नवका अंगूरक रस नहि पीब।”
30
तकरबाद एक भजन गाबि कऽ ओ सभ जैतून पहाड़ पर चल गेलाह।
31
तखन यीशु अपना शिष्य सभ केँ कहलथिन, “आइए राति अहाँ सभ गोटे हमरा कारणेँ अपना विश्वास मे डगमगायब, किएक तँ धर्मशास्त्र मे लिखल अछि जे परमेश्वर कहने छथि, ‘हम चरबाह केँ मारि देबैक, आ झुण्डक भेँड़ा सभ छिड़िया जायत।’
32
मुदा मृत्यु सँ फेर जीवित भऽ गेलाक बाद हम अहाँ सभ सँ पहिने गलील प्रदेश जायब।”
33
एहि पर पत्रुस कहलथिन, “चाहे सभ केओ अहाँक कारणेँ विश्वास मे डगमगायत, मुदा हम कहियो नहि डगमगायब!”
34
यीशु पत्रुस केँ कहलथिन, “हम अहाँ केँ सत्य कहैत छी जे, आइए राति मे मुर्गा केँ बाजऽ सँ पहिने अहाँ तीन बेर हमरा अस्वीकार कऽ कऽ लोक केँ कहबैक जे, हम ओकरा चिन्हबो नहि करैत छिऐक।”
35
मुदा पत्रुस कहलथिन, “हमरा जँ अहाँक संग मरहो पड़त तैयो हम किन्नहुँ नहि अहाँ केँ अस्वीकार करब।” आरो सभ शिष्य सेहो यैह बात कहलथिन।
36
ओहिठाम सँ यीशु अपन शिष्य सभक संग गतसमनी नामक एक जगह पर गेलाह। ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम किछु आगाँ जा कऽ जाबत प्रार्थना करैत छी ताबत अहाँ सभ एतऽ बैसल रहू।”
37
ओ पत्रुस आ जबदीक दूनू पुत्र केँ अपना संग लऽ गेलाह। ओ बहुत व्यथित आ व्याकुल होमऽ लगलाह,
38
और हुनका सभ केँ कहलथिन, “हमर मोन व्यथा सँ एतेक व्याकुल अछि—मानू जे हम दुःख सँ मरऽ पर छी। अहाँ सभ एहिठाम रहि कऽ हमरा संग जागल रहू।”
39
एतेक कहि ओ कनेक आगाँ बढ़लाह आ मुँह भरे खसि कऽ प्रार्थना करऽ लगलाह, “हे हमर पिता, जँ भऽ सकैत अछि तँ ई दुःखक बाटी हमरा लग सँ हटा लिअ, मुदा तैयो जेना हम चाहैत छी तेना नहि, बल्कि जेना अहाँ चाहैत छी तेना होअय।”
40
तकरबाद यीशु अपन तीनू शिष्य लग अयलाह। ओ हुनका सभ केँ सुतल देखि पत्रुस केँ पुछलथिन, “की हमरा संग एको घण्टा जागल रहितहुँ से अहाँ सभ केँ पार नहि लागल?
41
परीक्षा मे नहि पड़ि जाउ ताहि लेल अहाँ सभ जागल रहू आ प्रार्थना करैत रहू। आत्मा तँ तत्पर अछि मुदा शरीर कमजोर।”
42
यीशु फेर जा कऽ प्रार्थना करऽ लगलाह, “हे पिता, जँ ई बाटी बिनु पिने हमरा लग सँ नहि हटाओल जा सकैत अछि, तँ अहाँक जे इच्छा अछि से पूरा होअय।”
43
ओ जखन प्रार्थना कऽ कऽ शिष्य सभ लग अयलाह तँ ओ सभ फेर सुतल छलाह। हुनकर सभक आँखि नीन सँ भारी भऽ गेल छलनि।
44
यीशु हुनका सभ केँ सुतले छोड़ि कऽ फेर गेलाह आ तेसरो बेर ओही तरहेँ प्रार्थना कयलनि।
45
तकरबाद ओ शिष्य सभ लग अयलाह आ कहलथिन, “की अहाँ सभ एखनो तक सुतिए रहल छी आ आरामे कऽ रहल छी? देखू, ओ समय आब आबि गेल, मनुष्य-पुत्र पापी सभक हाथ मे पकड़बाओल जा रहल अछि।
46
उठू-उठू! चलू! देखू, हमरा पकड़बाबऽ वला आबि गेल अछि!”
47
यीशु ई बात कहिए रहल छलाह कि यहूदा, जे बारह शिष्य मे सँ एक छल, ओतऽ पहुँचि गेल। ओकरा संग लोकक बड़का भीड़ छलैक, और सभक हाथ मे तरुआरि आ लाठी छल। ओकरा सभ केँ मुख्यपुरोहित सभ आ समाजक बूढ़-प्रतिष्ठित लोकनि पठौने छलाह।
48
यीशु केँ पकड़बाबऽ वला ओकरा सभ केँ ई संकेत देने छलैक जे, “हम जकरा चुम्मा लेब, वैह होयत। अहाँ सभ ओकरे पकड़ि लेब।”
49
यहूदा तुरत यीशुक लग मे जा कऽ कहलकनि, “गुरुजी, प्रणाम!” आ हुनका चुम्मा लेलकनि।
50
यीशु कहलथिन, “हौ मित्र, तोँ जाहि काजक लेल आयल छह, से कऽ लैह।” तखन लोक सभ आगाँ बढ़ि कऽ यीशु केँ पकड़ि लेलकनि आ बन्दी बना लेलकनि।
51
ई देखि यीशुक एक शिष्य अपन तरुआरि निकालि कऽ महापुरोहितक टहलू पर चला देलनि जाहि सँ ओकर एकटा कान छपटा गेलैक।
52
यीशु अपना शिष्य केँ कहलथिन, “अपन तरुआरि म्यान मे राखि लिअ। जे केओ तरुआरि चलबैत अछि से तरुआरि सँ मारल जायत।
53
की अहाँ ई सोचैत छी, जे हम अपन पिता सँ एहि बातक लेल निवेदन नहि कऽ सकैत छी जे ओ एही क्षण हमरा सहायताक लेल स्वर्गदूतक बारह सेना सँ बेसिओ पठबथि?
54
मुदा तखन धर्मशास्त्रक जे लेख अछि, जे ई सभ भेनाइ जरूरी अछि, से कोना पूरा होइत?”
55
तकरबाद यीशु अपना चारू भागक भीड़क लोक केँ कहलथिन, “की अहाँ सभ हमरा विद्रोह मचाबऽ वला बुझि कऽ लाठी और तरुआरि लऽ कऽ पकड़ऽ अयलहुँ? हम तँ सभ दिन मन्दिर मे बैसि कऽ लोक केँ उपदेश दैत छलिऐक, ततऽ अहाँ सभ हमरा नहि पकड़लहुँ।
56
मुदा ई सभ एना एहि लेल भेल जे परमेश्वरक प्रवक्ता लोकनिक लिखल बात सभ पूरा होअय।” तकरबाद हुनकर सभ शिष्य हुनका छोड़ि कऽ पड़ा गेलनि।
57
यीशु केँ पकड़ऽ वला सभ हुनका महापुरोहित काइफाक ओतऽ लऽ गेलनि। ओहिठाम धर्मशिक्षक आ समाजक बूढ़-प्रतिष्ठित लोक सभ जमा भेल छलाह।
58
पत्रुस सेहो कनेक दूरे रहि कऽ यीशुक पाछाँ लागल महापुरोहितक आङन तक गेलाह। ओ एहि घटनाक अन्त देखबाक उद्देश्य सँ नोकर सभक संग भीतर जा कऽ बैसि रहलाह।
59
ओम्हर मुख्यपुरोहित सभ आ सम्पूर्ण धर्म-महासभाक सदस्य सभ यीशु केँ मृत्युदण्डक योग्य बनयबाक लेल हुनका विरोध मे झूठ-फूसक प्रमाण सभ जमा करबाक कोशिश मे लागल छलाह।
60
मुदा बहुतो झुट्ठा गवाह सभक वयान लेलाक बादो कोनो पकिया प्रमाण हुनका सभ केँ नहि भेटलनि। अन्त मे दू गोटे आगाँ आबि कऽ बाजल,
61
“ई आदमी कहने छल जे, ‘हम परमेश्वरक मन्दिर केँ तोड़ि कऽ तीन दिन मे फेर ओकर निर्माण कऽ सकैत छी’।”
62
एहि पर महापुरोहित ठाढ़ होइत यीशु केँ पुछलथिन, “की अहाँ कोनो उत्तर नहि देब? ई गवाह सभ अहाँक विरोध मे केहन बात सभ कहि रहल अछि?”
63
मुदा यीशु चुपे रहलाह। महापुरोहित फेर कहलथिन, “अहाँ जीवित परमेश्वरक सपत खा कऽ कहू जे, की अहाँ उद्धारकर्ता-मसीह, परमेश्वरक पुत्र छी?”
64
यीशु उत्तर देलथिन, “अहाँ अपने कहि देलहुँ। और हम अहाँ सभ केँ इहो बात कहैत छी जे, भविष्य मे अहाँ सभ मनुष्य-पुत्र केँ सर्वशक्तिमान परमेश्वरक दहिना कात बैसल आ आकाशक मेघ मे अबैत देखब।”
65
ई बात सुनिते महापुरोहित अपन वस्त्र फाड़ैत बजलाह, “ई आदमी अपना केँ परमेश्वरक बराबरि बुझैत अछि! की अपना सभ केँ एखनो गवाह सभक आवश्यकता अछि? अहाँ सभ स्वयं अपन कान सँ सुनलहुँ जे ई परमेश्वरक निन्दा कयलक।
66
आब अहाँ सभक की विचार अछि?” ओ सभ उत्तर देलथिन, “ई मृत्युदण्डक जोगरक अछि।”
67
तकरबाद ओहिठाम उपस्थित लोक सभ यीशु केँ मुँह पर थूक फेकऽ लगलनि, हुनका मुक्का मारलकनि। किछु लोक हुनका थप्पड़ मारैत कहलकनि,
68
“यौ अन्तर्यामी मसीह! कहल जाओ, अपने केँ के मारलक?”
69
पत्रुस ओहि समय धरि बाहर आङन मे बैसल छलाह। तखन एक टहलनी हुनका लग आबि कऽ कहलकनि, “अहूँ तँ गलील निवासी यीशुक संग छलहुँ।”
70
मुदा पत्रुस सभक सामने मे अस्वीकार करैत ओकरा कहलथिन, “तोँ की बाजि रहल छेँ से हमरा बुझहे मे नहि अबैत अछि।”
71
ई बात कहि पत्रुस ओहिठाम सँ हटि कऽ आङनक मुँह पर चल गेलाह। तखन एक दोसर टहलनी हुनका देखि ओतऽ ठाढ़ लोक सभ केँ कहलक, “ई आदमी नासरत नगरक यीशुक संग छल।”
72
पत्रुस सपत खाइत फेर अस्वीकार कयलनि जे, “हम ओहि आदमी केँ नहि चिन्हैत छी!”
73
किछु कालक बाद ओहिठाम ठाढ़ लोक सभ पत्रुस लग आबि कऽ कहलकनि, “निश्चय तोँ ओकरे सभ मे सँ छह। तोहर बोलिए एहि बात केँ स्पष्ट कऽ रहल छह।”
74
तखन पत्रुस सपत खा कऽ अपना केँ सरापऽ लगलाह आ कहलथिन जे, “हम ओहि आदमी केँ चिन्हिते नहि छी!” ठीक ओही क्षण मे मुर्गा बाजि उठल।
75
तखन पत्रुस केँ यीशुक कहल ओ बात मोन पड़ि गेलनि जे, “मुर्गा केँ बाजऽ सँ पहिने अहाँ हमरा तीन बेर अस्वीकार करब।” ओ ओहिठाम सँ बाहर भऽ भोकासी पाड़ि कऽ कानऽ लगलाह।
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