bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Garhwali
/
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
/
John 16
John 16
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
← Chapter 15
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 17 →
1
“यु बात मिल तुम मा इलै बोलि कि तुम विश्वास नि ख्वे द्या।
2
उ तुम तैं यहूदियों का मिलणा का भवन मा बट्टी भैर निकाली दयाला बल्कि उ बगत औंदु च कि जु कुई तुम तैं मारि डलला य समझला की मि परमेश्वर की सेवा करदु छों।
3
इन ऊंल इलै कन किलैकि न पिता परमेश्वर तैं जांणि अर न मि तैं जंणदा छा।
4
पर यु बात मिल तुम मा इलै बोलि कि जब ऊंको पूरो हूंणो कु बगत ऐ त तुम तैं याद ऐ जौ कि मिल तुम बट्टी पैली ही बोल्याली छो मिल यु सब तुम तैं शुरू मा इलै नि बोलि कि वे बगत मा तुम दगड़ी छो।”
5
पर अब मि अपड़ा भिजणवला मा जांणु छौं अर तुम मा बट्टी कुई मि मा इन नि पुछणु च कि मि कख जांणु छो?
6
पर मिल जु यु बात तुम मा बोलि इलै तुमारो मन भौत उदास हवे गै।
7
फिर भि मि तुम बट्टी सच बुल्णु छौं कि मेरू जांण तुम कु अच्छो च किलैकि जु मि नि जौं त उ मददगार तुम मा नि आलो, पर जु मि जौलु, त वे तैं तुम मा भिजलु।
8
अर वेल ऐ के दुनिया का लुखुं तैं पाप अर धार्मिकता अर न्याय का बारा मा यकीन दिलै।
9
उ पाप का बारा मा यकीन दिलालो की उ मि पर विश्वास कन से इन्कार करदींनि
10
यु साबित करद की यीशु धर्मी च अर वेका बारा मा इलै कि मि पिता परमेश्वर मा जांणु छौं अर तुम मि तैं फिर नि दिखल्या
11
अर न्याय का बारा मा भि यकीन दिलालो की यु दुनिया कु सरदार शैतान भंगारी ठैरे जालो।
12
मिल तुम मा और भि भौत सैरी बात बतांण चांणु छों पर अभि तुम ऊं तैं सै नि सकदा।
13
पर जब उ यानि पवित्र आत्मा आलो, परमेश्वर का बारा मा जु भि सच्चो च समझण का कारण बंणलो किलैकि ऊं अपड़ा अधिकार बट्टी नि बुल्दो, पर उ परमेश्वर की तरपां बट्टी सुणांलो, वे तैं ही बुलालो, अर आंण वली बात तुम तैं बतालो।
14
उ मेरी महिमा करला, किलैकि वे तैं मेरी तरपां बट्टी मिल्द च उ तुम तैं बतालो।
15
जु कुछ पिता परमेश्वर को च उ सब मेरू च इलै मिल बोलि, कि उ मेरी बातें मा बट्टी लै के तुम तैं बतालो।
16
“मि जरा देर तक और तुम दगड़ी छों तब अपड़ा भिजण वला मा लौटि जौलु।”
17
तब वेका चेलों ल आपस मा बोलि या क्य बात च जु उ हम मा बुल्णु च मि जरा देर तक अर तुम दगड़ी छों तब अपड़ा भिजण वला मा लौटि जौलु यु इलै कि मि पिता परमेश्वर मा जांणु छौं?
18
तब चेला एक दुसरा बट्टी पुछण छा “यु ‘थोड़ी देर’ जु उ बुल्द च क्य बात च? हम नि जंणदा, कि उ क्य बुल्द।”
19
यीशु ल यु की उ मि तैं यूं बातों कु मतलब पुछण चांणा छिन, वेल बोलि, क्य तुम आपस मा मेरी यूं बातों का बारा मा पूछताछ कना छा जरा देर मा तुम मि तैं नि देखि ल्या, अर फिर जरा देर मा मि तैं देखि ल्या?
20
मि तुम मा सच-सच बुल्णु छों मेरा मुरण का बाद तुम रुविला अर विलाप करिल्या, पर दुनिया का लोग आनन्द करला पर तुम तैं दुःख होलो।
21
जब जनन कु जन्म दींणु कु बगत औंद, त उ भौत पिड़ा मा हूंदी त वीं तैं पिड़ा हूंदी, किलैकि वींकी पिड़ा का बगत ऐ गै, पर तब उ नौंनो तैं जन्म दे दींदी त यु आनन्द बट्टी की जगत मा एक मनिख पैदा हवे, इलै उ जनन वीं पिड़ा तैं भूल जांदी।
22
इन ही रीति बट्टी, तुम तैं भि अब त शोक च, पर मि तुम तैं फिर मिललो तुम आनन्दित हवेला अर तुमारो आनन्द कुई तुम बट्टी छिन नि सकदो।
23
वे बगत जब तुम मि तैं फिर दिखला त तुम मि मा कुछ नि पुच्छिल्या; मि तुम मा सच-सच बुल्णु छौं जु पिता परमेश्वर बट्टी कुछ मगिल्या त उ मेरा अधिकार बट्टी तुम तैं दयालो।
24
अभि तक तुम ल मेरा नौं से पिता परमेश्वर बट्टी कुछ नि मांगी, मगिल्या त पैल्या कि तुमारो आनन्द पूरो हवे जौं।
25
“मिल यु बात तुम मा मिसाल दे के बोलि, पर उ बगत आंण वलो च कि तुम तैं मिसाल दे के नि बुललो पर खुलि के तुम तैं बुबा का बारा मा बतौलु।
26
वे बगत तुम मेरा नौं का अधिकार बट्टी मगिल्या अर मि तैं पिता परमेश्वर बट्टी प्रार्थना नि कन होलि की उ कैर जु तुम मांगदां छा
27
किलैकि पिता परमेश्वर त अफी ही तुम बट्टी प्रेम रखदु च इलै की तुम ल मि बट्टी प्रेम रख्युं च अर इन भि विश्वास कैरी कि मि पिता परमेश्वर कि तरपां बट्टी अयुं छौं।
28
मि पिता परमेश्वर कि तरपां बट्टी जगत मा अयुं छौं मि फिर जगत तैं छोड़ी के बुबा मा जांणु छौं।”
29
ऊंका चेलों ल बोलि, “देखा अब त तुम खुलि के बुल्ण छा अर कुई मिसाल दे के नि बुल्णा छा।
30
अब हम जांणि ग्यां कि तुम सब कुछ जंणद्यां त्वे तैं कैकी जरूरत ही नि च कि कुई तुम बट्टी सवाल पूछो, इलै हम विश्वास करदां छा कि तु परमेश्वर की तरपां बट्टी अयुं छै।”
31
यु सूंणि के यीशु ल ऊंमा बोलि, “क्य तुम अब अंत मा विश्वास करदां छा?
32
देखा उ बगत आंणु च बल्कि ऐ ही गयै कि तुम सब छिदरु-बिदरु हवे कै अपड़ा-अपड़ा मार्ग लील्या अर मि तैं यखुली छोड़ी दीला फिर भि मि यखुली नि किलैकि पिता परमेश्वर मि दगड़ी च।
33
मिल यु बात तुम मा इलै बोलि कि तुम तैं मेरा कारण शान्ति मिलो; दुनिया मा तुम तैं क्लेश हूंद, पर ढाडस बांधा, मिल ये दुनिया मा राज्य कन वला का मथि जीति हासिल कैरेले।”
← Chapter 15
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 17 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21