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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Romans 4
Romans 4
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
आब हम सभ अपन पूर्वज अब्राहमक विषय मे की कही? धार्मिक ठहराओल जयबाक सम्बन्ध मे हुनका की अनुभव भेलनि?
2
जँ अब्राहम अपन कर्म द्वारा धार्मिक ठहराओल गेलाह तँ ओ अपना पर घमण्ड कऽ सकैत छलाह, मुदा परमेश्वरक सम्मुख हुनका घमण्ड करबाक कोनो आधार नहि छलनि,
3
किएक तँ धर्मशास्त्र मे ई लिखल अछि जे, “अब्राहम परमेश्वरक बातक विश्वास कयलनि आ ई विश्वास हुनका लेल धार्मिकता मानल गेलनि।”
4
काज कयनिहार केँ जखन मजदूरी देल जाइत अछि, तँ ई नहि मानल जाइत अछि जे ओकरा पर कृपा कयल गेलैक, बल्कि ई ओकर अधिकार छलैक।
5
मुदा जे व्यक्ति अपना काज पर भरोसा नहि रखैत अछि, बल्कि ओहि परमेश्वर पर विश्वास करैत अछि जे पापी सभ केँ धार्मिक ठहरबैत छथि, ताहि व्यक्ति केँ विश्वासक आधार पर परमेश्वर ओकरा धार्मिक मानैत छथि ⌞आ ई कृपाक बात अछि⌟।
6
एही तरहेँ धर्मशास्त्र मे दाऊद ओहन मनुष्य केँ धन्य कहैत छथि जकरा परमेश्वर बिनु कर्मक आधार पर धार्मिक मानैत छथिन—
7
“धन्य अछि ओ सभ जकर सभक अपराध क्षमा भऽ गेल आ जकर सभक पाप झाँपि देल गेलैक।
8
धन्य अछि ओ मनुष्य जकर पापक लेखा प्रभु नहि लेथिन।”
9
की ई आशिष खतना कराओल लोक सभक लेल मात्र अछि वा तकरो सभक लेल जकरा सभक खतना नहि भेल अछि? हम सभ तँ कहैत आयल छी जे, “अब्राहमक विश्वास हुनका लेल धार्मिकता मानल गेलनि।”
10
तँ हुनकर विश्वास कोन स्थिति मे धार्मिकता मानल गेलनि—हुनकर खतना होमऽ सँ पहिने वा भेलाक बाद? खतना भेलाक बाद नहि, बल्कि पहिने!
11
हुनकर खतना जखन नहि भेल छलनि, ताहि समय मे विश्वास द्वारा जे धार्मिकता प्राप्त भेल छलनि ताहि पर छाप स्वरूप खतनाक चिन्ह बाद मे लगाओल गेलनि। एहि तरहेँ ओ ओहू लोक सभक पिता भेलाह जे सभ बिनु खतना करौने विश्वास करैत अछि, जाहि सँ ओकरो सभक विश्वास ओकरा सभक लेल धार्मिकता मानल जाइक।
12
अब्राहम ओहि खतना करौनिहार लोक सभक पिता सेहो छथि जे सभ मात्र खतने नहि करौने अछि, बल्कि हमरा सभक पिता अब्राहमक ओही विश्वासक पद-चिन्ह पर सेहो चलैत अछि, जे विश्वास खतना होमऽ सँ पहिने हुनका मे छलनि।
13
अब्राहम आ हुनका वंश केँ जे वचन देल गेल छल जे ओ पृथ्वीक उत्तराधिकारी होयताह, से वचन हुनका एहि लेल नहि देल गेल जे ओ धर्म-नियमक पालन कयलनि, बल्कि एहि लेल जे ओ विश्वास कयलनि आ परमेश्वर हुनका धार्मिक मानलथिन।
14
जँ वैह सभ उत्तराधिकारी बनैत अछि जे सभ धर्म-नियमक अधीन रहैत अछि, तँ विश्वास कयनाइ बेकार अछि आ परमेश्वर जे वचन देलनि से निरर्थक भऽ जाइत अछि,
15
किएक तँ धर्म-नियम परमेश्वरक प्रकोपे उत्पन्न करैत अछि, आ जतऽ नियम अछिए नहि, मात्र ततहि आज्ञाक उल्लंघन नहि पाओल जाइत अछि।
16
एहि कारणेँ परमेश्वरक वचनक पूर्तिक आधार अछि मनुष्यक विश्वास, जाहि सँ सम्पूर्ण बात परमेश्वरक दिस सँ कृपाक रूप मे रहय आ हुनकर वचन अब्राहमक सभ वंशजक लेल अटल होअय—मात्र तकरे सभक लेल नहि, जकरा सभ केँ धर्म-नियम भेटल छैक, बल्कि ओहि सभ लोकक लेल, जे सभ अब्राहम सनक विश्वास रखैत अछि। अब्राहम अपना सभ गोटेक पिता छथि,
17
जेना कि लिखल अछि जे, “हम तोरा बहुतो जाति सभक पिता बनौने छिअह।” परमेश्वरक दृष्टि मे अब्राहम अपना सभक पिता छथि। ओ ओहि परमेश्वर पर विश्वास कयलनि जे मुइल सभ केँ जिअबैत छथि और जे वस्तु अस्तित्व मे अछिए नहि तकरा अस्तित्व मे अनैत छथि।
18
जाहि परिस्थिति मे कोनो आशा नहि राखल जा सकैत छल, ताहू मे अब्राहम आशा राखि विश्वास कयलनि और तहिना बहुतो जातिक पिता बनि गेलाह, जेना कि हुनका कहल गेल छलनि जे, “तोहर वंशज असंख्य होयतह।”
19
हुनकर उमेर लगभग एक सय वर्षक भऽ गेल छलनि आ ओ जनैत छलाह जे हमर शरीर सँ आब किछु नहि होयत आ ओ इहो जनैत छलाह जे सारा केँ बच्चा होयब असम्भवे छनि।
20
तैयो ओ परमेश्वरक वचन पर कनेको सन्देह नहि कयलनि, बल्कि विश्वास मे आओर दृढ़ भऽ कऽ परमेश्वरक स्तुति कयलनि।
21
हुनका पक्का विश्वास छलनि जे जाहि बातक वचन परमेश्वर देने छथि तकरा पूरा करऽ मे ओ सामर्थ्यवान छथि।
22
एही विश्वासक कारणेँ ओ धार्मिक मानल गेलाह।
23
धर्मशास्त्रक ई शब्द जे, “विश्वासक आधार पर ओ धार्मिक मानल गेलाह,” मात्र अब्राहमेक लेल नहि, बल्कि अपनो सभक लेल लिखल गेल अछि। अपनो सभ केँ परमेश्वर धार्मिक मानताह—अपना सभ केँ, जे सभ ओहि परमेश्वर पर विश्वास करैत छी जे अपना सभक प्रभु, यीशु केँ, मुइल सभ मे सँ जीवित कयलथिन।
25
यीशु मसीह केँ अपना सभक पापक कारणेँ मृत्युदण्ड देल गेल छलनि आ अपना सभ केँ धार्मिक ठहरयबाक लेल जिआओल गेलनि।
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