bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Marwari
/
Marwari Bible
/
John 14
John 14
Marwari Bible
← Chapter 13
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 15 →
1
यीसु चेलौ ऊं कयौ, “थौरो मन दुखी नीं होवै। परमेसर माथै विसवास राखौ अर म्हारै माथै ई विसवास राखौ।
2
म्हारै पिता परमेसर रै घर मांय रैवण खातर घणी जगा है, जे उठै नीं व्हैती तो म्हैं थांनै पैला इज कैय देतो। क्यूंकै म्हैं थोरै वास्तै उठै जगा तैयार करणै जावूं हूं।
3
अर जद म्हैं जायनै थोरै वास्तै जगा तैयार करूं, तो पछै आयनै थांनै अपणै साथै एठै ऊं ले जाऊंला, की जठै म्हैं रैवूं उठै थै भी रैवौ।
4
अर जठै म्हैं जावूं उठै रौ मारग थै जांणौ हो।”
5
थोमा उणनै कयौ, “हे परभु, म्हौ कोनीं जांणौ, की थै कठै जा रिया हो। तो मारग कीकर जांणौ?”
6
यीसु वांनै कयौ, “मारग, सचाई अर जीवन म्हैं इज हूं। म्हारै उपरात पिता खनै कोई नीं जा सकै।
7
जे थै म्हनै जांणता होता, तो म्हारै पिता नै भी जांणता। अर अबै उणनै जांणौ हो, अर उणनै देख्यां भी हो।”
8
फिलिप्पुस उणनै कयौ, “हे परभु, म्हौ नै पिता रा दरसण कराय दो, ओ ही म्हौरै लिए घणौ है।”
9
यीसु जबाब दियौ, “हे फिलिप्पुस, म्हैं इतै दिन ऊं थांरै साथै हूं, अर कांई थूं म्हनै कोनीं जांणै? जिकौ म्हनै देख्यौ वो पिता नै देख्यौ। पछै थूं कीकर कैवै के, ‘म्हौ नै पिता रा दरसण कराय दो’?
10
कांई थांनै भरोसौ कोनीं, के म्हैं पिता मांय हूं, अर पिता म्हारै मांय है? ऐ बातां जिकौ म्हैं थोरै ऊं कहूं, म्हैं म्हारी तरफ ऊं नीं कहूं, पण पिता म्हारै मांय रैन कांम करै है।
11
म्हारौ विसवास करौ, के म्हैं पिता मांय हूं, अर पिता म्हारै मांय है, नीं तो कांमां रै कारण ई म्हारौ विसवास करौ।
12
“म्हैं साची साची कहूं, की जिकौ म्हारै माथै विसवास राखै, ऐ कांम जे म्हैं करूं हूं, वो भी करैला। बल्कि इण ऊं मोटा मोटा कांम करैला, क्यूंकै म्हैं पिता रै खनै जावूं हूं।
13
अर जे कीं थै म्हारै नाम ऊं मांगोला, वोहीज म्हैं करूंला, की बेटे रै दवारा पिता री महिमा होवै।
14
जिकौ ई म्हारै नाम ऊं मांगोला, तो म्हैं वो करूंला।
15
“जे थै म्हारै ऊं परैम राखौ हो, तो म्हारी आग्याओं नै मांनौला।
16
म्हैं पिता ऊं अरज करूंला, अर वे थांनै एक सहायक देवेला, जिकौ थांरै हमेसां साथै रैवैला।
17
वो सत्य री आतमा है, जिणनै संसार स्वीकार नीं कर सकै, क्यूंकै वो उणनै नीं तो देखे अर नीं जांणै। थै उणै जांणौ हो, क्यूंकै वो थोरै साथै रैवै, अर वो थोरै में रैवास करै है।
18
“म्हैं थांनै नमाईता नीं छोड़ूला। म्हैं थांरै खनै आऊं हूं।
19
अर थोड़ीक जेज वळै है, पछै संसार म्हनै नीं देखेला, पण थै म्हनै देखोला। इण वास्तै की म्हैं जीवतौ हूं, थै भी जीवता रैवौला।
20
उण दिन थै जांणौला, की म्हैं पिता रै मांय हूं, अर थै म्हारै मांय, अर म्हैं थांरै मांय हूं।
21
जिण रै खनै म्हारी आग्याओं है, अर वो उणनै मांनै है, वो म्हारै ऊं परैम राखै है। अर जिकौ म्हारै ऊं परैम राखै है, उण ऊं म्हारौ पिता परैम राखैला, अर म्हैं उण ऊं परैम राखूंला, अर अपणै आप नै उणरै माथै परगट करूंला।”
22
उण यहूदा जिकौ इस्करियोती कोनीं हो, उण कयौ, “हे परभु, थै थांनै सिरफ म्हौरै माथै इज परगट क्यूं करौला, अर पूरा संसार माथै क्यूं नीं?”
23
यीसु उणौनै जबाब दियौ, “जिकौ कोई म्हारै ऊं परैम राखैला तो वो म्हारै वचन नै मांनैला, अर म्हारौ पिता ई उण ऊं परैम राखैला, अर म्हौ उणरै खनै आवौला, अर वांरै साथै रैवौला।
24
जिकौ म्हारै ऊं परैम नीं राखै, वो म्हारौ वचन नीं मांनै। अर जे वचन थै सुणौ हो, वो म्हारौ कोनीं बल्कि पिता रौ है, जिण म्हनै भेज्यौ।
25
“ऐ बातां म्हैं थांरै साथै रैवतै थका थोरै ऊं कही।
26
पण सहायक पवितर आतमा जिणनै पिता परमेसर, म्हारै नाम ऊं भेजेला, वो थांनै सगळी बातां सिखावेला, अर म्हारी सगळी बातां थांनै याद आवैला, जिकौ म्हैं थोरै ऊं केई है।
27
“म्हैं थांनै सानति देवूं, म्हारी सानति थांनै देवूं। ज्यूं संसार दैवै है, म्हैं थांनै नीं देवूं। थौरो मन नीं दुखी होवै अर नीं डरै।
28
थै सुण्यौ की म्हैं थांरै ऊं कयौ, ‘म्हैं जावूं हूं, अर पाछौ थांरै खनै आऊंला।’ जे थै म्हारै ऊं परैम राखौ, तो थै इण बात ऊं आंणंद मनावता के म्हैं पिता खनै जा रियौ हूं, क्यूंकै पिता म्हारै ऊं महान है।
29
म्हैं ऐ सगळी बातां व्हैणा ऊं पैली थांनै बताय दी, ताकी जद ऐ बातां पूरी व्है, तद थै म्हारै माथै विसवास करौ।
30
“म्हैं अबै थांरै ऊं घणी ताळ तांई बातां नीं करूंला, क्यूंकै इण संसार रौ राजा सैतान आवै है, उणरौ म्हारै माथै कीं हक नीं है।
31
पण ओ इण वास्तै होवै है की संसार जांणै है की म्हैं पिता ऊं परैम राखूं हूं, अर जिण तरैह पिता म्हनै आग्या दी, म्हैं व्यौंही करूं। “उठो, एठै ऊं चालौ।”
← Chapter 13
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 15 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21